Lekhak ka kamra
' विचार' भावनाएं 'किसी जगह या समय के मोहताज नहीं हैं। वो कभी भी, कहीं भी आ जा सकते हैं। उनके लिए कोई विशेष कमरे क…
' विचार' भावनाएं 'किसी जगह या समय के मोहताज नहीं हैं। वो कभी भी, कहीं भी आ जा सकते हैं। उनके लिए कोई विशेष कमरे क…
कभी देखा है तुमने, लेख़क का कमरा ! जहां सपने पलते हैं ,वो उड़ान भरता है। अपनी कल्पनाओं को, जीता है। मन में उठते शोर को थाम , श…
केतकी, भोजन करके हाथ धोने के लिए नल पर गयी थी ,वहां भी उसे अपने पिता के स्वर सुनाई दे रहे थे - अब और नहीं, अब मैंने सोच लिया है …
सुमित अग्रवाल ,चतुर का घर देखकर अपने घर वापस जाने के लिए, उसके घर से बाहर निकले ही थे ,तभी चतुर ने अपने घर का मुख्य द्वार बंद क…
चतुर से वो महिला नाराज़ थी और जब उसने अपने पति को बताया- कि चतुर ने, हमें कितना बड़ा धोखा दिया है ? जब चतुर आता है ,तब वे उससे ब…
केतकी का, अपने घर जाने का मन नहीं कर रहा था , तब वह निर्मला को साथ लेकर, एक नीम के पेड़ के नीचे बैठ जाती है। दोनों सहेलियां आपस…
उम्मीदों ने बहुत रुलाया ,तमन्नाएं भी थीं ,बहुत, हाथ आते-आते छूट जाता,वो हमारे सब्र का पैमाना था। मांगने पर' भीख़' भी नह…
निर्मला और केतकी दोनों ,पवन के घर पहुंच गयीं। वही पवन, जो उनकी कक्षा में पढ़ता है और जो कल ही 'चाचा' बन गया। दोनों बच्चिय…