Zeenat [part 25]

 भूमि ,को ज़ीनत की बातें सुनकर ,उसे अपनी एक 'धार्मिक पुस्तक ''दुर्गा सप्तशती ''की किताब के एक पाठ की कुछ बातें स्मरण हो आईं  -''उसमें कहा गया था - कुछ लोग, रात्रि में अंधे होते हैं ,कुछ लोग ,आँखें होते हुए भी,मोहवश दिन में अंधे होते हैं।  सामान्य ज्ञान सभी रखते हैं ,पशु -पक्षी भी ज्ञान रखते हैं ,जो सामान्य जनों का ज्ञान है ,वही पशु -पक्षियों का ज्ञान है। पक्षी यह जानते हुए भी कि इस तरह से उनकी क्षुधा नहीं मिटेगी ,तब भी वो अपनी चोंच में दाना लाकर ,मोहवश स्वयं भूख से पीड़ित होते हुए भी, अपनी चोंच से, अपने बच्चों को भोजन खिलाते हैं। ''


इसी प्रकार संसार का हर प्राणी मोहवश अपना सम्पूर्ण जीवन अपने बच्चों की ख़ुशी और उनकी सुख -सुविधा में लगा देता है किन्तु वो अपने को ज्ञानी जनों की श्रेणी में मानता है। तब ये' पगली 'क्या गलत कर रही है ? जबकि इसे तो लोगों द्वारा पहले से ही 'पागल' घोषित कर दिया गया है। ये भी ज्ञानीजनों की भांति जानती है,' कि इसकी औलाद इसका सम्मान नहीं करती है वरन इसे पीटती है फिर भी यह मोहवश अपने बच्चों के भविष्य के लिए सोचती है,उन्हें आगे बढ़ते हुए, देखना चाहती है।' 

एक दिन अचानक बोली -उस दिन घर में सुदीप भी नहीं थे , आंटी ! क्या मेरी जिंदगी यूं ही कट जाएगी ?यूँ ही मुझे बुढ़ापा आ जायेगा। 

क्या हुआ ? अंततः भूमि ने पूछ ही  लिया। 

 जब मेरी शादी हुई थी ,तब मैं बहुत छोटी थी और अब चालीस  की हो गई हूँ। जब से मेरा आदमी मुझे छोड़कर गया है, एक बार भी उसने पलटकर नहीं देखा। मैं कहां हूं, क्या कर रही हूं ? उसके बच्चे कैसे हैं ?

क्या, तुझे उसकी याद सताती है ?

हाँ ,बाजी अब तो मुझे उसका चेहरा भी  याद नहीं रहा, परन्तु इतना तो याद है ,मेरे बच्चों का एक बाप था और मुझे छोड़कर चला गया। आज तक उसे देखा नहीं .... 

क्या तेरी कोई ससुराल भी है ?क्या तेरी ससुराल में और लोग भी हैं ? अब तक भूमि, उसे बिना परिवार के ही समझे हुए थी। 

हाय ,बाजी ! क्या बात कर रही हो ?पहले तो वो मेरे  प्रश्न पर शायद अचम्भित सी  हुई और फिर अपने परिवार के विषय में सोचकर वो एकदम से उत्साहित हो गयी और खुश होते हुए बोली -हाँ..... मेरी सास है ,मेरे आदमी के छह भाई और हैं ,उनकी बहुएं हैं। हमारे सात घर हैं। 

सात घर  क्यों?

सभी के अलग-अलग घर हैं, मेरी सास का घर अलग है ,यदि मैं वहां चली जाऊं तो मेरी सास मुझे वापस आने नहीं देती, मुझसे बहुत प्यार करती है। वो कह रही थी -'तेरे बच्चों के लिए, मैं ही दुल्हन ढूंढ कर लाऊंगी। एक बार चली जाऊं तो, मुझे वहां से आने में छह -सात  दिन लग जाते हैं।

 ऐसे तेरा गांव कितनी दूर है ?

'गांव' कहने  पर, उसे जैसे अपनी तोेहीन लगी तब बोली -वह गांव नहीं है ,कस्बा है,क़स्बा ! ज्यादा दूर तो नहीं है। तीन-चार घंटे का रास्ता है पर सबके घर में एक-एक दिन रुकूंगी तो छह -सात  दिन लग जाएंगे। मेरी सास तो मुझे बहुत प्यार करती है,कहती है -यहीं रह जा !

