जब 'चतुर भार्गव' ने, अपने' व्हाट्सएप' पर अपनी तस्वीर लगाई, उर्वशी उस तस्वीर को देखकर चौंक गयी। उसके मन में कभी -कभी ख़्याल आता था, कि कहीं ये वो ही तो नहीं ,किन्तु वो उस विचार को नकार देती थी। किन्तु आज उस चित्र को देखकर उर्वशी ,उसे एकदम से पहचान गई।
वह और कोई नहीं,'चतुर भार्गव ''था। अपने समय का 'रसिया 'जो महिलाओं को अपनी बातचीत के घेरे में ऐसे लेता था ,वो समझ ही नहीं पाती थीं, उनके साथ क्या हो रहा है ?
जब' चतुर भार्गव' से उर्वशी मिली ,वो उसके स्कूल में गयी थी। वहीं उससे, उर्वशी की मुलाकात हुई। वो स्कूल 'चतुर भार्गव ' का ही था। वो उस स्कूल का संस्थापक और प्रधानाचार्य भी....था।
जब उर्वशी ने पढ़ाना आरम्भ किया ,तब एक लड़की जो उससे पहले उस स्कूल में आई थी। वैसे वो ही नहीं सभी उनके चरित्र से परिचित थे। तब उस लड़की ने उर्वशी से कहा -''ये कुछ आशिक मिजाज है ,बताकर मुस्कुराकर चली गयी। उर्वशी सोच रही थी -ये उसने मुझे बताया या फिर चेतावनी दी थी ,इससे बचकर रहना।
जिसको नौकरी करनी है तो थोड़ा सा सहन भी कर लेती थीं । बात भी बहुत पुरानी हो गयी। तब मैंने अपना स्नातक पूर्ण ही तो किया था। उनके विषय में मैं, कुछ नहीं जानती थी। पहली बार जो भी उस स्कूल में जाएगा वो क्या जान पायेगा ? किंतु जब मैं वहां जाने लगी तब, मैंने भी बहुत कुछ जान लिया और वे भी मेरे विषय में बहुत कुछ जान गए।
शायद वही भड़ास निकालने के लिए ,मुझसे इस तरह का चैटिंग का सहारा लिया क्योंकि वो जानते थे , मैं भी उन्हें अच्छे से जानती हूं।
जब मैं पहली बार उनके स्कूल में गई थी, मेरे मन में शिक्षा के प्रति बड़ा प्रेम और श्रद्धा थी। मेरा साक्षात्कार हुआ और मुझे इस बात की प्रसन्नता भी हुई ,पहली बार में ही मुझे नौकरी भी मिल गयी।
धीरे-धीरे मुझे उस स्कूल की, जानकारी मिलने लगी। दरअसल हुआ ये था ,ये सर मेरे पिता को अच्छे से जानते थे ,जब इन्हें पता चला ,मैं दयाल जी की बेटी हूँ तो बड़े प्रसन्न हुए। मुझे भी, अपने पिता प्रशंसा सुनना अच्छा लगा।
मैंने तभी कह दिया था -सर ! मैं अपने पिता की जान -पहचान के कारण नौकरी नहीं चाहती हूँ ,यदि आपको लगता है ,मैं आपके स्कूल की एक अच्छी अध्यापिका साबित हो सकती हूँ, तो मुझे लीजिये ! किन्तु पापा के कारण नहीं।
नहीं ,ऐसी कोई बात नहीं है ,वो हमारे बड़े भाई जैसे हैं किन्तु किसी अयोग्य अध्यापिका को अपने स्कूल में प्रवेश कराकर अपने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ थोड़े ही करना है ,कहकर वो हंस दिए। वैसे ये बताओ !तुम पढ़ाना क्यों चाहती हो ? मेरा मतलब है ,तुम शिक्षिका ही क्यों बनना चाहती हो ?
