Zeenat [part 11]

क्या झूठ है ,क्या सच है ?भूमि इसका निर्णय नहीं कर पा रही थी ,उसकी कामवाली ने उनसे कुछ ही दूरी पर रहने वाले उनके पड़ोसी 'खन्ना' पर इल्ज़ाम लगाया था कि उन्होंने उसके साथ गलत हरक़तें की हैं। किन्तु भूमि की जानकारी में, उसके वो पड़ोसी बड़े ही सभ्य और संस्कारी परिवार लगता था। उनकी एक सुंदर पत्नी थी ,तब ये उन पर ,इस तरह कैसे इल्ज़ाम लगा सकती है ? तब भूमि के मन में अनेक विचार आये और वो अपने आपसे ही तर्क -वितर्क के झूले में झूलने लगी। 

उसे स्मरण हुआ ,ज़ीनत भी तो झूठ बोल सकती है ,उसे वो वाक्या स्मरण हो आया,जब ज़ीनत ने उससे भी झूठ बोला था और जब इसका झूठ पकड़ा गया। तब ये मुस्कुराने लगी थी और आगे बढ़कर बोली -चलो !आंटी !काम करवा लो ! 


भूमि छोटी सी बात है ,सोचकर अपने कार्य में व्यस्त हो गयी। कुछ देर पश्चात तब' ज़ीनत,' भूमि' से बोली - मुझे इधर की बात उधर,उधर की बात इधर अच्छी नहीं लगती ,आंटी !तुम्हें काम करवाना हो तो करवा लो !तुमने अपनी सास से क्यों पूछा ? वो तो मुझे  पहले से ही अच्छी नहीं लगती। 

क्या मतलब ? तूने ही मुझसे झूठ क्यों बोला ?वो मेरी सास हैं ,हमारा एक ही घर है ,वोमुझसे बड़ी हैं ,जब वो कुछ कहेंगी या पूछेंगी ,तो बताना ही होगा। ये हमारे घर की बात है,कहकर भूमि एकदम से चुप हो गयी ,उसे ड़र था कहीं ये लड़ने न लगे या चिल्लाये ! जिस तरह पड़ोसियों के यहाँ से लड़कर आती थी। 

अब इस समय भूमि के मन में ,अनेक विचार आ जा रहे थे ,भूमि को, जैसे घबराहट सी होने लगी उसने पानी पिया। गहरी -गहरी सांसें लीं , ''ज़ीनत '' के सामने तो किसी से कुछ नहीं पूछ सकती थी। तब उससे कहा -अब तुम जाओ ! कोई काम भी नहीं है,यहां कब तक बैठी रहोगी ?

 किन्तु वो बैठी रही, भूमि समझ गयी ,चाय की तो जैसे उसे लत लगी है। कितनी भी बार चाय पी सकती है ?तब उसने ,'ज़ीनत ' को चाय दी। भूमि उससे सिर्फ घर की सफाई ही करवाती ,रसोईघर में सिर्फ वो पोछा लगाने के लिए ही जाती है। 

यह यहां काम करने आती है और तुम इसकी ख़ातिरदारी में लग जाती हो ,ये अपने घर में बनाये -खाये।  ,अक़्सर भूमि को इस तरह काम करते देखकर सुदीप से ,उसे डांट पड़ जाती । ये तुम्हारी नौकर है या फिर तुम इसकी नौकर हो। 

आप जानते हैं ,मैं इसे अपनी रसोई में नहीं आने दूंगी ,तब  मजबूरी में इसे चाय बनाकर मुझे ही देनी होगी।   इससे और भी तो काम करवाया करो !

इतना परहेज़ तो भूमि भी उससे करती थी ,क्योंकि वो जानती थी ,ये प्रतिदिन नहाती नहीं है ,उसने उसे कुछ गलत  काम करते देखा तो नहीं किन्तु मन में यह गांठ बनी हुई है ,न जाने कहाँ से आ रही होगी ?ऐसा हुआ तो... उसे चाय पीते देख ,भूमि ने उससे पूछा -अब तुम्हारा दर्द कैसा है ?

वो बोली -दवाई खाई थी, अब मुझे बहुत आराम है।

 तब भूमि को,अचानक ही, उस पर क्रोध आया और उससे कहा -जब वो , तुझे छेड़ता था, तो तू उसके घर काम क्यों करती थी ? तुझे मना करना चाहिए था, उसे तभी डांटती ,तूने मना क्यों नहीं किया ? क्या तेरी भी इच्छा होती थी ? वह चुपचाप उठी और जाने लगी।

 भूमि कुछ समझ नहीं पा रही थी, इस पर मेरी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ! किंतु यह बात उसे हजम भी नहीं हो रही थी। वह जानना चाहती थी, क्या यह बात सही हो सकती है ? ''ज़ीनत '' के चले जाने के पश्चात तुरंत ही भूमि ने मिसेज गुप्ता को फोन लगाया। 

उन्होंने फोन तो तुरंत ही उठा लिया किंतु साथ ही उलाहना भी दिया, आज तुमने कैसे फोन कर लिया ? तुम तो कभी फोन नहीं करती हो। उसका आना-जाना भी तुमने, बंद नहीं किया।

 वह बाद की बात है, भूमि असमंजस में घिरी हुई थी, क्या मैं, इनसे यह बात पूछूं या नहीं ?

