ए !!!क्या तुम यहाँ किसी को जानते हो ? केतकी अपने खेतों में ,अपने काम में व्यस्त थी। ट्रैक्टर की आवाज में उसे कुछ सुनाई नहीं दिया। जब वो उसे घुमाकर वापस ला रही थी। तब उस लड़के ने हाथ उठाकर उसका ध्यान अपनी ओर खींचा। किसी अनजान लड़के को देखकर केतकी ने अपना चेहरा कपड़े से ढक लिया। जब वो करीब आई ,उस लड़के ने पूछा - ए... क्या तुम केशवदास जी को जानते हो ?
केतकी ने उसकी तरफ ध्यान से देखा ,उसकी शक़्ल कुछ पहचानी सी लगी ,तब उसने ट्रैक्टर पर बैठे -बैठे ही पूछा - तुम कौन हो ? कहाँ जाना है ?
केशवदास जी के घर....
केतकी ने पीछे घूमकर देखा, आखिर ये कौन है ? गांव का तो नहीं लगता वरना गांव में ऐसा कौन है ,जो मुझे नहीं जानता ? तब केतकी ने ट्रैक्टर रोका और उससे उतरी ,उसने देखा , पैंट -शर्ट पहने, कंधे पर एक बैग लटकाये ,बड़ी स्टाइल में एक लड़का खड़ा हुआ था। उसी से उसके घर का पता पूछ रहा था।
उस समय केतकी के सिर पर पगड़ी थी, बाल उलझे और बिखरे हुए थे और मुंह को ढके हुए , वह ट्रैक्टर पर बैठी थी ,इसीलिए उसके क़रीब तो नहीं गयी ,और दूर से ही बोली -उनसे क्या काम है ?
क्या तुम लड़की हो ?उसकी आवाज सुनकर उसने पूछा।
हाँ, तो क्या ?वो थोड़ा मुस्कुराया। वो केतकी को पहचान नहीं पाया था किंतु केतकी उसे पहचान गई थी। केतकी अपने को, उससे छुपाने का प्रयास करते हुए ट्रैक्टर के बड़े पहिये के पीछे हो गयी। तब उसे ध्यान आया कि उसने तो अपने चेहरे को कपड़े से पहले ही ढका हुआ है। तब बोली -यहां से सीधे जाकर, तीसरी गली में मुड़ जाना और वहां से किसी से भी केशव जी का घर पूछ लेना। वैसे उनके यहाँ जाना क्यों है ?
उसने एक नजर केतकी तरफ देखा, उसे आश्चर्य हो रहा था। एक लड़की ट्रैक्टर चला रही है, जहां पर यह कार्य मर्द ही करते हैं। केतकी के प्रश्न पूछने पर वह आगे बढ़ा और मुड़कर उसे घूरते हुए देखा ,और चला गया।
केतकी उसे अच्छे से पहचान गयी थी ,ये वो ही है ,मन ही मन उसके तन में तितलियाँ सी उड़ने लगी। स्वतः ही चेहरे पर मुस्कान आ गयी। क्या ये मेरे लिए यहाँ आया है ? वो फिर से ट्रैक्टर पर बैठी किन्तु अभी कुछ दू री तक ही गयी थी। अब उसका मन काम में नहीं लग रहा था। केतकी ने ट्रैक्टर को खेत से बाहर निकाला ,गांव की तरफ बढ़ चली।
इसे इतना तो पता है ,मैं इस गांव में रहती हूँ ,इसका यहाँ कौन है ?अवश्य ही मेरे लिए आया है। उसका मन दो माह पीछे दौड़ने लगा ,जब भाई का विवाह' विभा 'नाम की लड़की से तय हुआ था। यह उन्हीं दिनों की बात है, जब भाई के लिए लड़की देख रहे थे और एक लड़की 'विभा 'पसंद भी आ गई थी, पतली दुबली अच्छी लंबी लड़की थी, भाई की लंबाई भी अच्छी थी उनके हिसाब से लड़की अच्छी थी और व्यवहार कुशल भी थी।
केतकी उनके विवाह की तैयारी में जुट गई, कुछ दिनों के लिए उसने खेती -बाड़ी का काम छोड़ ही दिया था। उसने पिता ने कहा था - अब विवाह सारी तैयारियां मैं अपने तरीक़े से करूंगी।
कुछ दिनों के लिए खेती का काम तेरे पापा संभाल लेंगे ,उसकी मम्मी ने भी समर्थन किया। केतकी उन दिनों शहर जाकर ,अपनी होने वाली भाभी के लिए , साड़ियां खरीदती थी ,अन्य सामान की खरीददारी भी शहर से ही हुई। उन दिनों मेरा एक पांव गांव में और दूसरा शहर में रहता था।
