Khoobsurat [part 100]

इंस्पेक्टर तेवतिया,कल्याणी जी से उनके रिश्तेदारों के विषय में पूछता है ,और तब वो नित्या के पास जाता  हैं और उससे पूछते हैं - शिल्पा ,तुम्हारी बहन थी, तुम उसके विषय में मुझे कुछ बता सकती हो। 

इंस्पेक्टर साहब !उसके विषय में, मैं क्या बताऊंगी? वह मेरी बुआ की लड़की है , इस नाते मेरी बहन हुई। आप ऐसे समय में आए हैं, जब मैं भोजन बना रही हूं , मुझे भोजन बनाकर अपने पति के दफ्तर में भिजवाना है।


 हम आपका ज्यादा समय नहीं लेंगे, कुछ देर बात करके चले जाएंगे ,कहते हुए इंस्पेक्टर वहीं बैठ गए। नित्या ,इंस्पेक्टर को यूँ ही टरकाना चाहती थी किंतु जब वो वहीं बैठ गए ,तो कुछ देर के लिए उनसे बात करने के लिए बैठ गई। तब नित्या ने  कहा -पूछिए ! आप क्या पूछना चाहते हैं ?

तुम तो जानती ही हो ,हम, तुम्हारे जीजा यानि रंजन के केस की छानबीन कर रहे हैं ,जो अब इस दुनिया में नहीं रहे ,उनकी पत्नी भी ग़ायब है ,गायब है या ग़ायब हो गयी ,हम उसी सिलसिले में आपसे कुछ पूछना चाहते हैं ,अपनी बहन यानि शिल्पा के विषय में हमें कुछ बताइये !

तब नित्या बोली -शिल्पा एक अच्छी कलाकार है , उसका रूप, रंग साधारण है , इसलिए थोड़ा सा मानसिक रूप से परेशान रहती थी, किंतु उसे रंजन के रूप में, एक अच्छा पति मिला, दोनों एक- दूसरे से प्रेम करते थे, यह विवाह भी उनकी मर्जी से ही हुआ है।

 तो फिर उसने ,अपने पति का खून क्यों कर दिया ?

यह आप कैसी बात कर रहे हैं ?भला वो क्यों, 'रंजन जी' की हत्या करने लगी ?आपके पास क्या सबूत है ?कि उनकी हत्या शिल्पा ने ही की है। 

उसके पति की हत्या हुई है ,अब वो कहाँ है ?

ये मैं कैसे बता सकती हूं ,कि अब वो कहाँ है ?

तब आप, हमें अपना काम करने दीजिये !जो आपसे पूछा जाये, उसी बात का जबाब दीजिये !उन्होंने हत्या की है या नहीं ,वो तो हम पता लगा ही लेंगे।

तब नित्या को लगा ,इंस्पेक्टर थोड़ा टेढ़ा है ,किसी भी बात का कुछ भी अर्थ निकाल सकता है ,इससे संभलकर ही बात करनी होगी ,तब वो बोली -  दोनों आपस में बड़े ही प्रेम से रह रहे थे। एक बार हमारे यहां खाने पर भी आए थे। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं जानती हूं , मैं तो यह भी नहीं जानती हूं, कि वो बुआ का घर छोड़कर , उस कोठी में कब और क्यों गए थे ? यह बात तो मुझे बाद में ही पता चली, कि वे  लोग,अब बुआ जी के साथ नहीं रह रहे थे।

' रंजन' के विषय में आप क्या जानती हैं ?

' रंजन' के विषय में, मैं ज्यादा कुछ नहीं जानती हूं,बस इतना ही जितना सब जानते हैं। 

हमें आप बताइये !आप उन्हें कितना जानती है ?और लोगों से भी पूछ लेंगे। 

 वो एक अच्छा लड़का था , मेरे पति के कंपनी में ही नौकरी करता था ,मेरी बहन यानि शिल्पा से उसका विवाह हुआ ,फिर उसने नौकरी छोड़ दी ?

उसने नौकरी क्यों छोड़ दी ?इतनी महंगाई में इतनी अच्छी नौकरी छोड़ना ,भला क्या कारण हो सकता है ?

 सही कारण तो मैं, नहीं जानती हूं, किंतु इतना कह सकती हूं, हो सकता है , उन्होंने कोई कारोबार करने का सोचा हो और शायद कर भी रहे थे, इसलिए नौकरी छोड़ दी होगी। 

वह तुम्हारी बहन थी, क्या तुमसे, वो अपनी बातें शेयर नहीं करती थी ?

नहीं, शादी से पहले मैं दो साल वही रही हूं किंतु शादी के बाद हमारा मिलना और बातचीत करना लगभग कम ही हो गया था।

ऐसा क्यों ?

