Zeenat [part 64]
रफ़ीक को पता चल गया था ,कोई उसके घर में आता है ,अब तक तो उसे यही लगता था। दोनों ही मुझ पर निर्भर हैं ,मैं मारूं -पिटूं कहाँ जा सक…
रफ़ीक को पता चल गया था ,कोई उसके घर में आता है ,अब तक तो उसे यही लगता था। दोनों ही मुझ पर निर्भर हैं ,मैं मारूं -पिटूं कहाँ जा सक…
मेरी बहन मुझसे प्यार तो करती थी किन्तु उस रफ़ीक के कारण मैं ही, उसकी दुश्मन भी गयी थी। मैं भी क्या करती ? बेबस थी ,किसी तरह मेरे …
कहने को ज्ञान का भंडार , या कहूं ,पुस्तकों का रेला है। इतना बोझ न सह पाउँगा। जीवन से मिलता, क्या ज्ञान कम ? पुस्तकों का ज्ञा…
पुलिस के द्वारा ज़ीनत के पकड़े जाने पर ,पुलिस ने उसे बहुत पीटा और पूछा -बता ,तेरे गिरोह में और कौन -कौन शामिल है ? गिरोह क्या होत…
दरअसल पुलिस को इन लोगों की बरसों से तलाश थी किन्तु कोई ठोस प्रमाण न मिलने के कारण, पुलिस किसी को भी नहीं पकड़ पा रही थी। ज़ीनत क…
मम्मी ! मैंने आपसे कितनी बार कहा है ? अब आपको हमारे साथ चलना चाहिए। अब पापा भी नहीं रहे , यहां अकेले रहकर क्या करोगी ? आस -पास क…
लॉकडाउन का वह समय जब लोग सब अपने घरों में बैठे थे। सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते। दूर रहने वाले अपने परिवार के लोगों के…
क्या कहूं ,कैसे कहूं ? कहते -कहते , लब तक आते -आते ठहर जाती हैं ,कुछ 'अनकही बातें '! कहने को बहुत कुछ था,संकोचवश कह सकी …