इंस्पेक्टर कुणाल एक अनजान लड़की को लेकर, इंस्पेक्टर तेवतिया के थाने में पहुंचा। वहां पर उस लड़की ने अपना नाम' रोहिणी' बताया। इंस्पेक्टर तेवतिया भी नहीं समझ पा रहे थे आखिर यह लड़की कौन है ? और इंस्पेक्टर कुणाल इसे लेकर यहाँ क्यों आये हैं ,इससे क्या चाहते हैं ? इंस्पेक्टर कुणाल ने सिर्फ इतना ही परिचय दिया कि यह लड़की एक बगीचे में, चित्रकारी करने के लिए गई थी, किंतु खून !खून !कह कर, भाग आई और बेहोश हो गई। वह समझ नहीं पा रहे थे, यह उसका अभिनय था या सच में ही वह परेशान थी। कुछ तो था जो वह समझने का प्रयास कर रहे थे।
तब उन्होंने सब इंस्पेक्टर चांदनी से कहा- कि इससे पता करवाओ ! कि यह कहां से आई है या इसका घर कहां पर है ? पहले तो वह कुछ भी नहीं बताती है किंतु जब सब इंस्पेक्टर चांदनी उसे डांटती है और कहती है -यदि तुमने मेरे प्रश्नों का सही-सही जवाब नहीं दिया कि मैं तुम्हें लॉकअप में बंद कर दूंगी। तब उस पर इस बात का असर होता है और तब वह बताती है - कि'' विजयबाग़'' में कल्याणी जी की कोठी में यह रहती है।
तब कुणाल ,इंस्पेक्टर तेवतिया से कहता है - आओ, चलो ! इसे छोड़कर आते हैं।
इंस्पेक्टर तेवतिया समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर कुणाल क्या करना चाहता है? किंतु उन्हें लग रहा था यह जो कुछ भी करेगा हमारे केस की भलाई के लिए ही करेगा। उन्होंने उससे ज्यादा कुछ नहीं पूछा और उसके संग हो लिए।
कल्याणी जी की कोठी पर पहुंचकर, जब उनके चौकीदार ने उस लड़की को देखा तो चौंक गया -एकदम से बोला -मैडम ! आप इनके साथ यहां कैसे ? तब वह तुरंत ही, अंदर सूचना देने जाता है और इंस्पेक्टर साहब से कहता है - आप अंदर जा सकते हैं। इंस्पेक्टर तेवतिया और वह लड़की, घर के अंदर प्रवेश करते हैं किंतु कुणाल बाहर ही रह जाता है और उस चौकीदार से पूछता है -ये 'मैडम' कौन है ?
ये ' रोहिणी' मैडम है ?
यह बात तो मुझे पहले ही पता है, किंतु ये वो नहीं ,जिससे हम पहले मिलकर गए थे ,ये कहां से आई है? और इस कोठी में रहने वालों से उनका क्या संबंध है ? इन्हें आए हुए लगभग चार-पांच महीने हो गए हैं , साहब !मैं इतना कुछ नहीं पूछ सकता, बस इतना जानता हूं कि उनकी किसी रिश्तेदारी में ही है।
क्या यह शादीशुदा है ? क्या इसका कोई बच्चा भी हुआ है ?
हैरत से वह चौकीदार कुणाल की तरफ देखने लगा और उसने जवाब देने के बदले, कुणाल से ही प्रश्न किया। साहब ! ये सब आप कैसे जानते हैं ? कि ये अभी कुछ दिनों पहले ही मां बनी हैं किंतु मैं उनके पति के विषय में कुछ नहीं जानता ,ये जानकारी तो आपको अंदर भी मिल जाएगी ,मैं कुछ भी नहीं जानता कहकर इधर -उधर देखते हुए बोला - मुझे तो आते- जाते जो भी दिखाई देता है ,वह मैंने आपको बता दिया
जो लड़की पहले रहती थी ,उसका नाम भी' रोहिणी 'ही था ,वो कहाँ गयी ?
मैं साहब लोगों से, इस तरह कुछ सवाल -जवाब भी नहीं कर सकता, यह तो आप ही का कार्य है, आप ही उनसे बात कीजिए।कुणाल समझ गया ,ये ड़र गया है ,तब उससे बोला -तुम्हारा नाम नहीं आएगा ,बेफ़िक्र रहो !
