Shayri ke pal
१ - तन्हा बैठकर यूं ,अपने आप से गुफ्तगू की जाए। खुद से ही सवाल किया और खुद से ही जवाब दिया जाए। २- तमन्नाओं के शहर में ,हम खो…
१ - तन्हा बैठकर यूं ,अपने आप से गुफ्तगू की जाए। खुद से ही सवाल किया और खुद से ही जवाब दिया जाए। २- तमन्नाओं के शहर में ,हम खो…
नंदिनी मन ही मन बहुत परेशान थी, दीपक दो दिनों से गया हुआ था या यूँ कहें ,'ग़ायब हो गया था।' बिना कोई जानकारी दिए वो न जा…
प्रतिदिन की तरह दीपक ,नंदिनी की प्रतीक्षा करता है, और नंदिनी भी समय से तैयार होकर चुपचाप उसकी मोटरसाइकिल पर आकर बैठ जाती है। दी…
रात्रि के दो बजकर सात मिनट हो चुके थे , हवेली के ऊपरी हिस्से में पसरा सन्नाटा अब पहले जैसा नहीं था। कमरे की खिड़की के बाहर हवा …
मोहिनी और भानु आपस में बातें कर रहे थे कि ये किसी की योजना थी या हमें बहकाया गया था। तब मोहिनी ने भानु का हाथ पकड़ लिया और उसस…
रात के दस बज चुके थे, हवेली के अधिकांश कमरों की बत्तियाँ बुझ चुकी थीं, लेकिन मोहिनी के कमरे में अब भी रोशनी थी। मेज पर रखा फो…
उसने, कभी मेरी पसंद ,नापसंद पूछी ही नहीं। तुम क्या चाहती हो ?मुझसे कभी जाना ही नहीं। मेरे घुटते शब्दों को,मेरी सोच की तह खोल…
विभा, केतकी के बार -बार अपने कमरे में आ जाने से खुश नहीं है। वो जब से इस घर में आई है। उसने केतकी को बाहर घूमते और घर के काम करत…