आज समाचार पत्र के माध्यम से, कल्याणी जी को, शिल्पा के साथ हुई घटना के विषय में जानकारी हो गई थी। तब शिल्पा ने रोते हुए उन्हें बताया -मैंने वहां उपस्थित सभी लोगों को, अपनी सच्चाई साबित करने के लिए, वह विज्ञापन भी दिखलाया था किंतु तब भी, उन लोगों ने मेरी बात पर विश्वास नहीं किया।
यह बात सुनकर कल्याणी जी को क्रोध आ रहा था , उनको उस समाचार को देखकर भी क्रोध आ रहा था ,अभी उनके सामने वे ' समाचार- पत्र' वाले आ जाएं,तो वो उनकी अच्छे से खबर ले , जिन्होंने इतनी झूठी खबर फैलाई है। बात क्या थी और क्या बना दी ? इसी को तो कहते हैं -'बात का बतंगड़ बनाना ''ये तो अच्छा हुआ उन्होंने तेरा नाम, नहीं लिखा है, जो उस घटना के विषय में जानते होंगे , या जिन्होंने तुझे देखा होगा, वो तो समझ जाएंगे।
तब शिल्पा उन्हें समझाते हुए और उनके क्रोध को शांत करने के उद्देश्य से बोली -उनके समझने या न समझने से क्या होता है ? आपको मुझ पर तो विश्वास है, या नहीं।
हां, मुझे तुझ पर पूर्ण विश्वास है, किंतु इस तरह की घटनाओं से हमें सचेत रहना चाहिए। कहीं भी कोई गड़बड़ी नजर आए, तो तुझे सूचना देनी चाहिए थी, तेरे पास तो फोन था, तब भी उसका उपयोग न कर सकी। वहां उपस्थित लोगों की वीडियो ही बना लेती।
मम्मी! ऐसा हादसा मेरे साथ पहली बार हुआ है , मैं बहुत घबरा गई थी ,मैं इस घटना के लिए पहले से तैयार होकर नहीं गयी थी कि ऐसे समय में ,मुझे क्या करना चाहिए था ?इसलिए कुछ समझ ही नहीं आ रहा था, क्या करूं, क्या नहीं ? इतनी भीड़ इकट्ठा हो गई थी,दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था। वे लड़के ,उसी इलाके के थे इसीलिए उन लोगों ने, उनका ही समर्थन किया है। वहां मुझे कोई नहीं जानता था।
उन्होंने फिर से एक दृष्टि ,उस'' समाचार- पत्र'' पर डाली, उसमें एक लड़की भीड़ में दिखलाई तो दे रही है किंतु उसका चेहरा नहीं दिख रहा है। वो इस बात से संतुष्ट हो गईं , कोई भी उसे नहीं पहचान पाएगा, सोचेंगे -होगी, कोई लड़की ! किंतु मन ही मन यह सोचकर घबरा गईं , यदि ये लड़के अपने,इरादों में सफल हो जाते , तो क्या होता ? तब वो शिल्पा से बोलीं -अब से कहीं भी अकेले, नहीं जाना है , मुझसे बिना पूछे कहीं नहीं जाना है, मैं चाहती हूं कि तुम, उन्नति करो ! किंतु इस कीमत पर नहीं, यह तो अच्छा है कि अखबार वालों ने, इस खबर को, नमक- मिर्च लगाकर, छाप तो दिया है किंतु न ही, तुम्हारा नाम लिखा है, और न ही, तुम्हारी कोई पहचान है वरना हमारा मोेहल्ले में रहना मुश्किल हो जाता आइंदा जब भी जाओगी, मैं तुम्हारे साथ चलूंगी। वैसे अब तक तुम तो नित्या के साथ जाती थी न....
उसी के साथ जाने वाली थी, किंतु उसका इम्तिहान था इसलिए नहीं जा पाई।
और तभी यह हादसा हो गया, अगर कुछ हो गया होता तो हम क्या करते ? कभी सोचा है , इस समाचार -पत्र में किस लड़के का जिक्र आ रहा है कि वह अपने दोस्त के साथ चली जाती है।वो कौन सा दोस्त था ?
वो मम्मी! अचानक ही वहां कुमार आ गया था, मेरे कॉलेज में पढ़ता है, ज्यादा तमाशा ना हो, इसीलिए मैं चुपचाप उसकी मोटरसाइकिल पर बैठकर आ गई थी।
क्या उसने इस हादसे के विषय में नहीं पूछा ?
