Kiski dulhan [part 50]

मोहिनी जानना चाहती थी ,जिस कक्ष में वो तीनों बच्चे खेलते थे ,आज वो सुरक्षित क्यों नहीं है ? जिस आदमी से, उन्होंने हमें बचाया ,क्या वो वही लाल अंगूठी वाला इंसान है ?''

M.V. ने सिर हिलाया ,हाँ ये संभव है।

“क्या संभव है?मोहिनी की आवाज ऊँची हो गई।आपको हर चीज़ के बारे में ‘संभव है’ ही क्यों पता होता है?M.V. ने कोई जवाब नहीं दिया।मोहिनी आगे बढ़ी और उनसे पूछा -आपने मुझे बचपन में छिपाया था। 

हाँ !


आप मुझे उस आदमी से बचाते रहे।

 हाँ!

तब आप उस बच्ची को भी जानते हैं ,”M.V. फिर से चुप हो गया और फिर भी आप कहते हैं ,कि आपको नहीं पता ,वह अब किसके साथ है ? M.V. की आँखें पहली बार झुक गईं।

मोहिनी समझ गई—वह कुछ छिपा रहा है ,लेकिन उससे पहले कि वह कुछ और पूछती…दूर कहीं से एक हल्की आवाज आई।फूँऽऽ…पीतल की सीटी की आवाज़....

भानु ने ,तुरंत चारों तरफ देखा ,और बोला -वो यहीं है।”

मोहिनी ने कहा—हमें नर्सरी में जाना होगा।”

साया ने धीमे से कहा—अगर उसने तुम्हें वहाँ बुलाया है, तो तुम्हारा जाना शायद उसकी योजना का हिस्सा है।”

मोहिनी ने उसकी तरफ देखा और बोली -अगर न जाएँ ,तो....

साया ने कहा—तो शायद अगला संकेत कभी नहीं मिलेगा।

मोहिनी ने भानु  की तरफ देखा ,भानु ने उससे पूछा - तुम क्या चाहती हो?”

मोहिनी ने कुछ क्षण सोचा ,फिर बोली—“सच।”

भानु ने सिर हिलाया - तो चलते हैं। 

हवेली का पश्चिमी हिस्सा, बाकी हवेली से बिल्कुल अलग था।वहाँ धूल की मोटी परत नजर आ रही थी ,दीवारों पर पुरानी बेलें चढ़ी हुई थीं ,कई दरवाजों पर ताले लगे हुए थे ,दरवाजें बहुत पुराने  लग रहे  थे 

रत्न प्रताप सबसे आगे चल रहा था ,इस समय उसे अपने  कदम भारी लग रहे थे ,जैसे हर कदम उसे अतीत की तरफ ले जा रहा हो।आखिर वह एक बड़े लकड़ी के दरवाजे के सामने रुक गया ,दरवाजे पर कोई नाम नहीं था। बस ऊपर धुंधली-सी नक्काशी थी—म.भ. और उसके नीचे…एक तीसरा निशान ,लेकिन उसे किसी ने खुरचकर मिटा दिया था।

मोहिनी  ने अपना हाथ उस निशान पर रखा ,उसे अचानक ठंड महसूस हुई ,उसने फुसफुसाकर कहा -मैं यहाँ आई हूँ। 

भानु ने उसकी तरफ देखा ,और पूछा -क्या तुम्हें याद है?”

“नहीं ,कहकर उसने अपनी आँखें बंद कर लीं , मुझे लगता है…वह रुक गई ,मैं यहाँ रोई थी।”

रत्न प्रताप ने धीरे से कहा—तुम अकेली नहीं रोई थीं ,मोहिनी ने उसकी तरफ देखा और पूछा -क्या वह भी साथ में रोई थी?”

रत्न प्रताप  ने, कोई उत्तर नहीं दिया ,भानु ने दरवाजे की कुंडी पकड़ी ,वह बंद थी ,लेकिन मोहिनी ने जैसे ही अपनी पायल की तरफ देखा…उसके भीतर एक विचार आया ,उसने पायल से वही पीतल की चाबी निकाली ,चाबी ताले में लगाई ,क्लिक ! की आवाज़ के साथ दरवाजा खुल गया।अंदर धूल और पुराने कागजों की गंध थी।कमरे के बीचों बीच एक छोटी मेज थी। मेज पर तीन लकड़ी के खिलौने रखे थे।एक लड़की ,एक लड़का और…एक छोटी बच्ची !तीनों के पीछे उनके नाम लिखे थे।पहले खिलौने के पीछे—मोहिनी ,दूसरे के पीछे—भानु और तीसरे के पीछे—नाम की जगह सिर्फ एक खाली जगह।मोहिनी  ने उसे उठाया ,उसकी आँखों में बेचैनी फैल गई और बोली -“यहाँ नाम क्यों नहीं है?”

M.V. ने पीछे से कहा—क्योंकि उसका नाम मिटाया गया था।”

“किसने मिटाया ?”