कुछ देर पश्चात कुणाल अंदर गया, कल्याणी जी उसे देखकर थोड़ा घबरा सी गई और बोलीं -इंस्पेक्टर साहब !मुझे लगता है, आप अपने थाने को छोड़कर यहीं की ड्यूटी निभा रहे हैं। क्या आपका वह केस सुलझ गया ?
हम अपना कार्य बखूबी समझते हैं, हमारा कार्य केस सॉल्व करना ही नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा करना भी है। वह तो गनीमत मानिए ,मैं उधर से गुजर रहा था वरना यह आपकी बेटी, न जाने किस परिस्थिति में फंस जाती है। मुझे लगता है, इसे परेशानियों में फंसने का कुछ ज्यादा ही शौक है।
कल्याणी कुणाल की बात सुनकर थोड़ा हड़बड़ा गई और बोली - यह मेरी बेटी नहीं है, तुम्हें बताया तो था कि यह हमारी रिश्तेदार है। उस दिन आप लोगों से मिलवाया भी था। आपने मेरी बेटी को बचाया ,आपका धन्यवाद !क्या आप चाय लेंगे ?
तेवतिया मना करने ही वाले थे तभी कुणाल बोला -मंगवा लीजिये !साथ में नाश्ता भी.... इतना तो बनता ही है ,तेवतिया उसकी तरफ देख रहा था।
बेटी नहीं है ,बेटी जैसी तो है ,हां, इस बात को बहुत दिन हो गए, लापरवाही से कुणाल बोला - क्या यह जब से यहीं रह रही है, आपने इसका क्या नाम बताया था ?अनजान बनते हुए कुणाल ने पूछा।
रोहिणी !
जब हम पहले मिले थे, वह तो यह नहीं है ,एकाएक तेवतिया बोल उठे।
क्या मतलब ?नहीं, नहीं आपको कोई गलतफहमी हुई है ,यह वही है कल्याणी जी ने विरोध किया।
देखिए! भले ही दिन थोड़े ज्यादा हो गए हैं, किंतु मैं इतना जानता हूं, मैं एक बार जिसका चेहरा देख लेता हूँ उसे भूलता नहीं। मानता हूं कि आपने हमारा परिचय किसी' रोहिणी' नाम की लड़की से कराया था किंतु यह वह लड़की नहीं है। यह रिश्ते में आपकी क्या लगती है ?
यह मेरी' भतीजी' है, हड़बड़ाकर कल्याणी बोली।
किंतु उस दिन तो आपने, बताया था कि यह तुम्हारे पति की कोई रिश्तेदार है।
क्या मैंने ऐसा कहा था ?हाँ तो जो भी है ,इससे कोई रिश्ता तो है , हड़बड़ा कर कल्याणी ने कहा किन्तु आज तक मेरी बेटी नहीं मिली है।
हम उसे ही तो ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं ,उस लड़की का तो विवाह भी नहीं हुआ था फिर यह लड़की तो शादीशुदा है, और एक बच्चे की मां भी है।
नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है, कल्याणी जी उत्तेजित होते हुए बोली - यह सब आपसे किसने कहा ?
इसी लड़की रोहिणी ने बताया ,तभी तो इसे हम यहाँ लेकर आये हैं।
वो तो पगली है ,दरअसल वो बहुत बिमार थी, कुछ का कुछ बोलती है ,उसकी बात पर ध्यान मत दीजिये !
कोई बात नहीं, परेशानी में ऐसी हालत हो ही जाती है।
वैसे इस बेचारी बच्ची के पति का क्या नाम है ?इतने दिनों से यहीं रह रही है ,वो इसे लेने क्यों नहीं आया ?
इन दोनों का झगड़ा हुआ है ,अब जब इनमें सुलह हो जाएगी लेने आ जायेगा।
तब इंस्पेक्टर कुणाल ने तेवतिया की तरफ देखा ,ये अभी तो कह रही थीं इसका विवाह नहीं हुआ है और अब कह रहीं हैं -जब सुलह हो जाएगी ,तब लेने आ जायेगा।
