'शिल्पा' ,शायद ,समय से पहले ही ,उस 'ऑडिटोरियम' में पहुंच गई थी , अभी उसे वहां ,कोई भी दिखलाई नहीं दे रहा था , वह किसी से पूछना चाहती थी, क्या वह सही समय पर, सही जगह पहुंची है किंतु जिससे पूछना चाहती थी, वह करीब आते- आते वापस चला गया। शिल्पा दूर खड़ी थी इसलिए उसने अंदाजा लगाया , हो सकता है ,वह सुरक्षा गार्ड हो। तब मन में विचार आया ,यहाँ मैं पहली बार आई हूँ ,कम से कम इस जगह को घूमकर ही देख लेना चाहिए। हो सकता है , कोई और भी मिल जाये। ये भी हो सकता है,तब तक कोई ओर भी आ जाये, जिसने मेरी तरह फॉर्म न भरा हो ,वो भी तो कुछ समय पहले ही आएंगे।
कुछ आगे चलने पर उसे एक बैंच दिखलाई दी ,वह आगे बढ़कर उस बैंच पर बैठ जाती है और अपने थैले से पानी की बोतल निकालकर, पानी पीने लगती है फिर से उस विज्ञापन को पढ़ती है ,जिसमें लिखा था - समय से पहले आकर अपना स्थान निश्चित कर लें। सही तो है ,इसमें कुछ भी ,गलत नहीं है। संतुष्ट होकर इधर -उधर देखती है ,वो ऐसे स्थान पर बैठी थी ,जहाँ से उसे अंदर आते हुए ,लोग दिखलाई दें तभी उसने देखा, कुछ लड़कों का समूह उस मुख्य द्वार से प्रवेश कर रहा था।
अब तो ,शिल्पा पूरी तरह से आश्वस्त हो गयी ,प्रतियोगिता के लिए प्रतिभागी आने आरम्भ हो गए हैं।वो नहीं जानती थी ,ये कोई प्रतिभागी नहीं वरन उस जगह के आवारा लड़के हैं। वे लोग अपनी मस्ती में आगे बढ़ रहे थे।उस 'ऑडिटोरियम' में अंदर प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं लग रहा था इसीलिए कोई भी आ जा सकता था। तभी दूर से ही, उन लड़कों को एक लड़की,वहां बैठी दिखलाई दी। अबे यार ! देख ,एक लड़की वहां बैठी है।
कहाँ ?दूसरे ने इधर -उधर देखते हुए पूछा।
तभी पहले वाले ने उसके सर पर हाथ मारा ,और अंगुली के इशारे से बताया ,वहां देख ! वो रही ,वह सामने ही बैठी है।
तो दूसरे वाले की दृष्टि भी शिल्पा पर पड़ गई थी, तब वो बोला- हां, यार ! आज किसका मुंह देखा था ? आज का दिन बढ़िया जाएगा कहते हुए, हंसने लगा। सभी उस तरफ बढ़ चले,जहाँ शिल्पा बैठी हुई थी। शिल्पा ने भी सोचा -शायद ये भी प्रतिभागी हैं इसीलिए इधर आ रहे हैं। जब वे लोग उसके करीब आए , इतने सारे लड़कों को एकसाथ देखकर, शिल्पा की दृष्टि भी अचानक ही, नीचे हो गई। उसने सोचा, यदि इन्हें आवश्यकता होगी तो स्वयं ही पूछ लेंगे क्योंकि उनके हाथ में कोई भी सामान नहीं था ,हो सकता है, यहां पर ऐसे ही टहलने आए हैं।
तभी उनमें से एक बोला -मेरी जान ! क्या कर रही हो ?कहते हुए हंसा।
किसी की प्रतीक्षा में हो, लो ! हम तो आ गए, कहकर बेशर्मी से दाँत दिखलाते हुए दूसरे ने भी हंसते हुए उसका साथ दिया।
तब शिल्पा ने उनकी तरफ देखा, तब उनमें से एक बोला -अरे चल, छोड़ यार ! यह अपने लेवल की नहीं लग रही।
लेवल की हो या ना हो, किंतु लड़की तो है, कहते हुए ढिटाई से हंसने लगा।
मुझे लगता है, यह अपने यार की प्रतीक्षा में है, उसके लिए ही यहां आई होगी। पता है, इतनी बड़ी जगह है, यहां कोई आता जाता नहीं ,इसीलिए कहते हुए उसने पूछा -कहाँ से आई हो ?
तभी एक अन्य लड़का शिल्पा के करीब आकर बैठ गया और उससे पूछने लगा -क्या तुम यहां पहली बार आई हो ?किन्तु शिल्पा ने कोई जबाब नहीं दिया बल्कि अपना सामान समेटने लगी। उनमें से खड़े लड़कों में से एक बोला -हमारा यार !कुछ पूछ रहा है ,जबाव क्यों नहीं देती ?
