Khamoshi ki juban
इस तरह मत जाओ ! रुक जाओ ! थोड़ी सी तो देर हुई है, मैं अभी टिफ़िन लेकर आती हूं। तुम्हारा तो रोज का यही नाटक है, कहकर पुनीत तेजी …
इस तरह मत जाओ ! रुक जाओ ! थोड़ी सी तो देर हुई है, मैं अभी टिफ़िन लेकर आती हूं। तुम्हारा तो रोज का यही नाटक है, कहकर पुनीत तेजी …
मैं दर्द लिखती हूं, अपनी कहानी, किस्से या फिर कविताओं में, वह अनकहा दर्द जो कहा नहीं जा सकता, महसूस होता है, कहा नहीं जा सकता। अ…
ज़ीनत की हालत वैसे ही थी ,उसकी हालत में और कोई सुधार न देख ,सलमा ने उसे डॉक्टर को दिखाया ,डॉक्टर ने उसकी जाँच की ,तब उसने पूछा …
एक दिन ज़ीनत से उसकी अम्मी पूछ रही थीं - क्या तुम भी अपने भाइयों के साथ वहां गयीं थीं ? ज़ीनत ने हाँ में गर्दन हिलाई। वहां तुमन…
घर में सभी को पता चल गया था ,ख़ालिद के जाने का उन्हें ,ग़म तो हुआ किन्तु अपने बच्चों की भी फ़िक्र होने लगी। अब इन्हें जेल जाने से क…
खालिद की मौत हो चुकी है ,यह बात जब सलमा को पता चली, तो उसकी रूह कांप गई और वह घबरा गई कि अब उसके घर पर मुसीबतें आने वाली हैं। कभ…
जिंदगी अपनी राह पर बढ़ती चली जा रही थी। न जाने , वह कहां और किधर जा रही थी ? न मंजिल का था पता, न ही कोई राह सूझती थी। जिंदगी…
सैयद और नाज़िम , ख़ालिद को बहकाकर उससे कुबूल करवाना चाहते थे कि उसने ही ज़ीनत के साथ ऐसी ग़लत हरक़त की ,तब ख़ालिद ने ये बात मंजूर कर…