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Zeenat [part 39]

याकूब बाहर खड़ा होकर ,अपने  अम्मी -अब्बू की बातें , बहुत देर से सुन रहा था। वह जानना चाहता था, कि आखिर घर में क्या चल रहा है ? अभ…

Aaj ka satsang [ part 10]

झूठ - यह शब्द ऐसा है, इस पर किसी प्रकार का टै…

Zeenat [part 38]

शाम को जब यूसुफ़ साहब अपने घर आये ,तो मन  ही मन प्रसन्न भी थे और काम बढ़ जाने से थोड़े परेशान भी थे। जैसे ही घर के अंदर प्रवेश करते…

Hum kab ameer the ?

मोहित को, अब अपना घर अच्छा नहीं लगता था, दरअसल हुआ यह था, कि जब मोहित अपने मामा के यहां कुछ दिनों के लिए रहने के लिए गया था, तो …

Teri yaadon ki door

तुम्हारी रेशमी डोर सी यादें,  अकेले में, अक़्सर मुझे घेर लेती हैं।      जब तुम मेरी, यादों के घेरे में समाते हो ,आते हो ,आते …

Zeenat [part 37]

जब ख़ालिद ,ज़ीनत से मिलने गया। तब अचानक ही न जाने ज़ीनत को क्या हुआ ? वो बेहोश हो गयी, अचानक ज़ीनत की ऐसी हालत देखकर ,रेशमा की चीख़ न…

Ameer shahar ki garib galiyan

शहरों की उन मासूम, ग़रीब गलियों में , जहाँ लोग जाते नहीं ,'बद्नुमा दाग़' कहते हैं।   कुछ सपने, आशाओं संग, उम्मींदें पलती …

Khamosh dewaren

खामोश रहना है तो, इन दीवारों से सीखिए !  ये सब कुछ देखती है, सुनती हैं, किंतु खामोश रहती हैं।   लोग कहते हैं -''दीवारों…

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