तुषार ,उस स्थान से, ऐसे डरकर भागा,उसने फिर मुड़कर भी नहीं देखा। कपिल अब केेसा है या कपिल को क्या हुआ था ?उसने यह जानने का प्रयास भी नहीं किया। घर जाकर पहले तो अपने डर और अपनी धड़कनों पर नियंत्रण किया। तब जाकर उसने वो लिफाफा खोलकर देखा ,जिसमें एक चिट्ठी थी ,उसमें वही लाइनें लिखी हुई थीं -तुम मुझे बचा लो !मेरी सहायता करो !
तुषार शीघ्रता से बाहर की तरफ भागा और अपनी मम्मी को पुकारा -मम्मी कहाँ हो ?
क्या हुआ ?तुम स्कूल से आ गए और बताया भी नहीं।
हाँ ,अभी आया हूँ ,कहते हुए आगे बढ़ा।
तभी उसे देखकर शारदा जी बोलीं -अभी तक कपड़े भी नहीं बदले,अपनी माँ के सवालों से परेशान हो , तुषार ने तो जैसे, उनकी बातों पर ध्यान ही नहीं दिया ,तब वो बोला - मम्मी, देखो !मेरे नाम एक चिट्ठी आई है।
चिट्ठी !अविश्वास से उन्होंने उसकी तरफ पलटकर देखा ,किसने भेजी है ?आजकल फोन का जमाना है, तुम्हें कौन पत्र लिखने लगा? हँसते हुए ,उन्होंने तुषार की तरफ देखा ,वो पहले ही एक पत्र लिए हुए खड़ा था। उसका चिंतित चेहरा देखकर, उन्होंने अपनी हंसी रोकी और बोलीं -मुझे दिखाओ ! इस कागज़ में क्या लिखा है ? कागज में लिखे शब्दों को पढ़कर वह भी चौंक गई और सोचने लगी- यह किसने भेजा होगा ? लेकिन उस लिफाफे पर कोई भी मोहर भी नहीं थी ? न ही किसी स्थान का नाम लिखा हुआ था। चिंतित स्वर में बोलीं -अच्छा, तुम जाकर पहले अपने कपड़े बदल लो ! और खाना खा लेना, मैं अभी कहीं जा रही हूं कहते हुए वो तैयार होने लगी, और घर से बाहर निकल गईं।
पंडित जी ! आप कहां हैं ? शारदा जी ने मंदिर में प्रवेश किया।
उनकी आवाज सुनकर पंडित जी बाहर आए, और बोले -यह पूजा का समय नहीं है, तुम इस समय कैसे आई हो ?
परेशान होते हुए , वो बोलीं - मैं पूजा के लिए नहीं आई हूं, मैं आपसे ही मिलने आई हूं, कहते हुए पंडित जी के समीप आईं और पंडित जी को वह कागज दिखाया।
ये क्या है ?कहते हुए , जैसे ही पंडित जी ने उस कागज को छुआ, वह कागज जलने लगा,उन्होंने तुरंत ही उसे झटककर फेंका ,इस घटना से पंडित जी ने भी घबराकर पूछा - यह क्या था ?
यही तो मैं आपसे पूछने आई हूं, मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है,मैं क्या करूं ? कहते हुए ,उन्होंने सारी कहानी पंडित जी को बता दी, शारदा जी की बात सुनकर पंडित जी थोड़े चिंतित हुए और अपने आसन पर बैठकर बोले -यह बात तो स्पष्ट है ,कि कोई तुम्हारे बेटे से सहायता मांग रहा है ,वह बार-बार उसे पुकार रहा है। 'यह तो विधि का विधान है, जिसके लिए तय किया जाता है, वह कार्य उसे ही करना होता है, लेकिन यह नहीं पता ,उससे कौन मदद मांग रहा है और क्यों ? तुमने उस बच्चे से पूछा -वह कभी ऐसे किसी गांव में गया था या नहीं।
पंडित जी !आप कैसी बातें कर रहे हैं ? वह तो क्या, हम भी किसी गांव में नहीं गए हैं, सिर्फ मेरे पति ही किसी गांव से संबंधित है और जब से पहले पढ़ाई उसके पश्चात यहां नौकरी के सिलसिले में आए हैं ,तब से वे भी कभी अपने गांव नहीं गए हैं।
हो सकता है ,तुम्हारे पति का कोई जानने वाला हो, उन्हीं के परिवार का कोई सदस्य हो। तुम्हें अपने पति से बात करनी चाहिए।
अभी मैंने ,इस विषय में, अपने पति को कुछ भी नहीं बताया है, उनसे बात करके भी क्या हो जाता ? वो भी बरसों से, कभी अपने गांव नहीं गए हैं, यदि वो जो कोई भी है ,मेरे पति के परिवार से ही हैं , तो फिर ऐसे सपने मेरे बेटे को ही ,क्यों आ रहे हैं ? मेरे पति को क्यों नहीं आ रहे ?
