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Hum kab ameer the ?

मोहित को, अब अपना घर अच्छा नहीं लगता था, दरअसल हुआ यह था, कि जब मोहित अपने मामा के यहां कुछ दिनों के लिए रहने के लिए गया था, तो …

Teri yaadon ki door

तुम्हारी रेशमी डोर सी यादें,  अकेले में, अक़्सर मुझे घेर लेती हैं।      जब तुम मेरी, यादों के घेरे में समाते हो ,आते हो ,आते …

Zeenat [part 37]

जब ख़ालिद ,ज़ीनत से मिलने गया। तब अचानक ही न जाने ज़ीनत को क्या हुआ ? वो बेहोश हो गयी, अचानक ज़ीनत की ऐसी हालत देखकर ,रेशमा की चीख़ न…

Ameer shahar ki garib galiyan

शहरों की उन मासूम, ग़रीब गलियों में , जहाँ लोग जाते नहीं ,'बद्नुमा दाग़' कहते हैं।   कुछ सपने, आशाओं संग, उम्मींदें पलती …

Khamosh dewaren

खामोश रहना है तो, इन दीवारों से सीखिए !  ये सब कुछ देखती है, सुनती हैं, किंतु खामोश रहती हैं।   लोग कहते हैं -''दीवारों…

Zeenat [part 36]

ख़ालिद भी जब ज़ीनत से रिश्ते के लिए मान जाता है। तब ज़ोया ने  सोचा - कोई बात नहीं,मेरे कहें में इस वक़्त कोई नहीं किन्तु अब तो सलमा,…

Zeenat [part 35]

वाहिद,शाम को जब अपने घर आते हैं , तब ख़ालिद उनसे जानना चाहता है कि उसके चचाजान घर पर किस लिए आए थे ? यह बात, तब ज़ोया को भी पता चल…

Zeenat [part 34]

जब यूसुफ मियां , अपने घर वापस लौट कर आए तो सलमा उनका बेक़रारी से इंतजार करती हुई दिखलाई दी।  उनके आते ही ,उसने पूछा -उन्होंने क्य…

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