Zeenat [part 6]

'ज़ीनत ' कितना प्यारा नाम है ,उसका, श्रीमती गुप्ता के मुख से, उसके नाम का परिचय हुआ। भूमि ने उससे पहले उसका नाम जानने का प्रयास ही नहीं किया था। इसके माता-पिता ने, न जाने क्या सोचकर उसका यह नाम रखा होगा। यह उनके घर की शोभा रही होगी , इसके आने से उनके जीवन में खुशियां आई होंगी किंतु उसका जीवन, इस तरह से कैसे हो गया ? अनेक प्रश्न भूमि के मन में आते थे , उसके विषय में जानना चाहती थी किंतु अभी भी उसे मौका नहीं लगा था, कि वह उसके विषय में विस्तार से जान सके। फिर वह ऐसी क्यों है ?


 एक दिन अचानक ही , मोहल्ले में भूमि को कुछ शोरगुल सुनाई दिया। उसने घर से बाहर निकलकर देखा, मिसेज गुप्ता और 'ज़ीनत '' की लड़ाई हो रही थी, किस बात पर हो रही थी ?यह बात तो  मैं नहीं जानती, क्योंकि कई दिनों से वह मेरे घर ही नहीं आई थी। आज तो उसने, पुलिस की ड्रेस पहनी हुई थी , उसे देखकर मुझे आश्चर्य हो रहा था। इसे ये कपड़े इसे किसने दे दिए ? उसके हाथ में लाठी थी, जिस लाठी से वह उत्तेजित होकर, उन पर वार कर देना चाहती थी किंतु उन्होंने, अपने आगे एक कुर्सी लगा दी। 

मुझे आश्चर्य था, अभी कुछ दिन पहले तो बड़ी खुश थी , आज अचानक इसे क्या हो गया ? तभी भूमि अंदर से फोन उठा कर लाई और उसकी वीडियो बनानी आरंभ कर दी क्योंकि उसे लग रहा था -यहाँ 'ज़ीनत'  गलत है, लोगों ने, उसके विषय में, जो कुछ भी कहा था, वह सब सही था किंतु मेरे साथ तो इसका इस तरह का कोई व्यवहार नहीं था।

अब कुछ ही दिनों में ऐसा क्या हो गया? यही जानने के लिए,कुछ देर पश्चात भूमि ने मिसेज गुप्ता को फोन किया -हैलो ! क्या हुआ ?

  उनका जवाब आया -पता नहीं, यह 'पागल' ऐसी ही है, पता नहीं किस बात से मुझसे  चिढ़ गई है। अब मैं इधर -उधर देखती भी हूं ,तो उसे लगता है कि मैं उसे घूर रही हूं।

 यह कोई कम बड़ी बात नहीं थी, पड़ोसी होने के नाते ,मुझे उनसे हमदर्दी थी। एक कामवाली उन पर डंडे बरसाने का प्रयास कर रही थी हालांकि वह उसमें सफल नहीं हो पाई लेकिन यह तो गलत ही था। ऐसे समय में उसका यह रूप देखकर, भूमि भी चुपचाप अपने कमरे में आ गई और सोच रही थी -कभी मैंने इसके विषय में जानने को प्रयास नहीं किया आखिर यह ऐसा क्यों करती है ? क्या यह सच में ही' पागल' है या फिर पागल होने का अभिनय करती है।

 इस बात को भी तीन-चार दिन ही बीते ही थे, मैं छत पर खड़ी होकर, बाहर ऐसे ही देख रही थी, तभी वह मुझे आती  दिखलाई दी और मुझे देखते ही सीढ़ियों  से ऊपर चढ़ने लगी। मन ही मन मैंने  भी सोच लिया था, अब इसे  काम पर नहीं लगाऊंगी। 

मेरे पास आकर बोली - आंटी ! अब तो आपकी कामवाली नहीं आती।मुझे काम पर लगा लो !मैं गरीब हूँ ,मेरा आदमी भी नहीं है।  

हां, मैंने उसे हटा दिया है , मेरा संक्षिप्त जवाब था। 

क्या? कल से मैं आ जाऊं ,

 नहीं, तुम रहने दो !

