स्मरण, हो आतीं ,वो बातें ! वो यादें, जब' नववर्ष' आता था।
बालपन की वो यादें ! आज भी, मन में उमंगें जगा जाती हैं।
अपने हाथ से कार्ड सजा, प्रिय का स्मरण कर मुस्कुराते थे।
दिल में उठती उमंगों को महसूस कर, पुलकित हो जाते थे।
शायरी अपने शब्दों में लिख,'भाव' किसी के चुरा लाते थे।
बालपन की वो शायरी न जाने , किसने उसे लिखा होगा ?
''चंदा की चांदनी में नहा रही, दीदी !की याद मुझे सता रही।''
जिस शायरी से हंसी आती,उस शायरी को लिख इठलाते थे।
बालपन की वो,हंसीं यादें ! आज भी गुदगुदा जाती हैं।
कितनी तैयारी में लग जाते थे ? जब नववर्ष आता था।
दूर भेजने के लिए कार्ड, सुंदर,रंगीन लिफाफे लाते थे।
'सुंदर शब्दों' से उस पते को सहेज , पोस्ट कर आते थे।
अब इतनी प्रतीक्षा नहीं रही ,पहले सी तैयारी नहीं रही।
आज भी 'नववर्ष 'आता है ,न वो समय रहा, न कार्ड रहे ,
आज भी फोन पर ही सही , 'बधाइयों' का इंतजार रहे।
''नववर्ष की शुभकामनाओं ''से,'' दिल बाग बाग रहे।''
आज भी ,दोस्तों संग , मुस्कुराने के पल ढूंढ लाते हैं।
जीवन के अथाह सागर से, शब्दों के मोती ख़ोज लाते हैं।
भेज देते हैं, कुछ पलों को चुराकर,' नववर्ष की बधाइयां !'
जिनको पढ़कर आज भी, ''प्रियजन ''खुश हो जाते हैं।
कुछ कहते ये'' नववर्ष'' हमारा नहीं ,'चैत्र मास' में आएगा।
फूलों की खुशबू ,बसंत की रंगत, खुशियां हज़ार दे जायेगा।
ठंड से ठिठुरना ,ये पतझड़ ! कैसे, कोई 'नववर्ष ''मनाएगा ?
दोस्तों !ख़ुशी मनाना है,आज मना लो ! कल भी मन जायेगा।
