Janna hei

सुनंदा इन बातों से थक चुकी है, ये बातें सुनते - सुनते उसके' कान पक गए हैं।' जब वह तेइस वर्ष की थी तभी से उसकी मम्मी उसके लिए लड़का ढूंढने लगी थी। लड़के वाले आते ,उसे पसंद करते, तब सारी बात बेटे पर छोड़कर चले जाते। कहते -हमें तो आपकी लड़की पसंद है ,बस दोनों बच्चे आपस में बात कर लें  आपस में एक -दूसरे को समझ लें। इनकी हां है ,तो हमारी भी हाँ हो जाएगी। 

और तब सुनंदा के लिए ये परीक्षा पास करना कठिन हो जाता। तब लड़का सुनंदा से पूछता -''तुम्हारा कोई 'लड़का दोस्त ''तो नहीं है। तुम कितना कमा लेती हो ? घर के सभी काम कर लेती हो। मैं तो अपने परिवार के रीति रिवाज़ों और संस्कारों का सम्मान करता हूँ। तुम्हें हमारे हिसाब से चलना होगा और बताओ !आजकल कहाँ घूमने जाती हो ?


 ऐसी तो कोई विशेष जगह नहीं है ,वो ही ख़रीददारी करने के लिए गयी थी। तुम बताओ ! तुम क्या करते रहते हो ?

मुझे तो अपनी कम्पनी के काम से ही समय नहीं मिलता। 

काफी व्यस्त रहते हो ?ऐसी ही न जाने कितनी बातों का उसे सामना करना पड़ता। 

शर्मा जी ,बताइये !आपके लड़के का क्या निर्णय है ?तिवारी जी ने उनसे फोन पर पूछा। 

अब हम क्या कहें ? जी !हमारी तरफ से तो सब ठीक है ,बेटे की हाँ है ,तो हमारी भी हाँ है।

 तब आपका बेटा क्या कहता है ?

अभी तो कुछ नहीं कह रहा ,कहता है - पापा ,इतनी जल्दबाज़ी में विवाह नहीं करूंगा ,ये मेरे जीवन का फैसला है। आप देख नहीं रहे ,आजकल लड़कियां कितनी तेज हो गयी हैं ? पार्टियों में जाती हैं ,देर रात घूमती हैं। मुझे थोड़ा और समय दीजिये !

तिवारी जी, चुपचाप फोन रखकर बैठ जाते हैं। 

सुनो जी !शर्मा जी ने क्या कहा ? मैं सोच रही थी ,अबके साये में हम बिटिया का विवाह कर देंगे। उम्र बढ़ती जा रही है। 

हम क्या कर सकते हैं ?उन्होंने तो कह दिया ,जब बेटा कहेगा ,तभी विवाह के लिए आगे बढ़ेंगे। 

माँ को भी क्रोध आया ,और बेटी से पूछा -आखिर लड़का क्या चाहता है ?

इन सब चीजों से लड़की भी तंग आ चुकी थी ,तब वो माँ से बोली -मुझे और जानना चाहता है ,पहले तो कहता है ,मैं अपने रीति -रिवाज़ और संस्कारों का सम्मान करता हूँ ,मैं अपने परिवार से काफी जुडा हूँ।

 दूसरी तरफ कहता है -मेरे साथ फ़िल्म देखने चलो ! मेरे साथ पार्टी में चलो !रोमांटिक बातें करो !अपने दिल की बातें खुलकर मुझसे बताओ ! मैं तुम्हें और जानना चाहता हूँ। अब आप लोग ही बताइये ! वो मुझे और ज्यादा कैसे जानेगा ?

 मैं, उसके इतने क़रीब कैसे आ सकती हूँ ?उससे कैसे खुलकर मिल सकती हूँ जबकि मुझे, उसके व्यवहार से लगता ही नहीं कि वो 'हाँ 'करेगा। मैं उसके साथ पार्टी में क्यों जाऊं ? कल को कह दिया -लड़की ठीक नहीं ये तो मेरे साथ ही घूमती थी। इसने मना कर दिया ,कल को दूसरा मुझे जानना चाहेगा। क्या मेरा यही काम रह गया है ? कल को यदि मैं भावनात्मक रूप से उससे जुड़  गयी और उसने मना कर दिया तो मेरा क्या ?उसके घरवाले तो कह देंगे -बेटे ने मना कर दिया। ये ज़बान हिलने में तनिक देर नहीं लगती किन्तु मेरा तो अस्तित्व ही हिल जायेगा। 

अरे ! कोई उससे पूछे, जब तेरे बाप का तेरी मां के साथ विवाह हुआ था तो क्या तेरे बाप ने, छह  महीने तक उसे जाना था ,तब विवाह किया था।  क्यों ?उनके माता -पिता उसे समझाते नहीं ,वो एक जीती -जागती लड़की है ,कोई खिलौना नहीं ,वो उससे दुनिया भर की उम्मीदें क्यों लगा रहा है ? विवाह के पश्चात खूब जानने का मौका मिलेगा। 