सर ! मुझे शिक्षा से बहुत लगाव है, पढ़ने से ज्ञान प्राप्त होता है, और पढ़ाकर, मुझे और भी अनुभव हो जाएंगे, यहां पढ़ाना चाहती हूं, वैसे मैं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हूँ। यहां अनुभव प्राप्त करने के लिए आई हूं। मेरे कार्य में जो भी कमी होगी। आप जैसे ज्ञानीजन मेरे साथ हैं ,ही...आप मेरा अच्छे से मार्गदर्शन करेंगे।
उन्होंने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराकर बोले -ऑफिस में जाकर ,' शारदा मैडम 'से अपना कार्य पूछ लीजिए। आपको कौन सी क्लास देंगीं , उनसे बात कर लीजिए।'शारदा मैडम 'दिखाने के लिए स्कूल की प्रधानाचार्या थी किन्तु 'चतुर भार्गव 'के बिना एक कदम भी नहीं चल सकती थीं ।
दूने उत्साह के साथ मैंने स्कूल में जाना आरंभ कर दिया जिसमें कुछ लड़कियां, और कुछ महिलाएं भी थीं, सर लड़कियों को ज्यादा कुछ नहीं कहते थे, हालांकि हम लोगों से भी बड़े प्रेम से बात करते थे।
आज जब उन 'चतुर भार्गव 'की डीपी देखी, तो सारी बातें स्मरण हो आई और हंसी भी आई।
यह आशिक मिजाज, 'चतुर भार्गव' उम्र के इस पड़ाव पर आ गए किंतु अभी तक अपनी वही हरकतें छोड़ीं नहीं हैं। मैं इस अनजान शख्स से कोई प्रभावित नहीं थी। सिर्फ मुझे यह जानने की जिद थी, कि आखिर यह शख्स कौन हो सकता है जो मुझे अच्छे से जानता भी है, किंतु जब उनकी तस्वीर देखी तो अचानक ही वही भाव आ गया।
तब बोली- सर ! ये तो आप हैं ? मुझे कई बार संदेह तो हुआ था, किंतु कह नहीं पाई।
😀😀😀इसीलिए तो मैं, तुम्हें नहीं बताना चाहता था तुमने मेरी सारी चैट का, मजा ही किरकिरा कर दिया। अब सर कहकर बातें करोगी।
सर !आप सुधरेंगे नहीं।
मैं तो अपनी उम्र को कई साल पीछे छोड़ कर आगे जाना चाहता था किंतु तुम ने तो मेरी उम्र बढ़ा दी। मुझे तो लगा था तुम अब मुझे नहीं पहचान पाओगी , किंतु तुम्हारी याददाश्त अच्छी है तुमने मुझे पहचान लिया।
सर ! थोड़ा उम्र का ही तो प्रभाव है, वरना ऐसे चेहरा भुलाया नहीं जा सकता।
इसीलिए मैं, तुमसे इस तरह से बात नहीं करना चाहता था। अब सर !सर ! करके बात करोगी तो कैसे चलेगा ?वैसे ये बात तुमने सही कही ,ये चेहरा भी ऐसा ही है ,आसानी से भुलाया नहीं जा सकता।
अब क्या चैट करना ? अब अपने विषय में कुछ बताइए ! स्कूल कैसा चल रहा है ? बच्चे क्या कर रहे हैं ?
एक बेटा स्कूल चला रहा है, इसलिए आजकल मेरी स्कूल से छुट्टी हो गई है, दूसरा बेटा नौकरी करने जाता है। बेटी की शादी कर दी है और श्रीमती जी अपने पोते पोतियो में व्यस्त रहती हैं।
तो क्या हुआ ? आप तो अभी भी अपने ऑफिस में बैठकर, अपने पुराने दिनों को याद कर सकते हैं,😀😀 मुस्कुराते हुए उर्वशी ने कहा। इस बात पर वो गंभीर हो गया। अब तक उर्वशी को इस अनजान शख्स के विषय में जानने की इच्छा थी आखिर ये कौन है ? अब जब उसे जान गई है तो उसकी कहानी के विषय में जानने की इच्छा जागरुक हो गई है। हालांकि उसके विषय में बहुत कुछ जानती है किंतु अब क्या कर रहा है ? यह जानना चाहती है।
उर्वशी ने, अभी तक समीर से कुछ नहीं बताया था , आज जब उसे पता चल गया कि ये तो उसके वही सर है जिनके यहां यह नौकरी करती थी। तब उसे यह बात स्मरण हो गई और समीर से बोली - आपको मालूम है, आज हमारे एक सर से, मेरी बातचीत हुई। अभी तक वो मुझसे अनजान बनकर बातें कर रहे थे किन्तु आज मुझे पता चल गया, वो कौन हैं ?
समीर चुपचाप पलंग पर लेटा ,फोन चलाता रहा ,तब उर्वशी बोली - वे बहुत ही दिलफ़ेंक टाइप के आदमी रहे हैं। मेरे पास अचानक एक दिन, एक मैसेज आया और उसने यह दावा किया, कि वह मुझे जानता है। मुझे बड़ा अजीब लगा। मैं सोचने लगी आखिर ये इंसान कौन हो सकता है ? किंतु मैंने उसके विषय में जानना चाहा किंतु अपने विषय में उसने ज्यादा कुछ नहीं बताया।
मैं सोच रही थी, हमारे परिवार में से या रिश्तेदारी में से कोई मुझे बना रहा है। इसलिए मैंने सोचा, पता लगा कर तो रहूंगी। यह भी हो सकता है, कोई अनजान शख्स हो, जो वैसे ही मेरी आईडी में घुसने का प्रयास कर रहा है।
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