Kiski dulhan [part 65]

गोपाल भरी सभा में आकर बताता है -उसने तीसरे बच्चे को देखा है और उसे जाते हुए भी देखा है। तभी मोहिनी पूछती है -किसके साथ ?

गोपाल ने जवाब देने से पहले, भानु की ओर देखा और कहा - एक औरत के साथ ”यह सुनते ही मृणाल का चेहरा सफेद पड़ गया। भय से मृणाल का सफेद पड़ा चेहरा, मोहिनी ने भी देख लिया और बिना देर किये बोली -“माँ ”


मृणाल के मुख से कुछ नहीं निकला ,उसकी हालत ऐसी हो गयी जैसे उसे चोरी करते पकड़ लिया गया हो मोहिनी, उसके सामने जाकर खड़ी हो गई उसकी आंखों में देखते हुए पूछा - क्या वो आप थीं ?”

मृणाल ने आँखें बंद कर लीं और बोली -“हाँ ”उस एक सच्चाई से, हवेली के आँगन में जैसे समय थम सा गया। मोहनी की आँखों में अभी भी अविश्वास था। उसने ,अपने आपको विश्वास दिलाने के लिए फिर  पूछा -क्या आप सच में तीसरे बच्चे को लेकर गई थीं?”

“हाँ।”

“लेकिन कहाँ ?उसके शब्दों में जोर था। 

मुझे नहीं पता ”

आपको नहीं पता ? आश्चर्य से मोहिनी बोली -आप एक बच्चे को अपने साथ ले गयीं थीं और आपको ही नहीं मालूम कहाँ लेकर गयीं थीं ?

मृणाल की आवाज टूट गई ,तब वो बोली - मुझसे सिर्फ इतना कहा गया था ,'कि अगर मैं, उसे उस जगह से नहीं निकालूँगी, तो वह बच्चा जिंदा नहीं बचेगा।”

मोहिनी ने पूछा—ये सब आपसे किसने कहा था?”

मृणाल ने, रत्न प्रताप की ओर देखा ,रत्न प्रताप ने आँखें फेर लीं। मोहिनी समझ गई कि बात अभी यहीं खत्म नहीं होती है।

भानु ने गोपाल से पूछा—अगर मृणाल तीसरे बच्चे को लेकर गई थीं, तो मैं और मोहिनी कहाँ थे?”

गोपाल ने उसकी ओर देखा ,तुम दोनों भी उसी कमरे में थे।”

फिर हमें अलग क्यों नहीं किया गया ?”

क्योंकि उस समय किसी और का आदेश था।”

“किसका?”

गोपाल ने धीमे स्वर में कहा—तुम दोनों को एक साथ रखने का।”

भानु के चेहरे पर तनाव बढ़ गया ,तुम हमें ये बताओ ! किसने दिया था ?वह आदेश !”गोपाल ने कोई उत्तर नहीं दिया। तब मोहिनी ने पूछा— क्या यह वही R था?”

गोपाल ने तुरंत उसकी ओर देखा ,पहली बार उसके चेहरे पर साफ डर दिखाई दिया और घबराते हुए पूछा - तुमने यह अक्षर कहाँ देखा?”

मोहिनी ने अपनी पायल की ओर देखा और बोली  -हर जगह....”

गोपाल कुछ क्षण चुप रहा ,फिर बोला—R सिर्फ एक व्यक्ति का नाम नहीं था।”

रणवीर  ने तुरंत पूछा —“मतलब?”

मतलब यह कि तुम लोग अब तक जिस R को एक आदमी समझकर खोज रहे हो, वह असल में एक संकेत भी था।”

रूद्र ने पहली बार बीच में हस्तक्षेप किया ,किस चीज का संकेत?”

गोपाल ने उसकी ओर देखा ,एक व्यवस्था का।”

“किस व्यवस्था का?”

“ऐसी व्यवस्था, जिसमें परिवार के अंदर लिए गए फैसलों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था।”

रत्न प्रताप ने तेज आवाज में कहा—“बस !”

गोपाल शांत हो गया फिर बोला -क्या आपको डर लग रहा है ? रत्न प्रताप !”

रत्न प्रताप ने उसकी ओर घूरकर देखा और आगे बढ़कर बोला -“मुझे डर नहीं लगता।”

“तो फिर मोहिनी को सच क्यों नहीं बता देते?”

रत्न प्रताप ने जवाब नहीं दिया ,मोहिनी ने भी उन्हें देखा ,क्या आप जानते थे, कि मेरी माँ तीसरे बच्चे को साथ लेकर गई थीं?”

रत्न प्रताप ने कहा—“हाँ।”

 आपने तो मुझे पहले क्यों नहीं बताया ? ”

“क्योंकि उस समय तुम्हें बचाना जरूरी था।”

“और आज ?”

रत्न प्रताप ने पहली बार उसकी आँखों में सीधे देखा ,आज तुम्हें सच से बचाना संभव नहीं है।”

तब गोपाल ने अपनी जेब से एक मुड़ा हुआ कागज निकाला बोला - यह मैंने 18 अगस्त की सुबह लिखा था कहकर उसने वो कागज मोहिनी को दे दिया।कागज बहुत पुराना था ,स्याही कई जगह से फैली हुई थी।मोहिनी ने,उस कागज़ को पढ़ना शुरू किया।

“सुबह 7:40 — आदेश बदला गया। तीसरे बच्चे को अलग करने की बात कही गई।
लेकिन बच्चा मृणाल के साथ पहले ही कमरे से बाहर ले जाया जा चुका था।

नीचे एक दूसरी पंक्ति थी—मोहिनी और भानु को यह याद नहीं रहना चाहिए ,इसीलिए उनकी स्मृतियाँ मिटा दें। उसे पढ़कर मोहिनी की उँगलियाँ काँपने लगीं और बोली -इसका क्या मतलब है?”