 मेरी बात सुनकर जैसे उसे बहुत दुख हुआ और बोली -जब सबको जरूरत होती है, तो मुझको लगा लेते हैं और फिर पूछते भी नहीं है, मुझे उसके इन शब्दों में दर्द नजर आया और उससे कहा -देखो !तुम लड़ती  बहुत हो, तुम्हारे अंकल यह बर्दाश्त नहीं करेंगे। तुमने उन आंटी के साथ कैसा व्यवहार किया है ? यदि उनके चोट लग जाती , तो क्या होता ?

 पता नहीं क्यों मुझे उन पर बहुत गुस्सा आ गया था, वो कभी भी आराम से नहीं बोलती  -कुत्ते की तरह भों कती है, उसके ऐसे शब्द सुनकर मुझे बुरा लगा किंतु मैं चुप रही और उसे चुपचाप चाय के साथ, दो रोटी बना कर दे दी । पेट भरते ही वो बोली -आंटी मुझे बुला लो ! मैं तुम्हारा सारा काम कर दूंगी। 

नहीं, तुम चिल्लाओगी, तुम्हारे अंकल मुझे भी डांटेंगे। 

नहीं करूंगी। 

न जाने क्यों ?उसे देखकर  भूमि को उस पर तरस आ गया और बोली-तुमने अभी दो  दिन पहले मोहल्ले में कांड किया है ,आ जाना, किंतु किसी भी तरह का शोर नहीं होना चाहिए।

अगले दिन वो आई चुपचाप काम किया और चली गयी मेरे मन में जिज्ञाषा थी कि आखिर उसने उनके साथ ऐसा क्यों किया ?चाहते हुए भी नहीं पूछा। 

कुछ देर पश्चात ही ,मिसेज गुप्ता का फोन आ गया ,आपने उसे अपने घर बुला लिया,आपने देखा नहीं उसने मेरे साथ कैसा व्यवहार किया ?

मैंने बुलाया नहीं किन्तु ख़ुशामद कर रही थी ,ग़रीब हूँ ,पति नहीं है इंसानियत के नाते बुला तो लिया किन्तु यहाँ ऐसा कुछ करेगी तो भगा दूंगी। 

वो सबसे ऐसा ही करती है ,मैं इसकी पुलिस में रिपोर्ट करूंगी किन्तु कोई भी मेरे साथ चलने को तैयार नहीं ,तुम साथ चलोगी। 

मैं कभी पुलिस थाने नहीं गयी किन्तु मुझे उसका व्यवहार गलत लगा इसलिए आपको वीडियो भेज दिया देख लेना कहकर भूमि  कट कर दिया जैसे यहाँ पर उसकी ज़िम्मेदारी समाप्त होती है। 

अगले दिन भी' ज़ीनत ' आई ,काम किया भोजन किया और चली गयी उसके जाने के पश्चात मैंने सुदीप से कहा -देखो !लोग इससे अपने घरों में काम करवाते हैं और पैसे भी न के बराबर देते हैं ,ये कुछ कहती नहीं चुपचाप लेकर चल देती है किन्तु परसों मारपीट पर बात आ गयी तो अवश्य ही कुछ तो हुआ होगा। 

सुदीप बोले - इसे खाने से मतलब है ,इसे दो वक़्त की रोटी मिल जाये और चाय मिल जाये इसे और कुछ नहीं चाहिए। तुमने देखा नहीं ,इसे जो दो चार पैसे मिलते हैं ,उन्हें भी ये बता रही थी -किसी के घर रख देती है। 

आपको कैसे मालूम ?भूमि ने पूछा।

जब वो तुमसे बात कर रही थी ,मैंने सुना था ,तुम उसकी बात पर ध्यान नहीं देती हो। 

सुनती तो हूँ किन्तु कुछ बातें मुझे समझ नहीं आती ,इसीलिए हाँ ,हूँ कर देती हूँ। 

अभी मैं काम से ही निपटी थी ,मिसेज गुप्ता का मैसेज आया आज भी वो आई है ,आपने उसे भगाया नहीं। 

मैसेज देखकर ,भूमि ने नजरअंदाज करने का प्रयास किया किन्तु मन नहीं माना और उनसे मैसेज से ही पूछा -क्या आपने उसकी रिपोर्ट की ?

कोई साथ जाना नहीं चाहता ,तुम भी नहीं जा रहीं उन्होंने उलाहना दिया। 

मैंने पड़ोसी होने के नाते अपना फ़र्ज निभाया ,आपको उसकी वीडियो भेजी और मैं साथ जा तो नहीं सकती इसीलिए सुझाव दे रही हूँ। सौ नंबर पर फोन कीजिये।   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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