Qabr ki chitthiyan [part 69]

तुषार को ,बार-बार वहम होता है कि कोई उसके कमरे में है, कभी उसे लगता है, कि फोन पर किसी ने, उसे कोई संदेश भेजा है ,जिसमें वह उससे मदद मांग रहा है किंतु जब उसने अपना फोन अपनी मम्मी को दिखाया तो उस पर कुछ भी नहीं लिखा हुआ था। उसे डरावने सपने आते हैं, वह उन सपनों से डरता है किसी गांव में, किसी जंगल में,भटकता रहता है लेकिन समझ नहीं पा रहा है कि उसके साथ क्या हो रहा है ? उसकी हरकतों के कारण, उसकी मम्मी 'शारदा जी' भी परेशान हैं, उन्हें लगता है , बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं है इसलिए इस तरह की बातें कर रहा है,वे उसे डांटती हैं किंतु तुषार भी नाराज हो जाता है, उसे लगता है। मेरी मां को मुझ पर विश्वास ही नहीं है। वह उसे समझाने का प्रयास करती हैं और उसे पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहती हैं। 


और क्या हो रहा है ? शारदा जी ! आजकल काफी व्यस्त रहने लगी हैं, दिखलाई नहीं देतीं, उनकी पड़ोसन कामिनी ने कहा। 

बच्चों की परीक्षाएं समीप ही आ रहीं हैं ,इसीलिए आजकल बच्चों को थोड़ा समय देने के साथ -साथ  समझाना भी पड़ता है ,इसीलिए इधर-उधर भी जाना नहीं हो रहा , आजकल वैसे ही बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं रहता है। सारा दिन फोन में जो लगे रहते हैं और न पढ़ने के, नए -नए बहाने जो ढूंढते हैं। 

यह तो आप सही कह रही हैं आजकल के बच्चे ऐसे ही होते जा रहे हैं उनसे ज्यादा तो हमें मेहनत करनी हो जाती है। वैसे शारदा जी, मैंने देखा है,आजकल आपका बेटा थोड़ा खोया- खोया सा रहता है, क्या कुछ बात है, पहले जैसा नहीं लग रहा है, पहले काफी चुलबुला सा था, अब थोड़ा गंभीर सा हो गया है। क्या कोई बात है ?

 नहीं, कोई विशेष बात नहीं है , यह सब पढ़ाई के दबाब के कारण हो रहा है ,अब तक आराम से रहे ,जब परीक्षाएं आईं तो अब पढ़ना बोझ लग रहा है इसीलिए परेशानी महसूस हो रही है, शारदा जी लापरवाही से बोलीं । 

बच्चों पर पढ़ाई का इतना दबाव भी नहीं होना चाहिए कि बच्चों का बचपन ही कहीं खो जाए। उसे समझाइये !पढ़ाई का और इम्तिहान का कोई दबाव न माने, वरना जो कुछ भी उसे आता है वह भी सब भूल जाएगा। 

 यह बात तो आप सही कह रही हैं। देखती हूं, इसी वजह से मैं भी उनके साथ लगी रहती हूं ''लेकिन अब कुछ दिनों से ऐसा लगता है, जैसे वह किसी बात को लेकर परेशान है ,'' हालांकि शारदा जी यह बात कामिनी जी को बताना नहीं चाहती थीं  किंतु अब मुंह पर आ ही गई है, तो बता ही देती हैं । 

कौन सी बात ? उन्होंने जिज्ञासावश पूछा। 

कुछ दिनों से तुषार कह रहा है -उसे डरावने सपने आ रहे हैं ? और वह अक्सर नींद में डर जाता है। 

अच्छा, यह तो बड़े आश्चर्य की बात है, कितने दिनों से ऐसा हो रहा है ?

उसे इसी परेशानी से जूझते हुए लगभग पंद्रह दिन हो गए हैं। 

तब आपने क्या किया ?

