Mysterious nights [part 115]

पारो को ,रूही एक ऐसे स्थान पर ले आई ,जिसे रूही ने आज तक नहीं देखा था। उस भीड़ -भाड़ और चमकीले वस्त्र पहने लड़के -लड़की ,और वहां की चकाचौंध देखकर रूही ने पारो से पूछा -हम कहाँ है ?

यहां' नवरात्रि' पर सब लड़के और लड़कियां' गरबा' और डांडिया करते हैं इसीलिए तो तुझे कुछ नई चीजें  दिखाने लाई थी। अब तू भी, डांस कर ले !

नहीं, मुझे नहीं आता है ,घबराते हुए रूही बोली। 


 अरे हमें ही कहां आता है ? दूसरों को देख-देखकर सब सीख जाते हैं , हंसते हुए पारो ने कहा और उसके हाथ में भी, वो रंग -बिरंगी छड़ी पकड़ा दीं।

ये क्या हैं ?

यही वो डंडियां हैं ,जिनसे ''डांडियां नृत्य'' किया जाता है, लेकिन रूही का साहस नहीं हुआ, उसे समझ ही नहीं आ रहा था ,कैसे करना है ?तब वह बोली -तुम लोग करो, तब मैं तुम्हें देखती हूं , देख कर सिखती हूं, तब मैं नृत्य करूंगी, इस बात के लिए पारो मान गयी। रूही,वहीं खड़े होकर, सभी को नृत्य करते हुए देख रही थी किंतु' डांडिया नृत्य' करने का साहस नहीं जुटा पा रही थी।

 भीड़ बहुत बढ़ गयी थी ,भीड़ से बचने के लिए खिसकते- खिसकते, रूही एक तरफ खड़ी हो गई, जब वह अकेली खड़ी थी, तब किसी ने उससे कहा -क्या आप नृत्य नहीं करती हैं ?

रूही ने पलट कर देखा, एक चेहरा ! जो बेहद आकर्षक था ,देखने से ही लग रहा था ,जैसे बहुत पैसे वाला हो ,किन्तु वह रूही को  कुछ जाना- पहचाना सा लगा।तब अपने आपको ही समझाया ,मुझे लगता है ,शायद, मुझे ये कोई बीमारी ही हो गयी है ,जिस चीज को भी देखती हूँ ,जाना -पहचानी  सी नजर आने लगती है। 

क्या सोच रहीं हैं ? तभी वह बोला -आईये ! हम दोनों साथ में नृत्य करते हैं, वैसे आज ,आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं,शायद उसे लगा होगा ,उसके ऐसा कहने से रूही उसके साथ नृत्य करने के लिए तैयार हो जाएगी।  

धन्यवाद ! किन्तु मुझे यह नृत्य नहीं आता है।

 हम सिखा देते हैं, तभी वहां दो-चार लड़के और आ गए , उनमें से एक बोला। 

वह लड़का जो पहले से ही, रूही के समीप खड़ा था , उसने उन लड़कों को वहां से चले जाने के लिए कहा। 

क्यों ?हम क्यों जाएँ ? तू इसका क्या लगता है ?उनमें से एक लड़का अकड़ते हुए बोला। 

क्या तुम्हें दिखलाई नहीं देता ?ये मेरे साथ हैं ,अभी जाते हो या.... पुलिस को बुलाऊँ !

तभी एक लड़का आगे आया और बोला -स्वयं लड़की को पटा रहा है और हमें पुलिस की धमकी दे रहा है ,कहते हुए उसने एक जोर का मुक्का ,उस लड़के की तरफ बढ़ाया जो रूही की ढाल, बना खड़ा हुआ था ,वो अपना बचाव करते हुए ,नीचे झुका और उस लड़के को एक जोरदार धक्का दिया ,जिसके कारण वो बड़े जोर से जमीन पर गिरा और उसकी नाक से खून बहने लगा,वह फिर से उठ खड़ा हुआ ,अब बात उसके मान -सम्मान पर आ गयी थी। तब वह अपने दोस्तों से बोला -मारो ! साले को ,छोड़ना नहीं। 

  तब वो ,उस लड़के के साथ आये,उसके अन्य दोस्तों से बोला -देखो !मेरी किसी से भी कोई दुश्मनी नहीं है ,किन्तु कोई भी इन्हें कुछ कहेगा तो छोडूंगा नहीं ,हम सभी इस त्यौहार को मनाने आये हैं ,अब ये निर्णय आपका है ,मुझसे लड़ना है या फिर इस उत्सव  का अच्छे से आनंद लेना है।लड़ना चाहते हो तो मैं, पीछे नहीं हटूंगा।

