रूही और गर्वित प्रेम में खोये हुए थे ,अचानक ही,न जाने रूही को क्या हुआ ?उसने गर्वित को जोर से धक्का मारा और वो पलंग से नीचे गिर पड़ा। रूही की हालत और उसका व्यवहार देखकर वो घबरा गया। घबराया हुआ गर्वित, यह सब देख रहा था,अभी तक तो ये ठीक थी, अचानक ही फिर से इसे क्या हुआ ? रूही निश्चल बिस्तर पर पड़ी थी। गर्वित धीरे से उसके क़रीब आया ,यह जानने के लिए कि वह अब बेहोश है या फिर सो गई है। कुछ देर तक वह, उसे देखता रहा और फिर अपना तकिया उठाकर सोफे पर गया और वहीं लेट गया।
हम भी क्या करते ?कोई सीधी और सच्ची राह दिखाने वाला भी नहीं था। माँ तो स्वयं ही इन रस्मों के कारण अपने को फंसा महसूस करती थीं ,तभी उसे अपनी दादी [सुनयना देवी ]स्मरण हो आया । दादी ये नियम क्यों बनाकर चली गयीं ?हम भी क्या करते ?बचपन से ही, अपने बड़ों को इसी तरह देखा है ,गरीब ,लाचार महिलाओं को उनकी हवस का शिकार बनते देखा है। हम समझ ही नहीं पाए ,औरत का भी कोई सम्मान होता है ,माँ के अलावा हमने कभी किसी महिला को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा।
एक नारी , हमारे लिए तो भोग की वस्तु ही रही। उस कमरे की दीवारें उसे पांच साल पहले के सभी दृश्य दिखला रही थी। शिखा चीख रही थी -बेबस ,लाचार !और हम सभी उसके नग्न तन को वहशी नजरों से देख रहे थे,और हंस रहे थे। शर्म के कारण उसने अपनी आँखें बंद कर ली थीं। हमसे ,अपने तन को छुपाने की नाक़ामयाब कोशिश कर रही थी ,कभी हाथों से तो कभी ,बिस्तर पर पड़ी चादर से, किन्तु हममें से किसी को भी उस पर तरस नहीं आया। आता भी कैसे ?ये शब्द 'तरस' ,'हमदर्दी' ,इंसानियत' ,दया 'इनसे हमारा कभी परिचय हुआ ही नहीं था। वो प्रतिदिन हम लोगों की हवस का शिकार होती रही ,और धीरे -धीरे अपने जीवन से दूर जाती रही। जब वो बेहोश हुई ,हमने यह जानने का प्रयास भी नहीं किया कि वो जिन्दा है ,या मर गयी।
तभी गर्वित को रूही के कहे शब्द स्मरण हो आये -'मुझे जिन्दा जलाकर ,सुख -चैन से इसके साथ जी सकोगे। ''इसका अर्थ तो वही हुआ ,वो जिन्दा थी ,वो उठकर भागी भी थी किन्तु हम उसे भूत समझकर डरकर भाग आये थे। इस कमरे में ,उसकी आत्मा यहीं कहीं है ,उसकी आत्मा कहीं हमसे बदला लेना तो नहीं चाहती है। आज इस कमरे की दीवारें उसे उनके काले करतूतों की तस्वीरें दिखाती नजर आ रही थीं।
गर्वित ने एक नजर,बिस्तर पर लेटी रूही की तरफ देखा ,जो बैठे -बैठे सो गयी थी किन्तु अब लुढ़क कर बिस्तर पर सिकुड़ी हुई सी लेटी सो रही थी। उसने रूही की तरफ देखा ,इससे मिलने का भी तो मेरा उद्देश्य यही था। अपने घर के लिए ,एक लड़की लाना और फिर... किन्तु इसके साथ रहकर न जाने कैसे, मेरे मन में कितना परिवर्तन आया है ?मैं भी नहीं जानता ,तभी तो मैंने भाइयों से इसकी बिना इच्छा के छूने से मना कर दिया या फिर मुझे इससे प्यार तो नहीं हो गया। मैं स्वयं ही नहीं चाहता ,कोई भी इसके साथ वो सब करे ,ये सिर्फ मेरी है, मेरी....!
