Khoobsurat [part 110]

 औरत की ये कैसी विडंबना है ? जब मधुलिका जो अपनी सहेली का प्यार छीनकर संतुष्ट थी ,खुश थी किन्तु आज उसके साथ ही ऐसा कुछ हो रहा है ,कोई तो है, जो उसका घर तोडना चाहता है।अपना किया कर्म लौट कर वापस आता है। ऐसा ही कुछ मधुलिका के साथ, होने वाला है या हो रहा है, यह तो समय ही बताएगा। अभी तो मधुलिका को अपने पति पर, पूर्ण विश्वास है, हालांकि मधुलिका का, कुमार से, जुड़ने का कारण सिर्फ उसकी इच्छाएं और उसके परिवार


की परेशानियां थीं किंतु अब वह अपने उस परिवार में रम गई है। उस परिवार से अपने पति से प्यार करने लगी है। उनके मिलने का कारण कोई भी रहा हो किन्तु अब वो अपनी उस स्थिति से संतुष्ट है। 

 अब ऐसे में यदि कोई उसका पति ही छीनना चाहे तो वह क्या करेगी ? आखिर वह लड़की कौन है ?जो उसके पति को छीनना चाहती है। जो लड़की अब कुमार से जुड़ी है , मन ही मन वह भी परेशान है क्योंकि वह मन से तो कुमार से पहले ही जुड़ चुकी थी किंतु कुमार उससे अब जाकर जुड़ा है, वह चाहकर भी यह नहीं कह सकती-' कि वह उसकी जिंदगी में प्रवेश करना चाहती है।'उसकी  जिंदगी में भी प्रवेश कर चुकी है किन्तु ये तो उसका मन ही जानता है उसे घबराहट किस बात की है ? 

क्या ये रिश्ता आगे भी इसी तरह प्रेमपूर्ण बना रहेगा ? क्या ? ये शब्द कई सवालों के जबाब ढूंढता हुआ नजर आता है लेकिन अभी भी वह  उसकी जिंदगी से अलग- थलग ही है, इसका एक रिश्ता ऐसा है, जिसको वह संसार से छुपा रही है ,स्वयं कुमार से ही, अपने आप को छुपा रही है या फिर अपने आपको धोखा दे रही है। वह स्वयं भी नहीं समझ पा रही है ,यह रिश्ता प्यार का है या  जरूरत का .... उसकी अपेक्षा पहले सिर्फ इतनी सी थी ,कि कुमार उससे मिले ,उससे प्यार करे ,अब इस चाहत ने, एक नया रूप सवालों के रूप उसके सामने खड़ा कर दिया। कुमार के जीवन में मेरा क्या महत्व है ?जब वो मिला था ,विवाह की कोई चाहत नहीं थी किन्तु अब इस रिश्ते से कुछ अपेक्षाएं बढ़ गयीं हैं ,वे अपेक्षाएं ही रह -रहकर यामिनी को तंग कर रहीं हैं। 

जब यामिनी ,कुमार से पूछती है, समुद्र के किनारे घूमने चलोगे !

कुमार का तुरंत ही जबाब आया -हाँ -हाँ क्यों नहीं, तुम्हारे साथ टहलने ही तो आये हैं। कहते हुए उठा और तैयार होने लगा। जब यहाँ आया हूँ तो तुम्हारे साथ ये पूरा देश तो नहीं देख सकता ,कम से कम ये शहर तो घूम ही सकते हैं।

यामिनी भी तैयार होकर उसके साथ चल दी ,रास्ते में  दोनों चुपचाप चल रहे थे किन्तु उस ख़ामोशी में कुछ तो ऐसा था ,जो बहुत कहना चाहती थी। किन्तु शब्द न जाने कहाँ जाकर छुप गए हैं ? यामिनी शब्द खोज रही है। 

अचानक कुमार ने यामिनी से पूछा - एक बात बताओ !क्या तुम्हारे मन में कुछ है ,जो तुम, मुझसे कहना चाहती हो क्योंकि यामिनी के आव -भाव कुमार को बदले से लग रहे हैं, जो उसकी नजरों से बचे नहीं हैं। 

यामिनी ने उसके इस तरह प्रश्न पूछने पर, उसकी तरफ देखा और बोली -क्या तुम्हें ऐसा लगता है ? क्या तुम मुझे समझ सकते हो ?