पूछ रहा था, किंतु मैंने कोई जवाब नहीं दिया।
यदि उसने, यह समाचार, समाचार- पत्र में पढ़ लिया होगा, तो वह समझ जाएगा। अच्छा यह तो बता ! उस प्रतियोगिता के विषय में तुम्हें किसने बताया था ?
मुझे तो नित्या से, उस प्रतियोगिता के विषय में पता चला था।
और नित्या को किसने बताया था ?
उसी लड़के ने, जो मुझे वहां लेने गया था।
तुम्हें कुछ समझ आ रहा है या नहीं।
क्या मतलब ?
उस लड़के ने नित्या को बताया कि वहां पर प्रतियोगिता है, और नित्या ने तुम्हें बताया। इससे क्या पता चलता है ? यह हरकत उस लड़के की है और उसने यह जानबूझकर किया है।
वह लड़का, ऐसा क्यों करेगा ?
यह तो मैं भी ,नहीं जानती, तब वह वहां कैसे पहुंचा ? तुम्हें उससे पूछना चाहिए था, उसने तुम्हें वह पर्चा दिया था।
नहीं, नित्या को दिया था , जब वहां कोई प्रतियोगिता ही नहीं थी तब उसने नित्या को वह पेपर क्यों दिया था ? जबकि नित्या तो चित्रकारी करती ही नहीं है।
मम्मी !यह एक अलग ही विषय है।
क्या विषय है? वही तो मैं, समझना चाहती हूं।
अभी तो मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है, आप मुझे थोड़ा सोचने का मौका तो दीजिए !
कल इसी कारण से तुम परेशान थी , क्या तुम्हें यह बात आकर,हमें नहीं बतानी चाहिए थी।
अब इसमें क्या बताना था ? आप भी परेशान हो जातीं।
मैं, तेरे लिए कब-कब परेशान नहीं रही हूं ? अब तुम अपने को संभालो ! इस तरह कभी भी किसी भी हालत में अकेली तभी मत जाना, यह मेरा अंतिम निर्णय है, वरना मैं यह तुम्हारी चित्रकारी ही बंद करवा दूंगी, कह कर वो वहां से उठकर चली गई।
उनके जाने के पश्चात, शिल्पा सोच रही थी -क्या यह कुमार ने किया होगा ?वो भला क्यों, ऐसा करेगा ?या फिर उसी ने जानबूझकर किया है ? और किया है तो क्यों किया है ? वह क्या चाहता है ? उससे हमारी क्या दुश्मनी है ? सीधे-सीधे उससे पूछा तो नहीं जा सकता ,मेरे पूछने का तो मतलब ही नहीं बनता। हां, नित्या आवश्यक पूछेगी , इसी उम्मीद के साथ उसने, सोचना छोड़ दिया और वह नित्या की प्रतीक्षा करने लगी किन्तु सारा दिन उसके मन में यही उधेड़ -बुन चलती रही।
लगभग शाम के 4:00 बजे नित्या घर में प्रवेश करती है। आशा भरी नजरों से शिल्पा, नित्या की तरफ देखती है, और उसे लगभग खींचते हुए ,अपने कमरे में ले जाती है तब उसे वह' समाचार- पत्र' दिखलाती है -क्या तुमने यह, आज की खबर पढ़ी है।
नहीं तो.... इस खबर में ऐसा क्या है ?
तुम ही देख लो ! कहते हुए उसने वह 'समाचार पत्र' उसके सामने मेज पर पटक दिया।
हे भगवान ! क्या वहां पर मीडिया वाले भी थे ? या उन्हें किसी ने सूचना दे दी थी , बिल्कुल उलट ही खबर लिखी है।
वही तो मैं कह रही हूं , ऐसा लग रहा है जैसे कोई हमारा दुश्मन हमारे पीछे लगा है और हमारा अहित चाहता है। हमने भला किसी का क्या बिगाड़ा है ?अच्छा यह बताओ ! तुमने कुमार से बात की।
हां मैंने उसे फोन किया था।
तब उसने, क्या जवाब दिया ?
फोन उठाता तभी तो जवाब देता, उसने फोन ही नहीं उठाया।
कहीं इस सब के पीछे सच में कुमार ही तो नहीं है। मम्मी कह रही हैं -इन सबमें, उस लड़के का ही हाथ हो सकता है।
भला कुमार को, हमसे क्या दुश्मनी है ? वह तो' तमन्ना' को वैसे भी बहुत पसंद करता है।
किंतु उसने तुम्हारा फोन क्यों नहीं उठाया ?
क्या ये साज़िश कुमार की है ? यदि उसने साज़िश रची भी है ,तो क्या वो इतनी सरलता से स्वीकार कर लेगा ,आइये !आगे बढ़ते हैं।
