Zeenat [part 7]

'भूमि' जानती थी, ज़ीनत ने ,मिसेज गुप्ता के साथ जो भी व्यवहार किया है, वह सरासर अनुचित है, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। कल को यदि उन्हें चोट लग जाती या कुछ हो जाता तो क्या होता ? उनकी जगह मैं भी हो सकती थी। यही सब सोचकर भूमि ने, उस समय की एक वीडियो बना ली थी।  पड़ोसी होने के नाते, उसने वह वीडियो मिसेज गुप्ता के फोन पर भेज दी थी और उन्हें संदेश दिया कि आप पुलिस में उसकी रिपोर्ट कर दीजिए। 


जब मिसेज गुप्ता ने ,भूमि को साथ चलने के लिए कहा तो, उसने ,उनके साथ चलने से इनकार कर दिया और कहने लगी- मैं इस तरह नहीं जा सकती, न ही कभी पुलिस थाने गई हूं। मेरे घरवाले नाराज़ होंगे ,घर बैठे मुझसे , आपकी जो सहायता हो सकती है ,वो मैंने कर दी है,आगे भी जो बन पड़ेगा , मैं आपकी सहायता करूंगी। तब उसने मिसेज गुप्ता की परेशानी को महसूस कर उन्हें सुझाया- कि वो सोे नंबर पर फोन कर दें ! पुलिस स्वयं ही वहां आ जाएगी। 

भूमि का यह सुझाव मिसेज गुप्ता को अच्छा लगा और उसने सौ नंबर पर फोन करके पुलिस को बुलाया ,कुछ देर पश्चात, पुलिसवाले आये और पूछताछ करने लगे। मिसेज गुप्ता ने, पहले तो पुलिसवालों पर ही आरोप लगाया -'ये पुलिस की यूनिफॉर्म उसे किसने दी है ? वो अपने को पुलिसवाली समझने लगी है और उसे एक डंडा भी दे दिया ताकि वो हमारा सिर फोड़ दे। 

आपका, उससे क्या मतलब है ?ऐसा क्या हुआ ?जो वो आपसे ऐसा व्यवहार कर रही है , पुलिसवाले ने पूछा। 

वो मेरे यहाँ काम करती थी,मिसेज गुप्ता का संक्षिप्त का जबाब था। 

क्या आपके पास उसकी आईडी है ,आपने ,उसको काम पर लगाने से पहले' पुलिस वेरिफिकेशन' करवाया था। 

ऐसा तो कुछ नहीं है ,यहाँ तो लगभग सभी घरों में, वही काम करती है ,उन्होंने अपनी सफाई में कहा। 

वो कहाँ रहती है ,क्या आप जानती हैं ?

जी ,हमने उससे कभी पूछा ही नहीं, किन्तु कहती है - पास में ही किसी बस्ती में रहती है। 

आप उसके विषय में कुछ नहीं जानती और आपने उसे अपने घर पर काम के लिए रख लिया, यह गलत है ,कल को वो चोरी भी कर सकती है ,कुछ भी हादसा हो सकता है।

क्या, आप उसे जानते हैं ? आप लोगों ने भी तो उसे छूट दे रखी है, आप लोगों को क्या जरूरत थी ?उसे  वो डंडा और ड्रेस देने की, अब अपने को पुलिस ही समझती है ,अपनी वर्दी का रौब दिखाती है। उनकी ये बात सुनकर मुझे हंसी आई ''उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। ''तब वो बोलीं - उसे मैंने  ही, अपने घर नहीं लगाया है। यहां आस-पास के सभी घरों में वह काम करती है। भूमि भी पड़ोसन होने के नाते, अपने घर की छत से, देख रही थी। तब मिसेज गुप्ता ने पुलिस वालों को, वह वीडियो दिखाई ,जो भूमि ने भेजी थी और बोली -जब वह मुझ पर हमला कर रही थी तब इन्होंने ही ,यह वीडियो बनाई थी।  देखो !किस तरह से मुझ पर हमला कर रही है ? पुलिस वालों के पास कोई जवाब नहीं था।उन्होंने एक नजर भूमि के घर की तरफ देखा और बोले - अच्छा ठीक है ,हम उसे देखते हैं ,मिलेगी तो उसे समझायेंगे। 

उनमें से एक बोला -यह तो पागल है, आपको इसके मुंह में नहीं लगना चाहिए था। इतने घरों में यह काम करती है, किंतु शिकायत तो आपकी ही आई है।आपने उसके साथ ऐसा क्या व्यवहार किया ? 

वही तो मैं कह रही हूं, वो मेरे पीछे ही क्यों पड़ी है ?