गोपाल ने कहा—उस समय तुम दोनों बहुत छोटे थे, तुम्हारी यादों को मिटाया नहीं गया था,बल्कि उन्हें दबाया गया था।”

मोहिनी ने तुरंत अपनी माँ की ओर देखा ,और पूछा -क्या आपको ये सब पता था?

मृणाल ने अपना सिर झुकाकर कहा -“हाँ।”

तब बताइए ! मेरी यादों के साथ क्या किया गया? मृणाल उसे समझाना  चाहती थी ,उत्तर देने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसके शब्द न जाने कहाँ खो गए ? 

भानु ने आगे बढ़कर पूछा—हमारी स्मृतियों को मिटाने के लिए ,क्या हमें कोई दवा दी गई थी?”

गोपाल ने सीधा जवाब नहीं दिया किन्तु उसने कुछ ख़ुलासा तो किया ,कुछ दिनों तक तुम दोनों को ऐसी दवाएँ दी गईं, जिनसे तुम्हारी नींद गहरी होती गयी।”

मोहिनी की आँखों में भय उतर आया ,और वो 2 बजे का क्या किस्सा है ?”

गोपाल ने उसकी ओर देखा ,कुछ भी न समझते हुए उसने पूछा - 2 बजे का क्या ?”

मैं हर रात लगभग दो बजे गायब हो जाती हूँ ,

गोपाल के चेहरे का रंग बदल गया ,क्या तुम अभी भी…?”

भानु ने तुरंत पूछा—क्या आप इस विषय में भी कुछ जानते हैं ?”

गोपाल ने धीमे से कहा— मुझे लगा था ,वह तरीका पच्चीस साल पहले खत्म हो चुका है।”

मोहिनी के शरीर में सिहरन दौड़ गई ,कौन-सा तरीका?”

गोपाल ने कोई उत्तर नहीं दिया ,वह पीछे हट गया और बोला - अब मुझे जाना होगा।”

भानु ने उसका हाथ पकड़ लिया -“नहीं, अब तुम कहीं नहीं जाओगे।”गोपाल ने हाथ छुड़ाने की कोशिश भी नहीं की।उसने बस इतना कहा— अगर मैं तुम्हें वह बताऊँ जो हर रात 2 बजे होता है, तो तुम आज रात उसे रोकने की कोशिश करोगे।”

“हाँ।”

“और अगर तुमने उसे जबरदस्ती रोक दिया…वह कुछ पल चुप रहा ,तो मोहिनी के दिमाग में दबा हुआ अगला हिस्सा अचानक खुल सकता है।”

किसी ख़तरे को भांपकर ,भानु का चेहरा गंभीर हो गया ,और तब क्या होगा ?”

“और तब उसे जो याद आएगा, वह चीज शायद वो होगी ,जिसे तुम दोनों में से किसी को भी याद नहीं करना चाहिए।”

मोहिनी  ने धीरे से पूछा—“क्या?”

गोपाल ने उसकी ओर देखा और उससे पूछा - तुम्हारी माँ ने, तुम्हें उस रात क्यों बचाया था ,क्या तुम जानती हो ?”

मृणाल की आँखों से आँसू बह निकले ,मोहिनी ने उनकी ओर देखा ,“माँ?”

मृणाल ने काँपती आवाज में कहा—क्योंकि उस रात…वह कुछ क्षणों के लिए रुक गई।मैंने सिर्फ तीसरे बच्चे को नहीं बचाया था।”मोहिनी का दिल जोरों से धड़कने लगा ,मृणाल ने आगे कहा—मैं तुम्हें और भानु को भी बचाने की कोशिश कर रही थी।”उसी क्षण बाहर से किसी चीज के गिरने की तेज आवाज आई।सभी ने दरवाजे की ओर देखा।

रणवीर दौड़कर बाहर गया ,कुछ सेकंड बाद उसकी आवाज गूँजी—“भानु !”

भानु भी ,बाहर भागा,रणवीर के हाथ में वही पुराना रजिस्टर था लेकिन उसके बीच का एक पन्ना फाड़ दिया गया था। रणवीर ने काँपते हुए कहा— जिस पन्ने पर 18 अगस्त 2001 की असली एंट्री थी… वह गायब है।”

 पीछे से मोहिनी भी आकर खड़ी हो गई।फर्श पर उसे एक छोटा-सा लाल धागा दिखलाई दिया।ठीक वैसा ही लाल धागा…जैसा तीसरे बच्चे के रिबन में था।उसने उसे उठाया और तभी उसकी नजर सीढ़ियों के ऊपर गई।वहाँ कोई खड़ा था ,सिर्फ कुछ सेकंड के लिए ,एक परछाईं नजर आई ,फिर वह मुड़ी और ऊपरी गलियारे में गायब हो गई।

मोहिनी  ने बिना सोचे कहा—वह हमें देख रहा था।”

भानु ने उसकी ओर देखा ,पूछा -“कौन?”

मोहिनी की मुट्ठी में लाल धागा कस गया ,मुझे नहीं पता ,कोई तो था ”फिर उसने बहुत धीमे स्वर में कहा—लेकिन मुझे लगता है… वह तीसरा बच्चा तो नहीं था।”


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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