Shaitani sa......26

केतकी का बदला हुआ व्यवहार देखकर श्याम उससे पूछता है - आज क्या बात है ? जो तुम इस तरह की बातें कर रही हो ? कुछ नहीं ,मन में कुछ बातें आ रहीं थीं। अच्छा,अब तुम आगे बताओ ! कहते हुए ,उसने अनेक प्रश्न श्याम से किये । उसके प्रश्नों को सुन- सुनकर श्याम जवाब दे तो रहा था किंतु मन ही मन सोच रहा था-आज इसे क्या हुआ है ? इससे पहले तो इसने, मुझसे कभी भी इस तरह के सवाल नहीं पूछे। 

केतकी, उससे कैसे कहती ? दो दिन पहले, उसकी भाभी ने ,उसका मज़ाक बनाया था। बात केतकी के दिल में लगी थी। वो भाभी को दिखा देना चाहती थी कि मैं भी कुछ कर सकती हूँ। केतकी में कमी भी कोई नहीं थी ,अभी भी वो पिता के साथ जो कार्य करवाती थी ,हर लड़की के लिए ये सब सम्भव नहीं था। बस शिक्षा का अभाव था ,उसके पास कोई डिग्री नहीं थी। किन्तु इसे वो अपनी कमज़ोरी समझ ठहर जाना नहीं चाहती थी। 


श्याम ध्यान से केतकी की बातें सुन रहा था। तब उसने जाना, केतकी भले ही एक गांव से हो, किन्तु इसकी महत्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी हैं। क्या 'मैं 'इन्हें पूर्ण कर पाउँगा ? ये परिश्रमी होने के साथ -साथ स्वाभिमानी भी है ,कितने बड़े सपने देखती है ? उनकी नजदीकियां कम होने लगीं थीं। धीरे-धीरे उनकी मुलाकातें बढ़ने लगीं।

 एक दिन श्याम ने केतकी से कहा - तुम मुझ पर कितना विश्वास करती हो ? 

तब केतकी बोली - मैं,इस समय तुम पर ही तो अब विश्वास कर रही हूं, इसलिए तुमसे ,अपनी सारी बातें बांट लेती हूं। तुम्हें, मैंने अपने जीवन भर का साथी बनाने का निर्णय किया है। क्या ऐसा तुम नहीं सोचते हो ? तुम मुझसे प्यार तो करते हो,न...? 

हां ,हां ,मैं भी तो यही सोच रहा था ,जब मेरी नौकरी लग जाएगी ,बल्कि अगले महीने ही मेरी नौकरी लग जाएगी। 

तब तो तुम्हें,, मेरे पापा से बात करनी चाहिए , केतकी तुरंत बोली।

केतकी इतना जानती थी कि श्याम उससे प्यार करता है किन्तु कभी उसने यह जानने का प्रयास नहीं किया ,वो यहां उसके लिए आता है ,तो किसके यहाँ ठहरता है  ?किस गांव से आता है ? जब कोई दूसरा इश्क़ ,मुहब्बत के चक्कर में पड़ता है ,तो दूसरे उसे चार बात समझाने बैठेंगे। सब पता करके रखना, किन्तु जब स्वयं ही इश्क़ के फेर में पड़ता है ,तो सम्पूर्ण व्यवहारिक ज्ञान न जाने कहाँ उड़नछू हो जाता है ? ऐसा ही हाल कुछ केतकी का था। उसके सामने जीता -जागता श्याम है। उसके लिए वही सच है , जो वो बता देता है। इसीलिए तो किसी ने कहा है -''प्यार अँधा होता है। ''

श्याम एक दिन केतकी से बोला - तुम, मुझसे बातें तो करती हो, किंतु तुम्हें ,मुझ पर पूर्ण विश्वास नहीं है। 

तुम ऐसा क्यों कह रहे हो ?केतकी परेशान होते हुए पूछती है। 

ऐसा नहीं कहूं तो और क्या करूं ? तुमने एक बार भी मुझे अपना हाथ तक पकड़ने नहीं दिया, दूर से ही बैठकर बातें करती हो। मेरा भी कभी मन करता है ,तुम्हारे समीप आकर बैठूं ,तुम्हारे हाथों को पकड़ूँ। 

धत... ऐसी बातें थोड़े ही करते हैं। इससे क्या फर्क पड़ता है ? जब तुम मेरे पापा से बात कर लोगे, हमारी शादी हो जाएगी तो हाथ भी पकड़ लेना।

श्याम को लगा ,ये इतनी जल्दी मानने वाली नहीं है ,उसने मुँह बनाया ,तुम्हारे लिए मैं इतनी दूर से आता हूँ ,तुमसे प्यार जो करता हूँ। कई बार अपने दोस्त के घर ही ठहर जाता हूँ। हम शादी के सपने सजा रहें हैं ,एक साथ शहर में रहने का सोच रहे हैं किन्तु तुम्हें ,मुझ पर रत्तीभर भी भरोसा नहीं। कभी -कभी तो लगता है ,मैं मूर्ख हूँ ,जो तुम्हारी याद में यहाँ खिंचा चला आता हूँ। 

