Mysterious nights [part 151]

दुल्हन बनी, रूही जब अपने कमरे में पहुंची, उसका बिस्तर फूलों से सजा हुआ था, बड़े अरमानों से गर्वित ने उसे सजाया होगा। आज इसकी 'सुहागरात' जो है ,किन्तु मुझे तो अंगारों पर लौटना है।  रूही ने उस स्थान को देखा और उसकी आंखों में आंसू आ गए। यही वो स्थान है ,जहाँ मेरे बदन में अंगारे भरे गए थे।  उसके साथ जो लड़की उसे, उस कमरे में लेकर आई थी, वह बोली -भाभी !आप रो रही हैं ,आपको तो खुश होना चाहिए।ये दिन तो हर लड़की की ज़िंदगी में आता है।  

हां, यह खुशी के ही आंसू हैं ,रूही ने जबाब दिया। 


अच्छा भाभी !मैंने आपको आपका कमरा दिखला दिया ,अब आप आराम कीजिये !किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे बताना या फिर थोड़ी देर में मैं, आकर पूछ जाउंगी। भइया का तो पता नहीं ,कब आएंगे ?

ठीक है ,वैसे तुम्हारा नाम क्या है ?तुम्हें पहले तो यहाँ कभी देखा नहीं ,अचानक ही रूही के मुँह से निकल गया। 

उसकी बात सुनकर वो लड़की हंसी और बोली -भाभी !आप मज़ाक अच्छा कर लेती हैं ,आप मुझे पहले कब देखतीं ,जब आप ही यहां पहली बार आई हैं। वैसे मेरा नाम'' कविता ''है ,मैं इसी गांव में रहती हूँ। मालकिन ने मुझे ,यहाँ काम के लिए बुला लिया था। अच्छा,अब मैं चलती हूँ। 

रुको !एकदम से रूही बोली। 

क्या ? भाभी !

मैंने तुमसे जो कहा या पूछा ,घर में किसी से मत कहना वरना तुम्हारी भाभी की बेइज्जती हो जाएगी ,मासूम सा चेहरा बनाकर रूही बोली। 

कौन सी बात !अनजान बनते हुए कविता ने पूछा।

 रूही समझ गयी ,ये लड़की बहुत समझदार है ,किसी से कुछ नहीं कहेगी ,तब वो बोली -अच्छा, अब तुम जाओ ! मैं आराम करती हूँ। कहते हुए उसने, अपने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया जैसे ही उसने उस बिस्तर को देखा , उस बिस्तर पर रूही को, अपने साथ कभी गर्वित, कभी गौरव तो कभी सुमित और पुनीत दिखाई दे रहे थे। वह बार-बार अपने को, टूटा हुआ महसूस कर रही थी। वह एक इंसान नहीं, बल्कि एक शरीर थी, जिसकी कोई भावनाएं नहीं होतीं  और वह बार-बार उपयोग में लाई जा रही थी। उनके भोग का साधन बनी हुई थी, नहीं ..... अब और नहीं ,उसका पुराना दर्द जैसे छलक आया। वो देख रही थी ,किस तरह वे चारों उसके  नग्न तन को वहशी नजरों से देख ,मुस्कुरा रहे थे ?

उसकी न ही कोई भावनाएं थी, ना कोई इच्छा, ना कोई जज्बात ! एक मांस का लोथड़ा, जो उस बिस्तर पर पड़ा हुआ था। उन गंदे शरीर वालों ने उसे छुआ उनके छूने से,वह  खुद भी मैली हो रही थी ,उसे लग रहा था उसके तन का रोम-रोम गंदगी से भर चुका है। उसकी आत्मा रो रही थी, किंतु वह उस तन से आजाद नहीं हो पा रही थी और वे लोग, उसे गिद्धों की तरह नोच रहे थे। तभी उसे जैसे एहसास हुआ, उसके तन में चेतना आई और वह चौंक पड़ी। उस दर्द का एहसास हुआ ,उसका शांत मन, घृणा से भर गया और मन ही मन सोचने लगी। मैंने ये क्या किया ?क्यों, मैं पारो के कहने में आ गयी ? मुझे यहाँ आना ही नहीं चाहिए था। क्यों मैं फिर से इन लोगों के बीच आकर फंस गयी हूँ ? ये मुझसे कितनी बड़ी गलती हो गयी ? मैं यहाँ क्यों आई ?सोचकर रोने लगी, यहां पर उसका रोना कौन देख रहा था ?

