Rasiya [part 128]

उर्वशी, अपने पति समीर को  'चतुर भार्गव' की कहानी सुना रही थी, कहानी सुनाते- सुनाते , तब उसने बताया -कि'' चतुर भार्गव'' का किसी महिला के साथ संबंध था और यह इतना चालाक था , इसने उस महिला को यह नहीं बताया,' कि वह पहले से ही शादीशुदा है।'

 देखा जाए तो वह महिला भी अपने को, समझदार समझ रही थी। उसे भी भार्गव की जरूरत थी। उसका पति हमेशा काम में व्यस्त रहता था , वह अपनी पत्नी को समय नहीं दे पाता था। तब उस महिला ने ' चतुर  भार्गव'' को चुना।


उस महिला का क्या नाम था ?

ये मुझे नहीं मालूम ,मालूम भी होता तो इतने दिनों पुरानी बात है ,याद भी नहीं रहता। वैसे मुझे उसका नाम जानने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। चतुर भी किसी ऐसे मौके की तलाश में था , जहां से उसे पैसा भी मिले , लोगों का विश्वास भी मिले और उसका काम भी चलता रहे। मुझे ज्यादा जानकारी तो नहीं है ,मैंने सुना है ,उसने कई महिलाओं को ठगा है। 

क्या वो, शादीशुदा महिलाओं को ही बहकाता था ? 

हाँ, सुनने में तो यही आया है।

ऐसा क्यों ?

मुझे क्या मालूम ? किन्तु जब मैंने वहां रहकर जाना तो मुझे लगा ,उनके पैसे के लिए ,पति की लापरवाही  के कारण, वे अच्छे से पट जाती हैं। कुंवारी कन्या भी नहीं हैं,जो लोग उस पर शक़ करें, किससे मिल रहा है ?क्यों मिल रहा है ? शादीशुदा भाभी जी को पटाने पर किसी को संदेह भी नहीं होगा। आप, मुझसे बार -बार इस तरह प्रश्न पूछकर मुझे भृमित मत कीजिये ! आगे की कहानी सुनिए !

उस महिला के पास पैसा बहुत था किंतु उसके पति के पास समय नहीं था। यहाँ 'चतुर भार्गव 'को, महिला का साथ और पैसा दोनों ही मिल रहा था इसलिए उसने ,उस महिला से भी झूठ बोला - कि वह कुंवारा है ?और काम की तलाश में है।

 उस महिला को अपने लिए समय और बाहर घुमाने -फिराने के लिए एक ऐसे  ही दमदार व्यक्ति की तलाश थी। आरम्भ में उसने अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए ,उसे अपने घर में ही रख लिया। बाद में भाभीजी की ज़रूरतें भी पूरी होने लगीं। वो उस भाभीजी से संबंध रखता है परन्तु उसके पति का सम्मान भी करता था। उनके दर्द को समझता था क्योंकि उसकी नज़र में ,उनकी पत्नी उनका सम्मान नहीं करती थी। 

एक दिन चतुर के सामने उन्होंने अपना दर्द खोलकर रख दिया था । 

धीरे-धीरे चतुर को उस महिला की चालाकियां समझ में आने लगीं। वह महिला नहीं चाहती थी कि  चतुर भार्गव उससे बिना पूछे कोई भी कार्य करें। बस उसके आगे -पीछे घूमता रहे। एक तरह से देखा जाए,उसे डर था , ये कहीं दूसरी जगह जाकर काम न करने लगे, किन्तु भार्गव ने भी कच्ची गोलियां नहीं खेली थीं।वो जानता था। यहाँ भी कब तक रहेगा ? एक न एक दिन तो उसे जाना ही होगा। 

आत्मनिर्भर बनने के लिए उसे ज़्यादा पैसे की आवश्यकता थी, इसीलिए शायद वो मौक़े  की तलाश में था।वो महिला भी समझती थी। यदि इसके पास पैसा हुआ तो ये यहां से निकल जायेगा। इसीलिए उसे अपने नियंत्रण में रखना चाहती थी। 

आत्मनिर्भर बन जाने पर वो, उस भाभी के चंगुल से निकल जायेगा ,इसीलिए वो भी चौकन्नी रहती थी। जानती थी ,जवान आदमी है, कोई भी लड़की इसे आसानी से पटा सकती है। वो भाभी हमेशा उसके संग रहने का प्रयास करती थी।

 समय के साथ अब' चतुर भार्गव' समझने लगा था ,इस महिला को ज़्यादा दिनों तक मूर्ख बनाकर नहीं रखा जा सकता। इस महिला को तनिक भी आभास हुआ ,कि मैं छुपकर अपने बच्चों को पाल रहा हूँ तो ये मुझे अपने घर से बाहर करने में तनिक भी देरी नहीं करेगी। 