 पता नहीं, यह लड़कों में क्या बीमारी फैल गई है या दूसरे को बेवकूफ ही समझते हैं। कि मैं तुम्हें'' जानना चाहता हूं ''और जब लड़कियां ऐसे कदम उठाती हैं ,वह कहते हैं -कि लड़कियां बिगड़ रहीं हैं । पापा मुझे बताओ ! क्या आप मम्मी से छह -सात महीने तक मिलते रहे थे ? पता नहीं ,क्या जानना चाहते हैं ? आदमी के शौक उसका व्यवहार ,उसकी आदतें ,उसकी इच्छा ,यही आदमी पूछ लेता है और क्या जानना चाहते हैं ? मेरी तो कुछ भी समझ में नहीं आता।

  पूरी जिंदगी इंसान, अपने आप को ही नहीं समझ पाता ,कब उसका व्यवहार और मूड बदलेगा ? तो वह दूसरे के विषय में एक -दो महीने में क्या जान लेगा ?  क्या जानना चाहता है ? छह महीने तक भी मिले, तब भी वह नहीं जान पाया और रिश्ता नहीं किया तो मेरा क्या होगा ? मैं तो भावनात्मक रूप से उससे जुड़ जाऊंगी ,दुख तो मुझे ही होगा। मैंने तो आप लोगों की वजह से, उससे मना नहीं किया वरना उसकी हरकतें तो ऐसी हैं , कि मैं  शुरू से ही मना कर देती। '' जो बच्चा अपने माता-पिता का ही कहना नहीं मानता, और माता-पिता को, बार-बार झूठ बोलने पर विवश करता है ,वह दूसरों के लिए क्या सही होगा और दूसरे घर की बेटी से, अपने परिवार के सम्मान की उम्मीद करता है कि वह मेरे घर में आकर ,मेरी माँ की सेवा करें और मेरे पापा का सम्मान करें ! उसने कभी अपने अंदर झांक कर देखा है।

आज तक किसी लड़के ने मुझसे ये नहीं कहा -तुम मेरे घर आओगी !तो तुम्हें कितना सम्मान मिलेगा ?हम सब मिलकर प्यार से रहेंगे। सुख -दुःख में एक -दूसरे का साथ देंगे। तुम किसी बात की चिंता मत करना मैं तुम्हारे साथ हूँ।  

बेटी की ऐसी बातें सुनकर, तिवारी जी बेचैन हो उठे ! मन ही मन  बेटी कितनी परेशानी से जूझ रही थी ? हालांकि हम उसके जीवन के लिए ही ,एक अच्छा कदम उठाना चाहते थे किंतु यह तो मानसिक रूप से उसको अधिक यातना देना हुआ।

 उसकी बात भी सही है, आज से पहले कौन, कितना ,किसी को जानना चाहता था ?क्या हमारे घर नहीं बसे ? फिर अब क्या विशेष बात हो जाएगी। लड़के वालों को भी क्या परेशानी है ? उनका लड़का है, परेशानी तो लड़की वाले की है। वह तो इंकार करके आगे बढ़ जाएगा किंतु मानसिक परेशानी, तो लड़की ही झेलेगी। इस बात को तो हमने सोचा ही नहीं। तभी तिवारी जी ने एक निर्णय लिया और बोले - आज ही मैं शर्मा जी से इस रिश्ते से इनकार कर देता हूं। 

यह आप क्या कह रहे हैं ? इस एक ही लड़के की हालत ऐसी नहीं है, अगर हम दूसरा लड़का देखने चलेंगे, तब वह भी ,उसे जानना चाहेगा। हम महिलाओं को तो हमेशा से ही किसी न किसी रूप में परिक्षा देनी ही पड़ी है।  सभी के हालात यही हैं।  इन परेशानियों में जूझकर लड़की भी, मानसिक रूप से परेशान तो होती है, लोगों से मिलकर उसके व्यवहार में भी परिवर्तन आता है। अब इन परिस्थितियों से जूझकर, वह ससुराल पहुंचती है तो उनकी चार बातें सुननी पड़ती हैं। 

हम इस डर से, अपनी लड़की को और परेशान तो नहीं करवाना चाहते, पता नहीं ,माता -पिता भी बच्चे को समझाते नहीं ,या फिर उनके बेटे  उनकी सुनते नहीं। मैं कल ही शर्मा जी से खुलकर बात कर लेता हूं। हमें एक-दो दिन में अपना निर्णय सुना दीजिये  वरना हम ज्यादा दिन तक नहीं रुकेंगे , कहकर शर्मा जी ने अपनी बात समाप्त की। 

नोट -कैसी लगी इस पर अपनी सुझाव अवश्य दीजिएगा और समीक्षा भी दीजिएगा, धन्यवाद🙏

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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