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Zeenat [part 55]

अचानक ही ज़ीनत का भाई इतने वर्षों के पश्चात उसे मिल ही जाता है। इतने दिनों का गुस्सा आंसू बनकर बह निकला। उसके मिलने की ख़ुशी , मन …

Chehre ke pichhe chehra

चेहरे के पीछे ,छुपा चेहरा देखती हूं।  ' मैं 'क्या से क्या हो गई हूं ? कभी नादान थी, आज'' चट्टान'' हो गई…

Zeenat [part 54]

ज़ीनत अपने बच्चों को ,ले जाकर एक पुल के नीचे रहने लगी। कुछ शराबी , एक अकेली अनजान, बेसहारा,लाचार औरत को देखकर वहां भी आ ही जाते। …

Bhool gayi

सबको खुश करने की चाहत में,' खुद' खुश रहना भूल गई।  भरोसा पाने की धुन में,  खुद पर 'भरोसा 'करना भूल गयी।   दिन दे…

Zeenat [part 53]

ज़ीनत को लगता था ,लोग आते हैं ,उसका इस्तेमाल करते हैं ,चले जाते हैं। किसी को भी, उससे या उसके बच्चों से कोई हमदर्दी नहीं है। जो ल…

Kashmakash

तुमसे कहनी थी, कुछ दिल की बात ....  अधरों तक आते ठहर जाती, दिल की बात !  शायद, समझ सके न कोई , दिल की बात!  क्यों कहनी है ? तुम…

Zeenat [part 52]

जिस लालच में ,उस दुकानदार ने ज़ीनत को, अपने समीप रखा था ,वो लालच तो, बेरोक- टोक कब का पूरा हो चुका था ? किन्तु अब वो ज़ीनत के बच्च…

Talash apni pahachan ki

कौन हूँ ,क्या हूँ ? क्या मेरी पहचान है।  तलाशती हूँ ,अपने आपको, पूछती , दिल का क्या अरमान है ?  कभी रिश्तों में ढूँढ़ा ,कभी रंगों…

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