तुम ऐसा क्यों कह रहे हो ?तुम देखते नहीं हो हम कितना डर -डरकर मिलते हैं ? किसी ने देख लिया तो.... सोचकर ही केतकी की रूह काँप गयी।

मैंने ऐसा क्या कह दिया ? बस एक बार गले लगाकर तुम्हें ढेर सारा प्यार करने की इच्छा है। क्या मेरी यह इच्छा पूर्ण नहीं करोगी। 

केतकी को उस पर विश्वास तो हो गया था किन्तु ऐसी बातों से वो अभी भी घबरा उठती। वो, श्याम से कभी खेतों में, कभी कुएं के पीछे, कभी टूटी दीवार के पीछे, मिलने की जुगत लगाती  किन्तु तब भी ड़र बना रहता, कोई देख न ले।

 आज श्याम को इस तरह उदास देखकर, केतकी को उस पर प्यार आया और मुस्कुराते हुए बोली - गले ही तो मिलना है , कोई ऐसी जगह देखनी होगी ,जहाँ हमें कोई न देख सके। 

श्याम तुरंत बोला -तुमने कभी सुना है ,''बगल में छोरा ,गांव में ढिंढोरा ''

मतलब, मैं कुछ समझी नहीं ,तुम्हारी जो वो जानवरों को रखने वाली जगह है ,वो बहुत बड़ी है ,मैंने देखा है ,वहां कोई आता जाता नहीं है और वो जो भूसा रखने वाली कोठरी है ,हम कल वहीं मिलते हैं।

 मन ही मन केतकी को थोड़ी घबराहट तो हो रही थी ,इस तरह अकेले में इससे मिलना क्या उचित रहेगा ?उसकी छठी इंद्री ने उसे चेताया। वहां तो उनके परिवार में से ही कोई कभी -कभार जाता है।उसने एक नजर श्याम की तरफ देखा। तब सोचा ,प्यार किया है ,तो ड़रना कैसा ? कोई बुराई भी नहीं है ,जब इसकी नौकरी लग जाएगी ,तब हम विवाह कर ही लेंगे। मुझे अब डरना नहीं चाहिए ,ये भी तो मेरे लिए मेरे गांव आता है। 

उसको अब श्याम पर पूरा यकीन हो गया था, कि यह मुझसे प्यार करता है। यदि इसकी यह इच्छा है तो एक बार मिलने में कोई बुराई नहीं है। यह सोचकर वह कल मिलने का वादा करके चली जाती है। अगले दिन जब वो श्याम से, मिलने के लिए जाती है। वो पूरी तरह से सचेत थी। जब वो वहां पहुंची ,श्याम पहले से ही उसकी प्रतीक्षा कर रहा था।

केतकी को आते देखकर, उसे शीघ्रता से खींचकर अंदर ले गया। घबराहट के कारण केतकी की धड़कनें इतनी तीव्र थीं ,जैसे उसका दिल उसकी पसलियों से बाहर आ जायेगा। आखिर उसने अपने प्यार के लिए ऐसा कदम उठाया था किन्तु ह्रदय इस बात की गवाही दे रहा था ,ये जो भी है ,गलत हो रहा है इसीलिए वो इतनी घबराहट बढ़ रही थीं। 

श्याम ने ,केतकी को बिना एक पल भी गंवाए ,उसे बाँहों में भर लिया और इससे पहले कि वो कुछ और सोचती या कहती ,उसने उसके अधरों को चूम लिया। अब केतकी थोड़ा नाराज होते हुए ,उससे छूटने का प्रयास करने लगी और उस प्रयास में सफल भी रही। तब श्याम से बोली -ये क्या कर रहे हो ?तुमने गले मिलने के लिए ही तो कहा था। गुस्से और शर्म से उसका चेहरा गर्म और लाल हो गया। 

तब श्याम बोला -मैंने ऐसा क्या कर दिया ?अपना प्यार ही तो जतला रहा हूँ ,प्यार करने वाले इसी तरह प्रेम करते हैं। क्या तुम्हारी बहनें प्रेम नहीं करतीं ,क्या तुम्हारे भाभी -भइया ने प्रेम नहीं किया ? जब प्रेम होता है ,तो कोई दूरी नहीं रह जाती है। केतकी उसकी बात सुनकर थोड़ा शांत हुई ,श्याम का उससे ,इस तरह लिपटना और अधरों पर उसका चुंबन अभी भी महसूस कर रही थी। वो अपने आपमें ही सिमटती जा रही थी। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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