Dhokha [part 29]

नंदिनी और दीपक प्रतिदिन साथ आते हैं। आज भी वे साथ थे किन्तु आज नंदिनी उससे पूछ बैठी - क्या उसे कोई लड़की पसंद है ?किन्तु दीपक ये बात टाल गया और घर के नजदीक पहुंचकर बोला -लो !हमारा घर आ गया ,कहकर दीपक ने अपनी मोटरसाइकिल रोक दी। 

नंदिनी मोटरसाइकिल से उतरी और बोली -तुम्हारा बहुत -बहुत धन्यवाद !

क्या कल मैं तुम्हें लेने आऊं ? 


यह कोई पूछने की बात है ,तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो ?

तुमने जो ये' धन्यवाद 'मेरी तरफ भेजा है ,क्या इसकी आवश्यकता थी ?मैं उधर से निकलते हुए तुम्हें साथ ले लेता हूँ और क्या ?तुम पर कोई एहसान नहीं कर रहा हूँ। मेरा सफ़र भी आसान हो जाता है। 

आ जाना,बिंदास !अपनी आँखें टिमटिमाते हुए ,मुस्कुराकर नंदिनी बोली। 

 लगभग 3 महीने हो गए दोनों ही एक साथ जाते हैं, और लौटते समय एक साथ ही आ जाते हैं। इन दिनों में नंदिनी भी, दीपक से बहुत घुल मिल गई है अपने मन की बात भी कह देती है, किंतु दीपक अभी भी ,उसकी बातें सुनता है लेकिन अपने विषय में, उससे ज्यादा कुछ नहीं बताता है। 

नंदिनी ने भी,उसके विषय में जानने में कभी कोई रुचि नहीं दिखाई। 

मम्मी !अब नंदिनी कैसी है ? नंदिनी की मम्मी ने,अपनी मम्मी को फोन करके पूछा। 

अब तो तुम्हारी बिटिया बहुत खुश रहती है और कोई कोर्स भी कर रही है। हो सकता है ,धीरे-धीरे उसका मन भी बदल जाए और तब तुम, उससे शादी की बात कर लेना। 

इसके लिए भी तो, आपको ही, उसे तैयार करना होगा। हमारी सुनती ही कहां है ,जब भी फोन करती हूं तो हां ,हूं , में जवाब देती है। ठीक से बात भी नहीं करती और रिश्ते की बात आ जाए तो, फोन ही काट देती है। 

ठीक है, मैं देखती हूं ,जैसे उसके जीवन में लिखा होगा ,वैसा ही होगा। वैसे मेरी नजर में एक लड़का तो है। 

कौन लड़का है ?उन्होंने उत्सुकता से पूछा। 

 हमारे ही पड़ोस में रहता है, नंदिनी का अच्छे से ख्याल रखता  है और हमारी नंदिनी भी उससे अच्छे से घुल मिल गई है। 

तो फिर परेशानी किस बात की है ?आप उससे अपनी नंदिनी की बात चलाइए और नंदिनी के मन में उसके प्रति क्या है ,यह भी पता लगाइए ?

किंतु वह लड़का हमारी जाति का नहीं है , नानी ने अफसोस जतलाया । 

तो क्या हुआ ?प्रतीक ही क्या हमारी बिरादरी का था ? अगर लड़का पढ़ा -लिखा है ,व्यवहार कुशल है, समझदार है ,हमारी नंदिनी को खुश रख सकता है तो हमें और क्या चाहिए ? उससे आप बात कर लीजिए। 

ठीक है,तो  मैं उससे बात करके देखती हूं।  वैसे वह नंदिनी के साथ उसके कोर्स के लिए भी गया था।  अभी नानी को यह नहीं पता था कि नंदिनी अब दीपक के साथ मोटरसाइकिल पर प्रतिदिन आती जाती है। 

अभी वो दोनों बातें कर ही रहीं थीं  तभी नंदिनी ने घर में प्रवेश किया और पूछा -नानी ! किससे  बातें कर रही हो ?

तेरी मां से... और किससे बातें करूंगी ? वही पूछ रही थी,' कि नंदिनी कैसी है ?तू भले ही मेरे पास रह रही है किन्तु उसे तेरी फ़िक्र तो लगी ही रहती है। कभी वो भी मुझसे कहा करती थी -'आप मेरी फ़िक्र मत किया कीजिये !किन्तु अब माँ बन गयी तो अब उसे पता चल रहा है कि माँ की चिंता क्या होती है ?कहकर वो मुस्कुराते हुए, उसके समीप आकर बैठ गयीं।  

आपने मम्मी से पूछा -'कि अब नितिन कैसा है ?

उसका यह प्रश्न सुनकर वो बोलीं -सबसे पहले यही पूछा था -नितिन !कैसा है ?

