आज का दिन कैसा रहा ? दीपक ने नंदिनी से पूछा।
बहुत अच्छा ! मुस्कुराते हुए नंदिनी ने कहा।
अब तो सब ठीक से समझ आ रहा है।
आएगा ,क्यों नहीं ?जब तुम जैसे गुरु साथ हैं। तुम्हारा समझाने का तरीका बहुत अच्छा है ,तो भला क्यों न समझ में आएगा। ऐसा कुछ नहीं है, मेरी छात्रा भी बहुत ही समझदार और होशियार है। अच्छा, बताओ ! आज का क्या प्रोग्राम है ?
क्या मतलब ? मैं कुछ समझी नहीं,
आज चलकर कहीं कॉफी पीते हैं।
'हां' यह आईडिया ठीक रहेगा ,वैसे मेरी भी इच्छा हो रही थी।
कॉफी हॉउस में कुर्सी पर बैठते हुए दीपक ने पूछा - और सुनाओ !तुम्हारे मम्मी -पापा का फोन आया या नहीं।
अभी दो दिन पहले आया था ,मैं उनसे पूछ रही थी -नितिन का क्या हाल है ? वे लोग कैसे हैं ? किंतु मेरे घर वाले भी नितिन के विषय में कुछ बात करना ही नहीं चाहते, पता नहीं ,वो लोग क्या चाहते हैं?परेशान होते हुए नंदिनी ने कहा।
मैंने, उनसे कह दिया था -यदि मुझे,आप लोग नितिन की कोई जानकारी नहीं देंगे तो मैं वहीं पर आ जाऊंगी।
तब मम्मी ने बताया - ''वह बहुत अच्छा है ?
तुम्हारी चिंता भी अपनी जगह सही है, किंतु तुम्हारे माता-पिता तो यही चाहते हैं , कि तुम किसी अच्छी जगह लड़का देखकर शादी कर लो !
नहीं ,कर सकती।
क्यों नहीं कर सकती ? सुंदर हो ,जवां हो , तुममें किस बात की कमी है ?
ये मैं मानती हूं ,तुम मानते हो ,मुझ में कोई कमी नहीं है, किंतु अन्य लोगों से पूछो ! कितनी कमियां निकाल देंगे। ''अपनी कमियां जाननी हैं तो उनसे पूछो !जो तुम्हारा हित नहीं चाहते। ''कहकर मुस्कुराई। तब थोड़ी गंभीर होकर बोली - मैं एक बच्चे की मां हूं और मेरे उसके प्रति कुछ उत्तरदायित्व हैं ,उसका पिता नहीं है ,मैंने विवाह कर लिया तो वो 'अनाथ 'हो जायेगा। अब तुम ही बताओ ! मैं विवाह कैसे कर सकती हूं ?मुझे अपने बच्चे को, उनसे वापस लेना है।
कोई व्यक्ति तुम्हें ,ऐसा भी तो मिल सकता है जो तुम्हारे बच्चे की जिम्मेदारी भी उठाना चाहे या फिर तुम्हारे और तुम्हारे बेटे के मध्य न आये। तुम्हें उसी रूप में स्वीकार करें ,जिसमें तुम हो।
यह क्या बात कर रहे हो ?आजकल ऐसे लोग कहाँ मिलते हैं ? ऐसे लोग अवश्य ही मिल जायेंगे ,जो तुम्हारी कमियां गिनाएंगें। अब ऐसे लड़के की तलाश में तो मैं अपना समय बर्बाद नहीं करूंगी। मैं तो सोच रही हूं , जल्द से जल्द मेरा यह कोर्स पूरा हो जाए और मुझे एक अच्छी सी नौकरी मिल जाए और मैं अपने बेटे को अपने साथ ले आऊं ।
अभी भी तुम, अपनी ही सोच रही हो।
तुम कहना क्या चाहते हो ?
यदि उन लोगों ने तुम्हारा बेटा, तुम्हें नहीं दिया तो तुम क्या करोगी ?
