Khoobsurat [part 109]

कुमार, जब हवाई जहाज से नीचे उतर रहा था, तब एयरपोर्ट पर उसे, यामिनी खड़ी, उसका इंतज़ार करती  दिखलाई दे गई ,उसने भी जब कुमार को देखा, दूर से ही,उसने हाथ हिलाकर उसका स्वागत करती दिखलाई दी । उसे देखते ही वह प्रसन्न हो गया, जैसे कुमार को ,उससे मिले, बरसों हो गए हों। कुमार के समीप जाते ही, यामिनी ने तुरंत कुमार को गले लगा लिया और बोली -इतनी देर से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही थी आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई। 

तुम्हारे रहते भला मुझे, क्या दिक्क्त हो सकती है ?कुमार ने जबाब दिया। 

तब मुस्कुरा कर यामिनी ने पूछा -तुम्हारी बीवी ने तो कुछ नहीं कहा, उससे क्या कह कर आए हो ?उसने तुम्हें भेज दिया ,कहकर हंसी। 

उससे क्या कहना? गाड़ी में बैठते हुए कुमार ने कहा -वही, काम के सिलसिले से बाहर जा रहा हूं।


 आजकल तुम बड़ा काम करने लगे हो , मैं भी तो जानू,  किस काम के सिलसिले में यहाँ आए हो ?जानबूझकर यामिनी ने पूछा। 

तुमसे प्यार करना, तुमसे मिलना, यह भी तो एक जरूरी काम है ,यह कहते हुए उसने, उसे अपनी तरफ खींचना चाहा, तभी यामिनी ने, कुमार से इशारा किया कि गाड़ी में हम ही नहीं हैं , ड्राइवर भी है। यहां तो सब चलता है किन्तु तब भी यामिनी ने उसे रोक दिया। कुमार इस देश में किसी को नहीं जानता है? उसके लिए यह जगह नई है इसलिए वह यामिनी से पूछता है - हम कहां जा रहे हैं ? क्या तुम्हारा घर इसी शहर में है ? क्या तुम्हारे घर जा रहे हैं ?

उसकी बातें सुनकर यामिनी मुस्कुराई और बोली -तुम भी कैसी बातें करते हो ? तुम्हें अपने घर लेकर कैसे जा सकती हूँ  ?

क्या तुम्हारे परिवार वाले, मुझे ,तुम्हारे साथ देखकर ,मुझे वहां रखने से इनकार कर देंगे। वैसे मैंने, तुमसे आज तक पूछा नहीं, तुम्हारे परिवार में और कौन-कौन है ?

उसकी बात सुनकर यामिनी थोड़ा गंभीर होकर बोली -मेरे परिवार में कोई नहीं है, सिर्फ एक आंटी हैं  जिन्होंने मुझे पाला है। 

तुम्हारे माता-पिता, वे कहां पर है ? तुमने तो बताया था-' कि वो भारत से ही हैं। '

हां मेरे माता-पिता, इंडिया से ही थे किंतु अब वो इस दुनिया में ही नहीं है , मैं आंटी को तंग करना नहीं चाहती, इसलिए हम एक होटल में रुकेंगे, मुझे तो जैसे होटल में रहने की रहने की आदत पड़ गई है ,आंटी के साथ कम ही रहती हूँ ,अपनी कला प्रदर्शनी के लिए जाती रहती हूँ। एक तरह से देखा जाये तो मेरा कोई ठिकाना नहीं। 

 क्या तुम मुझे, अपनी आंटी से नहीं मिलवाओगी ? 

जब वह पूछेंगीं - कि तुम कौन हो ? तब उनसे क्या कहूँगी ?

यही कि मैं, तुम्हारा दोस्त हूं , कुमार ने जवाब दिया। 

सिर्फ दोस्त ही..... कहते हुए यामिनी ने कुमार की और देखा , जैसे वह कुमार से किसी और ही बात की अपेक्षा रख रही हो। 

तुम तो सब जानती ही हो, मैंने , तुमसे कभी भी ,कुछ भी नहीं छुपाया है। इतनी दूर मैं, तुम्हारे लिए ही तो आया हूं।

 वह तो मैं समझती हूं, यामिनी निराशा से मन ही मन सोच रही थी -' तुम्हारी हवस तुम्हें यहां खींच कर लाई है , जब तुम मुझसे प्यार ही नहीं करते तो फिर यहाँ किसलिए आए हो ?''किंतु प्रत्यक्ष से कुछ भी नहीं कहा। और उसने पूछा -क्या तुम अभी भी अपनी पत्नी से प्यार करते हो ?

