इंस्पेक्टर के जाते ही, नित्या ने दरवाजा बंद किया और अपने बिस्तर पर आकर लेट गई और गहरी -गहरी सांसें भरने लगी। मन ही मन सोच रही थी, इन लोगों ने तो अपना जीवन बर्बाद कर ही लिया , मेरी जिंदगी में, उनके जीवन की चिंगारी, न आ जाएं ।
इंस्पेक्टर सीधे, नित्या के घर से निकलकर, प्रमोद से मिलने के लिए उसके दफ्तर पहुंचे। पुलिस को देखकर एक बार तो सभी दफ्तर वाले चौंक गए आखिर प्रमोद ने ऐसा क्या किया है ? जो पुलिस आई है। तब इंस्पेक्टर साहब ने कहा -मैं एक केस की छानबीन कर रहा हूं इस विषय में, मुझे प्रमोद से बात करनी होगी , इसलिए मैं यहां आया हूं। कुछ देर के पश्चात एक अलग केेबिन में, प्रमोद उनके सामने प्रस्तुत हुआ।
हैलो !कहकर प्रमोद ने इंस्पेक्टर से हाथ मिलाया और बोला - इंस्पेक्टर साहब !आप मुझसे पूछ सकते हैं जो पूछना चाहते हैं।
हमने सुना है,'' रंजन आपके, साढू भाई थे।
जी ,सही बात है, मेरी पत्नी की बुआ की बेटी से उसका विवाह हुआ था।
मुझे ऐसा क्यों लग रहा है ?कि आप यह दर्शाना चाहते हैं कि वो रिश्ते में आपके सगे नहीं थे।
सगे और पराये क्या ? रिश्तेदार तो थे ही.... हाँ यह बताना भी सही रहता है कि रिश्ता इतना क़रीबी भी नहीं था जैसे सगे रिश्तों में होता है।
आपकी साली का व्यवहार कैसा था ? मेरे कहने का मतलब यह है, उन दोनों पति-पत्नी में कैसे संबंध थे ?
उनके आपस के संबंधों को तो मैं ज्यादा कुछ जानता नहीं हूं , न ही मुझसे कभी रंजन ने इस विषय में बात की है, मेरी साली, इतनी सुंदर भी नहीं थी, फिर भी उसे अपने पैसे पर बहुत अभिमान था। कुछ परेशान सी रहती थी, मेरी पत्नी से तो विशेष कर चिढ़ी रहती थी। हमने एक बार उन्हें खाने पर बुलाया था, उस समय मैंने उसके व्यवहार को देख रहा था, उसमें पैसे का अहंकार था, न जाने किस बात की अकड़ थी, अपने को बहुत बड़ी कलाकार समझती थी। कुल मिलाकर देखा जाए तो मुझे उसका व्यवहार पसंद नहीं आया।
आपकी पत्नी के साथ उसकी व्यवहार कैसा था ?
मेरी पत्नी एक सुशील समझदार, और रिश्तों को निभाने वाली महिला है किंतु शिल्पा बिल्कुल उसके विपरीत थी,उसकी सूरत और सीरत दोनों ही अलग है, मुझे तो उसका व्यवहार कुछ ज्यादा पसंद नहीं आया, बाकी मेरी पत्नी उसकी बहन है , वह अपने आप संभाल लेती थी क्योंकि वो उसकी रिश्तेदार है।
आपकी पत्नी ने तो हमें ऐसा कुछ नहीं बताया।
क्या आप नित्या से मिलने गए थे ?
जी हां, हम वहीं से आ रहे हैं।
अभी मैंने आपसे बताया था न..... मेरी पत्नी समझदार,सुलझी हुई और रिश्तों को निभाने वाली महिला है, अब ऐसे समय में उन पर विपत्ति आन पड़ी है, तो वह अपनी बहन के लिए और क्या कहेगी ?
रंजन के प्रति शिल्पा का कैसा व्यवहार था ?
नखरीली, जिद्दी, अकडू, उसने बेचारे की नौकरी भी छुड़वा दी, वह चाहती थी, कि रंजन नौकरी छोड़कर उसके पिता के घर में ,' घर जमाई' बनकर कर रहे, जबकि 'रंजन' यह नहीं चाहता था किंतु वो जिद करके उसे अपने मायके में ले ही गई ,न जाने, किस तरह से उसे मनाया होगा या किस तरह के उस अभिमानी औरत के नखरे उसे उठाने पड़े होंगे ?
