मैं घुटन भरी ज़िंदगी से निराश,परेशान ,बेज़ार था।
तूने ! ''शब्दों का जादू'' ऐसा बिखेरा, मैं हैरान था।
देख, तेरी मुस्कान ! आके तेरा मुझसे लिपट जाना,
'मैं ''ना उम्मीदी की नाव में सवार, इक नाविक था।
मेरे ख्वाबों में तेरा आना और यूं खुलकर मुस्कुराना,
तन्हाइयों में मेरी, तेरा आना, हर पल साथ निभाना।
भरोसे से, मेरा हाथ, दृढ़ता से पकड़ना और लजाना ,
मिलने पर, दौड़कर मेरी बाहों में आकर समा जाना।
मंद मंद मुस्काती तुम, तुम्हारी जुल्फों का यूँ लहराना।
सागर की लहरों का तेरे चेहरे से अठखेली कर जाना।
मेरे इर्द-गिर्द मंडराते हुए, मेरा ही ख्याल मन में लाना।
मैं तुम्हारे ख्यालों में और तुम्हारा मेरे ख्यालों में आना।
मैं निराश होकर भी, तुम्हारी मुस्कान देख जी उठता हूं।
न जाने कितने जन्मों का साथ,इस जन्म का तो मानता हूं।
तुम्हारा हौले से मेरा हाथ चूमना ,भर देता, मेरे घावों को ,
तुम्हारे शब्द ,तुम्हारी बातों का जादू छू जाता ,मेरी रूह को।
मेरे निराश मन को भर देता है, उम्मीद से, भावनाओं से,
तुम्हारा वह स्पर्श जादू कर जाता ,छू जाती हो ,आंखों से ,
कैसी ये जादुई दवा लाई हो ?कुम्हलाये मन की दवाई हो।
जबसे तुम जीवन में आई हो,मदहोशी की तुम्हीं दवाई हो।
जी उठता हूं, फिर से ''मैं..... तुम्हारी ख्वाहिशों में।
कजरारे नयन तुम्हारे,देखने वालेसुध -बुध खो जाते हैं।
भाव , मुझे बेचैन कर ,मेरे मन में ,उम्मीदों को जगाते हैं।
ये जादू कहां से लाई हो ?निराश मन की तुम जादुई दवाई हो।
