Khoobsurat [part 124 ]

इंस्पेक्टर कुणाल, अपनी गाड़ी से एक लड़की को बाहर निकालते हैं, वह लड़की थोड़ी थकी सी लग रही थी, बड़ी ही डरी और सहमी सी भी लग रही थी।  वे उस लड़की को लेकर सीधे, इंस्पेक्टर तेवतिया के पास आए थे। कुणाल के साथ उस लड़की को देखकर, इंस्पेक्टर तेवतिया ने पूछा - यह लड़की कौन है ?इसे यहाँ क्यों लाये हैं ?

जिसकी हमें बरसों से तलाश थी, कुणाल ने यह कहते हुए चांदनी मैडम से कहा - इन्हें अंदर लेकर जाओ !और  इशारा किया पूछताछ करो ! तब इंस्पेक्टर से बोले -आपके थाने का ही केस है इसीलिए यहां लाया हूँ। 


सब इंस्पेक्टर चांदनी ने, कुणाल की तरफ देखा आज तो वो और भी स्मार्ट लग रहे हैं ,उन्हें देखकर वो  मुस्कुराई और सिर खुजलाते हुए पूछा -सर ! यह कौन है ?उसकी ये हरकत देखकर ,इंस्पेक्टर तेवतिया और अन्य लोग भी मुस्कुरा दिए ,वे सभी जानते थे,चांदनी मन ही मन कुणाल को पसंद करती है ,दोनों ही  कुंवारे हैं किन्तु कुणाल जानते हुए भी अनजान बना रहता हैं।न जाने क्या बाधा है ?वे समझकर भी नहीं समझ पा रहे हैं।   

ये अपना परिचय स्वयं देंगी, यह कहकर इंस्पेक्टर रहस्यमय तरीके से मुस्कुराया।

सब इंस्पेक्टर चांदनी, उस लड़की को साथ लेकर थाने में अंदर आई और उससे पूछा - तुम कौन हो ? किंतु वह लड़की बहुत ही डरी हुई सी लग रही थी, उसकी हालत देखकर, चांदनी ने उसे पानी दिया और पूछा- अब तुम ठीक हो या तुम्हारे लिए चाय मंगवाऊँ । 

नहीं, मैं ठीक हूं, मुझे यहाँ क्यों लाया गया है ?उस लड़की ने जवाब देने के साथ ही प्रश्न किया । 

तुम बहुत परेशान थीं ,शायद किसी चीज को देखकर डर गयीं थीं ,इसीलिए इंस्पेक्टर साहब !तुम्हें यहाँ ले आये। शायद तुम बेहोश हो गयीं थीं।  अब तो मुझे अपना परिचय दोगी ,ताकि तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दिया जाये, सब इंस्पेक्टर चांदनी ने पूछा। 

जी, मेरा नाम' रोहिणी' है। 

अच्छा, कहां रहती हो ? पहले तो वह चुप हो गई फिर बोली - मैं इसी शहर में रहती हूँ। 

किन्तु कहाँ ?जगह क्या है ?

इस प्रश्न पर वह फिर से चुप हो गयी ,बताती क्यों नहीं ?किन्तु तब भी उसने कुछ नहीं बताया। 

तब सब इंस्पेक्टर चांदनी ,कुणाल के समीप जाती है ,वहां पहले से ही, इंस्पेक्टर तेवतिया और उनकी टीम के लोग उनके साथ में बैठे हुए थे. तब चांदनी ने उनसे पूछा -सर ! इस लड़की को आप क्यों उठाकर  ले आये हैं और यह कौन है ?क्या इसने कोई कांड किया है ?

क्या उसने अपने विषय में कुछ नहीं बताया ? इंस्पेक्टर कुणाल ने पूछा। 

उसने अपना नाम 'रोहिणी' बताया है, और यही की रहने वाली है लेकिन जब मैं उससे पूछ रही हूं कि  किस जगह पर रहती हो तो उस जगह का नाम नहीं बता रही है। यह आपको कहां मिली ?

तब इंस्पेक्टर कुणाल बोले - अभी उससे पूछती रहो !अवश्य बताएगी ,उन्होंने विश्वास से कहा। चांदनी चली गयी। उसके जाने के पश्चात ,कुणाल ने बताया -इन पर मेरी कई महीनो से नजर थी, मैंने इसका पीछा भी किया। मुझे लगता है ,ये नाटक कर रही है ,जब इसे पता चला कि कोई इसका पीछा  कर रहा है , तब इसने बेहोश होने का नाटक किया। मैं इसे यहीं  उठा लाया। 

वह बात तो ठीक है, किंतु हमें यह तो बताइए, कि यह कौन है ? और आप इसका पीछा क्यों कर रहे थे ?