आपकी बातों के आधार पर तो कह सकते हैं -उन दोनों पति-पत्नी के आपस में संबंध अच्छे नहीं थे।
देखिए ! जहां तक मैंने देखा है और उनके रिश्ते को समझा है, उस आधार पर मुझे तो नहीं लगता, कि उनके संबंध अच्छे रहे हैं, वह बहुत मनमानी करती थी, अपनी बात मनवा के ही रहती थी और मनवाई भी.... उस बेचारे की लगी लगाई नौकरी, उसने छुड़वा दी।
वैसे रंजन किस तरह का व्यक्ति था ?उसने तो आपके साथ काम भी किया है।
अच्छा इंसान था ,थोड़ा गंभीर होते हुए प्रमोद ने जबाब दिया।
जब आपका और उसका रिश्ता बदल गया ,तब क्या उसके व्यवहार में आपको अंतर् नजर आया ?
ऐसा कुछ नहीं है ,पहले हमारा बॉस वाला रिश्ता था हालाँकि मैंने अपने को कभी बॉस नहीं माना किन्तु रिश्ता बदल जाने के पश्चात मैंने दोनों को अपने घर भी बुलाया था वो मेरा उसी तरह सम्मान करता था जैसे हम दफ्तर में करता था।
ये भी तो हो सकता है ,जैसा वो अपने को दफ्तर में दिखाता होगा ,उसका वैसा व्यवहार अपने घर में अपनी बीवी के साथ अच्छा न हो।
अब ये बात तो मैं आपको क्या बता सकता हूँ ? ये बात तो, उसकी बीवी ही बेहतर तरीक़े से बता सकती है। मैं न तो कभी उसके घर गया और न ही उसकी उस नकचढ़ी बीवी से कभी बात हुई।
हम उसे ही तो ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं ,न जाने वो कहाँ गायब हो गयी है ?क्या आप इस विषय पर कुछ रौशनी डाल सकते हैं ?
उनकी बात सुनकर प्रमोद हंसा और बोला -ये आप मुझसे कैसी उम्मीद लगा रहे हैं ?कहने को तो वो मेरी साली थी किन्तु मेरी कभी उससे इतनी बात नहीं हुई ,मैं कोई अपहरणकर्ता नहीं, जो आप मुझसे ये सवाल पूछ रहे हैं।
आप ये बात कैसे कह सकते हैं ?कि उनका अपहरण हुआ है।
न... ये बात भी, मैं नहीं कह रहा ,ये बात मुझे उसी की मम्मी ने बताई है ,जब मैं उनके घर गया था।
अच्छा ठीक है, आपकी पत्नी ने आपके लिए भोजन भिजवाया होगा, जब हम आपके घर गए थे ,वे आपके लिए भोजन तैयार कर रही थी, आप भोजन कीजिए हम फिर कभी आपसे मिलेंगे।
यह आप क्या कह रहे हैं ? मैं तो सुबह ही टिफिन लेकर आ जाता हूं।
हमसे तो वो यही कह रही थीं , कि मैं अपने पति के लिए भोजन बना रही हूं ,कहकर इंस्पेक्टर केबिन से बाहर आ गया। इंस्पेक्टर समझ गया था कि नित्या उसे टरकाना चाहती थी इसलिए पति के भोजन बनाने का बहाना लिया था।
दिल्ली के एक बहुत अच्छे, होटल में, कुमार और यामिनी स्विमिंग पूल के पास बैठे हुए हैं हालांकि उनका स्विमिंग करने का कोई इरादा नहीं है लेकिन उन्हें वहीँ बैठना अच्छा लगा। यामिनी ने स्कार्फ बांधा हुआ है , तब कुमार यामिनी से कहता है - क्या तुम्हें तैरना आता है ?
, नहीं, मैंने कभी स्विमिंग नहीं की है।
ऐसा कैसे हो सकता है ? मैंने तो देखा है, ज्यादातर विदेश में रहने वाले लोग तैराकी जानते हैं।
लोग जब ऐसी चीजों में अपना समय व्यर्थ गंवाते थे, तब मैं अपनी कलाकारी में अपना हाथ साफ करती थी, किसी चीज को पाने के लिए , किसी दूसरी चीज का तो त्याग करना ही पड़ता है, कहते हुए वह उसके बहुत करीब आकर बैठ गई और फिर बोली -मेरे पास कितने दिनों के लिए आए हो ?
जब तक तुम कहो ! या जब तक तुम यहां रहती हो तब तक मैं, तुम्हारे पास रह लूंगा।
क्या तुम्हारी पत्नी को, तुम्हारे न रहने पर कोई परेशानी नहीं होगी।
जानता हूं किंतु क्या करूं ? दिल के हाथों मजबूर जो हूँ , काश !के तुम मेरी जिंदगी में पहले आई होतीं ,कुमार की बातें सुनकर यामिनी मुस्कुराई और कुमार के कंधे पर अपना सिर रख दिया।
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