उसने कहा -बड़े अच्छे से रह रहा है और अब थोड़ा -थोड़ा चलना भी सीख गया है। 

नानी !क्या सच कह रही हो ?खुश होते हुए नंदिनी ने पूछा -क्या मेरा नितिन इतना बड़ा हो गया होगा ?ख़ुशी से नन्दिनी की आँखें छलक आईं। 

हाँ और नहीं तो क्या ?अब वो डेढ़ बरस का हो गया है ,छह महीने का बच्चा ही ,घुटनों के बल चलने लगता है सालभर का बच्चा तो खूब चलता है और वो तो डेढ़ बरस का हो गया। 

हालाँकि नानी की ऐसी कोई बात अपनी बेटी से नहीं हुई थी किन्तु नंदिनी का मन रखने के लिए उन्होंने थोड़ा सा झूठ बोलना ही उचित समझा। वो भी एक माँ हैं ,माँ की भावनाओं को समझ सकती हैं।  

नानी,मम्मी ने और क्या बताया ?

और क्या बताती ? ज़्यादा बात नहीं कर पाई ,तुम जो आ गयीं थीं। 

नंदिनी अपनी मम्मी से नाराज रहती है ,किंतु आज उसकी इच्छा हुई ,अपनी मम्मी से बात करे ,तब बोली -नानी आपको फोन काटना नहीं चाहिए था ,उनसे मेरी बात भी करवा देतीं।

मुझे क्या मालूम था ?तू ,उससे बात करना चाहेगी।  मैंने सोचा ,उसका फोन आने पर तू, उससे लड़ने लगती है। तुझे पता है ,वो भले ही तेरी माँ हो किन्तु उससे पहले मेरी बेटी है ,और तू जब उसकी बातों को नजरअंदाज करती है ,तो मुझे अच्छा नहीं लगता। 

मैंने उससे, पहले ही पूछ लिया था कि नितिन कैसा है ?

तब भी उसने कहा -नंदिनी ,उसकी फिक्र न करें , उसके दादा -दादी उसे अच्छे से संभाल  रहे हैं और तेरे घर वाले भी जाकर उसे बाहर से ही देख आते हैं। नानी ने उसे सांत्वना दिया। चल !अब अपने कपड़े बदल कर आजा! आकर मेरे पास बैठना !मुझे ,तुमसे कुछ जरूरी बातें करनी है। 

तभी नंदिनी उनके पास आई और पूछा- नानी ! ऐसी क्या बात करनी है, जिसके लिए मुझे कपड़े बदलने की  आवश्यकता है ?आप ऐसे ही पूछ सकती हैं ?

नानी ने उसकी तरफ देखा और बोली - नहीं रे ,कोई  विशेष बात भी नहीं है ,वह तो मैं यह पूछ रही थी यह दीपक कैसा लड़का है ?

ठीक ही है ,क्यों ?

तेरी सहायता करता है और कभी-कभी तुम्हें अपने साथ ले भी आता है ,हालांकि तुमने ,मुझे बताया नहीं है कि तुम उसके साथ मोटरसाइकिल पर आती हो किंतु मैंने तुम्हें देखा है जब मैं छत पर कपड़े उतारने गई थी। 

अच्छा नानी, छुप -छुपकर मेरी जासूसी हो रही है, ये तो बहुत बुरी बात है ,कहते हुए नंदिनी हंसने लगी ।

तेरी नानी हूँ ,तेरी माँ की भी माँ ,तू क्या सोच रही है ?तू अपनी नानी की' नजरों में धूल झोंक सकती है। 'उम्र के साथ -साथ अनुभव भी तो बढ़ें हैं। आँखें बूढी हुई तो क्या हुआ ?इन्होंने बहुत दुनिया देखी है। 

जानती हूँ ,नानी ! वैसे मैंने आपसे कुछ नहीं छुपाया है ,वो मुझे लेने आ जाता है और हम दोनों साथ आ जाते हैं ,एक ही रास्ता तो पड़ता है। 

ठीक है ,मैं क्या कुछ कह रही हूँ ? नानी ,दीपक अच्छा लड़का है ,मेरी सहायता भी कर देता है। पड़ोसी अच्छा है। 

वही तो मैं कह रही हूं जब वह तेरी इतनी सहायता करता है कम से कम उसे 'धन्यवाद 'के लिए अपने घर पर खाने के लिए तो बुला ही सकती है। 

'धन्यवाद' के लिए उसे घर पर खाने के लिए क्यों बुलाना है ? मैं रास्ते में, उसे अपने मुंह से आमने -सामने रहकर भी धन्यवाद दे दूंगी। वैसे  आज ही यह औपचारिकता मैंने निभा दी है ,ऐसा नंदिनी में जानबूझकर कहा । 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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