Khoobsurat [part 73]

कोठी नंबर 308 में, अभी कुछ दिनों पहले ही एक नवदंपत्ति , रहने के लिए आया था। उन्हें आए हुए, अभी एक महीना भी नहीं हुआ था , लोगों को आज पता चला, उस कोठी में रहने वाले युवक की मौत हो चुकी है,या फिर यह हत्या है। इसका पता तो पुलिस के आने पर ही चलेगा ? इसके साथ इसकी पत्नी भी रहती थी, वह भी, यहां पर नहीं है। पुलिस ने भीड़ में  इकट्ठा हुए लोगों को,जो अंदर आने का प्रयास कर रहे थे, बाहर का रास्ता दिखा दिया और बोले -आप सभी यहां से जा सकते हैं ,यहाँ भीड़ करना उचित नहीं है।

 हमारी छानबीन में व्यवधान पड़ेगा,उन्होंने पूछताछ के लिए, उनके पड़ोसी मेहता साहब को और आसपास के दो -चार लोगों को रोक लिया। सभी को बहुत आश्चर्य हो रहा था, और सभी अटकलें भी लगा रहे थे।इस दंपत्ति के विषय में, कोई ज्यादा कुछ नहीं जानता था क्योंकि अभी इन्हें यहाँ आए हुए ज्यादा दिन भी नहीं हुए थे। थोड़ी बहुत जान -पहचान' मेहता साहब' से ही हुई थी। 


यह बात फैलते - फैलते पूरी कॉलोनी में फैल गई, अंदर पुलिस छानबीन कर रही थी। यह बात तो उन्हें, उन लोगों से ही पता चल गई थी, कि इस व्यक्ति की पत्नी, एक बहुत अच्छी पेंटर है किंतु यह क्या करता है ?वे लोग नहीं जानते। मेहता साहब !से ही पता चला, इस लड़के का नाम' रंजन' है। कमरे में छानबीन के पश्चात उन्हें एक फोन भी मिला और एक घर का पता भी मिला। इंस्पेक्टर तेवतिया ने, फोन नंबर की जाँच की  और उन पर फोन लगाया, जो एक नंबर कल्याणी देवी जी का भी था।जब इंस्पेक्टर तेवतिया ने उन्हें फोन लगाया - हेलो ! जी आप कौन बोल रहे हैं ? उधर से कल्याणी देवी जी ने पूछा। 

जी, मैं इंस्पेक्टर तेवतिया बोल रहा हूं , क्या आप कल्याणी देवी जी बात कर रहीं हैं ?

जी मैं ही कल्याणी हूँ ,आप बताइये !आपने मुझे क्यों फोन किया ?

क्या आप किसी रंजन को जानती हैं ?

एक पल वहां ख़ामोशी रही ,वो सोच रहीं थीं -'रंजन 'ने ऐसा क्या कर दिया ,जो इंस्पेक्टर मुझे फोन कर रहा है। 

 क्या आप मेरी बात सुन रही हैं ?इंस्पेक्टर ने पूछा। 

हां, जी 'रंजन 'मेरा दामाद है, कल्याणी जी ने कहा किंतु मन ही मन घबरा गई ,न जाने क्या हुआ है ? जो इंस्पेक्टर ने फोन किया है। तब कल्याणी जी ने पूछा -इंस्पेक्टर साहब !क्या कुछ हुआ है ?रंजन ने कुछ किया है। 

पहले आप यह बताइए ! आपकी बेटी कहां है ?

क्या मतलब ? मेरी बेटी कहां होगी ? वह अपने पति 'रंजन' के साथ ही होगी , क्या उसे कुछ हुआ है ?

क्या आप लोग कुछ देर के लिए, कोठी नंबर 308 में आ सकते हैं ?

हम वहां आ तो सकते हैं लेकिन इंस्पेक्टर साहब हमें कुछ तो बताइए ! क्या हुआ है ?

आप यहीं आकर देख लीजिएगा।

इंस्पेक्टर के इतना कहते ही, कल्याणी जी बुरी तरह घबरा गई थीं , वे तुरंत ही ड्राइवर से गाड़ी निकालने के लिए कहती हैं -दिल की धड़कनें तेजी से बढ़ रही थीं , गाड़ी की रफ्तार की तरह ही उनके मस्तिष्क  के विचारों की रफ्तार भी तेजी से बढ़ रही थी।  न जाने, मेरी बेटी को क्या हो गया होगा ? और रंजन के फोन से क्यों फोन कर रहे थे ?गाड़ी में बैठे हुए ही ,वह अपनी बेटी शिल्पा को फोन लगाती हैं किंतु शिल्पा का फोन नहीं लग रहा था स्विच ऑफ आ रहा था। यह लड़की भी न जाने कहां चली गई ? हमने तो सोचा था, दोनों हमसे अलग रहेंगे, साथ में रहेंगे, एक दूसरे को समझेंगे, एक दूसरे के प्रति प्यार बढेगा। पता नहीं, मेरे परिवार को किसकी नजर लग गई ?