अब बताओगी भी,,, फोन किस लिए किया था ?  

भूमि सोच रही थी ,क्या कहूं ?कुछ समझ नहीं आ रहा है मोहल्ले की बात है, किन्तु जिज्ञासा बलवती हुई जा रही थी किन्तु दिमाग़ कह रहा था ,कहीं ये बात ज़्यादा न फैल ,उन लोगों को पता चल गया तो क्या सोचेंगे ? -हमें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ भी हो सकता है ,पता नहीं, इस बात का कोई क्या अर्थ निकाले ? विचारों का बवंडर बढ़ता जा रहा था किन्तु जिज्ञासा प्रबल थी और वो जीत गयी। सच्चाई जानने की इच्छुक जिज्ञासा !तब भूमि बोली -आप किसी से कहोगी तो नहीं , मैं आपसे कुछ पूछना चाहती हूं। 

क्या पूछना चाहती हो ? भूमि को घबराहट थी, यह ऐसी ही है,'मुँहफट 'भी कह सकते हैं। हो सकता है, यह सारे मोहल्ले में इस बात का शोर मचा दे ! तब उसने'ज़ीनत '' का नाम न लेते हुए , मिसेज गुप्ता से पूछा  -मिस्टर खन्ना ! का चरित्र कैसा है ?

क्यों, क्या तुम्हें कुछ पता चला है ?उन्होंने तुरंत ही प्रश्न दाग़ दिया। 

पता तो चला है , वही मैं आपसे जानना चाहती हूं क्योंकि आप लोग तो बहुत पहले से यहां रह रहे हैं। आपको लोगों की ज्यादा जान -पहचान भी है। 

भूमि के इतना कहना ही था , तुरंत ही मिसेज गुप्ता ने पूछा -क्या 'ज़ीनत '' ने कुछ बताया ?

नहीं, ऐसा तो कुछ नहीं है, किंतु हां मुझे आपके पड़ोसी खन्ना साहब के विषय में कुछ पता चला है।

 तुम्हें कहां से पता चलेगा ? तुम कहीं आती -जाती तो हो नहीं, शायद वो समझ गयी थीं ,तब बिना भूमिका बांधे,बिना लग -लपेट के वो बोलीं - वैसे ये ऐसा ही है। 

क्या मतलब ?

भूमि की सोच के मुताबिक उन्होंने स्पष्ट रूप से संपूर्ण बात बताई ,वैसे वो, उनसे पूछने में इतना सोच रही थी किन्तु उन्होंने कितनी सरलता से सब कह दिया -' इसका बाप भी ऐसा ही था, घर में जो भी काम वाली आती थी उसी पर नजर रहती थी। उसका बेटा भी,ऐसा ही है।  न जाने, किस-किस को साथ लिए घूमता है ?

 क्या आप यह सब बातें पहले से जानती हैं ?

जानती हूं, तो क्या हो जाएगा ? मेरे कहे से तो वह सुधरेगा नहीं, जिसका बाप नहीं सुधरा उसका बेटा क्या सुधरेगा ?बेचारी !आंटी ! अंकल की करतूतों से  बहुत परेशान थीं। 

 किंतु यह परिवार तो.... बहुत अच्छा परिवार माना जाता है। 

सब बाहरी दिखावा है, शराब पीना, लड़की बाजी करना, भई बड़े लोग हैं ,बड़े-बड़े काम करते हैं, कह कर वह व्यंग्य से हंसी जैसे उनके लिए यह मामूली बात थी। भूमि को अभी भी अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था , बाहरी तौर पर इतना सभ्य परिवार दिखता है। लोग ऐसे भी हो सकते हैं। 

तभी मिसेज गुप्ता बोलीं -शराब पीकर इनका कुछ पता नहीं चलता , तभी तो उसकी पत्नी ने, अपनी बेटियों का कम उम्र में ही जल्दी-जल्दी विवाह कर करवा दिया।नशे में ,आदमी को औरत !औरत ही दिखेगी फिर चाहे उसके सामने उसकी अपनी ही बेटी क्यों न  खड़ी हो ?

 क्या ? इनकी पत्नी भी, यह सब जानती है ?

जानेगी , क्यों नहीं जानेगी ? उसी घर में जो रहती है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post