जब उर्वशी को उस अनजान शख़्स यानि 'चतुरभार्गव 'के विषय में मालूम पड़ा ,तब उसे आश्चर्य तो हुआ किन्तु उसकी सम्पूर्ण कहानी, उर्वशी की आँखों के समक्ष चलचित्र की तरह घूम गयी। शाम को जब समीर आये ,तब वो उससे बताती है ,किस तरह एक अनजान शख़्स उससे बातें कर रहा था ? उसकी बातों से उसे लग रहा था, जैसे वो उसे पहले से जानता है किन्तु अपने विषय में कुछ नहीं बताता था।
तब मैंने उस अनजान शख्स से बातें करनी शुरू की। उसकी जानकारी मिलने में कुछ अधिक समय लग गया किन्तु आखिरकार पता चल ही गया। वो उस स्कूल के प्रधानाचार्य और संस्थापक दोनों ही थे ,जहाँ मैं पढ़ाती थी।
वही, मुझसे इतने दिनों से , चैट करके बातें कर रहे थे। उनकी इतनी उम्र हो गई अभी भी उनकी वे आदतें गई नहीं है। उर्वशी अपनी ही धुन में समीर बताये जा रही थी।
कैसी आदतें ? वो तुम्हें कैसे जानते हैं ?
एकाएक समीर के प्रश्न करने पर थोड़ा रुकी और बोली - 'इश्कबाज़ी ' उनके व्यवहार में वो शालीनता नहीं थी। छोटा -मोटा हंसी -मज़ाक भी कर लेते थे। यह बरसों पुरानी बात है, शादी से पहले जब मैंने स्नातक पूर्ण किया । तब मैं , उनके यहां नौकरी करने लगी थी। तब से अब जाकर ,उन्हें न जाने मेरा पता कैसे चला ?एक दिन मुझे संदेश भेजा।
कैसे, क्या पता चला होगा ? तुम' फ़ेसबुक 'तो चलाती ही हो ,वहीं से जानकारी निकाली होगी ,समीर ने जबाब दिया।
उर्वशी को ,अब अपनी गलती का एहसास हुआ ,समीर सही तो कह रहा है ,वहीं से तो संदेश आया था किन्तु वो बताना नहीं चाहती थी क्योंकि समीर पहले से ही ,उसको फ़ेसबुक पर तस्वीरें डालने से, पहले ही मना करता था किन्तु मैं नहीं मानी। मेरी कई सहेलियां उस[ फेसबुक] पर सक्रीय रहतीं हैं ,इसीलिए मैंने भी अपनी आईडी. बना ली। यही सब सोचकर वो एकदम से शांत हो गयी।
समीर को, उसका ये व्यवहार ख़ला ,हालाँकि वो दिखाना नहीं चाहता था कि उसे उर्वशी की बातों में कोई दिलचस्पी है किन्तु तब भी वो जानना चाहता था आगे क्या हुआ ? तब समीर बोला -वो तुम्हें फेसबुक के माध्यम से मिला ,तब तुम्हें कैसे पता चला ?ये वही है।
मुझसे चैट से बातचीत कर रहे थे और मैं यह जानना चाहती थी कि आखिर यह इंसान कौन है ? और जब पता चला कि यह तो वही इंसान है -'चतुर भार्गव '
यह' चतुर भार्गव' कौन है ? उनकी बहुत लंबी कहानी है। तभी कुछ देर के लिए उर्वशी रुकी और उसने समीर की आँखों में झाँकते हुए पूछा - क्या तुम सच में उस इंसान के विषय में जानना चाहते हो ?
हाँ ,हाँ बताओ !
जब मैं, उनके स्कूल में पढ़ाने के लिए गयी,उनके विषय में कुछ नहीं जानती थी किन्तु जब वहां पढ़ाने लगी उनकी बड़ी दिलचस्प कहानी मुझे, सुनने को मिली।
तुमने उस स्कूल में कितने वर्ष तक पढ़ाया ?
यही कोई छह महीने ,उसके पश्चात मुझे आगे की पढ़ाई के लिए जाना था।
समीर ने उर्वशी की तरफ देखा और मुस्कुराया ,पूछा -अब उसकी कहानी बताओ !