वो अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गयी ,मैं अपनी गृहस्थी में... भला इस बात का भी कोई कारण हो सकता है ,इन छोटी -छोटी बातों पर कौन ध्यान देता है  ?

हम देते हैं ,एक छोटी से छोटी बात भी ,हमारे लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हमें उस कोठी में, रंजन का फोन मिला था , इंस्पेक्टर की बात सुनकर नित्या थोड़ा घबरा गई ,उसने सोचा -उसके फोन में कुछ ऐसा, वैसा तो नहीं था जिसके विषय में, मैं नहीं जानती हूं। इंस्पेक्टर की नजरें , नित्या को टटोल रही थीं , तब इंस्पेक्टर बोला -रंजन के फोन में आपकी बहुत सारी फोटो हैं , और हमने, जो उनकी'' कॉल रिकॉर्डस'' निकाले  हैं , उससे लगता है, वो आपसे बहुत बातें करता था,हमारा मतलब है ,आपकी,अपनी  बहन से भी इतनी बातें नहीं हुई होंगी ,जितनी आप अपने जीजा से करती थीं।  

पहले तो नित्या घबरा गई, उसका रक्त संचार और ह्रदय की धड़कने तीव्र होने लगीं किन्तु वो , अपने को संभालते हुए बोली -कैसी फोटो हैं ? आप मुझे दिखाएंगे। 

तब इंस्पेक्टर ने उसे कुछ फोटो दिखाई, उन्हें देखकर नित्या  ने सुकून की सांस ली और बोली -यह सभी फोटोस तो ज्यादातर, विवाह के समय की है, हम लोग, जब उनके विवाह में गए थे,' रंजन 'मेरे पति के अच्छे दोस्त भी रहे हैं , और मेरी बहन के पति होने के नाते, मैं उनकी साली भी लगती हूं ,साली की फोटो रखना कोई जुर्म तो नहीं है। किसी लड़की की तस्वीर अपने मोबाइल में रखना, कोई अपराध तो नहीं है,सहजता से नित्या ने पूछा।  

किंतु पत्नी से ज्यादा, आपकी तस्वीरें  हैं,'' कॉल रिकॉर्डस '' में भी आप लगातार उनके  संपर्क में रही हैं ।

 कब तक ?

ये बात आप ही बताइये !हमारे प्रश्नों का जबाब देने से बचने के लिए ,आप हमसे ही प्रश्न पूछ रहीं हैं ,मैं ही बता देता हूँ ,लगभग उनकी मृत्यु से एक डेढ़ महीना पहले आपने उनसे कोई संपर्क नहीं रखा, ऐसा क्यों ?

मैं ज्यादातर अपनी बुआ के पास रही थी, मैंने अपनी 'ग्रेजुएशन' वहीं रहकर की थी। वहीं पर रंजन, शिल्पा से मिले थे, उनकी आपस में बातचीत होती थी। मेरा विवाह हो चुका था, तब वह शिल्पा के विषय में, जानने के लिए अक्सर मुझे फोन किया करते हैं। जैसा कि अक्सर लड़के अपनी दोस्त को ज्यादा से ज्यादा अपने व्यवहार से अपने तोहफों से उन्हें प्रभावित करने का प्रयास करते हैं , इसलिए मुझसे  फोन पर पूछा करते थे उसे खाने में क्या पसंद है, कैसा रहना पसंद हैं ?बस इसी तरह की कुछ बातें.... 

धीरे-धीरे मैं भी ,अपने परिवार में व्यस्त हो गई थी, इसलिए मैं उनका फोन कम ही उठा पा रही थी और इसी कारण मुझे यह भी नहीं पता चला कि वे  लोग, कब बुआ का घर छोड़कर, दूसरी जगह चले गए हैं इस बीच उनके आपस में संबंध कैसे रहे? ये बात, मैं नहीं जानती। 

रिश्ता जीजा -साली तक ही सीमित था या.....नित्या के चेहरे पर नज़रें गड़ाते हुए कहा -ख़ैर ! आप अपनी बुआ को तो फोन करती ही होंगी ,उन्होंने भी आपको कुछ नहीं बताया। 

मैं ,आपसे कह तो रही हूँ ,इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं जानती कहते हुए वो अपने स्थान से उठ खड़ी हुई और बोली -मुझे देर हो रही है ,जितना भी मैं जानती थी ,आपको बता चुकी हूँ। 

इंस्पेक्टर को लग रहा था -बड़ी आसानी से, इसने अपना पीछा छुड़ा लिया है, लेकिन कुछ तो है जो यह है हमसे छुपा रही है। तब इंस्पेक्टर ने कहा -अभी मैं चलता हूं तुम्हें कोई भी बात याद आए, या हमें कुछ पूछना पड़े तो आपसे  फिर मिलेंगे।

 जी अवश्य ! 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post