Tum saath ho

मेरी हर' आरज़ू' में तुम हो,

ख्वाबों, खयालों में तुम हो। 

मेरी धड़कन, हर सांस में,

 मेरी रूह की आवाज में,

 तुम हो, सिर्फ तुम ही हो।

मेरी हर ज़रूरत में तुम हो। 

मेहरबाँ तुम हो ,नादाँ मैं हूँ।

मेरे प्रेम की फुहार तुम हो। 

मेरे अश्क़ों की पुकार तुम हो।

मेरे इर्द -गिर्द मंडराता एहसास तुम हो।  

 ख़्यालों की उड़ती बयार तुम हो।

मेरी हर मुस्कान में, विश्वास तुम हो।  

तुम्हारा साथ है, तो जी रही हूं, मैं !

तुम्हारा साथ मेरे हर अंदाज में है। 

सामने न, होकर भी साथ हो, मेरे ,

बस,यही ख्याल !आभास मेरे साथ है। 

उम्र भर साथ निभाया,आगे भी निभाना,

माना कि तुम सबके हो ! ख़ुदा !

लगता,मेरी हर साँस में,तुम साथ हो'' मेरे !

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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