मैं क्या करती ? उसे समझाया -'ये सब उसका वहम है ,भगवान का नाम ले !कुछ नहीं होगा किन्तु अभी भी कई बार वो डरकर उठ जाता है। 

गंभीरता से सोचते हुए कामिनी जी ने पूछा - आपने उससे पूछा ,वह कहीं इधर-उधर तो नहीं गया था, किसी ऐसी जगह जहां कहीं तंत्र-मंत्र हुआ हो और उसका पैर पड़ गया हो।किसी रहस्य्मयी तरीके से बात करते हुए बोलीं - ''आप जानती नहीं है, हमारे एक रिश्तेदार हैं , उनका बेटा, ऐसे ही बच्चों के साथ, कहीं खेल रहा था, और किसी ने उस जगह के समीप ही टोटका किया हुआ था, उस पर उसका पैर पड़ गया। जब वो घर आया ,रात भर उसको डरावने सपने आते रहे और फिर उसे बुखार हो गया। घरवालों ने सोचा ,साधारण बुखार होगा इसलिए उसका इलाज कराया, किंतु वह उस इलाज से भी ठीक नहीं हुआ बल्कि उसकी तबीयत बिगड़ती  गयी। तब किसी ने उनसे कहा  -'हमें लगता है, कि इस पर किसी ''ऊपरी हवा का असर है''। 

तब उन्होंने क्या किया ? शारदा जी उनकी कहानी को सुनकर अचंभित हो गईं और बोली - आगे क्या हुआ ?

आगे क्या होना था ? उनकी पड़ोसन ने भी बताया, कि आप पंडित जी के पास जाइये  तब ही ,उसका हल निकलेगा। तब वह अपने मंदिर वाले पंडित जी के पास गई और उन्हें सारा हाल-चाल बताया तब पंडित जी ने ध्यान किया और बताया -''कि किसी टोटके पर उसका पैर आ गया था, उसी का प्रभाव है, तब पंडित जी ने, उन्हें एक ताबीज दिया जिसके कारण ,उस टोटके का असर समाप्त हुआ और तब जाकर उसका बुखार उतरा और अब वो पूर्णतः स्वस्थ है। आप भी, अपने तुषार से पूछियेगा, कहीं ऐसी किसी जगह तो नहीं चला गया।हो सकता है ,इसी कारण उसका पढ़ाई से मन भटक रहा हो।  

कामिनी जी! आज के समय में, आप यह कैसी बातें कर रही हैं, तंत्र-मंत्र के विषय में आजकल कौन जानता है और कौन पूछता है ?नहीं, इन चीजों को अब कोई मानता है उन्होंने अविश्वास से कहा।  

ऐसा नहीं है, ये चीजें भी होती हैं। इस सृष्टि में जो न हो, कम है ,मुझे मालूम था ,आप मेरी बातों पर विश्वास नहीं करेंगी किन्तु मैंने तो ये सब देखा है ,तब कैसे? देखभाल कर इन बातों को झुठला सकते हैं। हम लोग नहीं मानते हैं तो कोई भी नहीं मानता है, कुछ लोग ऐसे हैं, जो इन चीजों पर विश्वास करते हैं। यदि एक-दो दिन की परेशानी हो तो माना जा सकता है किन्तु लगातार ये परेशानी आ रही है ,तो अवश्य ही कुछ तो होगा। अच्छा ये सब छोड़िये !आपको, उसकी नजर उतारनी चाहिए जो हम सोच रहे हैं ,ऐसा न हो ,इससे ही काम बन जाये और यदि लगता है कि लगातार यह परेशानी बन रही है तो फिर आपको ,उसे किसी को दिखला देना चाहिए वरना बच्चे को आगे दिक्कत होगी। हो सकता है ,इम्तिहान के समय कोई और परेशानी बढ़  जाए और वह ठीक से इम्तिहान भी न दे पाए ,तब तो पूरा साल बर्बाद हो जाएगा इसीलिए पहले ही इसका इलाज़ ढूंढिए ! 

कामिनी जी की, उस आखिरी लाइन ने, शारदा जी पर असर किया , तब वो बोलीं  -ठीक है, आज मैं उसकी नजर उतारकर देखती हूं। बच्चे हैं, कुछ उल्टा -सीधा भी खा लेते हैं , इधर-उधर भी चले जाते हैं सारा दिन हम उनके भी आगे- पीछे तो नहीं दौड़ सकते हैं ,अपने तर्कों द्वारा अपने को ही समझा रहीं थीं।  हालाँकि उनका दिमाग़ इन सब चीजों को नहीं मान रहा था किन्तु माँ का मन कह रहा था -ये सब करने में क्या जा रहा है ? करने में कोई बुराई भी नहीं है। अच्छा अभी मैं चलती हूं ,मेरा बाकी का काम पड़ा है। उनके दिमाग में वो सभी बातें घूम रही थीं, जो कामिनी ने बताईं , जैसे ही तुषार घर आया आते ही, उन्होंने उसकी नज़र उतारी।

 मम्मी ! आप, यह सब क्या कर रही हैं ?

वह मैं, तुझे बाद में बताऊंगी पहले तो तू मुझे यह बता ! तू कहां-कहां गया था ?

क्या मतलब ? 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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