Nyay ki khoj
'न्याय की खोज' के लिए हमें कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती, हमारा अंतर्मन जानता है कि क्या सही है और क्या गलत है ? …
'न्याय की खोज' के लिए हमें कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती, हमारा अंतर्मन जानता है कि क्या सही है और क्या गलत है ? …
शांत मन ,'मौन' रहकर अपने आपको टटोलता है। ज्ञान की धारा बही ,तब मौन अंतर्मन में झांकता है। वेदना की पराकाष्ठा ,मौन रहना…
हालाँकि कस्तूरी अपने पति चतुर के कामों में कोई दिलचस्पी नहीं लेती थी। चतुर भी, उसकी तरफ से निश्चिन्त था। चतुर जो भी कर रहा है ,क…
कोई भी... पीछे मुड़कर मत देखना।"रत्न प्रताप राजवीर ने, बहुत धीमी आवाज़ में दोनों को चेतावनी दी थी, उसमें ऐसा भय था, कि मोह…
रत्न प्रताप ,भानु और मोहिनी अभी बातें ही कर रहे थे ,तभी उन्हें लगा जैसे इस तहखाने की तरफ कोई बढ़ रहा है। वो कोई एक व्यक्ति नहीं …
वो भले ही, मुझसे लड़ती ,झगड़ती है। पर मेरी परवाह भी तो, वही करती है। रिश्ता हमारा भले ही पुराना हुआ है । जब मुस्कुराकर मेरी तरफ…
कबीर हताश, निराश, टहलते हुए , सागर किनारे आकर बैठ गया। मन ही मन सोच रहा था, इस जीवन का क्या करूं ? जो चाहता हूं, वह होता नहीं है…
रहा !' बीज 'का स्वप्न अद्भुत ! माटी के गर्भ में सोया, 'बीज' स्वप्न देख रहा था। बाहर आ,'अंधकार' से, …