Zeenat [part 59]
पुनीत अब नाराज़ होने लगा था ,वो देख रहा था ,भूमि उसकी बातों में कुछ ज्यादा ही ध्यान देती है। उसने भूमि से कई बार कहा ,''इ…
पुनीत अब नाराज़ होने लगा था ,वो देख रहा था ,भूमि उसकी बातों में कुछ ज्यादा ही ध्यान देती है। उसने भूमि से कई बार कहा ,''इ…
ज़ीनत चाहती थी, जिन लोगों के घर उसने पहले काम किया है, जिनसे उसकी जान -पहचान है। वे ,उसके काम न करने के बाद भी, उसे उसी तरह मन स…
जब पुनीत को, उसके बेटे ने बताया कि,'मम्मी किस तरह घबरा गयीं थीं ,ज़ीनत बहुत देर तक सोती रही थी।'' उनकी मुस्कुराहट दे…
भूमि ने पूछा ,अब तो तुम्हारे भाईजान तुम्हें मिल गए थे ,फिर तुम्हें अपने साथ क्यों नहीं ले गए ? पता नहीं, बाजी ! मुझे तो ख़ुशी थी…
अचानक ही ज़ीनत का भाई इतने वर्षों के पश्चात उसे मिल ही जाता है। इतने दिनों का गुस्सा आंसू बनकर बह निकला। उसके मिलने की ख़ुशी , मन …
चेहरे के पीछे ,छुपा चेहरा देखती हूं। ' मैं 'क्या से क्या हो गई हूं ? कभी नादान थी, आज'' चट्टान'' हो गई…
ज़ीनत अपने बच्चों को ,ले जाकर एक पुल के नीचे रहने लगी। कुछ शराबी , एक अकेली अनजान, बेसहारा,लाचार औरत को देखकर वहां भी आ ही जाते। …
सबको खुश करने की चाहत में,' खुद' खुश रहना भूल गई। भरोसा पाने की धुन में, खुद पर 'भरोसा 'करना भूल गयी। दिन दे…