प्रिय ,और सम्मानीय पाठकों !अब'' मिस्टीरियस नाइट्स '' कहानी एक अलग मोड़ की ओर बढ़ चली है ,अभी तक आपने'' ठाकुर अमर प्रताप सिंह'' और उसकी हवेली, उस परिवार के एक गहन रहस्य को जाना। वहीं दूर शहर में एक लड़की 'रातों को अपने सपनों से परेशान है। ''उसे ऐसे सपने आते हैं ,जिनसे वह डर जाती है ,रातों को सो नहीं पाती है ,आखिर उसके उन सपनों का क्या रहस्य है ?वो जानना चाहती है। उसे ऐसे स्वप्न क्यों आते हैं ?समय के साथ ,उसके जीवन के और भी रहस्य खुलते हैं, जिन पर उसे विश्वास करना कठिन होता है। ऐसे कौन से रहस्य हैं ?जिनको यदि वो जान गयी तो उसके जीवन में क्या हलचल मचा देंगे ? जानने के लिए आपको मेरे इस उपन्यास के दूसरे सीज़न में भी साथ देना होगा। आप लोगों के सहयोग से ही ,हमें कहानी को आगे बढ़ाने में मनोबल प्राप्त होता हैं। आप लोगो के प्यार और सहयोग से कहानी का दूसरा सीज़न आरम्भ कर रही हूँ ,ताकि आप इसी प्रकार अपना प्यार बनाये रखेंगें।
एक लड़की, जिसको रातों को, भयावह स्वप्न दिखलाई देते हैं और वह डर जाती है। यह रातें उसके लिए बहुत ही कष्ट दायक हैं उन सपनों को देखकर वह डरती है और उठ खड़ी होती है। वह यह नहीं समझ पा रही थी कि इस तरह के सपने उसे क्यों आ रहे हैं ? दिन में बेचैन रहती है, रातों को जागती रहती है। तब उसकी मम्मी ने उसके लिए अपनी एक दोस्त जो 'मनोवैज्ञानिक' है उससे बात की और उससे समय मांगा इस बीच उसकी, मौसी की लड़की जिसका नाम पार्वती है, वह आती है और रूही को अपने साथ घुमाने के लिए ले जाती है। उन्हें यह भी लगता है, कि यह लड़की किसी से मिलती-जुलती नहीं है, न ही इसका कोई मित्र है। इस कारण से इसे, इस तरह के डरावने सपने आ रहे हैं क्योंकि यह अपने मन में ही कोई नकारात्मक विचार पाले हुए हैं।
रूही, पारो के साथ, घूमने के लिए चली जाती है और वहां एक मेले में, एक' टैरो कार्ड रीडर' जुगनी 'से मिलती है और उससे अपने अतीत के विषय में जानना चाहती है। वह ज्यादा कुछ तो नहीं बता पाती है, किंतु इतना अवश्य बता देती है कि उसका विवाह हो चुका है और उसने अपने अतीत में बहुत कष्ट झेले हैं। जिसे सुनकर, रूही और बेचैन हो जाती है और उसे लगता है , मेरे घर वालों ने मुझे इस विषय में कुछ भी क्यों नहीं बताया ? घर वापस आकर, वह फिर से अपने कमरे में बंद हो जाती है। अपने उन उन रातों के रहस्यमई सपनों के विषय में सोचती रहती है। डॉक्टर अनंत, के सामने अब अनेक सवाल उठ खड़े होते हैं। आखिर यह लड़की कौन है ? इसे कहां से इसे लाया गया है, डॉक्टर अनंत की पत्नी, और पार्वती उनसे जवाब मानते हैं। तब डॉक्टर अनंत उन्हें सच्चाई से अवगत कराते हुए कहते हैं कि यह लड़की मेरी गाड़ी के सामने बेहोश हो गई थी जब मैं अपने किसी मरीज को देखने जा रहा था। क्योंकि उन्होंने बताया -वह लड़की अपनी याददाश्त खो चुकी थी , उसे अपना नाम तक मालूम नहीं है, यह नाम भी उन्होंने ही उसे दिया है। यह सब सच्चाई सुनकर, दोनों हतप्र्भ रह जाती हैं।
डॉक्टर अनंत ,जब पारो और तारा को यह बात बता रहे थे, तो उन्हें मालूम नहीं था कि यह बात कोई और भी सुन रहा है , वह और कोई नहीं, स्वयं रूही थी, आज रूही को लग रहा था,इस दुनिया में वह नितांत अकेली है। अवश्य ही, मेरे इन सपनों का कोई रहस्य मेरे अतीत में छुपा हुआ है। वो ,अब तक जिन्हें अपने माता -पिता समझ रही थी ,वो असल में उसका परिवार ही नहीं था। यदि ये लोग मेरे अपने नहीं हैं तो मेरा परिवार कहाँ है ,मैं कौन हूँ ?मेरे माता -पिता कौन हैं ?इस सभी प्रश्नों का बोझ लिए, चुपचाप ,बिना कोई आहट किये अपने कमरे में चली आई। तभी मैं सोचूं ,ये लोग मेरे होकर भी,मेरे नहीं लगते , इनसे मुझे वो लगाव ,वो अपनापन क्यों महसूस नहीं होता है ?