मैं तुम्हारी तरह कलाकार तो नहीं ,जो भावनाओं को पढ़ सकूं, किन्तु संगत का असर है इसीलिए न जाने  क्यों ? मुझे लगता है ,तुम, मुझसे कुछ कहना चाहती हो। 

कहना तो वो बहुत कुछ चाहती हूँ किन्तु उसके परिणाम से डरती हूँ मन ही मन यामिनी ने स्वीकारा , तब प्रत्यक्ष बोली - हमारी मुलाकातें बढ़ती जा रहीं हैं। हमारी हसीन यादें भी.... जो एक कहानी लिखती जा रहीं हैं। 

तुम भी न जाने क्या -क्या सोचती हो ?एक कलाकार जो हो ,कहकर कुमार हंसने लगा।

तुम नही समझ पाओगे ,एक कलाकार की भावनाओं को, कभी -कभी तो वह अपने जज्बातों में स्वयं ही उलझकर रह जाता है। दोनों समुन्द्र के किनारे पहुंचकर मस्ती करने लगते हैं। 

 अचानक ही मधुलिका के फोन की घंटी बजती है और वह अपना फोन उठाने के लिए रसोई घर से बाहर आती है इतने में ही फोन कट जाता है। वह वापस जा ही रही थी, तभी उसे लगता है ,जैसे किसी ने कुछ भेजा है वह रसोई घर से हाथ धोकर आती है और फोन पर देखने का प्रयास करती है, कि क्या है ?तब वह अपने 'व्हाट्स एप' पर देखती है तो उसके'' पैरों तले की जमीन खिसक जाती है'' लगता है, जैसे वह वहीं गिर पड़ेगी, मुझसे कुमार इतना बड़ा झूठ नहीं कह सकता। वह मुझे धोखा नहीं दे सकता, उसे आश्चर्य होता है उसकी आंखें फटी की फटी रह जाती है वह दोबारा वे तस्वीरें खोल कर देखती है। उस लड़की का तो ज्यादा पता नहीं चल रहा है किंतु ये बात स्पष्ट है ',कुमार अवश्य ही किसी लड़की के साथ है ,क्या यह अपने कारोबार की सिलसिले में ही विदेश गया है या फिर ये, इस लड़की से मिलने गया है। 

 मन में अनेक प्रश्न आ जा रहे थे। ऐसा कैसे हो सकता है ?ये भला विदेश में किसी लड़की को कैसे जानेगा ?पहली बार ही तो गया है ,हो सकता है ,जिससे मिलने गया हो ,उसकी पत्नी ,बहन कोई हो वहां तो सभी ऐसे ही रहते हैं ,वो भी 'समुन्द्र के किनारे 'मुझे अपनी सोच को बढ़ाना होगा अपने पति पर ,अपने रिश्ते पर विश्वास करना होगा। कुमार अब विदेश में व्यापार करने लगा है , अब मैं ,उसकी पत्नी इतनी छोटी सोच के साथ,उसके कारोबार में रुकावट तो नहीं बन सकती। फिर ये वहां बैठा ही तो है ,कोई गलत कार्य तो नहीं कर रहा। मधुलिका ने अपने आपको समझा लिया और रसोई में काम निपटाने चली गयी किन्तु मन अभी भी उन तस्वीरों में अटका हुआ था। आखिर ये तस्वीरें किसने भेजी होंगी ?कोई तो है ,जो कुमार के पीछे लगा है। वो जहाँ भी जाता है ,उसकी तस्वीरें मुझे भेजने के पीछे, उसका क्या उद्देश्य हो सकता है ?क्या हम पति -पत्नी में गलतफ़हमी पैदा करना चाहता है ?

काम में मन नहीं लग रहा था, वापस आकर फिर से उन तस्वीरों को देखना चाहती थी किन्तु सभी तस्वीरें मिटा दी गयीं थीं। ये सब क्या है ?कुछ समझ नहीं आ रहा। घड़ी में समय देखा ,बारह बजे हैं, किन्तु वहां अभी शाम के पांच बजे हैं। बात करके देखती हूँ ,कहते हुए उसने कुमार को फोन लगा ही दिया। बहुत देर तक कुमार ने फोन नहीं उठाया ,दो -तीन बार फोन करने पर कुमार ने फोन उठा ही लिया। कुमार मधुलिका का फोन देखकर झुंझला गया था और यामिनी के सामने उसका फोन उठाना ही नहीं चाहता था किन्तु जब यामिनी ने कहा -उठा लो !कोई परेशानी भी हो सकती है। 

कुमार ने फोन उठाते ही पूछा -क्या तुम ठीक हो ?

हाँ ,मैं ठीक हूँ। 

पापा ,को कोई दिक्क्त तो नहीं। 

नहीं ,वे भी स्वस्थ हैं।

मंकु केेसा है ?उसकी पढ़ाई ठीक तो चल रही है। 

हाँ ,बाबा हाँ सब ठीक है।तुम, इतने क्यों परेशां हो रहे हो ?

 

 


 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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