Hindi diwas

 कहने को ये है,[मातृभाषा ] ''मदर टंग  '' 

 बोलने वाले, सुनते रह जाते, अक्सर दंग !



 यह बस माध्यम है ,भावों को बतलाने,समझाने का ,

मृदु -कटु,भंडार भरा, शब्दों की पहचान बनाने का।


हिंदुस्तानी हैं,' हम' हिंदी से ही, सबका मान है। 

हिंदी की बिंदी ने ही बढ़ाया, सबका सम्मान है।

 

कभी आते क्लिष्ट शब्द , नई जिव्ह्या को देते कष्ट,

''रोमन लिपि ''से पढ़े बच्चे, हिंदी से हो जाते त्रस्त !

   

'भाषा' बनी है एक ,रहतीं इसकी सखियाँ अनेक !

ब्रजभाषा ,बुन्देल खंड से बुंदेली , अवधी, भोजपुरी ,

मैथिली , हरियाणवी ,मेवात ,सखी इसकी जयपुरी। 

 यह न जाने, हरियाणे से ले, कहाँ -कहां घूम आई ?

विभिन्न बोलियों के रूप में, छाप अपनी, छोड़ आई। 


कभी कड़वी,कभी मीठी,कभी भावों भरी, संस्कारी लगती है।

 ये  बोलने वाले पर निर्भर करता, किस जुबान से निकलती है ?


अ ,आ से ले , कोमल -कटु , दीर्घ -प्लुत, शब्दों का भंडार है। 

यह लगती हिंदुस्तान की शान है, हिंदी की ''बिंदी'' महान है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post