उठो, गर्वित ! क्या कर रहे हो, यहां क्यों सोए हो ? मम्मी जी !देखेंगीं तो क्या सोचेंगीं ? तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था यदि मैं सो गई थी तो मुझे उठा देते। नहा कर आई, रूही ने गर्वित को उठाते हुए कहा और उसे चाय बना कर देने लगी। अब गर्वित सच में ही घबरा गया था और डरते हुए उसके हाथों से चाय ले ली। सोच रहा था-इसका पता ही नहीं चलता, यह कब शिखा का रूप धर लेती है , या शिखा इसके अंदर आ जाती है, मरने के पश्चात भी, उस डायन ने हमारा पीछा नहीं छोड़ा।
रूही ,गर्वित को चाय देकर ,अपने नहाने के कपड़े सुखाने के लिए छत पर गई -गौरव वहां पर, पहले से ही, धूप में बैठा अखबार पढ़ रहा था। उसे देखकर रूही मुस्कुराई और बोली - आप सुबह, जल्दी उठ जाते हैं , योग करते हैं।
तुम्हें कैसे मालूम! तुम तो परसों ही आई हो,गौरव ने उसकी तरफ देखा,तो देखता ही रह गया ,उसके गोरे तन पर नीले रंग की साडी ,खूब फ़ब रही थी। उससे नजरें हटाकर उसने फिर से समाचार पत्र में अपना ध्यान लगाना चाहा किन्तु रूही को देख उसका ध्यान भटक गया था। मन ही मन सोच रहा था ,इतनी सुंदर लड़की ब्याहकर लाया है ,इसीलिए उसने,हमसे इसकी बिना इच्छा के ,इससे संबंध बनाने से मना किया है।वह फिर नजर उठाकर रूही की तरफ देखने का प्रयास करता है।
उसने देखा ,रूही तो पहले ही उसकी तरफ़ देखकर मुस्कुरा रही थी। मुस्कुराते हुए रूही बोली -जब इस घर में आई हूँ तो....अब परिवार के लोगों के विषय में तो जानना ही होगा।
हम्म्म्म ! कहकर गौरव शांत रहा ,आपको खाने में क्या पसंद है ?आपका रहन-सहन कैसा है ?आप तो गर्वित के छोटे भाई हैं ,न.... उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए पूछा ,अब गौरव ने अपना 'समाचार- पत्र' बंद करके अलग रख दिया और रूही की बातों में दिलचस्पी लेने लगा। तब रूही बोली - तब तो हम ,देवर -भाभी हुए ,हमारा हंसी -मज़ाक का रिश्ता बनता है। कपड़े सुखाकर उसके करीब आ बैठी ,और गौरव से पूछा -आपके भाई योग नहीं करते ?
नहीं ,वो तो आलसी है ,अपनी तारीफ करते हुए ,गौरव बोला -मैं तो सुबह पांच बजे उठकर तैयार रहता हूँ उससे तो मैंने भी कई कहा ,'आजा !मेरे साथ ,कसरत कर लिया कर ,किन्तु सुनता ही नहीं।
तुम्हारी बॉडी देखकर तो, बहुत सी लड़कियां तुम पर फिदा हुई होगीं , गौरव को चढ़ाते हुए रूही बोली।
हाँ ,सो तो है ,कॉलिज में तो हमारा बहुत रौब था,अपने हाथों को उठाकर अपनी बाजुएं दिखाते हुए गौरव बोला।
काश ! कि तुम मुझे गर्वित से पहले मिल जाते तो शायद मेरे पति तुम होते, गौरव को अपनी प्रशंसा सुनकर अच्छा लगा।