अपने समय में ये सर बहुत ही रोमांटिक हुआ करते थे। कोई सुंदर लड़की देखी नहीं ,उस पर अपना प्रभाव दिखाना आरम्भ कर देते थे।
क्या' रसिया 'टाइप' के थे ? समीर उसकी बात सुनकर हंसा और बोला -फिर तो तुम पर भी लाइन मारी होगी।
हम्म्म्म इठलाते हुए उर्वशी ने जवाब दिया। हां, कह सकते हैं, किंतु मुझे प्रभावित करने का उन्हें ज्यादा समय नहीं मिला। दूसरे मेरे पिता को वो अच्छे से जानते थे ,उनसे थोड़ा डरते थे। तीसरा हमारा घर एक गली छोड़कर ही था। ये परिस्थितियां न भी होतीं तब भी क्या आपको लगता है ?कि आपकी बीवी किसी के पटाये में आ सकती है ? आज तक आप ही उसे पटा ना सके, कहते हुए उर्वशी हंसने लगी। आज ऐसा लग रहा था जैसे उनकी जिंदगी में वो पुराने वाली ताज़गी भर गई हो।
तब समीर ने कहा - तभी मैं सोचूं, आजकल हमारी श्रीमती जी के चेहरे पर मुस्कान क्यों रहने लगी है ? आखिर तुम्हारे पुराने प्रेमी जो मिल गए थे , उनसे चैट चल रही थी। हालांकि समीर के मन में उस बात को लेकर कोई जलन या ईर्ष्या की भावना नहीं थी किंतु वो भी इंसान है ,इंसानी स्वभाव है, शक तो हो ही जाता है।
तब समीर बोला -तुम्हारे इस 'रसिया 'को सर 'कहूं या अंकल की कहानी कल शाम को आकर चाय के साथ सुनूंगा ,अभी मैं सोने की तैयारी करता हूं, तुम मेरे लिए खाना बना दो !
उर्वशी समझ गई, यह भी एक पुरुष है, उनकी पत्नी से कोई अन्य पुरुष चाहे वो बुजुर्ग ही क्यों ना हो ? बातें करता है तो थोड़ा अजीब तो लगता ही है। तब उर्वशी ने सोचा -क्या मैंने समीर को ये बात बताकर कोई गलती तो नहीं कर दी। इस विचार के चलते, उर्वशी ने सोचा, अब मैं, समीर से उनके विषय में कोई बात नहीं करूंगी।
अगले दिन समीर, चाय पीते समय बोले -और बताओ ! तुम्हारे उसे' सर' का कोई संदेश आया था।
आज तो समीर ने स्वयं ही ये बात छेड़ दी ,आज शायद अच्छे मूड़ में है। उर्वशी बोली - नहीं, अभी तक तो नहीं आया क्योंकि हो सकता है अब उनका ,मेरा सामना करने की हिम्मत नहीं हो रही है क्योंकि अब तो मैं उनकी सच्चाई जान चुकी हूं। ये बात तो वो भी जानते होंगे।
ऐसे लोग ढीठ होते हैं, ऐसे लोगों पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ता, कि कोई तुम्हारे बारे में क्या सोचेगा या क्या कहेगा ?उन्हें तो अपनी छिछोरी हरकतों से मतलब है।
ऐसा नहीं है कि वह गली -मोहल्ले में खड़े होकर, ऐसी हरकतें नहीं करता था, बल्कि वह तो एक सम्मानित परिवार से होते हुए, अपने हरकतों को अंजाम देता था। कोई उसको दोष भी नहीं दे सकता था।
वह अपने गांव से, शहर में पढ़ने के लिए आया था और शहर का ही होकर रह गया था। न जाने उसने, उस शहर में रहकर क्या-क्या कांड किए हैं ? उनके विषय में कोई नहीं जानता किंतु इतना अवश्य पता चला था जब वो अपना स्कूल बनवा रहा था ,उन्हीं दिनों उसने 'जेल' की हवा खाई थी।
क्या ? अचानक से समीर के मुंह से निकला, वह जेल भी जा चुका है। बड़ी पहुंची हुई हस्ती है।
हां शायद 6 महीने के लिए गया था ,मुझे ज्यादा जानकारी तो नहीं है ,क्योंकि मैं बहुत दिनों बाद उनके स्कूल में गई थी। तब तक तो उनके स्कूल को चलते हुए छह या सात वर्ष हो गए थे इसलिए सुनी -सुनाई बातों के माध्यम से ही मुझे पता चला था ।
धीरे-धीरे समय के साथ लोग भूलने भी लगते हैं। मैंने सुना था कि उनका किसी महिला के साथ 'अवैध संबंध 'था। वो नहीं जानती थी कि यह शादीशुदा है ,इसने अपने को कभी बताया ही नहीं कि मैंने शादी कर ली है। वह महिला भी नहीं चाहती थी कि '' चतुर भार्गव ''शादी करें। वह चाहती थी कि हमेशा मेरे साथ रहे, मेरे साथ काम करता रहे।
क्या वो महिला कोई व्यापार करती थी ?
