भूमि ,ज़ीनत को लेकर ,मिसेज गुप्ता से फोन पर चिंता व्यक्त करती है ,जब सभी ने उसे अपने घर से निकाल दिया। तब ये भूखी रहेगी ,कहाँ खायेगी ?
क्यों, हमने क्या उसका ठेका लिया है ?कहीं भी जाये या मर जाये ,हमें क्या ?अब ये इस मोहल्ले में नहीं आनी चाहिए। हमने तो सभी ने कह दिया है ,यदि ये यहाँ आती है तो पिटकर जाएगी। इसके विषय में जब इसको पैदा करने वाले माँ -बाप ने नहीं सोचा ,इसके पति ने नहीं सोचा, तो हम ही क्यों सोचें ?उसकी पिटाई हुई अच्छा हुआ।
भूमि को उनकी बात अच्छी नहीं लगी और बोली -ये काम पुलिस का है ,वो करेगी।
वो कुछ नहीं करेगी ,हम दो बार थाने गए थे किन्तु उन्होंने कह दिया - वो तो' पागल' है, किन्तु तुम लोग तो समझदार हो ,तुम्हें उससे बात ही नहीं करनी है और उससे काम भी नहीं करवाना है।
भूमि अजीब स्थिति में फंस गयी ,यदि वो घर पर आती है ,तो उससे तो मना ही नहीं होती ,एक दो बार प्रयास भी किया किन्तु वो अपने आप ही काम में लग जाती है। इसी तरह अगले दिन मिसेज गुप्ता का मेेसेज आया ,आपने उसे भगाया या नहीं। भूमि ने वो मैसेज देखा और नजरअंदाज करने का प्रयास किया।
नो रिप्लाई !
कुछ जबाब देना है या नहीं !
किन्तु भूमि उन्हें क्या जबाब दे ? यदि नहीं कहती है तो उन्होंने तो उसे मेरे घर आते हुए पहले ही देख लिया होगा और यदि हाँ कहती है ,तो वो फिर से'' राग अलापेंगी। ''तुमने उसे भगाया क्यों नहीं ?तुम हम लोगों के साथ नहीं हो।
तब उसकी सास ने एक दिन आकर पूछा -भूमि !ये तेरे घर क्यों आ रही है ?यहाँ तो सभी ने इसे हटा दिया ,तूने देखा नहीं ,गुप्ता की पत्नी के कैसे डंडे बजा रही थी ? इसे ज्यादा सर पर मत चढ़ा ,अब इसे यहाँ आने से मना कर दे। कल को तुझे कुछ कहा तो....
अब मैं क्या करूं ?मैंने उससे कहा तो था ,अब मत आना किन्तु आ जाती है।
पता नहीं ,यहाँ आकर कैसे चुपचाप काम करती है ,किन्तु इसके दिमाग़ का कोई ठिकाना नहीं ,कब क्या कर बैठे ?वो तो समझाकर चलीं गयीं।
अब आप सोच रहे होंगे ,ये मिसेज गुप्ता ,क्या सारा दिन भूमि के घर की तरफ ही देखती रहती है ?उसके घर कौन आ रहा है ,कौन जा रहा है ? क्या उसे कोई काम -धाम नहीं है ?दरअसल मिसेज गुप्ता के दो बच्चे हैं ,दोनों बड़े हो चुके हैं ,दोनों का विवाह हो गया है। अपनी गृहस्थी में व्यस्त हैं।बेटी ससुराल में है और बेटा -बहु नौकरी पर हैं। वैसे सप्ताह में अपने घर अपने माता -पिता से मिलने आ जाते हैं। उनका छोटा सा घर है ,आंगन नहीं है ,इसीलिए धूप लेने के लिए मुख्य दरवाज़े पर बैठी रहती हैं। अकेली, घर में उकता जाती हैं ,मन लगाने के लिए ,तो भी वहीं कुर्सी डालकर बैठ जाती हैं।वहां से सभी के घरों पर उनकी नजर रहती है। पति भी अपने काम पर चले जाते हैं।
एक तरीक़े से कहा जाये तो वो इस मौहल्ले का समाचार -पत्र भी हैं।किसके घर कौन आ रहा है ,कौन जा रहा है ?किसके घर में झगड़ा हुआ ,किस पति -पत्नी में बनती नहीं है ,किसकी पत्नी अपने पति से काम करवाती है ?किसके बेटे ने 'लव मैरिज ''की, किसकी लड़की का चक्कर चल रहा है ?या फिर किसकी लड़की छोटे कपड़े पहनकर किसी लड़के के साथ घूम रही थी ? उन्हें सब जानकारी रहती है ,कुछ भी ,किसी के विषय में भी आपको जानकारी चाहिए तो उनसे बात कीजिये,सारा इतिहास खोलकर रख देंगी। फिर उनकी पारखी नजरों से भूमि का घर कैसे बच सकता है ? फिर चाहे, उनकी अपनी ही बेटी ने अंतर्जातीय विवाह क्यों न किया हो ?