अभी तो तुमसे बताया,'' यह विधि का विधान है, हर इंसान का जन्म किसी न किसी उद्देश्य के लिए हुआ होता है'' हो सकता है ,वह कार्य तुम्हारे बेटे के माध्यम से होना है ,लेकिन इस पत्र को देखकर, इतना तो मैं अंदाजा लगा सकता हूं , कि यह पत्र पवित्र नहीं था किसी बुरी आत्मा का संदेश था ,जो मंदिर में आते ही यहाँ की ऊर्जा के कारण भस्म हो गया।
मतलब! आप कहना क्या चाहते हैं ?
जिस किसी ने भी यह पत्र भेजा है ,वह कोई आत्मा है ,और वो भी पवित्र नहीं है, इसे देखकर लग रहा है वह जो भी इंसान है, पिशाच योनि को प्राप्त हो चुका है।
यह आप क्या कह रहे हैं? आश्चर्य से शारदा जी ने पूछा -क्या ये संदेश किसी भूत या पिशाच की तरफ से आया है।
सही कह रहा हूं, तुम्हारे बेटे पर, किसी बुरी आत्मा का साया है, वैसे तो वो, उसका कोई अहित नहीं चाहती है ,यदि चाहती तो अब तक उसका अहित कर दिया होता। हो सकता है, वह अपनी मुक्ति चाहती हो और यह भी हो सकता है वह इस बहाने से अपना बदला लेना चाहती हो।
तब पंडित जी इसका कोई उपाय तो बताइए ! मेरा बेटा तो, बहुत दिनों से परेशान है, रातों को डर कर उठ बैठता है। तब बताइए! मैं क्या कर सकती हूं ?
मुझे थोड़ी विधि करनी होगी , एकदम से मैं, यह नहीं कह सकता, बात क्या है ? ध्यान लगाना होगा।
तब पंडित जी, आप कब जवाब देंगे ?
थोड़ा समय तो लगता ही है, पंडित जी ने सांत्वना देते हुए कहा।
बच्चों के इम्तिहान सिर पर हैं, बेटा परेशान रहता है, और आज तो यह पत्र, उसके किसी दोस्त ने उसे दिया है और वह कह रहा था - मम्मी ,अचानक मेरे दोस्त का चेहरा ही बदल गया।
मैं समझ गया, उस शक्ति की ऊर्जा, उसके आसपास ही भटक रही है, वह उसे अपने पास बुलाना चाहती है वह किसी जगह फंसी हुई लगती है , हो सकता है ,अपनी मुक्ति के लिए या वहां से निकलने के लिए , तुम्हारे बेटे को माध्यम बनाना चाहती है। मैं थोड़े उपाय करूंगा, उससे पहले तब तक मैं तुम्हें एक अभिमंत्रित ताबीज देता हूं। उसे तुम अपने बेटे के, बाजू में बांध देना। वह शक्ति बहुत शक्तिशाली है , तुम इतना समझ सकती हो कि वह, यहां नहीं आ सकती, किंतु उसकी शक्तियां इतनी ज्यादा हैं कि वह अपनी शक्तियों के माध्यम से, तुम्हारे बेटे से संपर्क कर रहा है। तुम यह सोचो ! कि वह कितना खतरनाक होगा ?
ठीक है, पंडित जी ! अभी मैं जाती हूं , किंतु मैं कब आऊं या फिर आप मुझे फोन कर दीजिएगा।
हां यह सही रहेगा, जब वह विधि पूरी हो जाएगी तब मैं आपको फोन कर दूंगा आप आ जाइएगा।
आपकी बहुत-बहुत मेहरबानी ! और शीघ्र से शीघ्र मेरे बेटे को इस परेशानी से उबारिये।
ताबीज लेकर, शारदा जी घर पर आती हैं और आते ही उसे अपने बेटे के हाथ पर बांध देती हैं, और उससे कहती हैं -अब तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी किन्तु तुषार की आंखों के सामने, बार-बार कपिल का वही चेहरा आ रहा था, अब तो वह कपिल के समीप जाने से भी डर रहा था। उसके मन में जिज्ञासा थी कि कपिल ने ऐसा क्यों किया ?लेकिन डर के कारण उसने, उससे कुछ भी नहीं पूछा।
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