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Zeenat [part 64]

रफ़ीक को पता चल गया था ,कोई उसके घर में आता है ,अब तक तो उसे यही लगता था। दोनों ही मुझ पर निर्भर हैं ,मैं मारूं -पिटूं कहाँ जा सक…

Zeenat [part 63]

मेरी बहन मुझसे प्यार तो करती थी किन्तु उस रफ़ीक के कारण मैं ही, उसकी दुश्मन भी गयी थी। मैं भी क्या करती ? बेबस थी ,किसी तरह मेरे …

bachapan jine do

कहने को ज्ञान का भंडार , या कहूं ,पुस्तकों का रेला है।   इतना बोझ न सह पाउँगा।  जीवन से मिलता, क्या ज्ञान कम ?  पुस्तकों का ज्ञा…

Zeenat [part 62]

पुलिस के द्वारा ज़ीनत के पकड़े जाने पर ,पुलिस ने उसे बहुत पीटा और पूछा -बता ,तेरे गिरोह में और कौन -कौन शामिल है ?  गिरोह क्या होत…

Zeenat [part 61]

दरअसल पुलिस को इन लोगों की बरसों से तलाश थी किन्तु कोई ठोस प्रमाण न मिलने के कारण, पुलिस किसी को भी नहीं पकड़ पा रही थी। ज़ीनत क…

Mera ghar hi meri duniya

मम्मी ! मैंने आपसे कितनी बार कहा है ? अब आपको हमारे साथ चलना चाहिए। अब पापा भी नहीं रहे , यहां अकेले रहकर क्या करोगी ? आस -पास क…

Ek naya ehsas

लॉकडाउन का वह समय जब लोग सब अपने घरों में बैठे थे। सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते।  दूर रहने वाले अपने परिवार के लोगों के…

Ankahi baaten

क्या कहूं ,कैसे कहूं ? कहते -कहते , लब तक आते -आते ठहर जाती हैं ,कुछ 'अनकही बातें '! कहने को बहुत कुछ था,संकोचवश कह सकी …

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