पुलिस अपनी छानबीन में जुटी थी , कुछ समझ नहीं आ रहा था, आखिर इस हत्या का क्या कारण हो सकता है ? कोई तो दुश्मन होगा, जो घात लगाए बैठा होगा। यहां पर, इन लोगों को ज्यादा लोग, जानते भी नहीं थे। यदि हम यह कह दें कि दहेज के लिए लड़की को सताया जा रहा था किंतु यहां तो लड़के की हत्या हुई है और लड़की गायब है, फिर क्या कारण हो सकता है ?इंस्पेक्टर तेवतिया इस हत्या का कारण जानने का प्रयास कर रहे थे।
सर ! हमने तो सुना है, वहां भी लोग कह रहे थे -वो लड़की यानि शिल्पा एक जानी-मानी कलाकार है, हेेड कांस्टेबल मंजू ने, इंस्पेक्टर तेवतिया से कहा।
कहीं ऐसा तो नहीं, इन दोनों में झगड़ा हुआ हो, दोनों में हाथापाई हुई हो, और ऐसे में लड़की इस लड़के को मार कर गायब हो गई।
हां, सर यह संभावना हो सकती है ,गहरी सांस लेते हुए , तावड़े ने कहा।
कहीं ऐसा तो नहीं, इनका एक महीने पहले यहां आना ही , किसी योजना या षड्यंत्र के तहत हुआ हो इंस्पेक्टर तेवतिया ने अनुमान लगाया। वैसे तो अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने पर ही पता चल सकेगा कि आखिर इसकी मृत्यु किस हथियार से हुई है ?
तीन दिनों के पश्चात रंजन की' पोस्टमार्टम रिपोर्ट' भी आ गई, उसमें बताया गया था ,उसकी गर्दन पर किसी नुकीले, तीखे हथियार से वार किया गया है, जो आगे से बारीक है और पीछे से चौड़ा है,जख़्म ज्यादा गहरा तो नहीं है किन्तु उस हथियार से गर्दन पर इस तरह वार किया गया, उसकी स्वाँस नली कट गयी और अधिक रक्त बह जाने के कारण, उसकी मृत्यु हुई है और उस जख्म पर रंगों के अंश भी पाए गए हैं, जो की चित्रकारी में प्रयोग किए जाते हैं।
इंस्पेक्टर तेवतिया ने , अपनी टीम को साथ लिया और दोबारा से, कोठी नंबर 308 पर जांच करने पहुंच गये। तावड़े हथियार ढूंढो ,यहीं कहीं मिलना चाहिए, जिसमें रंग भी लगे हों।
तभी अचानक से मंजू बोली -सर! कहीं, पेंटिंग के नाइफ़ से तो, इसको मारा नहीं गया।
ऐसा, तुम कैसे कह सकती हो ?
क्योंकि मुझे मालूम है ? पेड़ पौधे अथवा पहाड़ बनाने के लिए एक ऐसे नाइफ का प्रयोग किया जाता है जो आगे से नुकीला और पीछे से थोड़ा चौड़ा होता है।
वहां तुम्हें कोई ऐसा हथियार मिला था, इंस्पेक्टर ने पूछा।
नहीं सर , हो सकता है, उससे हत्या करके उसे किसी दराज में या किसी ऐसी जगह फ़ेंक दिया गया हो ,जहाँ हमारी दृष्टि नहीं गयी हो।
ह्म्म्मम्म ,तुम सही कह रही हो ,कुछ तो ऐसा मिलेगा, जिससे हम इस केस में आगे बढ़ सकते हैं ,मेज ,पलंग ,दराज़ कोई भी चीज मत छोड़ना !
