कुमार के मन में चोर था ,पहले तो वो सोच रहा था -'मैं कहाँ जा रहा हूँ, क्या कर रहा हूँ ? शिल्पा को कुछ पता नहीं चलेगा, किन्तु आज शिल्पा को शांत देखकर, उसे थोड़ा ड़र लगा ,कहीं, इसको कुछ पता तो नहीं चल गया है ? अपने मन की शंका मिटाने के लिए वो शिल्पा से पूछता है -क्या कुछ हुआ है ?शिल्पा का दिल तो किया ,उससे चीख़ -चीखकर कहे -'मेरा दिल टूटा है, किसी ने मेरा विश्वास तोड़ा है किन्तु तुरंत ही सम्भल गयी। कहीं किसी ने मेरे साथ मज़ाक ही किया होगा,तो क्या होगा ? जब तक कोई प्रमाण नहीं मिल जाता ,तब तक किसी के भी फोन आने पर मैं, अपने मन में शंका का बीज नहीं बो सकती।
तब वो बोली -हां, तुम शिल्पा को तो जानते ही हो , कुमार के ध्यान में एकदम से शिल्पा नहीं आई ,क्योंकि अब तो वह यामिनी के ख्यालों में खोया रहता है। शिल्पा का होना न होना अब उसके लिए कोई महत्व नहीं रखता। तब वह सोचने का प्रयास करने लगा ,तभी मधुलिका बोली - इतनी जल्दी भूल गए ,मेरी दोस्त और तुम्हारी.....कहकर वो चुप हो गयी क्योंकि उस रिश्ते का कोई नाम ही नहीं था। वही जो अच्छी पेंटिंग करती थी।
हां, तो उसे क्या हुआ ? लापरवाही से कुमार ने पूछा
क्या तुम भी, अखबार नहीं पढ़ते हो? मधुलिका ने कल्याणी जी की तरह ही उससे प्रश्न किया।
क्या मतलब ?
क्या तुम जानते नहीं हो, शिल्पा के संग एक हादसा हो गया है।
कैसा हादसा ? अखबार पढ़ता तो हूं, पर कभी ध्यान नहीं गया ,गया भी होगा तो, कोई विशेष नहीं लगा होगा, तुमने आज तक तो कभी उसके विषय में बातचीत नहीं की,न ही, उसके विषय में कभी सोचा होगा। तब आज अचानक वो कैसे याद आ गयी ?
कुमार, ये बात तो, सही कह रहा है , मधुलिका ने विवाह के पश्चात न ही कभी उसका ज़िक्र किया और न ही कभी उससे मिलने का प्रयास किया किन्तु आज उसके मुँह से शिल्पा का नाम सुनकर चौंक गया।
आज ख़ाली बैठी थी ,न जाने कैसे उसका ख्याल आ गया ?सोचा ,उसे फोन कर लेती हूँ ,उसने फोन नहीं उठाया ,तब उसकी मम्मी को फोन किया ,तब शिल्पा की मम्मी ने ,जो भी बातें मधुलिका को बताईं , वह सब कुमार को सुना दी। उस घटना को सुनकर कुमार भी हतप्रभ रह गया और बोला -क्या ऐसा भी हुआ था ?उसके साथ कितना बुरा हुआ ? अब वह कहां होगी ?क्या वो हत्यारे उसे भी उठाकर ले गए ?
