श्याम और केतकी बहुत दिनों से गांव में छुप-छुपकर मिल रहे थे ,किन्तु श्याम अब उससे इस तरह मिलना नहीं चाहता था। हमेशा ड़र लगा रहता है,कि कहीं कोई आ न जाये या बातें करते हुए देख न ले। तब वो कहता है - कहीं एकांत में मिलते हैं ,जहाँ तुम और सिर्फ़ मैं हूँ।
किन्तु केतकी को ऐसा कोई स्थान नजर नहीं आ रहा था। वो उस गांव की बेटी है ,हर कोई उसे जानता है। अभी तक छुप -छुपकर जब भी मिलती थी, किसी ने साथ में देख भी लिया तो क्या होगा ?कभी कह देती ,रास्ता पूछ रहा था। किसी के घर का पता पूछ रहा था। उसके पास बहाने होते, किन्तु इस तरह एकांत !ये बात सोचकर ही काँप गयी किन्तु अब वो ऐसा एकांत कहाँ से लाये ? पहले तो वो उससे इस तरह मिलने से ही डर रही थी। तब श्याम ने, उसे अपनी मुहब्बत का वास्ता दिया।
तब केतकी ने सोचा -जीवन तो इसी के साथ बिताना है ,फिर मिलने में बुराई ही क्या है ? इस तरह वो मिलने के लिए तैयार हो गयी।
उन्होंने मिलने के लिए स्थान भी चुना तो केतकी का अपना अहाता जहाँ पर ढोर [ गाय - भैंस इत्यादि ]बांधे जाते थे ,जहाँ उनका भूसा रखा जाता था। केतकी,घबराते हुए जब श्याम से मिलने पहुंची ,किन्तु श्याम से उसे ऐसी उम्मीद तो नहीं थी ,श्याम तो उस पर जैसे झपट पड़ा। किन्तु अब करे भी तो क्या ?किससे कहे ?वो तो स्वयं ही उससे मिलने आई है ,इसीलिए शांत रही। श्याम उसे शांत देखकर, फिर से आगे बढ़ा ,तभी बाहर से कोई तेज आवाज आई। केतकी तेजी से उठकर बाहर की तरफ भागी और फिर उसने मुड़कर पीछे नहीं देखा, घर पहुंचकर ही दम लिया ,वो इतनी घबरा गयी थी ,खड़े -खड़े ही कई गिलास पानी पी गयी।
चिंतामणि उसकी हालत देखकर पूछती हैं -अब तक कहाँ थी ? इतनी घबराई हुई क्यों है ? क्या हुआ है ?क्या कोई भूत देख लिया ,कहकर माँ मुस्कुराई।
कुछ नहीं ,एक बैल मेरे पीछे पड़ गया था ,कहते हुए उसने पानी पिया और एक गहरी स्वांस लेकर छत पर अपने कमरे में चली गयी। उसकी इस हालत को विभा ने भी देखा किन्तु उसने वही समझा जो वो समझना चाहती थी। वो सही जा रही थी। तीन -चार दिनों तक केतकी अच्छी बच्ची बनकर चुपचाप काम करती रही। श्याम से मिलना तो दूर उसके विषय में सोच भी नहीं रही थी।
उसकी घबराहट और ड़र जब समाप्त हुआ ,तब उसे फिर से श्याम का ख़्याल आया ,मैं तो घर आ गयी थी ,तब श्याम ने क्या किया होगा ? क्या किया होगा ?अपने घर चला गया होगा। स्वयं ही प्रश्न करके स्वयं ही उत्तर भी दे दिया। उसी ने तो वो जगह ढूंढी थी ,वैसे उसे कैसे पता चला ? हो सकता है ,उसके दोस्त ने ही बताया होगा। वैसे मैंने आज तक उसके दोस्त के विषय में कभी पूछा ही नहीं, उसका दोस्त कौन है ?
