गर्वित ने ,अपने भाइयों से सीधे -सीधे कह दिया था -कोई भी रूही को उसकी बिना इच्छा के नहीं छुएगा,उसकी ये बात सुनकर तीनो भाइयों को क्रोध आया कि यह घर के नियम तोडना चाहता है। किन्तु गर्वित ने स्पष्ट तौर पर कह दिया,कोई नियम नहीं टूटेगा ,घर में एक ही स्त्री रहेगी ,वरना हमारा होटल है ही।तब सुमित उसकी बातों का विरोध करता है।
देख !मैं तेरा बड़ा भाई हूं , अब मैं जो कुछ कहूंगा वही होगा,गर्वित ने उसे समझाते हुए कहा।
हम भी तुम्हारे भाई हैं, और इस घर के नियम के अनुसार जो चलेगा, तभी तक हम भी साथ रहेंगे वरना....
वरना क्या ? जो पहले से होता आया है, होता रहेगा ,क्रोध से पुनीत भड़क गया।
ऐसा कुछ भी नहीं होगा, भड़कते हुए गर्वित ने भी जबाब दिया, तुझे ज्यादा जवानी फूट रही है ,तो अपने लिए कोई और ढूंढ ले ,, वरना मैं इसे लेकर डॉक्टर साहब के घर चला जाऊंगा ,उनका घर- जमाई बनकर वहीं बस जाऊंगा।
गौरव जो इतनी देर से उन सबकी बातें चुपचाप सुन रहा था ,उसने क्रोध में ,शराब का गिलास जमीन पर पटककर तोड़ दिया और बोला -तुम हमें धमकी दे रहे हो।
कुछ भी समझ लो ! बात बिगड़ने लगी थी ,गिलास टूटने और अपने लड़कों की जोर -जोर की आवाज सुनकर ,जगतसिंह और हरिराम जी जो सोने के लिए अपने -अपने कमरों में जा रहे थे ,उनके क़दम वहीं कमरे के दरवाजे पर ठिठक गए। अभी तो उसने हवेली में कदम ही रखा है,न जाने, किस मनहूस घड़ी में यह विवाह करके लाया है, आते ही हम भाइयों में झगड़ा करवा दिया,पुनीत वहां से उठकर जाने का उपक्रम करते हुए बोला।
झगड़ा उसके कारण नहीं, तुम्हारी नियत के कारण हो रहा है। तभी गर्वित ने भी क्रोध में आकर गिलास उठाकर फेंक दिया।
''चार दिन की मुसलमानी, अल्लाह ही अल्लाह पुकार रही है '' क्या हमारे पिता ने ऐसा नहीं किया था ?कहते हुए पुनीत ने गर्वित के ऊपर कुशन उठाकर फ़ेंक दिया ,अब तो गर्वित गुस्से से सोफे से उठ खड़ा हुआ और बोला -तुझे बड़ी जवानी चढ़ी है ,तुझे मैं अभी बताता हूँ ,कहते हुए उसकी तरफ बढ़ा ,तभी उसके दो भाई उनके मध्य आ गए और बोले -सही तो कह रहा है ,वे आपस में हाथापाई करने लगे।
तभी बलवंत सिंह जी वहां आ गए और बोले- यहां क्या हो रहा है ?
उन्हें देखकर पहले तो सभी शांत हो गए ,तब आवेश में आकर सुमित ने उन्हें सारी बात बता दी, उसकी बात सुनकर, वो एकदम से शांत हो गए और बोले -हमने भी कभी भी, किसी भी तरह की कोई जबरदस्ती नहीं की। इसके लिए भी हमने, नियम बना लिया था, एक-एक महीने का, इस बीच कोई नहीं आता था। यदि इसी तरीके से नियम बनाया जाए तरीके से और धैर्य के साथ रहा जाए तो किसी को भी,किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। इस तरह लड़ने से कोई लाभ नहीं है, आज तक हमारे घर में कभी लड़ाई - झगड़ा नहीं हुआ है तो फिर तुम यह क्या कर रहे हो ? उन्होंने घड़ी में समय देखा और बोले -रात्रि के 12:00 बज रहे हैं , यह समय उचित नहीं है ,वैसे ही नकारात्मक विचार आते हैं, जाओ !जाकर अपने-अपने कमरे में सो जाओ !सभी भाइयों के मन में गुब्बार भरा था किन्तु उनके कहने पर सभी चुपचाप वहां से चले गए। तब उन्होंने, गर्वित को रोक कर पूछा -तुम ऐसी बातें कैसे कर सकते हो ?जबकि तुम जानते हो ,इस घर में क्या चल रहा है ?