कोई नहीं जानता ?वह कहाँ है ? पुलिस का तो यही कथन है -कि उसी ने अपने पति की हत्या की और भाग गयी क्योंकि ये अपहरण का मामला तो नहीं लगता,यदि उसका अपहरण हुआ होता तो फिरौती के लिए उन लोगों का फोन आता।
यह बात भी सही है ,सोचते हुए कुमार बोला -क्या वो किसी का ख़ून कर सकती है ? ऐसी लगती तो नहीं थी।
कुमार के इतना कहते ही ,अचानक मधुलिका को फिर से उस फोन का स्मरण हो आया और बोली - हम सोचते हैं ,'हम बड़े समझदार और सुलझे हुए इंसान हैं ,किन्तु हमारे साथ रहने वाला या जिससे भी कोई नजदीकी रिश्ता है ,कब दगा दे जाये ? पता ही नहीं चलता।सबसे बड़ा धोखा तो उसे तब मिलता है ,जब उसे पता चले, कि उसका सबसे विश्वसनीय मित्र या रिश्ता ही उसके साथ छल कर रहा है,कहते हुये मधुलिका का स्वर थोड़ा तेज हो गया।
कुमार ने, मधुलिका के चेहरे की तरह देखा ,उसे अभी भी विश्वास था ,कि शिल्पा को कुछ भी मालूम नहीं होगा। आख़िर उसे बताएगा ही कौन ?तब वो बोला -क्या उसका पति उसके साथ छल कर रहा होगा ?ऐसा भी तो हो सकता है ,उसने ही अपने पति के साथ छल किया हो।जैसे मुझसे झूठ बोला ,उससे भी कुछ झूठ बोले हों ,उसके मुँह में उन बातों को स्मरण कर जैसे कड़वाहट सी घुल गयी।
नहीं,वो ऐसा नहीं कर सकती ,उसे, मैं अच्छे से जानती हूँ ,वो तो स्वयं को ही छल रही थी ,वो जानती थी ,कि ईश्वर ने उसे कुरूप तो नहीं बनाया ,किन्तु इतना सुंदर भी नहीं बनाया फिर भी उसे लगता था ,उसके सपनों का राजकुमार उसके लिए आएगा और उसका रंग -रूप न देखकर ,शिल्पा को अपने प्यार के लिए ,उसकी सीरत या फिर उसी कला के कारण उसे अपनाएगा।
ये उसकी गलत फ़हमी थी ,माना कि वो एक अच्छी कलाकार थी, किन्तु इसका अर्थ यह तो नहीं ,मैं उससे विवाह कर लेता। जीवन भर का रिश्ता है ,यूँ ही भावुकता में ,उसकी कला के कारण, ताउम्र उसे गले में बांधकर तो नहीं बैठ सकते। उसमें कला की खूबसूरती है,उसका हमने तहेदिल से सम्मान किया किन्तु यदि उसने मेरे लिए भी ऐसा सोचा होता तब भी मैं, उससे विवाह नहीं करता।
यह तुम क्या कह रहे हो ?क्या तुम जानते नहीं थे कि वो तुमसे प्रेम करने लगी है।
मैं भी, एक अनजान कलाकार तमन्ना के लिए ,भावुक हो उठा था ,अनजाने ही उसके सौंदर्य की कल्पना करके ,उससे प्यार करने लगा था। किन्तु बाद में पता चला,वो सब एक झूठ था ,वो मेरी कल्पना से कहीं भी नहीं मिलती थी। तब प्यार करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता ,उसका झूठ तब मेरे सामने, उससे भी ज्यादा भयानक रूप में आया कि वो शिल्पा ही ,तमन्ना है ,जो मेरी ज़िंदगी में दिलचस्पी ले रही है। मुझे उसके झूठ के कारण उसका चेहरा ज्यादा भयानक नजर आया ,असल में वो मुझे एक चालाक लड़की नजर आई, उसकी कला जैसी सुंदरता उसमें नहीं थी। तब मैंने, तुमसे शादी की।
तुम्हारी बातों से तो लग रहा है ,तुमने, मुझसे प्यार के कारण नहीं ,बल्कि उससे पीछा छुड़ाने के कारण मुझसे विवाह किया। क्या तुम्हें मुझसे प्यार नहीं हुआ था ?
तभी कुमार को यामिनी का स्मरण हो आया और मन ही मन सोचा -शायद ,नहीं वो एहसास तो नहीं हुआ ,जो आज यामिनी के साथ हो रहा है।
क्या सोच रहे हो ?तुम्हारे पास कुछ जबाब है ? मधुलिका ने बेचैनी पूछा ।
उस समय कुछ सोचने और समझने की अक़्ल ही कहाँ थी ?जो भी सुंदर लड़की सामने आई और प्यार हो गया ,वो हमारा लड़कपन था,कहते हुए हंसने लगा।
अच्छा, तुम्हें जब अक़्ल ही नहीं थी ,तो उसी बेअक़्ली में शिल्पा से विवाह क्यों नहीं कर लिया ?चिढ़ते हुए मधुलिका बोली - अब तो तुम बच्चे या किशोरावस्था में तो नहीं हो,अब हमारे रिश्ते के विषय में क्या सोचते हो ?
हमारे विवाह को साढ़े तीन वर्ष बीत चुके हैं और तुम आज न जाने क्यों ?ये बेमतलब का प्रश्न लेकर बैठ गयीं ? आज तक मैंने तुम्हें कभी, किसी चीज की कमी होने दी है ,क्या तुम्हारी किसी बात को महत्व नहीं दिया ?तुम्हें मेरे किस व्यवहार से लगता है ?कि मैं एक योग्य समझदार पति नहीं या जिम्मेदार पिता नहीं।
