Zeenat [part 60]

ज़ीनत का, इतना बड़ा झूठ जानकर सुदीप को आश्चर्य हुआ ,उसे विश्वास नहीं हो रहा था ,ये इतना बड़ा झूठ भी बोल सकती है। आखिर इतना झूठ बोलने के पीछे उसका उद्देश्य क्या रहा होगा ? क्या लोगों से उनकी हमदर्दी पाना ? गरीब बनकर उनके घर में सेंध लगाना। सुदीप  मन ही मन सोच रहा था - यदि ये सच्चाई भूमि को पता चलेगी ,तब उसकी क्या प्रतिक्रिया होगी ? वो तो उस पर पूरा विश्वास करती है।


घर आकर सुदीप  ने जब भूमि को सारी बातें बताईं ,तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ और बोली -ऐसा कैसे हो सकता है ?मैंने उसे कई बार भूखे -प्यासे गलियों में टहलते देखा है। मेरे ही घर में नहीं ,यहाँ आस -पड़ोस में भी तो वो काम करती थी। किसी को तो उसकी सच्चाई का पता होता ,लेकिन यहां तो सभी को ,इसकी यही कहानी पता है। 

तुम लोग ,कभी बाहर निकली हो ? उसने जो कहानी सुनाई तुमने मान ली ,तुम्हारे कहने पर मैंने भी मान ली। किसी को जरूरत ही महसूस नहीं हुई, इसके विषय में सही जानकारी लेने की। किसी ने उसके विषय में जानने का प्रयास भी नहीं किया, इसीलिए तो कहते हैं ,घर में कोई भी नौकर रखो ! उसकी ठीक से जाँच -पड़ताल करनी चाहिए। मैं भी तुम्हारे बहकाये में आ गया। मैं तो इसे घर में आने ही नहीं देता ,भगा देना चाहता था। 

भूमि, चुपचाप सुदीप की बातें सुन रही थी ,तब बोली -किन्तु उस दिन' मिसेज गुप्ता ' ने जब पुलिस को बुलाया था ,तब पुलिसवालों ने भी कुछ नहीं कहा ,उल्टे उन्हें ही कहा ,वो तो पगली है ,ऐसे ही घूमती रहती है। जब मिसेज़ गुप्ता ने पूछा था - कि वो कहाँ रहती है ? वहां से उसे पकड़कर लाइए और उसे डांटिए और उसका वो डंडा भी छीन लीजिये !'

किन्तु तब उन्होंने कोई जबाब नहीं दिया। न जाने, उसे डंडा और वो ड्रेस किसने दी है ? वे  पुलिसवाले भी नहीं जानते थे कि वो कहाँ रहती है ?उन्होंने कहा था ,'उसने तो अपना कोई गाँव बताया था ,लोग बोले - नहीं ,उसने तो हमें पास में ही कोई मोहल्ला बताया था। तब भूमि को लगा तो था ,इसके रहने का स्थान भी, किसी को मालूम नहीं है किन्तु इस बात पर किसी ने इतना ध्यान ही नहीं दिया। उसे लगा ,इसका दिमाग़ भी कम है तभी तो इसे लोग ' पगली 'कहते हैं। इसे अपना घर भी याद होगा या नहीं।  

सुदीप की बात सुनकर भूमि को बहुत आश्चर्य हुआ।  कुछ समझ नहीं आया,वह क्या कहे ? ये जो भी जानकारी लेकर आये हैं ,झूठ भी तो हो सकती हैं ।  क्या वह' पगली' कहलाई जाने वाली, 'ज़ीनत' इतना बड़ा झूठ और इतनी बड़ी कहानी गढ़ सकती है।हालाँकि मैंने सुदीप से कई बार कहा था -ये मुझे तो' पगली' नहीं लगती है, किन्तु इतना भी नहीं लगता था कि वो इतनी शातिर होगी।  उसने जो भी कहानी भूमि को सुनाई थी , क्या वह सब काल्पनिक थी ?

