Zeenat [part 48]
सलमा दरवाजे पर खड़ी हुई बहुत देर से, दरवाजे को खटखटा रही थी किंतु किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला -जीनत ! जीनत ! अरे दरवाजा खोल... …
सलमा दरवाजे पर खड़ी हुई बहुत देर से, दरवाजे को खटखटा रही थी किंतु किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला -जीनत ! जीनत ! अरे दरवाजा खोल... …
क़लम पहले भी चलती थी ,आज भी चल रही है, ज़माने से चलती आ रही है। वो सुंदर साहित्य ही नहीं लिखती ,समाज को आइना भी दिखला देती है। जब…
कबीर दौड़ते हुए झाड़ियां में छुप गया, उसकी सांस फूल रही थी। वह पसीने से वह लथपथ था। कोई चार- पांच आदमी उसे ढूंढ रहे थे। वो नहीं…
आदिल अब घर भी सम्भालता, बच्चों और ज़ीनत को भी देखता ,हर वक़्त सलमा वहां नहीं होती। इस दौहरी मेहनत से ,अब आदिल भी थकने लगा था। घर…
इस तरह मत जाओ ! रुक जाओ ! थोड़ी सी तो देर हुई है, मैं अभी टिफ़िन लेकर आती हूं। तुम्हारा तो रोज का यही नाटक है, कहकर पुनीत तेजी …
मैं दर्द लिखती हूं, अपनी कहानी, किस्से या फिर कविताओं में, वह अनकहा दर्द जो कहा नहीं जा सकता, महसूस होता है, कहा नहीं जा सकता। अ…
ज़ीनत की हालत वैसे ही थी ,उसकी हालत में और कोई सुधार न देख ,सलमा ने उसे डॉक्टर को दिखाया ,डॉक्टर ने उसकी जाँच की ,तब उसने पूछा …
एक दिन ज़ीनत से उसकी अम्मी पूछ रही थीं - क्या तुम भी अपने भाइयों के साथ वहां गयीं थीं ? ज़ीनत ने हाँ में गर्दन हिलाई। वहां तुमन…