 मुझे लगा, जब इससे इतना प्यार करने वाला, इसका परिवार है तो फिर यह वही क्यों नहीं रुकती है ?तब तू वहीं क्यों नहीं जाती, वहीं अपनी सास के पास आराम से रहती। 

नहीं, किसके साथ रहूंगी ? यहां तो काम भी कर लेती हूं।

 उसके अस्पष्ट  जबाब से भूमि संतुष्ट नहीं हुई ,न जाने वहां इसके साथ क्या परेशानी होगी ? हो ,सकता है, यह स्वयं वहां रह ना पाती हो, या फिर इसे अपने पति की याद आती हो मैंने  फिर उससे कोई और प्रश्न नहीं किया।

 भूमि उसकी तरफ देख रही थी, और सोच रही थी -क्या कोई इसे' पागल' कह सकता है, हाँ ग़रीब तो अवश्य है।  मुझे तो नहीं लगता -यह पागल है या इसका दिमाग कम है। आज ये अपने शौहर की कमी महसूस कर रही है ,उसकी चाहत इसे बेचैन कर रही है ,जिसके कारण यह उदास है। मैंने सुना है ,पागलों में यौन इच्छा भी ज़्यादा होती है और अचानक ही उनका व्यवहार बदल जाता है। यह सोचकर भूमि  को थोड़ा डर लगा ,कहीं इसका व्यवहार बदल न जाये।   

तब वो बोली -आंटी ! मुझे रातभर नींद नहीं आती , परेशान रहती हूँ , कहते हुए वो ,मेरी तरफ निरीह भाव से,  देख रही थी।

 भूमि महसूस कर रही थी, लोग इसे 'पागल 'कहते हैं किंतु इतना यह इतना तो समझती है कि इसका शौहर इसे छोड़कर गया है, अपने लोगों को याद भी करती है। उस पति को याद करती है, जो इसे बरसों पहले छोड़कर चला गया, इसे अपने बुढ़ापे की फिक्र होती है। इसे अपने बच्चों के भविष्य की भी चिंता है , कहने को यह पढ़ी-लिखी नहीं है, पागल है, लेकिन सभी कुछ सोचती और समझती है। 

तभी भूमि ने उससे पूछा -तुम्हारे यहां तो कई शादियाँ हो जाती हैं, जब वह तुझे छोड़कर चला गया तो तू  भी किसी और का हाथ थाम  लेतीं । 

नहीं, कर सकती थी। 

क्यों ? नहीं कर सकती थी। 

आंटी तुम अंकल के चार काम करती हो ,उनके लिए खाना बनाती हो ,उनके कपड़े धोती हो। मुझे तो कुछ भी नहीं आता ,मुझे कौन रखता ?सबको खाना बनाने वाली ,कपड़े धोने वाली चाहिए। 

उसकी बात सुनकर भूमि ने उसकी तरफ देखा ,अब वो क्या कहे ?किन्तु उसने महसूस किया ,ये सब बातें नजर में रखती है ,हो सकता है ,हमें इस तरह रहते देखकर ही इसे अपने शौहर की याद आती हो। 

तब वो बोली - मेरे अब्बू ने तो बहुत कहा था-मेरे भाई ने भी कहा था,इसका दुबारा निक़ाह कर दो  किंतु अम्मी नहीं मानी। 

 पता नहीं ,इसकी अम्मी क्यों इसकी दुश्मन बन गई और इसे इस तरह राह पर भटकने के लिए छोड़ दिया ,क्या कारण रहा होगा ? क्या तुम्हारी अम्मी आज भी जिंदा है ? 

नहीं, अम्मी- अब्बू दोनों ही नहीं हैं। 

इसमें मैं उसके लिए क्या कर सकती थी ? मैं उसके जीवन को बदल तो नहीं सकती थी, न ही उसके ख़्वाबों  को, उसके इच्छाओं को, पूरा कर सकती थी , अपने को विवश पा ,भूमि अपने कपड़े समेटने लगी। अच्छा ! यह बताओ ! तुम्हारे उस भाई जान ख़ालिद ने कुछ किया तो नहीं था उसके बाद तो तुम्हारा निकाह अच्छे से हो गया होगा।

 आज उसका मन दुखी था , शायद उसे अपने घर वालों की याद आ रही थी, हो सकता है ,घर में इसके बेटे ने इसे कुछ कहा हो। शायद आज उसे अपने शौहर  की याद भी सता रही थी, जिसे इसकी तनिक भी परवाह नहीं थी। कितने वर्ष हो गए अब तो वह कहीं दूसरी बेगम के साथ घूम रहा होगा। मन में अनेक प्रश्न उठते,आख़िर  उसने इसे छोड़ा ही क्यों था ? और छोड़ा भी तो बच्चे हो जाने के बाद, अगर उसे इसके साथ रहना ही नहीं था तो निकाह ही नहीं करता। निकाह हो भी गया फिर बच्चे भी.... क्या उसे , इनकी जिम्मेदारी भी नहीं उठानी चाहिए थी ,कैसे-कैसे लोग हैं ? क्या इसकी फूफी  ने कुछ कहा या नहीं ?वही तो इसकी सास रही होगी। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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