Khoobsurat [part 97]

कुमार ,यामिनी की तलाश में भटक रहा था ,वो चाहता था यामिनी के जाने से पहले, एक बार तो उससे मिल ले किन्तु तभी मधुलिका का फोन आता है। अपनी बेचैनी को छुपाते हुए कुमार उसका फोन उठाता है ,तब मधुलिका उससे कहती है -शीघ्र ही घर आ जाइये !आपके पापा की तबियत बिगड़ गयी है ,उनको अस्पताल में भर्ती किया गया है। दुविधा में फंसा कुमार ,अपने लिए टैक्सी मंगवाता है ताकि वो घर वापिस पहुंच सके । गाड़ी में बैठकर भी उसे अपने पापा के लिए दुःख तो था किन्तु उससे अधिक यामिनी से न मिल पाने की चाहत, उसे कमजोर किये दे रही थी। 


गाड़ी में बैठकर ,इत्मीनान से यामिनी को फोन करता है किन्तु उसका फोन नहीं लगा। उसे ऐसा लग रहा था ,जैसे वो किसी अद्भुत लोक की यात्रा करके अब वो नर्क के रास्ते जा रहा है अथवा नींद में देखे, सुंदर सपने ,अचानक ही आँख खुलने से टूट जाते हैं और तब इंसान को वास्तविकता का ज्ञान होता है कि जो कुछ भी वो देख रहा था ,वो उसका स्वप्न था जो अब टूट चुका है। इसी प्रकार कुमार भी छटपटा रहा था। 

इंस्पेक्टर तेवतिया ,अपने एक हवलदार के साथ कल्याणी देवी जी से मिलने आता है ,कोठी  के आस -पास देखता है वहां पर अजीब सी शांति थी, वह सीधा कोठी के अंदर चला गया और कल्याणी के पास पहुंच गया। इससे पहले कि वह कोई सवाल पूछता, कल्याणी जी ने पूछा-इंस्पेक्टर साहब ! क्या मेरी बेटी का कुछ पता चला ? 

जी नहीं, वही तो मैं आपसे पूछने आया हूं, यदि उसका अपहरण हुआ होता तो, आपसे किसी ने तो फिरौती की रकम मांगने के लिए फोन किया होता ? इसका मतलब है , किसी ने उसका अपहरण भी नहीं किया है।

 यह मैं कैसे बता सकती हूं ?

अब तक हम इस केस को ,आपकी बेटी के अपहरण और आपके दामाद की हत्या के रूप में देख रहे थे किन्तु हमें लगता है ,जो हमने पहले सोचा था ,वही उचित लग रहा है।

क्या सोचा था ?आपने ! 

यही कि आपकी बेटी और दामाद में झगड़ा हुआ और आपकी बेटी ने गुस्से में उस पर वार किया जिसके कारण उसकी गर्दन की नस कट गयी। तब भी वो जिन्दा था किन्तु यदि उसे डॉक्टर को दिखलाया जाता तो शायद ,बच सकता था किन्तु आपकी बेटी उसे मारकर भाग ख़ड़ी हुई ,ज्यादा रक्तस्राव के कारण आपके दामाद की मौत हो गयी। 

इंस्पेक्टर साहब !आपकी सुईं एक ही जगह पर अटकी हुई है किन्तु मेरी बेटी भी तो मिल नहीं रही है ,आप ये क्यों नहीं सोचते ?

बहुत सोचा ,तभी तो बता रहे हैं ,हमारा रात -दिन चोर -डाकुओं से ही पाला पड़ता है। यदि आपकी बेटी का अपहरण हुआ होता तो फिरौती की रकम मांगने के लिए तो आपके पास फोन आया होता, उसी ने हत्या की है इसीलिए वो भाग गयी है और कहीं छुप गयी है ,हत्यारा वहीं थोड़े ही न बैठा रहता है । अब आप, हमें ये बताइये ! क्या आपकी बेटी ने भी आपको फोन नहीं किया ? 

यह आप कैसी बातें कर रहे हैं ? जब वह किसी की कैद में होगी तो भला, कोई अपहरण कर्ता  उसे  फोन क्यों  करने  देगा ?