रूही ,उस मार-पिटाई से घबरा गई थी,और उस भीड़ में ,पारो को ढूंढ़ रही थी। पारो अपने दोस्तों के साथ नृत्य करते हुए, भीड़ में न जाने कहां खो गई थी ? रूही, भीड़ से अलग अकेली खड़ी थी किन्तु अब उसके साथ एक अनजान लड़का उसकी ढाल बना हुआ खड़ा था। 

 उसकी बात सुनकर वे लड़के, वहां से जाने लगते हैं, तब वो लड़का जिसकी नाक से खून बह रहा था ,बोला -छोडूंगा नहीं ,ये उधार रहा। 

हाँ -हाँ देखेंगे ,तुम्हारा उधार भी चुकाएंगे ,कहते हुए हंसा ,उनके जाने के पश्चात वह लड़का घबराई हुई रूही से पूछता है-क्या तुम्हारे साथ कोई है ?

हां मेरी बड़ी बहन है, वह भीड़ में अपने दोस्तों के साथ है, मैं उसी की प्रतीक्षा कर रही हूं। तब वह लड़का एक मेज की तरफ इशारा करते हुए कहता है -'यहां कब तक खड़ी रहोगी, आओ ! वहां बैठते हैं , हो सकता है तुम्हारी बहन तुम्हें ढूंढते हुए ,यही आ जाए। रूही को वह लड़का सज्जन लगा और वह उसका कहना मानकर, वही एक मेज के पास कुर्सी पर बैठ गई। तब वह बोला -क्या तुम अक्सर यहां आती हो ?

नहीं, मैं यहां पहली बार आई हूं, उसके साथ बैठकर भी, रूही को घबराहट हो रही थी,उसकी नजरें पारो को इधर -उधर खोज रहीं थीं कि काश !वो एक बार दिखा जाये।  वह अपनी घबराहट छुपाते हुए उस लड़के के प्रश्नों के जवाब दे रही थी 

तुम कहां रहती हो ?

 मैं इसी शहर में रहती हूं, रूही ने संक्षिप्त सा जवाब दिया। उस लड़के ने महसूस किया, मैं उससे बात करने का प्रयास कर रहा हूं किंतु यह कहीं और ही देख रही है, तब उसने पूछा-क्या तुम मेरे विषय में कुछ भी नहीं जानना चाहोगी ? हड़बड़ाहट में, रूही बोली - हां हां क्यों नहीं ?

मेरा नाम' गर्वित 'है , मैं यहां नहीं रहता हूं मैं दूसरे शहर में रहता हूं, किंतु यहां' गरबा' अच्छा होता है यह देखने के लिए तुम्हारी तरह ही चला आया। मुझे' डांडियां खेलना' नहीं आता, सोच रहा था, तुमसे सीख लूंगा , किंतु तुम भी मेरी तरह ही, हो , तुम बहुत सुंदर हो। 

जी, यह बात आप मुझसे पहले भी कह चुके हैं, रूही ने कहा किंतु उसकी दृष्टि बार-बार उस भीड़ में अपनी बहन को ढूंढ रही थी। क्या आप थोड़ा सा, नृत्य नहीं करना चाहेंगीं। 

अभी तो आपको बताया, मुझे नहीं आता है, और भी लड़कियां हैं आप उनके साथ नृत्य कर लीजिए !

वह तो मैं भी जानता हूं, किंतु तुम्हें अकेली देखकर, कहीं कोई और न जाए इसीलिए मैं यहां बैठा हूं। आप यहां रोज आया कीजिए , साल भर का त्यौहार है, लोगों से मिलना हो जाता है, कुछ दोस्त बन जाते हैं, मैं भी इसीलिए यहां आया हूं। 

तो क्या, आपने दोस्त बना लिए ?

 नहीं, आज ही तो आया हूं, क्या आप मेरी दोस्त बनेंगीं। 

उसकी बात सुनकर, रूही ने उसकी तरफ देखाऔर बोली - मैं आपकी दोस्त कैसे बन सकती हूं ? मैं यहां  प्रतिदिन नहीं आती हूं। 

तो क्या हुआ ? अब आइएगा , मुझे भी अच्छा लगेगा। क्या मैं खाने के लिए कुछ मंगा सकता हूं ?

नहीं, मुझे भूख नहीं है, वह तो मैं जानता हूं , किंतु समय बिताने के लिए खाना भी एक अच्छा माध्यम है। हम नृत्य नहीं कर रहे तो कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए वरना हम यहां बैठे-बैठे बोर हो जाएंगे, कहते हुए वह  हंसने लगा। 

शायद मेरी बहन आती ही होगी। 

उन्हें भी आ जाने दीजिए !वे भी हम से मिल लेंगी। आपको, मुझसे डर तो नहीं लग रहा है,गर्वित ने रूही से प्रश्न किया।  


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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