पता नहीं ,कोई अजीब सा गांव है , उस गांव में कुछ चिट्ठियां मेरे सामने आती हैं ,न जाने ,कौन उन चिट्ठियों को भेज रहा है ?यह भी नहीं पता, मेरे नाम है या नहीं, बस उनमें शायद कोई मुझसे सहायता मांग रहा है ,कुछ समझ नहीं आ रहा, मैं उस गांव में जाता हूं, उन लोगों से पूछता हूं ,तो उनकी आवाज मुझे सुनाई नहीं देती, वे सब मुझसे क्या कह रहे हैं ?कुछ सुनाई नहीं देता। उनकी बातें समझने का प्रयास करता हूं तभी मेरा दोस्त, यश न जाने कहां गायब हो जाता है ? किसी गांव का सपना बार-बार आ रहा है। कोई मुझे चिट्ठियां लिख रहा है, मुझसे सहायता मांग रहा है लेकिन समझ नहीं आ रहा मैं उसकी सहायता कैसे करूं ?
तुषार का सपना सुनकर, शारदा जी हंसने लगीं , और हंसकर पूछने लगीं -तुमने कभी कोई गांव देखा है, क्या तुम किसी गांव में गए हो, तुम जानते भी हो, गांव कैसे होते हैं ? और सपने में तुम्हारे गांव आ रहे हैं , वहां भी कोई तुमसे सहायता मांगता है, तुमने अपने आप को देखा है, अभी तुम दसवीं क्लास में ही हो , तुम किसी की सहायता क्या करोगे ? कहते हुए जोर-जोर से हंसने लगीं और बोलीं -तुम बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो ! किसी गांव के या गांववालों के सपने नहीं देखने हैं।
उनकी बात सुनकर तुषार चिढ़ गया और बोला -मैं कोई जान -बूछकर सपने देखता हूं, अपने आप आ जाते हैं।
यह सिर्फ एक सपना है, तुम्हारे मन का वहम है , तुम अभी दसवीं क्लास में पढ़ते हो, तुम भला किसी की क्या सहायता करोगे? अभी तुम बच्चे हो ,पहले तुम अपनी ही सहायता कर लो, तुम्हें पता है, अगले महीने तुम्हारी परीक्षाएं हैं और तुम डरावने सपने देख रहे हो, अपनी परीक्षाएं कैसे दे पाओगे ? जाओ ! नहा धो लो, और तैयार हो जाओ !थोड़े सख़्त लहज़े में बोलीं। जब तुषार नहाने जाने लगा ,तब बोलीं - भगवान का नाम लिया करो ! डरावने सपने आने बंद हो जाएंगे। मन ही मन बुदबुदाने लगीं, न जाने कैसे -कैसे वहम पाल लेता है ?
तुनकते हुए तुषार नहाने के लिए चला जाता है ,और सोचता है -मम्मी सही तो कह रही हैं ,मैंने आज तक कोई गांव नहीं देखा ,न ही किसी गांव में गया। तब भी मुझे अजीब से गांव दिख रहे हैं ,हो सकता है इसीलिए किसी गांव की मेरी कोई कल्पना हो और वही सही नहीं बन रही ,जब मैंने कोई गांव ही नहीं देखा, उसने अपने चेहरे पर साबुन लगाया हुआ था ,तभी उसके कानों में जैसे एक भारीभरकम आवाज गूंजी -''तुम मेरी सहायता तो करोगे न..... !
