Gaya waqt hath nahi aayega
ज्यादा सोचने और समझने में उम्र निकल जाती है। जो खुश रहने की उम्र थी, वह न जाने कहां खो जाती है ? अब कभी उम्र के एक पड़ाव पर सोच…
ज्यादा सोचने और समझने में उम्र निकल जाती है। जो खुश रहने की उम्र थी, वह न जाने कहां खो जाती है ? अब कभी उम्र के एक पड़ाव पर सोच…
रूही ,नाराज होकर आश्रम में तो आ गयी किन्तु वहां उसे, अपने बच्चों की चिंता परेशान कर रही थी। वह स्वयं ही नहीं समझ पा रही है ,वो न…
रुही की सच्चाई जानकर ,गर्वित को बहुत क्रोध आता है ,किंतु समझ नहीं पाता, कि ऐसी स्थिति में उसे क्या करना चाहिए ? तब उससे पारो बा…
हवेली में पहुंचते ही, सभी घरवालों से गर्वित का सामना हुआ और उन्होंने गर्वित से पूछा- रूही कहां है ? उस समय पार्वती भी हवेली में …
आज इस गुलाबी शाम को आराम करते हैं। आओ ! ये शाम ,आज तुम्हारे नाम करते हैं। कॉफी की प्यालियों से शाम की शुरुआत …
भले ही , 'फेरों' पर कुछ कदम पीछे चलती हूँ। तो क्या ?तुमने देखा नही। कुछ कदम आगे भी तो' ध…
गर्वित के मन में ,बार -बार एक ही प्रश्न उठ रहा था ,आख़िर रूही हमें अपने गांव में लेकर क्यों आई ? सम्पूर्ण सच्चाई अपने घर में अपने…
न जाने रूही, क्या सोचकर गर्वित को साथ लेकर, अपने घर आई थी और उसी के सामने, अपने सभी रहस्य खोल रही थी ? तब वो अपने माता -पिता से …