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Bhool gayi

सबको खुश करने की चाहत में,' खुद' खुश रहना भूल गई।  भरोसा पाने की धुन में,  खुद पर 'भरोसा 'करना भूल गयी।   दिन दे…

Zeenat [part 53]

ज़ीनत को लगता था ,लोग आते हैं ,उसका इस्तेमाल करते हैं ,चले जाते हैं। किसी को भी, उससे या उसके बच्चों से कोई हमदर्दी नहीं है। जो ल…

Kashmakash

तुमसे कहनी थी, कुछ दिल की बात ....  अधरों तक आते ठहर जाती, दिल की बात !  शायद, समझ सके न कोई , दिल की बात!  क्यों कहनी है ? तुम…

Zeenat [part 52]

जिस लालच में ,उस दुकानदार ने ज़ीनत को, अपने समीप रखा था ,वो लालच तो, बेरोक- टोक कब का पूरा हो चुका था ? किन्तु अब वो ज़ीनत के बच्च…

Talash apni pahachan ki

कौन हूँ ,क्या हूँ ? क्या मेरी पहचान है।  तलाशती हूँ ,अपने आपको, पूछती , दिल का क्या अरमान है ?  कभी रिश्तों में ढूँढ़ा ,कभी रंगों…

Zeenat [part 51]

आज तक ज़ीनत से किसी ने इस तरह से बात नहीं की थी ,उसके साथ ये लोग,जो भी व्यवहार कर रहे थे ,उसे महसूस कर ज़ीनत को ,उन पर गुस्सा आ …

Zeenat [part 50]

ज़ीनत बिना टिकट लिए ही, बस में चढ़ गयी थी ,जैसे सब लोग चढ़ रहे थे। उसके पास टिकट न देखकर कंडक्टर ने ,उसे बीच रास्ते में ही उतार दि…

Zeenat [part 49]

आदिल के, घर से चले जाने के पश्चात ,ज़ीनत और भी परेशान रहने लगी थी ,हालाँकि उसकी अम्मी सलमा अपनी बेटी का पूरा ख्याल रखने की कोशिश …

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