आप बार -बार उसके अपहरण की चर्चा करके हमें, हमारे केस से भटका रही हैं ,नाराज होते हुए इंस्पेक्टर ने कहा -यदि उसका अपहरण हुआ होता तो आपके पास अपहरण कर्ता का फोन आता ,फिर आपकी बेटी का कोई क्यों अपहरण करेगा ?

 आप अपनी तहकीकात कीजिए मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है , इतने दिन हो गए ,आप मेरी बेटी को ढूंढ ही नहीं पा रहे हैं,कहते हुए कल्याणी जी रुआंसी हो गयी।  

अपने अपनी बेटी का ,जो नंबर आपने दिया है, वह नंबर भी नहीं लग रहा है'' स्विच ऑफ'' आ रहा है या तो आपकी बेटी बहुत चालाक है या फिर वह अपहरण कर्ता बहुत चालाक है। 

मेरी बेटी पर आप, बेवजह ही शक कर रहे हैं, वह भला अपने पति का खून क्यों करेगी ? उनके विवाह को तो ज्यादा समय भी नहीं हुआ था।

 हमने उसकी सहेलियों में आसपास सब जगह पता करवा लिया किंतु कहीं भी किसी को, आपकी बेटी के विषय में कोई जानकारी नहीं है न ही ,उसने किसी से कोई संपर्क किया है और यदि उसका अपहरण हुआ है तो किसी का फोन तो आता ,पैसे की मांग करता , फिर आपकी बेटी कहां चली गई ?

यह बात तो आपको ही पता लगानी है, मैं क्या बता सकती हूं ? आप अपने रिश्तेदारों के नाम और पते  दीजिए !

उनसे आपको क्या मिलेगा ?आजकल रिश्तेदार इतना मतलब ही कहाँ रखते हैं ? जो हमसे चिढ़ा हुआ है वो हमारी बुराई करेगा ,जिसको हमसे हमदर्दी है ,वो सहानुभूति जतलायेगा।  रिश्तेदारों में मेरा भाई मेरा मायका है, ससुराल पक्ष से इनका एक भाई और है। हमने वहां भी सब जगह पूछ लिया है, शिल्पा न जाने कहां है किंतु वहां भी नहीं है। 

फिर भी आप हमें उनके नाम और पते दीजिए हम उनसे बातें करेंगे आप उसे और जगह नहीं ढूंढ रहे हैं बस सीधा तो यहां, घर में ढूंढने आ जाते हैं या फिर आसपास रिश्तेदारी में ढूंढ रहे हैं। 

तब आप ही हमें बता दीजिए कि आपकी बेटी कहां जा सकती है ? उसने  कैसे कपड़े पहने थे, कुछ पता नहीं चल रहा है, सभी बस अड्डों पर भी हमने पता करवा लिया है ,हमारी जाँच  चल रही है अभी हम निश्चिंत नहीं बैठे हैं ,पता तो हम लगा ही लेंगे लेकिन आपको भी सचेत किया जाता है यदि उसका कोई फोन आता है तो आप हमें तुरंत सूचित करेंगी,कहकर इंस्पेक्टर कोठी से बाहर आते हैं। 

 कल्याणी जी के फोन भी रिकॉर्डिंग पर डाल दिए गए थे क्योंकि इंस्पेक्टर को लगता था -शायद कल्याणी जी अपनी बेटी को बचाने का प्रयास कर रही है किंतु अभी तक कोई भी ऐसा फोन नहीं उनके लिए नहीं आया और न ही उन्होंने किसी को  फोन किया। 

यामिनी ,कुमार के चले जाने के पश्चात अपने होटल में आती है और अपना सामान लेने आती है ,तब काउंटर पर बैठी लड़की ने उसे बताया -मैडम !आपको एक सर पूछ रहे थे। 

जानती हूँ ,तुमने क्या कहा ?

जैसा आपने बताया ,कह दिया वो तो यहाँ से गयीं किन्तु मैं उनसे कहना चाह रही थी कि अभी आपका सामान है किन्तु उन्होंने मेरी कोई बात नहीं सुनी और बाहर की तरफ दौड़े। शायद आपको ही ,ढूंढने गए थे। 

यामिनी खुश होकर उसकी बातें सुन रही थी ,मन ही मन प्रसन्न थी ,कुमार उसके लिए परेशान था। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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