Chehre ke pichhe chehra
चेहरे के पीछे ,छुपा चेहरा देखती हूं। ' मैं 'क्या से क्या हो गई हूं ? कभी नादान थी, आज'' चट्टान'' हो गई…
चेहरे के पीछे ,छुपा चेहरा देखती हूं। ' मैं 'क्या से क्या हो गई हूं ? कभी नादान थी, आज'' चट्टान'' हो गई…
ज़ीनत अपने बच्चों को ,ले जाकर एक पुल के नीचे रहने लगी। कुछ शराबी , एक अकेली अनजान, बेसहारा,लाचार औरत को देखकर वहां भी आ ही जाते। …
सबको खुश करने की चाहत में,' खुद' खुश रहना भूल गई। भरोसा पाने की धुन में, खुद पर 'भरोसा 'करना भूल गयी। दिन दे…
ज़ीनत को लगता था ,लोग आते हैं ,उसका इस्तेमाल करते हैं ,चले जाते हैं। किसी को भी, उससे या उसके बच्चों से कोई हमदर्दी नहीं है। जो ल…
तुमसे कहनी थी, कुछ दिल की बात .... अधरों तक आते ठहर जाती, दिल की बात ! शायद, समझ सके न कोई , दिल की बात! क्यों कहनी है ? तुम…
जिस लालच में ,उस दुकानदार ने ज़ीनत को, अपने समीप रखा था ,वो लालच तो, बेरोक- टोक कब का पूरा हो चुका था ? किन्तु अब वो ज़ीनत के बच्च…
कौन हूँ ,क्या हूँ ? क्या मेरी पहचान है। तलाशती हूँ ,अपने आपको, पूछती , दिल का क्या अरमान है ? कभी रिश्तों में ढूँढ़ा ,कभी रंगों…
आज तक ज़ीनत से किसी ने इस तरह से बात नहीं की थी ,उसके साथ ये लोग,जो भी व्यवहार कर रहे थे ,उसे महसूस कर ज़ीनत को ,उन पर गुस्सा आ …