सामान उलट -पलट करके ढूंढने का प्रयास करते हुए तावड़े ने कहा -सर ! हमें इस कमरे तो कुछ नहीं मिला कहीं ऐसा तो नहीं हम घर में ढूंढ़ रहे हैं और वो बाहर फ़ेंक दिया गया हो। जब कोई हत्या करेगा तो अपने हथियार को छुपाने का प्रयास तो करेगा।
यदि ये सोची -समझी ,योजना के तहत की गयी हत्या है ,तो वो अवश्य ऐसा ही करेगा और यदि अनजाने में हत्या हुई है तो घबराहट में इधर -उधर फेंककर भी जा सकता है या जा सकती है।
आपको क्या लगता है ?क्या उसकी पत्नी ने ही इसकी हत्या की होगी।
अभी तक तो ऐसा ही लग रहा है ,इस दोनों के सिवा घर में कोई नहीं ,और हत्या भी एक ऐसे हथियार से हुई है ,जो एक पेंटर के हाथ में रहता है ,तुम उधर पलंग के नीचे देखो !कभी वहां ,इसके नीचे फेंक दिया गया हो। बातें करते हुए वे लोग ,घर की चीज ,एक-एक दराज, पलंग के नीचे सब जगह देख रहे थे।
तभी मंजू की दृष्टि, आईने के पीछे एक स्थान पर पड़ी उसने उसे धीरे से हटाया वह चाकू वहीं पर पड़ा हुआ था। प्रसन्न होते हुए मंजू ने कहा -सर मिल गया , देखिए ! यही नाइफ़ होता है जिससे कलाकार अपनी चित्रकारी करते हैं।
इंस्पेक्टर और तावड़े तुरंत वहां आये ,उन्होंने उसे पहली बार देखा था,-मंजू को देखकर बोले -क्या इससे रंजन की हत्या हुई होगी ?उसको ध्यान से देखते हुए ,उन्होंने कहा - तुमने यह बहुत अच्छा कार्य किया है। इसे देखकर तो मुझे लगता है, यह काम कल्याणी जी की बेटी का ही हो सकता है। उसी के पास यह यंत्र होगा एक पेंटर के सिवा इसे कौन प्रयोग में लायेगा ?
क्या कमाल की चीज है ?चाकू का काम तो काटना ही है किन्तु इसको कलाकारी के लिए बनाया गया है ,ताकि रंगों को काटकर सुंदर चित्र या आकृति बनाई जा सके किन्तु वाह रे इंसान !तूने इसे भी नहीं छोड़ा ,प्रेम का रंग भरते -भरते इसे लहू से ही भर दिया। सर !एक बात कहूँ ! ये कलाकार भी तो सरफ़िरे ही होते हैं।किसी -किसी को जुनून की हद तक अपनी कला से प्रेम होता है। कहीं ऐसा तो नहीं ,उन मैडम को लाल रंग की आवश्यकता थी और जब पति ने लाने से इंकार किया होगा ,तो पति के लहू से ही वो चित्रकारी पूर्ण की होगी।
तावड़े !तुम भी न.... बेसिर- पैर की बातें करते हो,भला ऐसा भी कहीं होता है ,पहले वो लड़की अपने पति को मारेगी फिर इत्मीनान से उसके लहू से चित्रकारी करके स्वयं भी गायब हो जाएगी। ,मंजू मुस्कुराते हुए बोली।
ये तो मन का विचार था मन में आया और कह दिया ,सरफ़िरे हत्यारे तो इससे ज़्यादा वहशीपन कर जाते हैं।
आओ !चलो !चलते हैं ,इंस्पेक्टर तेवतिया बाहर की तरफ कदम बढ़ाते हुए कहते हैं। मंजू भी बाहर की तरफ जाने लगी किन्तु तावड़े वापस उन चित्रों की तरफ गया और उन्हें ध्यान से देखने लगा कहीं लाल रंग की जगह रक़्त ही तो नहीं है। उसे ऐसा करते उन दोनों ने देख लिया और मुस्कुराकर आगे बढ़ गए।
कल्याणी देवी जी की कोठी की घंटी बज रही थी , कल्याणी देवी ने गेट खोलने के लिए, अपने नौकर को भेजा। पुलिस को देखकर वह और बोला -जी आपको किससे मिलना है ?
तुम्हारी मालकिन से मिलना है, वो अंदर हैं, वह असमंजस में पड़ गया उसे बताना चाहिए या नहीं, यह बात तो उसकी मालकिन ने उसे बताइ ही नहीं, उसे सोचते हुए देखकर इंस्पेक्टर तेवतिया ने उसे दरवाजे से हटाया और अंदर आ गए।
कौन है ? कल्याणी जी अंदर से पूछ रही थी।
हम हैं...... कहते हुए उन्होंने अंदर प्रवेश किया। इंस्पेक्टर तेवतिया ने अंदर जाकर देखा एक बड़ा सा हॉल था, काफी आधुनिक और महंगे सामानों से सजा हुआ था। वहीं एक कुर्सी पर कल्याणी देवी जी बैठी हुई थीं ,उन्हें देखकर वे कुर्सी से उठीं और बोलीं - आइये !इंस्पेक्टर साहब !क्या मेरे दामाद के कातिल का पता चल गया ? मेरी बेटी शिल्पा मिली या नहीं।
वही तो हम आपसे जानना चाहते हैं।
क्या मतलब ?
मतलब यह है, कि आपकी बेटी कहां है ?
ये इंस्पेक्टर को क्या हो गया ?जो स्वयं शिल्पा की माँ से ही उसकी बेटी के विषय में पूछ रहा है ,आख़िर उसने ऐसा क्यों कहा ?चलिए !आगे बढ़ते हैं।
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