भाभी के गांव में,हमारी बारात बड़े जोरों - शोरों से गई थी। केतकी भी, अपने भाई की बारात में गई थी। हालांकि वहां महिलाओं को बारात में जाने की इजाजत नहीं थी किंतु केतकी ने कहा -'अभी मैं इतनी बड़ी नहीं हूं सारी बहनें भी मिलकर कहने लगीं , हमारे पहले, बड़े भाई की शादी है ,हम तो जाएंगे। केशव जी बेटियों की जिद के आगे झुक गए ,मन में ख़ुशी भी थी किसी को नाराज़ करना नहीं चाहते थे।
महिलाओं के लिए अलग से गाड़ी लेकर गए ,जिसमें लड़के की बहनें और एक -दो रिश्तेदार और भी थीं । जब गांव वालों को यह पता चला कि बारात में कुछ महिलाएं भी आई हैं , तो उन्हें देखने के लिए जैसे भीड़ उमड़ पड़ी किंतु लड़की वालों से तो पहले ही कह दिया गया था -'कि लड़के की बहनें भी बारात में आ रही हैं। उनका इंतजाम अलग से कर दिया जाए।'' इसलिए उन्हें एक अलग घर में ठहरा दिया गया।
जब भाई के साथ, वे लोग मंडप के समीप पहुंची। तब गांव की सभी महिलाएं और पुरुष उसकी बहनों को भी देख रहे थे। दो तो शादीशुदा ही थी जो अपने पतियों के साथ जाकर खड़ी हो गई थीं। अकेली केतकी ही रह गई थी , केतकि के घुंघराले लंबे बाल, और उसने क्रीम कलर का शरारा सूट पहना हुआ था, जो उस पर बहुत ही फ़ब रहा था। जब इस लड़के ने मुझे देखा तो देखते ही जा रहा था।
मुझे बड़ा अज़ीब लगा ,सोचा शायद मैं अच्छी नहीं लग रही ,तभी भीड़ से होते हुए ,चुपचाप जाकर ,आइने के सामने खड़ी हो गयी किन्तु सब कुछ तो ठीक था। तब वो मुझे, इस तरह क्यों देखे जा रहा है ?अच्छी कद काठी की केतकी बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें हिरनी की तरह चपल थी। शरमाते हुए वह कुर्सी पर जाकर बैठ गई , हालांकि वह अपने गांव में तो बिंदास रहती है ,किंतु किसी दूसरे गांव में वह भी बारात में गई थी तो उसे बड़ा अजीब लग रहा था।
जब वापस आई तो वो लड़का नहीं दिखा ,तब स्वयं ही केतकी की नजरें उसे खोजने लगीं। तभी एक लड़का उसके लिए पानी लेकर आया। अपनी ही धुन में मस्त केतकी ने, उससे गिलास लेकर पानी पिया। कुछ देर के पश्चात, मिठाई लेकर आया। तब भी केतकी अपनी बहनों के साथ बातों में व्यस्त थी । उसके कुछ देर बाद वही लड़का उसके लिए चाय लेकर आया। एक दो बार तो उसने ध्यान नहीं दिया, किंतु बार-बार वह उसके लिए कुछ न कुछ लेकर आ रहा था।
तब उसके साथ आई एक लड़की का ध्यान उस पर गया । तब वो बोली -मुझे तो लगता है ,इस शादी में हम तो आये ही नहीं हैं। बस यही आई है ,कितनी देर से देख रही हूँ ,कभी इसके लिए पानी ,कभी मिठाई ,जबसे इसी की ख़ातिरदारी हो रही है। हम तो जैसे यहाँ हैं ही नहीं ,कहते हुए उसने ,उस लड़के की तरफ इशारा किया जो उधर ही देखकर मुस्कुरा रहा था।
कुछ देर के बाद वो फिर से आ गया ,तब केतकी ने कहा -क्या आज सब कुछ मुझे ही खिलाओगे, मेरी बहनों को भी तो दो !
जी.. जी.. यह कहकर वह खिसियाया सा उनके सामने सारी प्लेटें रखकर चला गया ,जो मेरे लिए लाया था।
उन स्मृतियों को सोचकर केतकी मुस्कुरा दी। उसके इस व्यवहार को देखकर वहां बैठी सभी महिलाएं हंसने लगीं और बोलीं - लगता है ,इसे हमारी केतकी पसंद आ गई है।