चार -पांच दिनों के पश्चात केतकी को जैसे राहत का एहसास हुआ और वो घर से बाहर निकली किन्तु आज उसे श्याम के मिलने पर कोई दुःख नहीं था। उस दिन को सोचकर अभी भी घबराहट होती है। श्याम उसके दिलो -दिमाग़ पर छाया तो था किन्तु उसकी दूरी पहले की तरह परेशान नहीं कर रही थी। वो भी न जाने कहाँ चला गया था ?अब केतकी को कहीं भी दिखलाई नहीं दे रहा था। लगभग एक सप्ताह तक श्याम के न दिखने पर अब केतकी सोचने लगी -आखिर श्याम दिखलाई क्यों नहीं दे रहा ? जब तो मुझसे मिलने के लिए इतना परेशान और बेताब रहता था। कहीं वो मेरे इस तरह भाग जाने के कारण मुझसे नाराज़ तो नहीं हुआ होगा।
विभा ,केतकी के व्यवहार को देख और समझ रही थी। एक दिन उसने पूछा -दीदी !क्या बात है ?कुछ परेशान हो।
तुम्हें ,मेरे व्यवहार से क्या ?अपने काम से काम रखो ! कहकर बुदबुदाते हुए आगे बढ़ गयी ,ये चलीं हैं ,मेरा हालचाल पूछने।
केतकी के इस व्यवहार से विभा बुरी तरह तिलमिला गयी। इससे बड़ी हूँ ,जितने प्यार से बोल रही हूँ ,उतनी ही'' सिर पर चढ़ रही है।''मेरा भी समय आएगा।
तब एक दिन केतकी को श्याम दिखलाई दिया ,उसे देखकर केतकी को प्रसन्नता हुई किन्तु अपनी ख़ुशी को छुपाते हुए, अपने काम में व्यस्त रही। श्याम उसके करीब आया और उससे पूछा - तुम तो इस तरह भाग गयीं ,जैसे कोई भूत तुम्हारे पीछे पड़ा हो।
और क्या करती ? तुमने हरकत ही ऐसी की थी ,किसी ने देख लिया होता, तो क्या होता ?मैं बुरी तरह डर गयी थी। शायद ,कोई आ गया है।
तुम्हें ,बस अपना ही ख्याल है ,तुमने एक बार मेरे विषय में भी नहीं सोचा।
क्या सोचती ?मैं घबरा ही इतना गयी थी ,कहते हुए उसने एक गहरी स्वांस ली। वैसे तुम बताओ !इतने दिनों से कहाँ थे ?
तो तुम्हें मेरी याद आ रही थी ,कहकर श्याम मुस्कुराया।
नहीं ,मैं बस यही सोच रही थी ,कि कहीं तुम्हें कुछ हो तो नहीं गया।
नहीं ,मुझे क्या होगा ?जब तुम्हारा प्यार मेरे साथ है ,आज बस तुम्हें एक ख़ुशख़बरी सुनाने आया था।
कैसी खुशख़बरी ?काम करते अपने हाथों को रोककर केतकी ने पूछा।
अच्छा ,तुम्हें क्या लगता है ?ये खुशख़बरी तुम्हें इतनी आसानी से सुनने को मिल जाएगी।
तो फिर.....
अभी वो बात अधूरी है ,कहते हुए श्याम ने एक आँख दबाई ,यह देख सुनकर केतकी का ह्रदय धड़क उठा।
उसने अपनी आँखें नीची कीं और बोली - नहीं ,मुझे कुछ नहीं सुनना।
बस ,उतर गया, तुम्हारे प्यार का बुखार ! हिम्मत ही नहीं थी ,तो प्यार क्यों किया ?जब तुम अभी साथ न निभा सकीं तो मुझसे विवाह करके तमाम उम्र के लिए ,इस रिश्ते को कैसे निभा पाओगी ?वायदा करना आसान होता है उसको निभाना कठिन !अरे... मैं भी क्या बातें कर रहा हूँ ? तुमने तो मुझसे कोई वायदा किया ही नहीं ,हमेशा मुझसे ही पूछती रहीं ,तुम मेरा साथ दोगे। रिश्ता दोनों तरफ से निभाया जाता है। उससे बचकर भागा नहीं जाता।
चुप !अब चुप भी करोगे !यहाँ कोई फ़िल्म नहीं चल रही है। ये ज़िंदगी है ,जो भी करना है ,सोच -समझकर करना है। मैं नहीं चाहती ,मेरे कारण मेरे पिता का गर्व से उठा मस्तक झुक जाये। हाँ ,मानती हूँ ,तुमसे प्यार करने लगी हूँ किन्तु ये सब तभी तो होगा। जब तुम ,मेरे पिता के पास रिश्ता लेकर जाओगे और वो सम्मान से मेरा हाथ तुम्हारे हाथ में देंगे।
केतकी की बातें सुनकर श्याम चुप हो गया ,और बोला -तुम्हारी बात सही है ,मैं तुम्हारे पिता से हमारे विवाह की बात करूंगा इसीलिए तो तुम्हें खुशख़बरी सुनाने आया था।
अब बता भी दो !क्या खुशख़बरी है ?तभी दूर से कोई आता दिखलाई दिया ,केतकी बोली -किसी ने तुम्हें मेरे साथ खड़े देख लिया तो... अभी उसने ये ही कहा था। तब तक श्याम वहां से गायब हो गया था। केतकी ने इधर -उधर देखा तो वो पेड़ों के झुरमुट में छुप गया था।
उसने दूर से ही केतकी से इशारा करके बताया ,शाम को चार बजे वहीं आ जाना ,मैं इंतजार करूंगा ,सिर्फ़ एक बार....केतकी ने भी उसे कह दिया -वो आएगी।
