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Rasiya [part 134]

चतुर अपने घर में आये मेहमानों को ,तन्मय का परिचय कराते हुए कहता है -परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, ये पुलिसवाला ! मेरे बचपन क…

Lekhak ka kamra

' विचार' भावनाएं 'किसी जगह या समय के मोहताज नहीं हैं।  वो  कभी भी, कहीं भी आ जा सकते हैं।  उनके लिए कोई विशेष कमरे क…

Kabhi dekha hai

कभी देखा है तुमने, लेख़क का कमरा ! जहां सपने पलते हैं ,वो उड़ान भरता है।  अपनी कल्पनाओं को, जीता है।  मन में उठते शोर को थाम , श…

Shaitani sa......5

केतकी, भोजन करके हाथ धोने के लिए नल पर गयी थी ,वहां भी उसे अपने पिता के स्वर सुनाई दे रहे थे - अब और नहीं, अब मैंने सोच लिया है …

Rasiya [part 133]

सुमित अग्रवाल ,चतुर का घर देखकर अपने घर वापस जाने के लिए, उसके घर से बाहर निकले ही थे ,तभी चतुर ने अपने घर का मुख्य द्वार बंद क…

Rasiya [part 132]

चतुर से वो महिला नाराज़ थी और जब उसने अपने पति  को बताया- कि चतुर ने, हमें कितना बड़ा धोखा दिया है ?  जब चतुर आता है ,तब वे उससे ब…

Shaitani sa......4

केतकी का, अपने घर जाने का मन नहीं कर रहा था , तब वह निर्मला  को साथ लेकर, एक नीम के पेड़ के नीचे बैठ जाती है। दोनों सहेलियां आपस…

Jo manga vo kahan mila ?

उम्मीदों ने बहुत रुलाया ,तमन्नाएं भी थीं ,बहुत,  हाथ आते-आते छूट जाता,वो हमारे सब्र का पैमाना था।  मांगने पर' भीख़' भी नह…

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