न जाने क्यों ? कुमार को लग रहा था, यह मुझसे कुछ और ही अपेक्षा रख रही है या कुछ और पूछना चाहती है। तब वह बोला- 'प्यार तो मैं, उससे पहले भी नहीं करता था, किंतु अब वह मेरी जिम्मेदारी बन गई है उसे निभा रहा हूं।'' प्यार तो मैंने तुम्हारे साथ रहकर सीखा है, यामिनी मुस्कुरा कर रह गई।  कुछ देर गाड़ी में मौन छाया रहा, और दोनों चुपचाप बैठे खिड़की से बाहर की तरफ देखते  रहे।

 होटल आने पर वे दोनों गाड़ी से उतर गए ,यामिनी का रहन-सहन और यहां पर उसकी बातचीत देखकर ऐसा लगता था, जैसे उसे यहां रहने की आदत पड़ चुकी है, सब कुछ अच्छे से संभाल रही थी। उसने कमरे की चाबी ली और आगे बढ़ गयी।  एक कमरे के सामने पहुंचकर,  उसने दरवाजा खोला। आलीशान कमरा था ,उसका कमरा देखकर कुमार हैरत में पड़ गया और उसने ,उससे पूछा -काफी महंगा कमरा होगा। 

हां है तो.... किंतु हमारी हसीन यादों से महंगा तो नहीं,

बस तुम्हारी यही बातें तो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं, कहकर कुमार बिस्तर पर लेट गया, जैसे बहुत ही थका हुआ हो। नहा लो !खाना मंगवा लेती हूं।

 खाना भी खा लेंगे , जिसके लिए हम आए हैं, उससे तो ठीक से गले मिल लें, कहते हुए उसने यामिनी को अपनी तरफ खींचा और उसके अधरों पर अपने अधर रखकर बोला - मुझे, तुम पहले क्यों नहीं मिली ? यामिनी बहुत कुछ कहना चाहती थी किंतु उसके होंठ जैसे सिल गए और वह निढाल होकर ,कुमार की बाहों में समा गयी। तुम्हारे इस प्यार के लिए कितना तरसी हूँ ?चाहत भी मिली तो कब.... ?सोचकर मुस्कुराई।

 तुम्हारा साथ भी न... कितना सुकून दे जाता है ? ऐसा लगता है , जैसे क्या पा गया हूँ ? कुमार, यामिनी से बोला।दोनों एक -दूसरे की बांहों में देर तक दुनिया जहाँ से बेखबर रहे किन्तु अबकी बार यामिनी के मन में एक कसक सी थी जो किसी कांटे की तरह उसे चुभ रही थी ,रह -रहकर उससे, उसे टीस उठती महसूस हो रही थी। कुमार के चेहरे पर सुकून भरी मुस्कुराहट थी। कुछ देर बाद दोनों ने मिलकर भोजन किया वहीं कमरे में ही मंगवा लिया था।भोजन करते समय कुमार को लगा ,जैसे यामिनी के मन में कुछ चल रहा है। क्या बात है ?कुछ कहना चाहती हो। 

कुछ नहीं ,बस इस बात का दुःख होता है,काश !कि तुम मुझे पहले ही मिल जाते। 

सबके मिलने का समय पहले से ही तय है ,अच्छा ,ये बताओ ! क्या तुम्हारी, विवाह करने की कभी इच्छा नहीं हुई, क्या कभी किसी से प्यार भी नहीं हुआ ?

 एक उम्र थी, जब मेरी विवाह करने की इच्छा थी,उसी से प्यार भी हुआ था किंतु....

किन्तु क्या ?क्या उसने तुम्हें पसंद नहीं किया ?

नहीं ,ऐसा कुछ नहीं है ,उसका किसी और लड़की से विवाह हो गया ,शायद वो उससे प्यार करता था। तब  वह उम्र समय के चक्रव्यूह में न जाने कहाँ खो गयी ?

माना कि तुम्हारे लिए ये दुख़द भरा समय रहा किन्तु मैंने कहा था ,न... सबके मिलने का समय निश्चित है ,वो अगर तुम्हें मिल जाता तो मैं कैसे तुम्हारे जीवन में आता ?लापरवाही से कुमार बोला। 

जैसे मैं तुम्हारे जीवन में आ गयी ? यामिनी ने तुरंत जबाब दिया। 

हाँ ,ये भी है किन्तु तब हमें छुप -छुपकर मिलना पड़ता। 

अब भी तो वही कर रहे हैं ,कहकर यामिनी जोर -जोर से हंसने लगी। 

उसकी बातों का आशय समझकर ,कुमार हंसने लगा और बोला -अब एक से ही झूठ बोलना पड़ता है ,तब दो -दो से झूठ बोलना पड़ता ,कहते हुए दोनों जोर -जोर से हंसने लगे। कुछ पल के लिए यामिनी अपने मन का दर्द भूल गयी तब हँसते हुए बोली -क्या बीच [समुन्द्र का किनारा ]पर चलोगे ?


 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post