Rasiya [part 144]
अगले दिन शिल्पा ने ,अपने और प्रवीण के मध्य हुए वार्तालाप को और समय पर पैसे न दे पाने की असमर्थता को,चतुर से बतलाती है। बाहरी त…
अगले दिन शिल्पा ने ,अपने और प्रवीण के मध्य हुए वार्तालाप को और समय पर पैसे न दे पाने की असमर्थता को,चतुर से बतलाती है। बाहरी त…
वह नक़ाबपोश ''सभा कक्ष'' के दूसरे द्वार से भाग चुका था। अभी वे तीनों कुछ समझ पाते तभी 'सभा कक्ष ''का …
श्याम मेघों की, ओट से बाहर आ , झांकती इक बूंद कुछ घबराई सी, नीचे जाना मुझे किसअनजान देश ? गिरूँ किस,अनजान नगर या डगर सोच रही, …
रत्न प्रताप राजवीर ,मोहिनी और भानु प्रताप तीनों' निमंत्रण पत्र' पर दिए नक्शे के आधार पर सुरंग से होते हुए ,'सभा कक्ष…
भीगी हुई धरा ने,जब यूं अपना श्रृंगार किया। माटी की महक ने , हर ह्रदय महका दिया। लगता,धुलित हरित वर्ण आंचल सँवार लिया। हरित दूर…
शिल्पा को जब पता चलता है कि चतुर के स्कूल में जो छात्र आते हैं ,उनमें से कुछ का 'मासिक शिक्षा शुल्क' आया ही नहीं है और क…
'' सभा कक्ष का निमंत्रण'' उन तीनों को संशय में डाल रहा था ,ये निमंत्रण ही था या फिर हमें फंसाने के लिए कोई जाल ब…
रत्न प्रताप राजवीर ,मोहिनी और भानू प्रताप ने, उस कक्ष में तीन नाम खुदे हुए देखे ,किन्तु तीसरा नाम हर बार की तरह ,मिटा हुआ था। जि…