Waqt ke sath
जीवन ड़गर पर चल तू मुसाफ़िर ! चल वक़्त के साथ ! न वक़्त तेरा ,न ये जीवन,वक़्त पर न किसी का पहरा। गया वक़्त !न आया हाथ ,वास्ते किसी …
जीवन ड़गर पर चल तू मुसाफ़िर ! चल वक़्त के साथ ! न वक़्त तेरा ,न ये जीवन,वक़्त पर न किसी का पहरा। गया वक़्त !न आया हाथ ,वास्ते किसी …
चिड़ियों की चहचाहट के स्वर के साथ ही, केतकी की माँ की नींद खुल गयी ,बाहर आकर देखा ,दिन निकलने ही वाला है। उन्हें घड़ी देखने की आ…
उर्वशी संक्षेप में, अपने पति समीर को बताती है - जिस दिन चतुर के घर का मुहूर्त था , उसी दिन पुलिस उसे लेने आ गई। कमाल की बात त…
मम्मी मुझे रंगों के विषय में बताइए ! हमारी मैडम ने रंगों की कहानी लिखने के लिए कहा है। कहते हुए, कृति अपनी मम्मी के इर्द-गिर्द …
अपने को जब तुम ,तन्हा पाओ ! फ़िक्र में अपनों की,तन्हा!दिन न कटते हों। तब अपने आप को, संभाले रखना ! धैर्य मत खोना ,'अप…
चतुर अपने घर में आये मेहमानों को ,तन्मय का परिचय कराते हुए कहता है -परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, ये पुलिसवाला ! मेरे बचपन क…
' विचार' भावनाएं 'किसी जगह या समय के मोहताज नहीं हैं। वो कभी भी, कहीं भी आ जा सकते हैं। उनके लिए कोई विशेष कमरे क…
कभी देखा है तुमने, लेख़क का कमरा ! जहां सपने पलते हैं ,वो उड़ान भरता है। अपनी कल्पनाओं को, जीता है। मन में उठते शोर को थाम , श…