Bhool gayi
सबको खुश करने की चाहत में,' खुद' खुश रहना भूल गई। भरोसा पाने की धुन में, खुद पर 'भरोसा 'करना भूल गयी। दिन दे…
सबको खुश करने की चाहत में,' खुद' खुश रहना भूल गई। भरोसा पाने की धुन में, खुद पर 'भरोसा 'करना भूल गयी। दिन दे…
ज़ीनत को लगता था ,लोग आते हैं ,उसका इस्तेमाल करते हैं ,चले जाते हैं। किसी को भी, उससे या उसके बच्चों से कोई हमदर्दी नहीं है। जो ल…
तुमसे कहनी थी, कुछ दिल की बात .... अधरों तक आते ठहर जाती, दिल की बात ! शायद, समझ सके न कोई , दिल की बात! क्यों कहनी है ? तुम…
जिस लालच में ,उस दुकानदार ने ज़ीनत को, अपने समीप रखा था ,वो लालच तो, बेरोक- टोक कब का पूरा हो चुका था ? किन्तु अब वो ज़ीनत के बच्च…
कौन हूँ ,क्या हूँ ? क्या मेरी पहचान है। तलाशती हूँ ,अपने आपको, पूछती , दिल का क्या अरमान है ? कभी रिश्तों में ढूँढ़ा ,कभी रंगों…
आज तक ज़ीनत से किसी ने इस तरह से बात नहीं की थी ,उसके साथ ये लोग,जो भी व्यवहार कर रहे थे ,उसे महसूस कर ज़ीनत को ,उन पर गुस्सा आ …
ज़ीनत बिना टिकट लिए ही, बस में चढ़ गयी थी ,जैसे सब लोग चढ़ रहे थे। उसके पास टिकट न देखकर कंडक्टर ने ,उसे बीच रास्ते में ही उतार दि…
आदिल के, घर से चले जाने के पश्चात ,ज़ीनत और भी परेशान रहने लगी थी ,हालाँकि उसकी अम्मी सलमा अपनी बेटी का पूरा ख्याल रखने की कोशिश …