ऐसा मत बोलो ! ऐसा सोचकर तो मुझे कभी-कभी डर भी लगता है। न जाने आगे क्या होगा ?नौकरी करुंगी या उन लोगों से लड़ने जाऊंगी। सबसे बड़ी बात तो यह है, कि मेरे घरवाले भी मेरे साथ खड़े नहीं हैं। वो भी नहीं चाहते, कि मेरा बच्चा मेरे साथ रहे। शायद उन्हें लगता है , बच्चा रहा तो वो ,मेरे विवाह में अड़चन बन सकता है। एक बच्चे की माँ से कोई विवाह नहीं करना चाहेगा।
उनका सोचना भी ,अपनी जगह सही है क्योंकि उनके आसपास के लोगों में, घरों में तो सभी को मालूम है कि उनकी लड़की कुंवारी है ,उसका अभी विवाह नहीं हुआ है।
मैं अड़ोस -पड़ोस के लोगों की परवाह नहीं करती ,यदि ऐसे लोगों की परवाह करती तो मैं फिर प्रतीक से प्रेम ही नहीं करती क्योंकि तुम तो जानते ही हो, हमारा घर का वातावरण कितना परंपरागत रहा है ?ऐसे में एक लड़की का किसी गैर समाज के लड़के से, विवाह करने की सूचना ,उससे प्रेम संबंध बनाना बहुत ही बड़ा कार्य है।
यह अच्छी बात है कि तुम अपने लिए सोचती हो ,लेकिन तुम्हें अपने परिवार के लिए भी तो सोचना चाहिए उनकी भी तो कुछ इच्छाएं हैं ,समाज की कुछ मान मर्यादा है ,कल को तुम्हारे बहन -भाई रिश्ता होगा तो लोग पूछने लगते हैं ,रिश्तेदार भी पूछते हैं -''बड़ी बेटी का विवाह नहीं हुआ ,छोटी बेटी का विवाह क्यों कर रहे हैं ,तुम्हें उनके नजरिए से भी तो सोचा होगा। एक न एक दिन तो लोगों को पता चलेगा ही.... वो बेचारे !अब कह देते होंगे -बाहर पढ़ने गयी है, किन्तु कब तक झूठ बोलेंगे ?
हां, यह बात तो तुम ठीक कह रहे हो , इस तरीके से तो मैंने सोचा ही नहीं, तभी तो मैं कहती हूं -''तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो ,जो मुझे सही राह दिखा देते हो।''
चलो !तुम हमें एक अच्छा दोस्त तो समझती हो।
दोस्ती के लिए कहने की आवश्यकता नहीं पड़ती ,वो तो दिल अपने आप ही समझने लगता है। मेरी परेशानियों को शीघ्र सुलझा देते हो। तब मुझे क्या करना चाहिए ? गुरुदेव !आप यह भी बता दीजिए ! मुस्कुराते हुए नंदिनी ने कहा।
मैं ,तुम्हें क्या समझाऊंगा और क्या सुझाव दूंगा ?मैं तो तुम्हें, तुम्हारी परिस्थितियों को देखकर ,समझा ही सकता हूं बाकी तो तुम्हारी अपनी सोच है। तुम क्या करना चाहती हो ? वह तो तुम्हें देखना है लेकिन इस चीज का भी ख्याल रखना है कि अपने बेटे की परवरिश के साथ-साथ अन्य लोगों के मान को भी ठेस न पहुंचे ,उनका मान सम्मान भी बना रहे।
आखिर वो तुम्हारे माता-पिता है , तुम्हारे भले के लिए ही सोचते हैं ,जैसे नितिन तुम्हारा बेटा है, ऐसे ही तुम भी तो अपने माता-पिता की बच्ची हो। कम से कम तुम्हारे माता-पिता भी तो अपनी बेटी की भलाई चाहते हैं उनकी जिम्मेदारी भी है और वो चाहते हैं कि तुम कहीं, अच्छा सा लड़का देखकर विवाह कर लो !
मुझे तो लग रहा है ,तुम ,मुझसे ज़्यादा मेरे परिवार के लिए सोच रहे हो।
नहीं ,ऐसा नहीं है ,वो तो मैं सम्पूर्ण बातों को सोचकर कह रहा था ,जो अब तक तुमने, मुझसे बताया ,कहकर दीपक मुस्कुरा दिया।
अच्छा,कॉफी खत्म हो गई अब चलते हैं या कुछ और खाने -पीने का इरादा है, कुर्सी से उठते हुए नंदिनी ने पूछा।
नहीं, बस चलते हैं।
अच्छा, मैंने, तुमसे कभी पूछा नहीं, तुम्हारे परिवार में और कौन -कौन हैं ?
शायद ,एक दिन बताया तो था, मेरे माता-पिता हैं एक बहन है उसकी शादी हो गयी ।
क्या तुमने शादी नहीं की ?उसके इतना कहने पर दीपक थोड़ा चुप हो गया। क्या हुआ ? चुप कैसे हो गए ? क्या कोई लड़की पसंद है ? उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली - मुझे बता दो ! मैं ,तुम्हारे घर वालों से सिफारिश करवा दूंगी। कौन है ?वो !
नहीं, इसकी कोई जरूरत नहीं है।
जरूरत कैसे नहीं है ? जब तुम मेरी इतनी सहायता कर रहे हो ,तो मैं भी तो तुम्हारी सहायता के बदले में सहायता कर सकती हूँ , कहते हुए हंसने लगी। अब बता भी दो ! वह कौन है ?
