Shadi ki anguthi

 जब गोमती की सगाई हुई  ,तो उसके ससुराल से, उसके लिए बहुत सुंदर हीरे की अंगूठी आई थी और जब उसके होने वाले पति ने उसे पहनाई तो वह बहुत ही खुश हुई। उसकी सहेली दीपाली भी उसकी सगाई में आई थी। 

गोमती को उसकी शादी और सगाई की बधाई दी। मन ही मन सोच रही थी। काश !कि मुझे भी ऐसा ही कोई राजकुमार मिले ,जो मुझे ''हीरे की अंगूठी ''पहनाये। गोमती की अंगूठी देखकर वह बहुत प्रसन्न हो रही थी, और उसे बहुत-बहुत बधाइयां देते हुए बोली - देखो ! कितने अच्छे लोग हैं ,कितना अमीर परिवार है ?जो तुम्हें इतनी खूबसूरत हीरे की अंगूठी पहनाई है। 


गोमती के विवाह के पश्चात, दीपाली की भी यही तमन्ना थी कि मेरी'' शादी की अंगूठी''भी  बहुत ही कीमती होनी चाहिए और गोमती की अंगूठी से बेहतर तो होनी ही चाहिए। वो इसी बात दिल से लगाए हुए बैठी थी और उसने सोच लिया था कि मैं उसी से विवाह करूंगी, जो मेरे लिए खूबसूरत 'हीरे की अंगूठी ''लेकर आएगा। 

एक दिन माता-पिता ने उसके लिए एक लड़का देख लिया, लड़का पढ़ा -लिखा किसी अच्छी कंपनी में मैनेजर था अच्छा कमाता था,उसका परिवार भी अच्छा था। तब गोमती की तमन्ना जागरूक हो उठी और उसके मन में अब यही बात चल रही थी कि मेरी ससुराल से, मेरे लिए शादी की कैसी अंगूठी आएगी ?शर्म के कारण अपने मन की इच्छा किसी से कह भी न सकी। 

विराज भी जब उसे देखने आया था तो देखते ही विवाह के लिए हाँ कर दी थी। कुछ देर के लिए अकेले में मिली किन्तु 'शादी की अंगूठी ''के लिए कह न सकी। 

 सगाई में जब अंगूठियां पहनाने का समय आया, तब दीपाली की जिज्ञासा सगाई से ज्यादा अपनी उस शादी की अंगूठी को देखने की थी किन्तु जब उसे डिब्बे से निकाला गया ,अंगूठी तो बहुत खूबसूरत थी किंतु वह सोने की थी, जिसको देखकर दीपाली का मन उदास हो गया। 

वह मन ही मन सोच रही थी ,मुझे पहले ही विराज से कह देना चाहिए था कि मुझे मेरी सगाई पर हीरे की अंगूठी चाहिए।  माता-पिता ने भी जब अपनी बेटी का चेहरा देखा तो घबरा गए ,सोचने लगे ,अचानक इसे क्या हुआ ?क्या इसे लड़का पसंद नहीं है किंतु उन्होंने तो इसकी पसंद पहले ही पूछ ली थी, फिर क्या बात हो सकती है ? दीपाली  चेहरा देखकर विराज भी सोच में पड़ गया। 

जब उन्हें एकांत मिला तब उन्होंने बेटी से पूछा - सगाई के समय ,उसका चेहरा क्यों उतरा हुआ था ? क्या तुम्हें  वो लड़का पसंद नहीं था, हमने तो तुम्हारी पसंद से ही शादी की है। 

 ऐसी कोई बात नहीं है ,दीपाली ने जबाब दिया। 

तो फिर क्या बात है? उसकी मां ने प्रश्न किया। 

मम्मी !आपने देखा नहीं था, गोमती के विवाह में,उसके लिए  कितनी खूबसूरत अंगूठी आई थी। मेरी भी यही तमन्ना थी कि मेरी ससुराल से भी, मेरे लिए 'हीरे की अंगूठी' आये और उन्होंने क्या दिया है ?यह ''सोने की ''अंगूठी'' अपनी अंगुली को दिखाते हुए बोली। अब मैं अपनी सहेलियों को क्या दिखाऊंगी ?वो तो यही कहेंगीं -' कि तेरी ससुराल वाले तो इतने अमीर हैं और फिर भी तुझे एक हीरे की अंगूठी न दे सके।

 उसकी परेशानी समझकर उसकी माँ ने दीपाली से पूछा -अच्छा, यह बताओ ! यह अंगूठी पहनने की रस्म क्या है ,इसे क्यों पहनाया जाता है ?

दीपाली बोली -यह तो एक मात्र रस्म है विवाह से पहले, यह अंगूठी इसलिए पहनाई जाती है कि रिश्ता पक्का हो जाता है। 

सोने की अंगूठी पहनने से पहले, क्या तुम्हारा रिश्ता पक्का नहीं हुआ था ? तुम कुछ भी नहीं जानती हो, यह अंगूठी प्रेम ,विश्वास और रिश्ते की अटूटता बनी रहे इसलिए पहनाई जाती है। तुम इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़े बैठी हो। तुम्हारे लिए इस अंगूठी का मूल्य सिर्फ अपनी सहेलियों को दिखाना और उन्हें यह जतलाना है कि देखो !मैंने कितनी महंगी अंगूठी पहनी है। 

तुम सबसे बड़ी गलतफहमी में जी रही हो, अंगूठी पहनाने से का अर्थ है -'जिस रिश्ते में तुम बंधी हुई हो वह रिश्ता अटूट बना रहे, उसमें प्रेम हो ,विश्वास हो और अंगूठी की यह जो गोलाई है ,उसका अर्थ समझती हो। 

नहीं तो...

जब समझना चाहोगी ,तब ही तो समझ पाओगी, इसकी गोलाई का अर्थ यह है कि इस रिश्ते में न आदि है न अंत है ,यह रिश्ता लगातार अटूट बना रहेगा। अंगूठी चांदी की हो ,सोने की हो या फिर हीरे की हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है यदि तुम्हारा पति तुमसे बहुत प्रेम करता है ,तुम्हारा सम्मान करता है। वह बातें महत्व रखती है। यदि उसने' हीरे की अंगूठी' पहनाई है और तुम्हें सम्मान नहीं देता है, तुमसे प्रेम नहीं करता है दूसरी महिलाओं का साथ चाहता है ,तो क्या तुम उस रिश्ते में खुश रह पाओगी ? माँ ने उससे ही प्रश्न किया। यह एक प्रेम का प्रतीक है जो प्रेम एक दूसरे को हृदय से जोड़ता है। 

तभी दीपाली को स्मरण हुआ, एक बार बीच में गोमती आई थी, तो वह बहुत ही उदास थी मैंने उससे कई बार पूछा भी था, लेकिन समय भी नहीं मिला और वह भी शीघ्र ही चली गई, क्योंकि उसकी ससुराल वालों ने  ज्यादा समय उसे छोड़ा ही नहीं। तब दीपाली को अपनी मां की बात, अच्छी लगी और उसे ''शादी की अंगूठी ''का सही अर्थ समझ में आ गया और उसने प्रसन्नतापूर्वक अपने विवाह के लिए की सभी रस्मों को खुशी-खुशी निभाया। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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