Qabr ki chitthiyan [part 70]

शारदा जी को लग रहा था ,उनका बेटा, शायद पढ़ाई के मानसिक दबाब के कारण ऐसी हरकतें कर रहा है किन्तु जब उनकी पड़ोसन ने उसकी हरकतों को सामान्य नहीं बताया तब उन्हें भी चिंता हो गयी ,कहीं  ये सही तो नहीं कह रहीं हैं। इसीलिए वे कामिनी जी के कहेनुसार तुषार से पूछती हैं -वह कहाँ घूमने गया था? किन्तु उनके प्रश्न को सुनकर तुषार समझ नहीं पाता ,मम्मी ! क्या कहना चाहती हैं ?


मेरे कहने का मतलब है - कहीं इधर-उधर कोई ऐसी जगह तो नहीं गया था, जहां पर कोई जादू- टोना करता है, जैसी कोई नींबू पड़ा है या कोई दाल वगैरह या कोई घरेलू सामान दिख जाए मिर्ची वगैरह , वह ठीक से तुषार को समझा भी नहीं पा रही थीं  क्योंकि वो स्वयं भी, इन चीजों पर विश्वास नहीं करती थी, किंतु कामिनी जी के कहने पर अब बेटे की भलाई के लिए यह सब सोच रही थी। 

मम्मी ! ऐसा कुछ भी नहीं है , मैं कहीं भी नहीं गया हूं ,मैं जब भी जाता हूं अपने सपने में ही जाता हूं और वह ऐसी जगह है, वहां जाने से हम अपने आपको रोकना चाहकर भी ,रोक नहीं पाते ,सपना तो अपने आप ही आ जाता है  और वहां जाकर ड़र के सिवा कुछ महसूस नहीं होता। 

 अच्छा !ठीक है ,तुम अब अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो ! अब आगे से ऐसी कोई बात हो तो मुझे, अवश्य बताना, कोई ऐसा डरावना सपना आए या कोई भी ऐसी बात....  जो तू फोन पर बता रहा था। ऐसा कोई संदेश आए तो मुझे बताना !अब शारदा जी, अपने बेटे के साथ हो रहीं घटनाओं के लिए थोड़ा गंभीर हो गई थीं। 

दो दिनों तक तुषार ने ऐसा कोई व्यवहार नहीं किया, जैसे वह पहले बता रहा था, और वह प्रतिदिन उससे पूछती थी- आज कोई बुरा सपना तो नहीं आया ,आज फोन पर कोई मैसेज तो नहीं आया, तुषार के इनकार करने पर मन ही मन सोचने लगीं -' चलो !अच्छा ही हुआ नजर उतारने  पर ही बात खत्म हो गई अवश्य ही किसी की नजर लगी होगी, यह सोचकर वो निश्चिंत हो गईं। 

तीसरे दिन तुषार को फिर से एक बहुत ही डरावना सपना आया जिसे देखकर तुषार डर गया और मम्मी ! मम्मी ! चिल्लाया। 

शारदा जी ने आकर पूछा -क्या हुआ ? ऐसे ही कोई डरावना सपना था।

 तूने अपने सपने मैं क्या देखा ? मैंने देखा, मैं किसी जंगल में भटक गया हूं , मैं बहुत देर से रास्ता ढूंढ रहा हूं लेकिन कोई भी रास्ता मुझे दिखाई नहीं दे रहा है ,जंगल  से भटकते हुए मैं एक गांव में पहुंच जाता हूं। 

उसकी यह बात सुनकर उन्होंने फिर से माथा पकड़ लिया और बोलीं - तुझे ये कौन सा गांव दिखता है ,तूने कभी उस गांव का नाम पढ़ा है ?

नहीं ,मैंने उसका कोई नाम नहीं पढा है लेकिन मुझे कोई गांव ही दिखता है जो जंगल के करीब है। 

फिर क्या हुआ ?

