Parvah nahi
उसने, कभी मेरी पसंद ,नापसंद पूछी ही नहीं। तुम क्या चाहती हो ?मुझसे कभी जाना ही नहीं। मेरे घुटते शब्दों को,मेरी सोच की तह खोल…
उसने, कभी मेरी पसंद ,नापसंद पूछी ही नहीं। तुम क्या चाहती हो ?मुझसे कभी जाना ही नहीं। मेरे घुटते शब्दों को,मेरी सोच की तह खोल…
विभा, केतकी के बार -बार अपने कमरे में आ जाने से खुश नहीं है। वो जब से इस घर में आई है। उसने केतकी को बाहर घूमते और घर के काम करत…
भानु और मोहिनी सच्चाई की तह तक जाना चाहते हैं किन्तु रत्न प्रताप ने उन्हें फिर से रोकना चाहा ,और कहा ,ये तुम्हारे लिए अच्छा नहीं…
सुबह की पहली किरण, हवेली की ऊँची खिड़कियों से भीतर आ रही थी , लेकिन मोहिनी की आँखों में अब भी रात का अँधेरा ठहरा हुआ था। उसकी क…
केतकी ,श्याम से मिलने जाती है ,वो उससे पहली बार नहीं मिल रही है किन्तु अभी तक वो श्याम के इतनी करीब भी नहीं आई कि उससे अकेले म…
आख़िर मनीष ने खुलासा कर ही दिया, उसने अपनी मां को बताया -कि वो विभा को यहाँ छोड़ने के लिए ही तो आया है,क्योंकि ऐसी हालत में उसको क…
मुख्य दरवाज़े के बाहर कोई खड़ा , कोई चिल्ला रहा था -'दरवाज़ा खोलो ! जब दरवाज़ा खोला गया ,तब वहां मात्र एक बैग रखा था और कुछ साम…
नंदिनी ने, नानी को घर आकर बताया ,'उसने दीपक को किसी लड़की के साथ बगीचे में जाते देखा। तब नानी, उससे ही प्रश्न करने लगी -वे कै…