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Zeenat [part 37]

जब ख़ालिद ,ज़ीनत से मिलने गया। तब अचानक ही न जाने ज़ीनत को क्या हुआ ? वो बेहोश हो गयी, अचानक ज़ीनत की ऐसी हालत देखकर ,रेशमा की चीख़ न…

Ameer shahar ki garib galiyan

शहरों की उन मासूम, ग़रीब गलियों में , जहाँ लोग जाते नहीं ,'बद्नुमा दाग़' कहते हैं।   कुछ सपने, आशाओं संग, उम्मींदें पलती …

Khamosh dewaren

खामोश रहना है तो, इन दीवारों से सीखिए !  ये सब कुछ देखती है, सुनती हैं, किंतु खामोश रहती हैं।   लोग कहते हैं -''दीवारों…

Zeenat [part 36]

ख़ालिद भी जब ज़ीनत से रिश्ते के लिए मान जाता है। तब ज़ोया ने  सोचा - कोई बात नहीं,मेरे कहें में इस वक़्त कोई नहीं किन्तु अब तो सलमा,…

Zeenat [part 35]

वाहिद,शाम को जब अपने घर आते हैं , तब ख़ालिद उनसे जानना चाहता है कि उसके चचाजान घर पर किस लिए आए थे ? यह बात, तब ज़ोया को भी पता चल…

Zeenat [part 34]

जब यूसुफ मियां , अपने घर वापस लौट कर आए तो सलमा उनका बेक़रारी से इंतजार करती हुई दिखलाई दी।  उनके आते ही ,उसने पूछा -उन्होंने क्य…

Zeenat [part 33]

रुकैया जब यहां आई थी , वाहिद जानते थे , वो ज़ीनत के बारे में पूछताछ कर रही थी,जरूर कुछ तो बात हुई है ,जो वो इस तरह से पूछताछ कर …

Zeenat [part 32]

खाना, खाने के बाद सलमा, अपने शोेहर युसूफ मियां के करीब आकर बैठ गई।  सुबह का माहौल तो बहुत ही ग़मगीन रहा ,इसीलिए तो यूसुफ़ घर से बा…

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