Jadui dawa

मैं घुटन भरी ज़िंदगी से निराश,परेशान ,बेज़ार था। 

तूने ! ''शब्दों का जादू'' ऐसा बिखेरा, मैं हैरान था। 

देख, तेरी मुस्कान ! आके तेरा मुझसे लिपट जाना,

'मैं ''ना उम्मीदी की नाव में सवार, इक नाविक था। 



मेरे ख्वाबों में तेरा आना और यूं खुलकर मुस्कुराना,  

तन्हाइयों में मेरी, तेरा आना, हर पल साथ निभाना।

 भरोसे से, मेरा हाथ, दृढ़ता से पकड़ना और लजाना , 

मिलने पर, दौड़कर मेरी बाहों में आकर समा जाना।

 

मंद मंद मुस्काती तुम, तुम्हारी जुल्फों का यूँ लहराना।

 सागर की लहरों का तेरे चेहरे से अठखेली कर जाना।  

मेरे इर्द-गिर्द मंडराते हुए, मेरा ही ख्याल मन में लाना। 

मैं तुम्हारे ख्यालों में और तुम्हारा मेरे ख्यालों में आना।

 

मैं निराश होकर भी, तुम्हारी मुस्कान देख जी उठता हूं। 

न जाने कितने जन्मों का साथ,इस जन्म का तो मानता हूं।

तुम्हारा हौले से मेरा हाथ चूमना ,भर देता, मेरे घावों को ,

तुम्हारे शब्द ,तुम्हारी बातों का जादू छू जाता ,मेरी रूह को। 


 मेरे निराश मन को भर देता है, उम्मीद से, भावनाओं से,

तुम्हारा वह स्पर्श जादू कर जाता ,छू जाती हो ,आंखों से ,  

 कैसी ये जादुई दवा लाई हो ?कुम्हलाये मन की दवाई हो। 

जबसे तुम जीवन में आई हो,मदहोशी की तुम्हीं दवाई हो।  

 

जी उठता हूं, फिर से ''मैं.....  तुम्हारी ख्वाहिशों में। 

 कजरारे नयन तुम्हारे,देखने वालेसुध -बुध खो जाते हैं।

भाव , मुझे बेचैन कर ,मेरे मन में ,उम्मीदों को जगाते हैं। 

ये जादू कहां से लाई हो ?निराश मन की तुम जादुई दवाई हो। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post