Kalpna

उम्मीदों  के दिए जला, मैंने एक दुनिया बसा ली है। 

मेरी कल्पना की बगिया में शब्द, रंग, भाव माली हैं। 

दिल में किसी के न दुर्भावना, घृणा और न ईर्ष्या है।

यथार्थ से परिपूर्ण ,कुछ कल्पना से जुडी भावनाएं हैं।



न ग़म कोई ,न बंदिशें ,प्रेम पूर्ण जहां में खुला आसमान था। 

उड़ती रही ,बिन पंख मैं , प्रेम का इक ख़ूबसूरत पैग़ाम था।

हक़ीकत से परे , मेरी कल्पनाओं की अद्भुत सी शान थी। 

कल्पना थी ,इक ख़ूबसूरत जहाँ की, ख़्वाबों की ताबीर थी।

     

कुछ दिल से जुड़ी, कुछ भावनाओं से जुड़ी,अपनी सी

कुछ आसमानी, कुछ अतरंगी सी, मासूम कल्पनाएं ! 

कल्पना के रंगों में उड़ान भरती , वो अद्भुत जहाँ था ।  

जीती थी उसमें, ठहर जाता वो पल ! मेरा आसमान था। 


पलकों में सजाये सपने, प्रीत की राह' मैं' खोजती रही। 

हकीकत में रहकर भी, सपनों को पालती-पोषती रही। 

 कविताओं में ,कभी लेखों में ,कल्पनाएं परोसती रही।

 हक़ीकत को कल्पना के रंगों से भिगोती -तौलती रही।

  

खुली आँखों से देखा,जो मेरा अपना था ,एक सपना था।

कल्पना का वो रंगीन ,प्रेम भरा सपना , मेरा अपना था।  

अपनापन, अपने लोग, वो प्रीत भरी बातें .....

कर आती कल्पना में, अपनों से ही प्यार भरी मुलाकातें ! 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post