मुझे लगता है ,शायद ,ये गूंगी है ,इसके मुँह में जबान नहीं है, कहकर हंसने लगा।
भइया !आज तो गूंगी लोंड़ियाँ के साथ और भी मजा आएगा। शिल्पा ने जल्दी से अपना सामान समेटा और उठ खड़ी हुई। उन आठ -दस लड़कों में अपने को घिरा देखकर वो बुरी तरह घबरा गयी थी।
अरे.... यो तो चल दी ,दूसरा चिल्लाते हुए बोला -अपने यार से मिलके न जागी कहते हुए उसने शिल्पा का थैला पकड़ लिया।
शिल्पा ने उसे घूरकर देखा ,उसको इस तरह घूरते हुए देखकर वो हंसा और बोला -देख ! कैसे घूर री है ?भई यू तो मन्नै भसम कर देगी ,देख मैं जल रहा हूँ, उसका अभिनय देखकर सभी हंसने लगे।
तभी शिल्पा जोर से चीखी -छोड़ !मेरा बैग कहते हुए उसने झटका दिया। तभी वो बोला -अरे !तुम्हारी भाभी गूंगी ना है ,शिल्पा से शायद उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वो उसके थैले वाले हाथ को झटका दे देगी , जिसके कारण उसके हाथ से वो थैला छूट गया। थैला छुटते ही बोला - अरे बाप रे !इसमें तो बड़ी जान है ',कोनहुँ चक्की का आटा खात हो' ,कहते हुए उसे पकड़ने का प्रयास किया, किन्तु शिल्पा तेजी से पलटी और उसके गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ जमा दिया ,उस तमाचे की गूंज बहुत तेज़ थी,तब शिल्पा बोली - ज्यादा हीरो बन रहा है , खबरदार ! जो मुझे हाथ लगाने का प्रयास किया। अभी कुछ लोग आने वाले ही होंगे ,तब उनके सामने तुम सबकी पोल खुलेगी।उसे अभी भी उम्मीद थी, कि प्रतियोगिता के लिए सभी आने वाले होंगे।
कौन आ रहे हैं ? कहते हुए वो आगे बढ़ा किन्तु शिल्पा दौड़ने लगी ,उसने सोचा जो व्यक्ति यहाँ आते ही दिखा था ,शायद वो ही दिख जाये। तभी एक बोला -अरे वो भाग रही है ,उसे पकड़ो !
शिल्पा को लगा यदि वो यहाँ से भागी नहीं ,तो इन दस मुश्टण्डों का मुकाबला नहीं कर पायेगी ,सोचते हुए जोर -जोर से शोर मचाने लगी -बचाओ ! बचाओ ! वो गार्ड भी न जाने कहाँ चला गया ? वो अपने सामान के साथ थी इतनी तेज दौड़ न सकी। तब तक एक लड़के ने उसका दुपट्टा खींच लिया जो उसके गले में लिपटा हुआ था जिसके कारण शिल्पा लड़खड़ा गयी और जमीन पर गिर पड़ी।
पकड़ ! साली को ,ज्यादा ही जोश आ रहा है ,कहते हुए उस लड़के ने अपना गाल सहलाया।अब शिल्पा को लग रहा था ,वह यहां आकर गलत जगह फंस गयी है। तभी उसे मुख्य द्वार पर एक परछाई दिखलाई दी। गला दुपट्टे के कारण घुट रहा था ,जिसके कारण उसका बोल नहीं निकल पा रहा था ,इसीलिए उसने एक हाथ से अपना दुपट्टा और दूसरे हाथ को उठाकर उसने उस व्यक्ति का ध्यान अपनी और आकर्षित करना चाहा। वह भी उधर ही आ रहा था ,तभी एक लड़का बोला -रितेश !छोड़ दे !मुझे लगता है कोई आ रहा है।
आ रहा है ,तो मैं क्या करूं ?इससे तो बदला लेकर रहूंगा। तब तक वो परछाई स्पष्ट दिखने लगी ,वो वही रिक्शावाला 'रंजन 'था ,उसने शिल्पा को देखा ,तब वह शोर मचाते हुए दौड़ा -अरे ! बचाओ !बचाओ !गुंडों ने एक लड़की को पकड़ लिया है। वो जानता था ,वो किसी चलचित्र का अभिनेता नहीं है ,जो दस -दस लड़कों से जूझ सकेगा इसीलिए अब वह लोगों को बुलाने के लिए बाहर की तरफ भागा।
देख !तेरा प्रेमी भी भाग गया। कहते हुए वे हंसने लगे। तब एक बोला -चलो !इसे अंदर ले चलो !उसके ये शब्द सुनकर शिल्पा की रूह काँप गयी।
इस शोर -शराबे में जो गार्ड न जाने अब तक कहाँ व्यस्त था ?दौड़ते हुए आया और चिल्लाकर बोला -यहाँ क्या हो रहा है ?