मैं कोई कहानी नहीं सुना रहा हूं, मैं अपना बुरा सपना सुना रहा हूं, नाराज होते हुए तुषार ने कहा। 

वही तो मैं तुझसे  सुनना चाह रही हूं, वही आवाज गूंज रही थी, तुम मेरी सहायता करोगे न....  मैं यहां फंसा हुआ हूं , मैं उस आवाज को ढूंढ रहा था, न जाने, वह आवाज कहां से आ रही थी ? इस आवाज के पीछे की कहानी क्या है ?मैं कुछ भी समझ नहीं पा रहा हूं। मैं उस आवाज़ को ढूंढते- ढूंढते अचानक एक पहाड़ पर पहुंच गया । पहाड़ की चोटी पर भी, वह आवाज मेरा पीछा कर रही थी किंतु वह आवाज देने वाला व्यक्ति मुझे कहीं भी नजर नहीं आ रहा था। जैसे ही मैं पीछे मुड़कर देखता हूं ,कई भयानक आदमी, मुझे मारने के लिए मेरे पीछे खड़े थे। मैं उनसे बचने का प्रयास करता हूं और दौड़ता हूं , किंतु दूसरी तरफ खाई थी, मैं चारों तरफ से घिर चुका था आगे बढ़ता हूं, तो खाई में जाता हूं और पीछे आता हूं तो उन राक्षसों के द्वारा मारा जाता हूं, उनसे बचते हुए मैं खाई में गिर गया। 

खाई में गिरने वाला स्वप्न तो अच्छा नहीं होता ,निराशा से, मन ही मन शारदा जी ने विचार किया। न जाने मेरे बेटे के साथ यह किस तरह की घटनाएं हो रही हैं ? क्या मुझे भी किसी पंडित जी से मिलना चाहिए पता तो लगाना चाहिए कि मेरे बच्चे को इस तरह के सपने क्यों आ रहे हैं ? यह सोचकर उन्होंने मन ही मन निश्चय किया कि अब वह अपनी बेटी की भलाई के लिए किसी से मिलेंगी। तब वह बोली -कोई बात नहीं तुम परेशान मत हो इसका भी हल निकल आएगा। अभी तुम आराम करो !

क्या आराम करूं ? डर के कारण अब तो मुझे नींद भी नहीं आएगी। 

जो अपने पापा के पास सो जाओ ! कह कर वो रसोई घर में गई, और अपने लिए कॉफी बनाने लगीं। न जाने क्या मुसीबत आन पड़ी है ,न जाने ये कैसे सपने हैं ?इनका राज़ क्या है ?क्या मुझे किसी पंडित से मिलना चाहिए ?बच्चे के भविष्य का सवाल है किसी न किसी से तो बात करनी ही होगी। मन ही मन निश्चय करके सो गयीं। अगले सामान्य दिनों की भांति वे सभी उठकर अपने -अपने कार्यों में व्यस्त हो गए। तुषार जब अपने स्कूल जा रहा था। तब उसे एक आदमी ने उसे एक लिफ़ाफा दिया। 

तुषार ने उसकी तरफ देखा और उससे पूछा -ये क्या है ? किन्तु इससे पहले ही ,वो वहां से चला गया। तुषार ने आस -पास उसे ढूंढा ,इतनी जल्दी वो कहाँ जा सकता है ?किन्तु आदमी कहीं भी दिखलाई नहीं दिया ,अब उसने वो लिफाफा, अपने बैग में रख लिया , स्कूल में जाकर खोलकर देखूंगा,ऐसा  इस लिफाफे में क्या है ? बाहर किसी का नाम भी नहीं था,न जाने किसने भेजा है ? स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया और लिफ़ाफे को भूल भी गया।  वो लिफ़ाफा बैग की जेब में पड़ा रहा। स्कूल से लौटते समय उसी स्थान पर उसे याद आया किसी ने उसे एक लिफाफा दिया था ,तब उसका मन किया ,उसे वहीँ खोलकर देख ले !तभी उसके दोस्त कपिल ने उसे पुकारा और पूछा -क्या वो कल अपने ट्यूशन पढ़ने गया था। 

नहीं जा पाया ,प्रोजेक्ट बनाने में इतना व्यस्त रहा ,भूल गया। 

एकदम से कपिल की आवाज अचानक बदल गयी और वहां एकदम से अँधेरा सा हो गया ,उसी बादल भरे साये में वो मुस्कुराया और बोला -  तू भूलता बहुत है ,उसकी पुतलियां एकाएक गायब हो गयीं। 

तुषार ड़र गया और एकदम से चिल्लाया - कपिल !


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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