मेरे अंदर इन लोगों के प्रति कोई जुड़ाव महसूस नहीं होता था किन्तु ये लोग, इतने बुरे भी नहीं हैं, अपने ना होकर, इन्होंने अपने जैसा व्यवहार किया ? मुझे अपनी बेटी माना ,ऐसे हालात में मुझे मौत के मुँह से बचाया। मुझ पर इनका बहुत बड़ा कर्ज़ है ,मौका मिला तो अवश्य चुकाऊँगी। आखिर मेरी ऐसी हालत क्यों हुई होगी ? और किसके कारण हुई होगी ? क्या वास्तव में मेरा विवाह हो चुका था ? यदि विवाह हुआ था तो मेरा परिवार और मेरा पति कहां है ? क्या उसने मुझे ढूंढने का प्रयास नहीं किया होगा ?मेरे माता -पिता कहाँ हैं ?अनेक प्रश्न उसके मन में घुमड़ रहे थे , जिनका जवाब उसके पास नहीं था।
अभी तक वह अपने सपनों की उलझन में ही उलझी हुई थी , तभी उसने सोचा -जहां मैं उनकी गाड़ी से टकराई थी, हो सकता है मैं उसी जगह के आसपास रही हूं। न जाने, कहां से आई होंगी ? मेरे प्रश्नों का जवाब कौन देगा ?तभी मैं सोचूं ,इस घर में मेरे बचपन की कोई भी तस्वीर क्यों नहीं है ?
उधर पारो भी ऐसे ही कुछ विचारों में उलझी थी ,मौसा जी ! अब यदि इसके घर वाले इसे ढूँढ भी रहे होंगे , तो वो उसे पहचान भी नहीं पाएंगे, जब आपने इसके चेहरे का, इलाज करवाया है , हो सकता है, इसका चेहरा ही बदल गया हो।
हां, यह तो हो सकता है क्योंकि मैंने भी इसका असली चेहरा नहीं देखा।
तब इसके परिवार वालों का पता लगाने के लिए हमें क्या करना चाहिए ?
व्यर्थ में ही परेशान हो रही हो, मेरा दोस्त है,इंस्पेक्टर रंजन ''मैं उसके सम्पर्क में हमेशा रहता हूँ ताकि किसी लड़की के गुमशुदा होने की सूचना मिले।
मौसा जी !अब आप यह बात सोचिए ! जिन लोगों ने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया है ,वे उसके गुमशुदा होने की रिपोर्ट क्यों दर्ज कराएंगे ? यदि उनसे कोई पूछेगा भी ,तो वे लोग कोई ना कोई बहाना बना देंगे। यदि उन्हें इसकी आवश्यकता होती तो वइ इसके साथ ऐसा व्यवहार ही नहीं करते।
अब यह भी तो पता नहीं कि वह अपनी ससुराल में थी या फिर मायके में, और इसके साथ किसने यह सब किया ?
जो भी है, हम तो इनमें से किसी को भी नहीं जानते हैं और न ही अब वह जानती है। अब हमें क्या करना चाहिए ?
अभी वे, लोग सोच ही रहे थे तभी पार्वती के मन में आया और बोली -क्यों ना मौसी जी ! हम, उसी महिला के पास जाते हैं जिसने इसके अतीत को देखा है। हो सकता है, वह कोई ऐसी बात ही बता दे, जिससे हम उसके परिवार को ढूंढ सकें।
हो भी सकता है कि वह कुछ हमारे काम की बात बता दे और यह भी हो सकता है कि जब उसे लगेगा, हमें उस पर विश्वास हो गया है तो अटकलें लगाने लगे।
तभी तारा जी बोलीं -तुमसे एक बात कहूं, मैं सोच रही थी, मेरी एक दोस्त मनोवैज्ञानिक है मैं उसे रूही को दिखाने के लिए ,लेकर भी गई थी। वह भी शायद हमारे इस कार्य में सहायता कर सकती है।
ये पागल थोड़े ही है ,बस अपनी स्मृति भुला चुकी है ,पारो बोली।
'' मनोविशेषज्ञ '' पागलों का इलाज ही नहीं करते ,वे अपनी' सम्मोहन कला' से उसको अतीत में भेज सकते हैं और वहां पर जाकर उसके अतीत का पता लगा सकते हैं।
हां यही बेहतर इलाज हो सकता है , और यदि यह कार्य नहीं करेगा, तब हम उस ज्योतिषाचार्य के पास चले जाएंगे।
नहीं मौसा जी ! अभी वो मेला दो दिनों के लिए और है उसके पश्चात वो हमें नहीं मिलेगी, हम तो उसका पता भी लेकर नहीं आए, हमें क्या मालूम था कि उसने जो कुछ भी बताया, वह सत्य हो सकता है। अब तो मुझे लगता है वो अवश्य ही बहुत कुछ जानती है ,उसकी बातों में सच्चाई है।
अब क्या करें ? चिंतित स्वर में तारा जी ने पूछा।
ऐसा करते हैं, पारो फिर से रूही को लेकर वापस उसके पास जाएगी।
यह आप क्या कह रहे हैं ?पारो यदि रूही को लेकर उसके पास जाती है तो देखा नहीं आज कितनी परेशान थी और वह पूछेगी कि तुम मुझे वहां क्यों ले जा रहे हो? तब उसे सम्पूर्ण सच्चाई हमें बतानी ही होगी। और मैं नहीं चाहती कि वह सम्पूर्ण सत्य जानकर और परेशान हो और उसे पता चले, कि हम उसके असली माता-पिता नहीं है।
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