Mera ghar hi meri duniya
मम्मी ! मैंने आपसे कितनी बार कहा है ? अब आपको हमारे साथ चलना चाहिए। अब पापा भी नहीं रहे , यहां अकेले रहकर क्या करोगी ? आस -पास क…
मम्मी ! मैंने आपसे कितनी बार कहा है ? अब आपको हमारे साथ चलना चाहिए। अब पापा भी नहीं रहे , यहां अकेले रहकर क्या करोगी ? आस -पास क…
लॉकडाउन का वह समय जब लोग सब अपने घरों में बैठे थे। सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते। दूर रहने वाले अपने परिवार के लोगों के…
क्या कहूं ,कैसे कहूं ? कहते -कहते , लब तक आते -आते ठहर जाती हैं ,कुछ 'अनकही बातें '! कहने को बहुत कुछ था,संकोचवश कह सकी …
ललित ने कुछ दिनों तक ही नौकरी की थी, किंतु एक दुर्घटना में ,उसके पैर की हड्डी टूट जाने के कारण उसको नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा और …
उम्मीदों के दिए जला, मैंने एक दुनिया बसा ली है। मेरी कल्पना की बगिया में शब्द, रंग, भाव माली हैं। दिल में किसी के न दुर्भावना…
ज़ीनत का, इतना बड़ा झूठ जानकर सुदीप को आश्चर्य हुआ ,उसे विश्वास नहीं हो रहा था ,ये इतना बड़ा झूठ भी बोल सकती है। आखिर इतना झूठ बोलन…
सुदीप अब नाराज़ होने लगा था ,वो देख रहा था ,भूमि उसकी बातों में कुछ ज्यादा ही ध्यान देती है। उसने भूमि से कई बार कहा ,''…
ज़ीनत चाहती थी, जिन लोगों के घर उसने पहले काम किया है, जिनसे उसकी जान -पहचान है। वे ,उसके काम न करने के बाद भी, उसे उसी तरह मन स…