 लड़कों का उसे देखने आना, बुआ के लड़के से, उसका निक़ाह तय होना, एक अनजान आदमी का, उसे उठाकर ले जाना। क्या यह सब उसकी कल्पना थी ? कोई इतना बड़ा झूठ कैसे बोल सकता है ? कोई सामान्य  इंसान हो तो विश्वास भी कर लें ! किन्तु इससे तो ठीक से बोला भी जाता ,फिर ये इतना बड़ा षड्यंत्र कैसे रच सकती है ?इसने कोई चोरी भी नहीं की ,कभी लगा ही नहीं इसे पैसे का कोई लालच रहा होगा।

 भूमि तो जैसे सदमे में ही आ गई। पगली सी दिखने वाली लड़की, हमदर्दी पाने के लिए इतनी बड़ी कहानी कैसे बना सकती है ? या फिर उसका निक़ाह तो हुआ नहीं और वो उसका सपना था। जिसकी कहानी बनाकर हम सभी को बताती थी। इसका मतलब वह' पगली' नहीं है वरन  लोगों को' पागल' बनाती है।

सुदीप बोले - मेरे दोस्त ने ही बताया था, कि यह मेरे' मेडिकल स्टोर ' से कई बार बच्चे गिराने की दवाइयां भी ले जा चुकी है। हाँ ,अपनी 'यौन इच्छा ''की पूर्ति के लिए किसी को भी मना नहीं करती थी। कोई जवान ,अधेड़ उम्र ,केेसा भी उसके सामने आये ,किसी को कभी मना नहीं किया। 

भूमि जिसे एक जरूरतमंद ,ग़रीब ,बेसहारा, समझकर उससे सहानुभूति जतला रही थी ,वो तो कुछ और ही निकली।ऐसा कैसे हो सकता है ? कहीं ऐसा तो नहीं ,घरों की जानकारी लेकर चोरी करवाती हो ,न जाने कितने विचार मन में उत्पन्न होते और मिटते, किन्तु दिल मानने के लिए तैयार नहीं था। भूमि का विश्वास रह -रहकर कह रहा था ,शायद उसकी कोई मज़बूरी रही होगी।

दूसरे ही पल विरोध करता नजर आता , ऐसी भी क्या मज़बूरी जो इतना बड़ा झूठ बोलना पड़ जाये ? दिखने वाला हर ग़रीब ,जरूरी नहीं ,जरूरतमंद ही हो। दिखने वाला ग़रीब ! हो सकता है  ,उस चोले के पीछे उसकी कोई चाल भी  हो सकती है। भूमि कई दिनों तक अपने आपको समझाती रही ,उसने सोचा था ,जब वो घर आएगी तो ज़ीनत से ही अपने सभी प्रश्नों का जबाब मांगूंगी। 

कई दिन हो गए ,ज़ीनत काम पर नहीं आई। एक दिन उसकी खबर आई ,उसको पुलिस ने पकड़ लिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ होगा ? जो पुलिस उसके पास पहुंच गई। भूमि के आश्चर्य की सीमा नहीं थी, आख़िर उसने ऐसा क्या किया होगा? क्या, किसी की हत्या की होगी ? या किसी को धोखा दिया होगा। ऐसी तो लगती नहीं है। 

कुछ दिन बाद, समाचार -पत्र में उसकी कहानी छपी - एक ऐसी अनजान लड़की को पकड़ लिया गया है । जो दिखने में लाचार ,बेसहारा और ग़रीब दिखती है।  हमदर्दी के लिए, अपने बच्चों की और पति के छोड़ कर चले जाने की कहानी सुनाती है। जबकि वे बच्चे भी उसके अपने नहीं हैं । विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है जिन बच्चों को वो अपना कहती है वे, उसकी बहन के बच्चे हैं और जिसे वह अपना घर बताती है ,वह भी उसकी बहन का ही है। इस लड़की की कई लोगों ने शिकायत की है किन्तु पुलिस ने उसे गरीब और लाचार समझकर हमेशा उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया। वो उनके सामने रोने लगती थी और पुलिस को भी उसने वही कहानी सुनाई ,जो सबको सुनाती आ रही थी। 

भूमि सोच रही थी ,वो तो पुलिस के कपड़े पहनकर पुलिस बनी घूमती थी ,तब भी क्या पुलिसवालों ने ,उससे कुछ नहीं कहा ? वो तो कहती थी -पुलिसवाले मेरा ही कहना मानते हैं ,मेरे कहे में ही चलते हैं ,तो क्या उन पुलिसवालों को उस पर कोई शक़ नहीं हुआ ?और अब हुआ भी तो... उन्हें अब कैसे पता चला ?कि ये लड़की कोई अपराधी है ?



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post