ठीक है, यदि वह हमें मिलती है तो हम उससे बात करते हैं ,यह कहकर वो लोग चले गए। सारा दिन मोहल्ले में, यही चर्चा का विषय बना रहा, किंतु उस दिन वह कहीं भी दिखलाई नहीं दी।इसे मिसेज गुप्ता अपनी जीत समझ रहीं थीं और कह रहीं थी -अब जब पुलिस उस पर डंडे बजाएगी ,तब उसकी अक़्ल ठिकाने आएगी।  

किन्तु भूमि सोच रही थी ,मैंने उसकी वीडियो बनाकर कोई गलती तो नहीं कर दी। एक तरफ मैं चाहती हूँ उस लड़की को कोई कुछ न कहे ,दूसरी तरफ पड़ोसन की सहायता भी कर रही हूँ।आख़िर मैं चाहती क्या हूँ ? तब अपने मन को समझाया,उस समय' ज़ीनत' का जो व्यवहार था। वह गलत ही था किन्तु इंसानियत के नाते मुझे उसकी सहायता भी करनी है ,जब तक मुझे सच्चाई का पता न चल जाये। 

दूसरी तरफ उसका बेटा कपिल भी कह रहा था -मम्मी ! ये गलत है ,इस तरह तो पुलिसवाले भी गलत ही हैं,इस तरह कोई भी ऐसे ये यूनिफॉर्म नहीं दे सकता। 

अब हम क्या कर सकते हैं ,कौन कहेगा ?कि ये मेरा काम है। इस तरह एक दिन और बीता था, शाम का समय था, लोग अपने घरों से बाहर निकलकर बाहर घूम रहे थे, तभी खूब जोरों से किसी की आवाज आ रही थी, किंतु इस बात का भूमि को पता नहीं चला।

 भूमि के पति सुदीप ने भी जब यह सुना- कि मोहल्ले में पुलिस आई थी, तब वो बोले -तुमने पड़ोसी होने के नाते उनकी सहायता की किंतु वह सभी का नाम क्यों ले रही थी ? यदि उसे वीडियो दिखानी थी, तो बिना नाम लिए भी दिखा सकती थी जरुरी नहीं था वह तुम्हारा नाम ले !यह भी तो कह सकती थी- कि किसी ने भेजी है। वो अपने साथ -साथ सबको लपेटना चाह रही है। 

सुदीप की कही बात, से भूमि डर गई और उसने तुरंत ही, वह वीडियो हटा दी, वह नहीं चाहती थी, कि इस मामले में किसी भी तरह से उसका नाम आए, और उसके घर वाले, उसकी किसी भी बात को लेकर उसे ताने सुनाएं। 

अगले दिन प्रातः काल ही, ज़ीनत, भूमि के घर आई, और आकर चुपचाप झाड़ू लगाने लगी। भूमि भी चुप थी, उसने, उससे कुछ नहीं पूछा , और न ही उसको किसी बात की जानकारी थी किंतु न जाने, अचानक ही ज़ीनत  को क्या हुआ और वो रोने लगी। भूमि घबरा गयी, इसको क्या हुआ ?और उससे पूछा -क्या हुआ ?सुबह -सुबह इस तरह रोना ठीक नहीं ,तुम्हारे अंकल को पता चला तो डांटेंगे ,मुझे बात बताओ ! क्या हुआ है ?

तब वो बोली -बाजी ! सब मेरे पीछे पड़े हैं , कल मुझे डंडे से बहुत मारा। 

क्या ??उसकी बात सुनकर भूमि को आश्चर्य हुआ, कब ,किसने और क्यों मारा ?

 कल मैं यहां से गुजर रही थी, और मुझे देखते ही, इस चश्मे वाली की, दूसरी पड़ोसन ने, मुझे अपने पति से पिटवाया उसने मेरा डंडा ही छीन कर मुझे बहुत मारा। 

क्यों मारा ? क्या तुमने उन्हें कुछ नहीं कहा था ? क्योंकि भूमि को उस पर विश्वास नहीं हुआ क्योंकि भूमि पहले भी उसका वह रूप देख चुकी थी।

 इन लोगों ने, एक्का कर लिया है और कह रहे हैं - इसको इस मोहल्ले में नहीं आने देंगे और फिर वह अपनी डंडे की चोट दिखाने लगी। भूमि को उसकी चोट देखकर बहुत दुख हुआ और बोली -इतनी ठंड पड़ रही है ,तुझसे  काम नहीं होगा ,तू अपने घर चली जा और आराम कर ,अपने लिए दवाई भी ले जाना वरना ठंड में चोट में बहुत अकड़न होगी।  


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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