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Mera ghar hi meri duniya

मम्मी ! मैंने आपसे कितनी बार कहा है ? अब आपको हमारे साथ चलना चाहिए। अब पापा भी नहीं रहे , यहां अकेले रहकर क्या करोगी ? आस -पास क…

Ek naya ehsas

लॉकडाउन का वह समय जब लोग सब अपने घरों में बैठे थे। सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते।  दूर रहने वाले अपने परिवार के लोगों के…

Ankahi baaten

क्या कहूं ,कैसे कहूं ? कहते -कहते , लब तक आते -आते ठहर जाती हैं ,कुछ 'अनकही बातें '! कहने को बहुत कुछ था,संकोचवश कह सकी …

Lockdown ke dinon ka pyaar

ललित ने कुछ दिनों तक ही नौकरी की थी, किंतु एक दुर्घटना में ,उसके पैर की हड्डी टूट जाने के कारण उसको नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा और …

Kalpna

उम्मीदों  के दिए जला, मैंने एक दुनिया बसा ली है।  मेरी कल्पना की बगिया में शब्द, रंग, भाव माली हैं।  दिल में किसी के न दुर्भावना…

Zeenat [part 60]

ज़ीनत का, इतना बड़ा झूठ जानकर सुदीप को आश्चर्य हुआ ,उसे विश्वास नहीं हो रहा था ,ये इतना बड़ा झूठ भी बोल सकती है। आखिर इतना झूठ बोलन…

Zeenat [part 59]

सुदीप  अब नाराज़ होने लगा था ,वो देख रहा था ,भूमि उसकी बातों में कुछ ज्यादा ही ध्यान देती है। उसने भूमि से कई बार कहा ,''…

Zeenat [part 58]

ज़ीनत चाहती थी, जिन लोगों के घर उसने पहले काम किया है, जिनसे उसकी जान -पहचान है। वे ,उसके  काम न करने के बाद भी, उसे उसी तरह मन स…

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