तुषार ने जल्दी से अपने चेहरे पर पानी डाला, यह देखने के लिए कि यह कौन बोला ? किन्तु जैसे ही मुँह धोया ,वहां कोई नहीं था। बस नल चल रहा था किन्तु आवाज तो आई थी। क्या ये भी मेरा वहम हो सकता है ? वह जल्दी से नहाकर बाहर आया और तैयार होने लगा। किन्तु मन में वही विचार चल रहे थे ,वह अपने स्कूल जाने के लिए तैयार होते हुए भी, अपने प्रश्नों के उत्तर ढूंढ़ रहा था। सामने दीवार पर टेलीविजन चल रहा था ,उसके पापा समाचार सुन रहे थे। तब तुषार के मन में विचार आया ,कभी गांव नहीं गया तो क्या हुआ ?टेलीविजन में तो देखा है। पहले सोचा ,मम्मी से कहे फिर सोचा -कुछ न कहने में ही भलाई है ,मेरी बात तो वे सुनेंगी ही नहीं ,इसलिए तैयार होकर अपने स्कूल चला गया।
क्या हुआ ?आज माँ -बेटे में किस बात को लेकर ज़िरह हो रही थी ,टीवी बंद करके तुषार के पापा ताराचंद जी ने पूछा।
बेफिज़ूल की बातें करता है ,सपने में न जाने क्या -क्या देखता रहता है ?और फिर उसे लगता है ,उसमें कोई न कोई सच्चाई तो है।
उसने सपने में ऐसा क्या देख लिया ?जो तुम इतनी नाराज हो रहीं थी। बच्चा है ,तुम्हें तो समझदारी से काम लेना चाहिए। सुबह -सुबह उसे डांटने लग गयीं।
डांटूंगी नहीं तो, उसकी ये हरक़तें बढ़ती जाएँगी ,उन पर यहीं विराम लगा देना ही उचित है।
स्कूल से आकर तुषार शाम को ,व्यक्तिगत शिक्षा के लिए गया। पढ़ाई का बड़ा ही दबाब बन रहा है क्योंकि अबकि बार बोर्ड की परीक्षाएं जो हैं। शाम को बैठा पढ़ रहा था ,अचानक उसके फोन पर कोई संदेश आया। उसने जैसे ही फोन देखा ,आश्चर्यचकित रह गया -उसमें लिखा था ,तुम मेरी सहायता के लिए आओगे न..... कोई नंबर नहीं ,अचानक ही कमरे की लाइट चली गयी ,वह अँधेरे और एकांत में ड़र गया ,किन्तु फोन की रौशनी आ रही थी ,जिसमें फिर से एक संदेश लिखा जा रहा था -तुम ही मुझे मुक्ति दिलवा सकते हो ,आ रहे हो न... मैं वहीं उसी गांव में मिलूंगा। तुषार को लगा जैसे -वहां पर कोई है ,उसने अँधेरे में आँखें फाड़कर देखने का प्रयास किया किन्तु उसे कोई दिखलाई नहीं दिया किन्तु वो इतना डर गया था ,वो चिल्ला उठा -मम्मी ! तभी एकदम से लाइट आ गई।
बेटे की, हृदय विदारक चीख़ सुनकर, शारदा जी दौड़ती हुई, आती हैं और आते ही कहती हैं -क्या सो गया था ?फिर से वही डरावना सपना देखा।
नहीं ,अभी तो मैं, जाग ही रहा हूँ।
फिर चिल्लाया क्यों था ?क्या अब जागते हुए ही सपने देखने लगा।
नहीं, मम्मी मैं, सो नहीं रहा था, मैं तो अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था किंतु न जाने कहां से मेरे फोन में एक संदेश आया ,बड़ा ही अजीब सा संदेश था।
ऐसे ही किसी ने भेज दिया होगा ,तेरे ही किसी दोस्त ने मज़ाक किया होगा। तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान क्यों नहीं देते हो ? सारा दिन फोन में लगे रहते हो,इसे साथ में रखने की क्या आवश्यकता है ?डांटते हुए उन्होंने पूछा।
पता नहीं, यह संदेश ! किसने भेजा है ? किसी का नाम -नंबर कुछ भी नहीं आ रहा है, कहते हुए ,उसने अपना फोन अपनी मम्मी को दिखाया। उस फोन में, उसके सभी संदेश उन्होंने पढ़े लेकिन ऐसा कोई भी संदेश वहां पर नहीं था। तब वो बोलीं -तू क्या हमसे मजाक कर रहा है ? इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है। तू कहीं कोई, कहानी तो नहीं गढ़ रहा है, सच बता ! अपनी परीक्षाओं की तैयारी ही कर रहा है उन्होंने, संदेह से तुषार से पूछा।
अबकी बार, तुषार चिढ गया और बोला -आप मुझ पर कभी विश्वास नहीं करती हैं , मैं कितने दिनों से कह रहा हूं ,कोई है, जो मुझे सपनों में आकर तंग करता है , अब तो सपनों में ही नहीं बल्कि मेरे फोन पर भी किसी ने संदेश भेजा है और अब भी आप कह रही हैं -कि यह किसी की शरारत है।
ले ये फोन देख ! तू ही दिखला दे ! कहां लिखा है ? वह संदेश शायद मुझे ना दिख रहा हो, वे भी नाराज होते हुए बोलीं।