इधर चतुर के घरवाले,उसके बच्चों के लिए सही ठिकाना ख़ोज रहे थे। उन्हें मालूम था, हमारा बच्चा किसी अच्छी जगह नौकरी करता है किन्तु ये नहीं जानते थे ,वो एक धोख़ेबाज़ इंसान है। कोई नौकरी नहीं करता है बल्कि अमीर या जरूरतमंद महिलाओं को अपनी मोहब्बत का शिकार बनाता है।  

'  जो औरत अपने पति की ना हुई, वह मेरी सगी कैसे हो सकती है ?'चतुर का उन भाभियों के प्रति यही विचार था।  'चतुर भार्गव' अनजान बनकर उनके साथ रहा, और उसका परिवार उस घर से कुछ दूरी पर पलता रहा। यह बात उसने सबसे छुपाई हुई थी और सतर्क भी रहता था कहीं कोई उसकी असलियत न बता दे या किसी के माध्यम से उसकी असलियत का पता ना चल जाए। 

चतुर भार्गव को इस तरह तो रोका नहीं जा सकता था ,तब उस महिला ने सोचा ,क्यों न ,कोई क़ारोबार आरम्भ किया जाये ? मेरा पैसा ,चतुर का परिश्रम दोनों मिलकर कमाएंगे। तब उस महिला ने मिलकर , जमीनों का क्रय -विक्रय का कारोबार आरम्भ किया , उस महिला को ज्यादा जानकारी तो नहीं थी. सारा कार्य भार उसने 'चतुर भार्गव' पर ही छोड़ा हुआ था। संपत्ति के क्रय -विक्रय से उन्हें बहुत लाभ भी हुआ। 

 इतनी संपत्ति की आमदनी ''चतुर भार्गव' इतने पैसे देख ,अब तक जिस मौक़े की तलाश में था। वो कब तक महिलाओं को पटाता रहेगा ?उसे लगा ,अभी मौक़ा है, फिर हाथ नहीं लगेगा। 

वो महिला भी इतनी भोली नहीं थी। वह चतुर भार्गव से कहती -हमारी जमीन बिक रही है या नहीं।

 चतुर उससे कह देता, भाभी हर चीज का हिसाब आपके पास है अभी कुछ संपत्ति गई है और कुछ अभी बाकी है। धीरे -धीरे ही काम आगे बढ़ता है। ''बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी ?'' कब तक वह उससे झूठ बोलता , वह महिला भी इतनी सीधी नहीं थी कि कुछ समझ न सके उसे आभास हुआ ,कहीं कुछ तो गड़बड़ है।

 धीरे-धीरे उसने अपने तरीके से पता लगाना आरंभ किया और तब उसे पता चला। चतुर अपना एक अलग मकान बना रहा है। इस बात का पता चलते ही , उस महिला को बहुत क्रोध आया क्योंकि उसने, उस पर विश्वास करके अपने पति की संपूर्ण संपत्ति लूटा दी थी। 

ऐसा नहीं था, कि अपने पति का सम्मान नहीं करती थी, उनका सम्मान करती थी किंतु उनसे ज्यादा चतुर पर विश्वास किया था। 'चतुर ' युवा था,वाकपटुता में निपुण था। उसके पति भी अच्छा कमा रहे थे किन्तु अब उनकी उम्र हो चुकी थी ,वे अपनी पत्नी से दस -बारह बरस बड़े थे। वे अपनी पत्नी और चतुर के रिश्ते को भी जानते थे किन्तु परिवार के लिए और बदनामी के डर से चुप रहे। 

जब उस महिला को पता चला कि चतुर का घर बन रहा है ,एक दिन बिना किसी को बताये, उस घर को देखने गयी। चतुर ने घर क्या हवेली बनवाई थी ? घर वापस आकर उसने किसी से कुछ नहीं कहा। उसने सोचा ,हो सकता है, चतुर ये घर हमारे लिए ही बनवा रहा हो और हमें उपहार में दे !आख़िर हमारे सिवा इसका है ही कौन ?

एक दिन उस महिला ने ,चतुर से पूछा भी.... तुम मुझसे कोई बात छुपा तो नहीं रहे हो। 

नहीं भाभी !मैं आपसे कोई बात क्यों छुपाऊंगा ? सब आपके सामने ही तो है। मेरा जो कुछ भी है, आप दोनों ही तो हो।

 उसकी बातें सुनकर उस महिला को पक्का विश्वास हो गया। ये घर हमारे लिए ही बनवा रहा है।वो कभी -कभी चुपके से उस घर को देख आती। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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