Read more

Dard e raah

तरु की छांव में ,बैठी युवती' पथ' निहारती।  कर्म करता पथ , कहो, सुंदरी !तुम किसे निहारती ? तुम कितने शांत, पथ ! अडिग, धैर…

Path ka dhairy

कच्ची मिटटी ,कभी 'पगडंडी' सी !    कभी 'संकरी' ,कभी बनी 'विस्तृत !   कभी गड्ढे ,कभी टूटी, कीचड़ भरी, कभी उबड़…

Nyay ki khoj

'न्याय की खोज' के लिए हमें कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती, हमारा अंतर्मन जानता है कि क्या सही है और क्या गलत है ? …

Maun ki pehli seedhi

शांत मन ,'मौन' रहकर अपने आपको टटोलता है। ज्ञान की धारा बही ,तब मौन अंतर्मन में झांकता है।   वेदना की पराकाष्ठा ,मौन रहना…

Rasiya [part 142]

हालाँकि कस्तूरी अपने पति चतुर के कामों में कोई दिलचस्पी नहीं लेती थी। चतुर भी, उसकी तरफ से निश्चिन्त था। चतुर जो भी कर रहा है ,क…

Kiski dulhan [part 14]

कोई भी... पीछे मुड़कर मत देखना।"रत्न प्रताप राजवीर ने, बहुत धीमी आवाज़ में दोनों को चेतावनी दी थी,  उसमें ऐसा भय था, कि मोह…

Kiski dulhan [part 13]

रत्न प्रताप ,भानु और मोहिनी अभी बातें ही कर रहे थे ,तभी उन्हें लगा जैसे इस तहखाने की तरफ कोई बढ़ रहा है। वो कोई एक व्यक्ति नहीं …

Vamangi

वो भले ही, मुझसे लड़ती ,झगड़ती है।  पर मेरी परवाह भी तो, वही करती है।  रिश्ता हमारा भले ही पुराना हुआ है ।  जब मुस्कुराकर मेरी तरफ…

Load More
That is All