Teri yaad

तेरी आहटों को जीती हूं मैं, तेरी आहटों को सोचती हूं। 

तेरे लिए जीती हूं मैं, तेरे लिए मरती भी हूं। 

मेरी खामोशियों में तू है, समाया। 

 हर वक्त तू ,मुझे यूं ही याद आया। 

जब से गया तू ,हरदम रहा संग तेरा साया। 

एहसास तेरे साए का महसूस करती हूं मैं ,

तुझे हर पल ,हर जगह ढूंढती हूं। 

मैं ख्वाबों में अपने ,तुझे ढूंढती हूं। 

मैं आईने में ,तुझे खोजती हूँ। 

कहनी थी, कितनी बातें तुझी से,

 तेरी तस्वीर से...मन बहलाती हूं मैं,

तेरी यादों में तुझे ढूंढती हूँ। 

सामने तुझको बिठाकर तुझी से शिकवे, 

तन्हाइयों तेरी खुशामद भी करती हूं ,मैं !

तुम्हीं  से मोहब्बत ,तुम्हीं  से शिकायत ,

तुम्हीं  से अदावत, तुम्हीं पर इनायत

मेरी रूह को जो ,सुकून आए, उन सांसों को खोजती हूं मैं। 

तेरी आहटों को जीती हूँ ,मैं...तेरी आहटों को खोजती हूँ।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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