जिसने चाहा, कि वह कभी अस्तित्व में थी ही नहीं।”

मोहिनी ने खिलौने को पलटा ,उसके नीचे एक छोटा-सा कागज चिपका था ,उसने वो कागज निकाला।उस पर बच्चों जैसी लिखावट में लिखा था—अगर मेरा नाम मिटा दिया जाए, तो मोहिनी मुझे याद रखेगी। मोहिनी की आँखें भर आईं ,क्या ये उसने लिखा था?”

M.V. ने कहा—“हाँ।”

“उसे पता था, कि उसका नाम मिटा दिया जाएगा?”

“शायद।”

मोहिनी ने कागज सीने से लगा लिया ,फिर कमरे के दूसरे कोने में उसकी नजर एक छोटी अलमारी पर पड़ी ,अलमारी के ऊपर…एक पुराना लाल रिबन रखा था ,मोहिनी ठिठक गई ,उसने अपनी हथेली में पकड़े रिबन को देखा फिर अलमारी वाले रिबन को दोनों बिल्कुल एक जैसे थे।

भानु ने पूछा—“दो रिबन?”

मोहिनी धीरे-धीरे अलमारी की तरफ बढ़ी ,उसने अलमारी खोली ,उसमें अंदर सिर्फ एक छोटी सी डायरी थी ,उसके कवर पर लिखा था—“तीन बच्चों के लिए ,मोहिनी ने डायरी उठाई ,पहला पन्ना खाली था।दूसरा भी ,तीसरे पन्ने पर सिर्फ एक वाक्य था—18 अगस्त के बाद किसी पर भरोसा मत करना। मोहिनी का दिल धड़क उठा। भानु ने अगला पन्ना पलटा ,वहाँ एक चित्र बना था ,उसमें तीन बच्चे थे और उनके पीछे एक बड़ा आदमी खड़ा था। उसके हाथ में लाल अंगूठी थी ,लेकिन उसके चेहरे पर …काली स्याही फैली हुई थी।मोहिनी  ने धीरे से पूछा—यह कौन है ?

पीछे से रत्नप्रताप आवाज आई—जिसका चेहरा तुम दोनों ने उस रात देखा था।”

मोहिनी पलटी ,क्या उसे आपने देखा था?”

रत्न प्रताप की आँखें तस्वीर पर थीं, “हाँ”

तो आप उसे पहचानते हैं?”

रत्नप्रताप ने बहुत धीमे से कहा—पहचानता था।”

“था”क्या मतलब ?

रत्न प्रताप  ने उसकी तरफ देखा ,अब नहीं जानता कि यह वही आदमी है या नहीं। 

अचानक डायरी अपने आप बंद हो गई ,धप्प! मोहिनी ये सब देखकर चौंक गई। तभी कमरे के भीतर कहीं से,किसी  बच्ची की हँसी सुनाई दी। बहुत हल्की किन्तु बहुत परिचित मोहिनी  ने फुसफुसाकर कहा—वह यहाँ है।

भानु ने चारों तरफ देखा ,कहाँ?”

एक छोटी आवाज आई—पीछे दोनों ने एक साथ पलटकर देखा।कमरे के पीछे की दीवार पर एक छोटा-सा दरवाजा था ,जो अभी कुछ क्षण पहले वहाँ दिखाई नहीं दे रहा था।दरवाजे पर वही निशान था—दो साँप, उनके मध्य में एक फूल और उसके नीचे…इस बार तीसरा अक्षर स्पष्ट दिखाई दे रहा था -म.भ.र.

मोहिनी ने उस अक्षर को छुआ ,“R…”

भानु ने धीरे से पूछा—यह R किसका नाम हो सकता है?”

मोहिनी ने कोई उत्तर नहीं दिया ,क्योंकि उसी क्षण दरवाजे के दूसरी तरफ से बच्ची की आवाज आई— मोहिनी  दीदी… अब तुम्हें मेरा नाम याद आने लगा है।”मोहिनी  की आँखें आश्चर्य से फैल गईं।

भानु ने उसकी ओर देखा ,क्या तुम्हें सच में कुछ याद आ रहा है? 

मोहिनी ने दरवाजे को देखते हुए धीरे से कहा—नाम नहीं…वह रुकी लेकिन एक आवाज…उसकी आँखों में अचानक एक पुरानी याद चमकी ,एक छोटी बच्ची उसके सामने खड़ी थी।वह हँसते हुए कह रही थी—मेरा नाम तुमने ही रखा था।”मोहिनी का चेहरा सफेद पड़ गया ,मैंने…वो फुसफुसाई -मैंने उसका नाम रखा था।

  दरवाजे के पीछे से फिर वही आवाज आई— अब वही नाम बोलो ! मोहिनी !”

कमरे में मौजूद सभी लोग बिल्कुल स्थिर हो गए ,मोहिनी ने दरवाजे की तरफ देखा ,उसके होंठ खुले…लेकिन नाम बाहर आने से पहले ही—दरवाजे के पीछे किसी ने जोर से दस्तक दी ,एक बार ,फिर दूसरी बार..फिर तीसरी बार..और तीसरी दस्तक के साथ…दीवार पर लिखा तीसरा अक्षर अपने आप मिट गया।म.भ.बस इतना ही रह गया।

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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