अपने घर के मुख्य द्वार पर बैठे -बैठे कोई ऐसी महिला आती -जाती दिख जाये तो उसे पकड़ लेती हैं और दुनिया भर की बातें उसे बताती हैं और उससे पूछती हैं या फिर फोन पर लगी रहती हैं इसी तरह उनका समय व्यतीत होता है। अब ऐसे में भूमि का घर भी उन्हें दीखता है। अब आप भूमि को क्या कहेंगे ?जब वो एक कामवाली से ही अपने घर आने से इंकार न कर सकी तब वो अपनी पड़ोसन मिसेज गुप्ता से कैसे कह सकती है ?आप अपने काम से काम रखिये !हमारे घर में क्या हो रहा है ?आपको इस बात से कोई मतलब नहीं होना चाहिए।
ज़ीनत आई काम किया और चली गयी ,अगले दिन बोली -बाजी !मुझे दोपहर में भी बुला लो !अब कोई भी मुझे काम पर नहीं रख रहा ,मैं कहाँ धक्के खाउंगी ?
ठीक है ,आ जाना ,देख लेंगे किन्तु चुपचाप, कोई अगर तुम्हें दिखे तो नजरअंदाज करके आ जाना। काम तो कुछ ज्यादा नहीं था ,काम करके और भोजन करके वो धूप में लेट गयी। कुछ देर पश्चात भूमि के समीप आकर कुछ नहीं बोली, किन्तु भूमि की तरफ देखने लगी ,भूमि ने पूछा -चाय पीयेगी !
हाँ ,भूमि ने अपने और उसके लिए चाय बनाई ,तब चाय पीते हुए वो बोली -बाजी !कोई दवाई है। मेरी कमर में और छाती में दर्द हो रहा है ,चक्कर भी आ रहे हैं।
ऐसा क्यों ?क्या कुछ हुआ है ? मैं डॉक्टर तो नहीं ,तुम डॉक्टर को दिखाओ !हाँ अभी चक्कर की दवाई दे देती हूँ फिर डॉक्टर को दिखाकर आना। शाम की अजान का समय हुआ और अजान की आवाज सुनकर बोली -अब मैं चली जाउंगी।
डॉक्टर को कब दिखाएगी ?
कल दिखाने जाउंगी ,तुम मेरा कितना ध्यान रखती हो ?कहकर मुस्कुराई और बोली -अल्लाह !तुम्हें खुशियां दे ,तुम्हारे सभी काम बने कहकर वो चली गयी किन्तु आज दिन ढले उसके मुख से ऐसी बात सुनकर भूमि को अच्छा लगा ,मन में प्रसन्नता की लहर दौड़ गयी। तब सोचा -इसे इस समय देखकर क्या कोई कह सकता है ,यह' पागल 'है।
अगले दिन' ज़ीनत ' नहीं आई, भूमि को उसकी चिंता हुई कहीं उसकी तबीयत ज्यादा तो नहीं बिगड़ गई ऐसा क्या हुआ था जो उसे चक्कर आ रहे थे। तभी उसे अपने पति और पड़ोसन की बात स्मरण हो आई न जाने कहां-कहां मुंह मारती है ? क्या यह ऐसी होगी ? क्या उसने ऐसा कुछ किया होगा ? कहीं वो.... आगे सोच भी ना सकी।
उससे अगले दिन जब वह आई तो वह प्रसन्न थी, और बोली -बाजी ! तुमने सही सलाह दी, मैंने दवाई खाई और मुझे अब आराम है आज पहली बार उसके चेहरे पर थोड़ा सुकून दिखलाई दिया। काम करने के पश्चात बोली -अब तो मेरे पास कुछ और काम नहीं है , लेकिन मैं दूसरे मोहल्ले में जाऊंगी वहां भी कुछ लोग मुझे जानते हैं उसकी बात सुनकर मुझे आश्चर्य होता था। इसे अभी भी अपने ऊपर कितना विश्वास है ? कि लोग मुझे जानते हैं और काम देंगे।
अचानक ही दोपहर में, घर आ गई , भूमि उसे समय कपड़ों की तह बना रही थी, उसे इस तरह अचानक आया देखकर उससे पूछा -इस समय क्यों आई हो ?
वैसे ही, वैसे ही तुमसे मिलने का मन कर रहा था। चुपचाप आकर जमीन पर बैठ गई और भूमि को कार्य करते हुए देखने लगी। तब भूमि ने पूछा -डॉक्टर ने क्या बताया था ? क्या दिक्कत थी ?
पहले तो वह चुप रही, फिर बोली -डॉक्टर ने कहा है , तुम गलत ही करोगी तो भुक्तोगी।
कैसी गलती ?