इंस्पेक्टर साहब ! अब आपको बादाम खाने की आवश्यकता है , आपको ध्यान है, हम कल्याणी जी के यहां गए थे , तब हमारा परिचय एक लड़की से हुआ था, तब कल्याणी जी ने उसका नाम 'रोहिणी' बताया था। 

अरे हां हां याद आया, तो क्या यह वही 'रोहिणी 'है ?

क्या आपने उसे ध्यान से नहीं देखा था ? महीनों हो गए, एक पल के लिए ही तो देखा था ,चेहरा इतना ध्यान कहां रहता है ? किंतु आपने यह कैसे जाना? कि यह वही लड़की है। 

सर ! नाम वही है, किंतु लड़की वह नहीं है। 

यह आप क्या पहेलियां बुझा रहे हैं ? मैं कुछ समझा नहीं। 

देखिए !आपके थाने का मामला है , आपके शहर का मामला है ,इसमें मैं, ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर सकता।  आप स्वयं की पता लगाइये  कि आखिर यह लड़की कौन है और उस बगीचे में क्या करने गई थी ? आपके लिए एक और बात बताता हूं, हंसते हुए कुणाल ने कहा। 

वह क्या है ?

यह भी एक कलाकार ही है। 

क्या ? आश्चर्य से इंस्पेक्टर तेवतिया अपनी कुर्सी से उछल पड़े। 

जी हां, जब मैं इसका पीछा कर रहा था, तब मैंने इसके हाथ में कैनवास देखा था किंतु या तो इसे पता चल गया या फिर इसका उद्देश्य वहां जाने का ही था, यह एक बाग में चली गई और वहां से चिल्लाते हुए -वापस आई ,खून ! खून !

क्या फिर से किसी का खून हो गया ?

 नहीं, मैंने जांच करवाई है , बाकी की कहानी यही बताएगी या मैं ही बताऊं पहले तो आप इससे यही पूछ लीजिए कि यह कहां रहती है ?

अभी तो आपने बताया, इसे हमने कहाँ देखा था ? कल्याणी जी के घर में ही रहती होगी।

 वह तो हम सोच रहे हैं, यह क्या बताती है ? इसके  मुंह से सुनिए !

तब तक सब इंस्पेक्टर चांदनी भी, उस लड़की के पास जाकर दोबारा पूछताछ कर रही थी और उससे बोली -तुम उस बगीचे में क्या करने गई थीं ?अबकी बार भी वह लड़की चुप रही, तब कड़कते हुए स्वर में चांदनी ने कहा  -यदि तुम मुझे ठीक से नहीं बताओगी तो मैं ,तुम्हें यही लॉकअप में बंद कर दूंगी। चांदनी के इतना कहते ही, उस लड़की पर जैसे असर हुआ और वह बोली - मैं उस बगीचे में, चित्रकारी करने के लिए गई थी। 

फिर क्या हुआ ?उसे घूरते हुए बोली। 

 न जाने क्यों मुझे डर लगा, ऐसा लगा, जैसे कोई मुझे घूर रहा है या मेरा पीछा कर रहा है , मुझे वहां खून ही खून नजर आया कहते हुए वह कांपने लगी और बोली -मुझे मेरी कोठी पर छोड़ आओ !

इतनी देर से वही तो पूछ रही हूं , तुम कहां रहती हो ?

विजयबाग़ में जो कल्याणी जी की कोठी है ,मैं वहीं रहती हूं। 

कल्याणी जी से तुम्हारा क्या रिश्ता है ? वह चुपचाप इधर-उधर देखने लगी और बोली -मैं उन्हीं की रिश्तेदार हूं। 

यह सब सूचना सब इंस्पेक्टर चांदनी ने , इंस्पेक्टर कुणाल और तेवतिया को दी। तब कुणाल इंस्पेक्टर तेवतिया से बोला -कल्याणी जी ने हमें जिस रोहिणी से मिलवाया था, यह वह नहीं है। आओ, चलो ! उसे छोड़कर आते हैं यह कहते हुए वे उठ खड़े हुए। इस समय इंस्पेक्टर तेवतिया, कुणाल के किसी भी बात को समझने में असमर्थ थे कि वो करना क्या चाहते हैं ? 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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