Coffee or tum

       आज इस गुलाबी शाम को आराम करते हैं।

       आओ ! ये शाम ,आज तुम्हारे नाम करते हैं। 

    कॉफी की प्यालियों से शाम की शुरुआत करते हैं।

   कॉफी और तुम !उस गर्माहट का एहसास करते हैं। 


       जीवन सी मीठी और कड़वी ! ये कॉफी !

                अपनी महक से, लुभाती है। 

     दिनभर की थकन को तरोताज़ा कर जाती है। 

तुम्हारे दामन की तरह वो पल भी सिमट सा जाता है 

       कॉफी का वो मग ,सामने जब आता है। 

    कॉफी की चुस्की ,जब अंतर्मन छेड़ जाती है।

 भाप से उड़ते ख्यालों में,ज़िंदगी  उलझकर रह जाती हैं। 

   इन बुलबुलों के तल में, कितनी गहराई है ? 

    सम्पूर्ण ज़िंदगी जैसे, यहीं सिमट आई है।   

आओ !आज इस शाम को ,तुम्हारे नाम करते हैं। 

               प्यार की गर्माहट से ,

      कॉफी की मिठास, कड़वाहट का एहसास करते हैं। 

लरजते होठों पर कॉफी की आख़िरी बूँद से आगाज़ करते हैं।

  मेरे बालों में जब तुम ,नाजुक़ सी अंगुलियां फिराती हो।

 सच कहता हूँ , मेरी ज़िंदगी को नया आयाम दे जाती हो।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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