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Talash apni pahachan ki

कौन हूँ ,क्या हूँ ? क्या मेरी पहचान है।  तलाशती हूँ ,अपने आपको, पूछती , दिल का क्या अरमान है ?  कभी रिश्तों में ढूँढ़ा ,कभी रंगों…

Zeenat [part 51]

आज तक ज़ीनत से किसी ने इस तरह से बात नहीं की थी ,उसके साथ ये लोग,जो भी व्यवहार कर रहे थे ,उसे महसूस कर ज़ीनत को ,उन पर गुस्सा आ …

Zeenat [part 50]

ज़ीनत बिना टिकट लिए ही, बस में चढ़ गयी थी ,जैसे सब लोग चढ़ रहे थे। उसके पास टिकट न देखकर कंडक्टर ने ,उसे बीच रास्ते में ही उतार दि…

Zeenat [part 49]

आदिल के, घर से चले जाने के पश्चात ,ज़ीनत और भी परेशान रहने लगी थी ,हालाँकि उसकी अम्मी सलमा अपनी बेटी का पूरा ख्याल रखने की कोशिश …

Zeenat [part 48]

सलमा दरवाजे पर खड़ी हुई बहुत देर से, दरवाजे को खटखटा रही थी किंतु किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला -जीनत ! जीनत ! अरे दरवाजा खोल... …

Kalam ki syahi or samaj ka sach

क़लम पहले भी चलती थी ,आज भी चल रही है, ज़माने से चलती आ रही है। वो सुंदर साहित्य ही नहीं लिखती ,समाज को आइना भी दिखला देती है। जब…

Kalam ki schchai

कबीर दौड़ते हुए झाड़ियां में छुप गया, उसकी सांस फूल रही थी। वह पसीने से वह लथपथ था। कोई चार- पांच आदमी  उसे ढूंढ रहे थे। वो नहीं…

Zeenat [part 47]

आदिल अब घर भी सम्भालता, बच्चों और ज़ीनत को भी देखता ,हर वक़्त सलमा वहां नहीं होती। इस   दौहरी मेहनत से ,अब आदिल भी थकने लगा था। घर…

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