आखिर तू, इस घर के लिए परिवार के लिए, एक लड़की ले ही आया, सच में तू इस परिवार की सच्ची संतान है , जो इस परिवार के भले के लिए सोचता है। सभी भाई बैठकर, आपस में शराब पी रहे थे और बातचीत कर रहे थे। देखने में तो वह बहुत अच्छी लग रही है, क्या वह हमें, अपने पति के रूप में स्वीकार करेगी ?गौरव ने प्रश्न किया |

 उनकी यह बात सुनकर गर्वित खामोश हो गया, कुछ देर पश्चात बोला - अभी वह, इस विषय में कुछ भी नहीं जानती है, यह कार्य तो महिलाओं का होता है, मम्मी ही उसे समझाएंगी। तुमसे तो किसी से यह कार्य नहीं हुआ, मैंने किया है और अब देखो ! कैसी लार टपका रहे हैं ? अभिमान से गर्वित बोला -जैसे उसने इस परिवार के लिए एक लड़की को पटाकर और अपने घर लाकर कोई महान कार्य किया हो .  

तुम करो या हम !बात तो एक ही है,सुमित ने कहा .

 बात एक नहीं है ,मैं नहीं चाहता कि वह सभी की चाहत बने। 

हमें तो लगता है, नई बहू देखकर, इसका मन बदल गया है,उसे अपने लिए सोच रहा है , मुझे लगता है , यह उससे प्यार करने लगा है, जबकि यह हम सभी जानते हैं।  हमारे परिवार की क्या रस्में हैं  फिर तू इस तरह की बातें क्यों कर रहा है ? सभी चाहते थे, कि वह उनके प्रश्नों का जवाब दे वह बोला -मैं नहीं चाहता , शिखा की तरह यह भी परेशान हो जाए और मर जाए पहले उसकी इच्छा को जानना होगा। अगर वह स्वेच्छा से तैयार होती है तो ठीक है, वरना कोई भी उससे जबरदस्ती नहीं करेगा। 

यह क्या बात हुई ? तीनों एक साथ बोले। 

हां यही बात है, यह तेजस भाई की विधवा शिखा नहीं है, यह मेरी पत्नी है , जैसी उसकी इच्छा होगी, इस घर में वही होगा। 

तू कहना क्या चाहता है ?

जो कुछ भी कह रहा हूँ , तुम लोग समझ रहे हो। मैं यही कहना चाहता हूं, मैंने इससे वायदा भी किया है। 

कैसा वायदा ?तीनों चौंककर बोले। 

इसके साथ मेरा विवाह हुआ है, उसके आधार पर यह मेरी पत्नी है , शिखा का किसी से भी विवाह नहीं हुआ था, तो वह, तुम सब की प्रॉपर्टी बन गई थी , किंतु मैं इसका पति हूं , यदि यह मेरे साथ ही रहना चाहेगी तो तुम कोई भी उसे हाथ नहीं लगाओगे, गर्वित ने ,गुस्से से पूरे दृढ़ निश्चय के साथ कहा। 

गर्वित की बात सुनकर तीनों भाई भड़क गए , उसके आते ही तू तो बदल गया, जबकि तू जानता है, हमारे घर का क्या नियम है ? 

सब जानता हूं, तभी तो कह रहा हूं, यदि उसकी इच्छा नहीं होती है, तो कोई उससे जबरदस्ती नहीं करेगा। स्वेच्छा से वह पास आती है, तो ठीक है वरना हमारा होटल है,ही। इस घर में नई भी एक रहेगी, और परंपरा भी चलती रहेगी। 

तीनों भाई ! उसके इस तरह कहने से क्रोध से ''आग बबूला हुए ''जा रहे थे। यह बात तो मम्मी को बतानी पड़ेगी। यदि मैं विवाह करके लाता, तब भी तो तुम सब साथ होते, सुमित बोला। 

हममें से कोई भी विवाह करके लाता, हवेली की नियमों के आधार पर तो ऐसा ही होता, फिर यह क्या अलग से विवाह करके आया है। ऐसा नहीं चलेगा,' नियम तो नियम है।' क्रोधित होते हुए सुमित बोला। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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