Zeenat [part 42]
सैयद और नाज़िम , ख़ालिद को बहकाकर उससे कुबूल करवाना चाहते थे कि उसने ही ज़ीनत के साथ ऐसी ग़लत हरक़त की ,तब ख़ालिद ने ये बात मंजूर कर…
सैयद और नाज़िम , ख़ालिद को बहकाकर उससे कुबूल करवाना चाहते थे कि उसने ही ज़ीनत के साथ ऐसी ग़लत हरक़त की ,तब ख़ालिद ने ये बात मंजूर कर…
सैयद और नाज़िम की ख़ालिद से अच्छी दोस्ती हो गयी। वो उनसे बात तो करता था किन्तु एक दूरी बनकर रखता था। किन्तु नाज़िम भी अपने काम के …
कल्पित ने, आज अपनी किताब में एक नया ही अध्याय पढ़ा था, अमर होने का अध्याय ! जिसमें उसे ज्ञात हुआ -'अमृत' पीकर इंसान अमर…
नाज़िम और सैयद चाय की टपरी पर मिलते हैं ,जहाँ पहले से ही ख़ालिद बैठा हुआ था। अब तक तो ख़ालिद ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया था किन…
याकूब बाहर खड़ा होकर ,अपने अम्मी -अब्बू की बातें , बहुत देर से सुन रहा था। वह जानना चाहता था, कि आखिर घर में क्या चल रहा है ? अभ…
झूठ - यह शब्द ऐसा है, इस पर किसी प्रकार का टै…
शाम को जब यूसुफ़ साहब अपने घर आये ,तो मन ही मन प्रसन्न भी थे और काम बढ़ जाने से थोड़े परेशान भी थे। जैसे ही घर के अंदर प्रवेश करते…
मोहित को, अब अपना घर अच्छा नहीं लगता था, दरअसल हुआ यह था, कि जब मोहित अपने मामा के यहां कुछ दिनों के लिए रहने के लिए गया था, तो …