आज इस गुलाबी शाम को आराम करते हैं।
आओ ! ये शाम ,आज तुम्हारे नाम करते हैं।
कॉफी की प्यालियों से शाम की शुरुआत करते हैं।
कॉफी और तुम !उस गर्माहट का एहसास करते हैं।
जीवन सी मीठी और कड़वी ! ये कॉफी !
अपनी महक से, लुभाती है।
दिनभर की थकन को तरोताज़ा कर जाती है।
तुम्हारे दामन की तरह वो पल भी सिमट सा जाता है
कॉफी का वो मग ,सामने जब आता है।
कॉफी की चुस्की ,जब अंतर्मन छेड़ जाती है।
भाप से उड़ते ख्यालों में,ज़िंदगी उलझकर रह जाती हैं।
इन बुलबुलों के तल में, कितनी गहराई है ?
सम्पूर्ण ज़िंदगी जैसे, यहीं सिमट आई है।
आओ !आज इस शाम को ,तुम्हारे नाम करते हैं।
प्यार की गर्माहट से ,
कॉफी की मिठास, कड़वाहट का एहसास करते हैं।
लरजते होठों पर कॉफी की आख़िरी बूँद से आगाज़ करते हैं।
मेरे बालों में जब तुम ,नाजुक़ सी अंगुलियां फिराती हो।
सच कहता हूँ , मेरी ज़िंदगी को नया आयाम दे जाती हो।