उधर मंजू उस कॉलोनी की महिलाओं से पूछताछ कर रही थी, जिस जानकारी में उसने पाया ,शिल्पा किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी ,ये लोग अभी ही आये हैं ,अभी किसी से कोई विशेष जानपहचान नहीं हुई है। तब मंजू ने पूछा -इनके घर में कोई नौकर तो होगा। 

हाँ ,एक छोटी सी लड़की साफ -सफाई के लिए आती थी जो आसपास के अन्य घरों में भी काम करती है किन्तु उसने,उनके विषय में हमें कभी कुछ नहीं बताया। 

कुछ देर के पश्चात कल्याणी जी की गाड़ी, कोठी नंबर 308 के सामने पहुंच जाती हैं, वहां पर पहले से ही लोगों की भीड़ लगी, देखकर, मन आशंका से डूब जाता है , अवश्य ही कुछ तो हुआ है, तेजी से वह कोठी के अंदर प्रवेश करती हैं, और पूछती हैं -यहां क्या हुआ है ?

 किंतु उन्हें इंस्पेक्टर तेवतिया उन्हें दरवाजे पर ही रोक लेते हैं और बगीचे में ही बैठा लेते हैं ,कहते हैं -आप बाहर ही बैठिए !हमें आपसे कुछ बातें करनी है। 

पूछताछ बाद में कीजियेगा ,पहले मुझे पता तो चले ,आखिर यहां क्या हुआ है ?और मेरी बेटी -दामाद कहाँ है ?

तभी मंजू कहती है -देखिए !यहाँ एक आदमी की हत्या हुई है ,पूछने पर पता चला ,वो आपके दामाद रंजन हैं। 

क्या ?उसे जैसे बिच्छू ने काट लिया हो और मेरी बेटी उन्होंने तुरंत ही पूछा। 

वो हमें नहीं मिली ,हमने सोचा ,वो अपने मायके में होगी इसीलिए तो आपसे पूछ रहे थे कि क्या आपकी बेटी आपके पास है ?आप हमारा सहयोग कीजिये और हमारे सभी प्रश्नों  का सही -सही जबाब दीजिये। 

जी पूछिए ! क्या पूछना चाहते है ? 

'रंजन' आपका दामाद है और आपकी बेटी का क्या नाम है ?

 मेरी बेटी का नाम शिल्पा है उन दोनों का अभी विवाह हुआ है। 

 आपकी बेटी इस वक्त कहां है ?

कहाँ होगी ?वो अपने पति के साथ ही थी, आप मुझे कुछ समझाएंगे आखिर यहां क्या हुआ है? इंस्पेक्टर तेवतिया के सवालों से कल्याणी जी झुंझला गई। 

वही तो मैं आपको बताने जा रहा हूं , यहां आपके दामाद की लाश पड़ी है,औरआपकी बेटी लापता है ,हमें लगता है ,क्या मालूम इस हत्या की दोषी आपकी बेटी ही हो ?

 क्या? कल्याणी जी जैसे कुर्सी से उछल पड़ी, और पूछा -वो ऐसा क्यों करेगी ?पहले आप उसे ढूंढिए !वो कहाँ है और उसे क्या हुआ है ?उसका फोन भी नहीं लगा रहा है। 

वही तो हम आपसे पूछ रहे हैं, आपकी बेटी यहां नहीं है, हमने सोचा -शायद आपके पास होगी। 

वह यहां से कहां जाएगी ? कहते हुए वह रोने लगी और बोलीं  -मेरी बेटी को ढूंढिए ! वह कहां गई है ? और उसके पति के हत्यारे की भी तलाश कीजिये !क्या आपने उसे ढूंढने का प्रयास किया ?

जी हां, हमने उसे सारे घर में ढूंढ लिया है वह यहां कहीं भी नहीं है। 

क्या मैं अंदर जाकर एक बार देख सकती हूं ? कांपते  स्वर में उन्होंने पूछा -शायद उन्हें उम्मीद थी कि कहीं डर के कारण वो कहीं छिपी बैठी हो।  



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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