कहने को ज्ञान का भंडार ,
या कहूं ,पुस्तकों का रेला है।
इतना बोझ न सह पाउँगा।
जीवन से मिलता, क्या ज्ञान कम ?
पुस्तकों का ज्ञान ,न सह पाऊंगा।
अभी दया करो ! मुझ पर,
बचपन क्यों ?मेरा छीन रहे हो।
इस बस्ते का बोझ अधिक है ,
क्यों ? स्पर्धा में खड़ा किये हो ?
लड़खड़ाते क़दमों से लगता ,
आगे ,अब न चल पाउँगा।
पुस्तकों का भार न सह पाउँगा।
माना, आगे बढ़ते जाना मुझको !
कुछ तो सुकूँ से रहने दो !मुझको !
डर इनका ,न मन में भरने दो !
ये पुस्तकें ज्ञान का भंडार हैं।
संभाल सकूँ मैं ,इस पूंजी को
अब सलोना बचपन जीने दो !
अभी खेल में आगे बढ़ने दो !
मेरा बचपन मुझको जीने दो !