मैंने सिर्फ यही कहा था, कि वो जो भी चाहते हैं ,उसमें, रूही की रजामंदी अवश्य होनी चाहिए , शिखा की तरह ज़बरन रिश्ता नहीं बनाना है। तब वो कह रहे थे -''हमारी मां के साथ भी तो यही हुआ था ''अब आप ही बताइये !क्या उनके साथ जबरदस्ती हुई थी ?' जो भी हुआ ,उनकी रजामंदी से ही हुआ था लेकिन मैंने सिर्फ इतना कहा है -''यदि रूही की इच्छा नहीं होगी, तो उसके पास कोई भी नहीं जाएगा। ''कहते -कहते गर्वित को क्रोध आया और बोला -कोई भी.....
उन्होंने देखा ,ये नशे में है ,तब वे बोले - अच्छा !अब तुम जाओ !तुम्हारी बीवी तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही होगी। कल बात करेंगे,कहकर उन्होंने उसे उसके कमरे का रास्ता दिखाया। गर्वित नशे में था और उसका अपने भाइयों से झगड़ा भी हो गया था, उसका वैसे ही मूड खराब हो गया था, फिर भी अपने मूड को ठीक करने का प्रयास कर रहा था, वह अपने कमरे की तरफ बढ़ रहा था। उसने जैसे ही कमरे में प्रवेश किया , उसने देखा, पलंग खाली था, वहां पर कोई नहीं था। मन ही मन सोचा -क्या मैं, किसी गलत कमरे में आ गया हूं ?फिर से पलटा ,किन्तु यही तो सजा हुआ है ,आज मेरी रात है ,फिर मेरी दुल्हन किधर गयी ? यहां तो कोई नहीं है। क्या वे तीनों .....नहीं छोडूंगा, सालों को !एक -एक को देख लूंगा कहते हुए बिस्तर पर गिर पड़ा और बड़बड़ाता रहा -वो मेरी दुल्हन है ,आज मेरी सुहागरात है।
सुबह जब रूही उठी ,तब उसे स्मरण हुआ ,वो रो रही थी और रोते -रोते सोफे पर लेट गयी किन्तु वो नहीं चाहती थी कि गर्वित उसे देखे ,तब उसने अपने को अलमारी में छुपा लिया था ,वहीं बैठे -बैठे न जाने कब सो गयी थी ? अब वो चुपचाप उठी और आकर गर्वित के समीप वहीं पलंग पर लेट गयी और सोने का अभिनय करने लगी।
बाहर जब किसी ने दरवाजा खटखटाया, तब भी वह जानबूझकर नहीं उठी , गहरी नींद में सोने का अभिनय करती रही , इस खटखटाहट के कारण, गर्वित की नींद अवश्य खुल गई, उसने, अपने समीप रूही को सोते देखा और बोला - रूही !उठो !देखो,दरवाजे पर कोई है, किन्तु रूही नहीं उठी ,तब गर्वित बोला - 8:00 बज गए ,अब खड़ी हो जाओ !रस्मों के लिए मम्मी बुला रही होगीं ,हमारे यहाँ बहुयें इतनी देर तक नह सोतीं।
रूही कुलमुलाई और बोली -अभी और सोने दो !
नशे और नींद के कारण अभी भी गर्वित का सर भारी था किंतु वह जानता था, कि मम्मी रस्मों के लिए, रूही को बुला रही होंगी, उसकी नींद अवश्य खुल गई और बोला -जाकर एक बार देख तो आओ ! कौन आया है ?
तुम कहते हो, तो उठकर जाती हूं , कहते हुए ,अलसाई सी उठी और उसने दरवाजा खोला -सामने वही लड़की कविता खड़ी थी, बोली -भाभी !अभी तक आप तैयार नहीं हुईं। मांजी ने बुलाया है, आप तैयार हो जाइए ! मैं दोबारा आपको लेने आती हूं। वह उसके जवाब की प्रतीक्षा किए बगैर वहां से चली गई। रूही तैयार होने के लिए,स्नानघर में घुस गयी। निश्चिन्त होकर गर्वित फिर से सोने का प्रयास करने लगा ,तभी अचानक उसे स्मरण हुआ ,रात्रि में तो रूही कमरे में ही नहीं थी ,इस वक़्त ये यहां कैसे आई ?यह विचार मन में आते ही उसकी नींद उड़ गयी।
