Khoobsurat [part 33]

नित्या और शिल्पा को ही नहीं, उसकी मम्मी कल्याणी जी को भी ,इस घटना के पीछे 'कुमार' का हाथ लगता है किन्तु शिल्पा का दिल इस बात को मानना ही नहीं चाहता है। शिल्पा तो उससे शिकायत भी नहीं कर सकती क्योंकि वो विज्ञापन तो कुमार, नित्या के लिए ही लाया था। उसने शिल्पा के हाथ में, जब वो विज्ञापन देखा था ,तब उसने ,उससे पूछा था -यह तुम्हें कहाँ से मिला ? किन्तु तब शिल्पा ने ,उससे झूठ बोला था -'बाहर कहीं बंट रहे थे ,मुझे भी मिल गया।''


 उसे क्या मालूम था ?वो विज्ञापन एक धोखा है इसीलिए उसने नित्या से कहा था -कि वो कुमार को बुलाये और उससे पूछे !उसने यह विज्ञापन उसे क्या सोचकर दिया था ? उसे ये किसने दिया था अथवा कहाँ से लाया था ? किन्तु जब नित्या ने कुमार को फोन किया तो उसने फोन ही नहीं उठाया। यही बात, उसने शिल्पा से आकर बताई ,तब शिल्पा ने पूछा -उसने तुम्हारा फोन क्यों नहीं उठाया ? 

अब यह तो वही जाने !

 उससे मिलकर बात तो करनी ही होगी। शिल्पा को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि कुमार ऐसा कुछ कर सकता है , या फिर वह नित्या के साथ ऐसा कुछ करना चाहता था। वह फिर से सवालों के कटघरे खड़ी हो गई।  कुमार, नित्या से कोई बदला लेना चाहता है वह ऐसा क्यों करना चाहता है ? नित्या से उसकी क्या दुश्मनी है ? अवश्य ही कोई गलतफहमी हो गई है। आज वह कॉलेज भी नहीं गई थी, क्योंकि उस घटना का असर, अभी भी उसके दिलों- दिमाग पर छाया हुआ था किंतु अब कॉलेज जाना उसे आवश्यक लग रहा था, क्योंकि कुमार से मिलकर ही, यह सब बातें हो सकती हैं।

साहस करके शिल्पा कॉलेज जाती है, उसे उम्मीद थी उसके विषय में, वहां कोई नहीं जानता होगा किंतु उसके पहुंचते ही मधुलिका ने, उससे पूछा -तुम कल कॉलिज क्यों नहीं आईं ?

क्यों ,क्या हुआ ? क्या मेरा आना जरूरी था ?

नहीं ,तुम्हारा आना तो जरूरी तो नहीं था ,क्या तुम जानती हो ? कल एक लड़की के साथ, क्या हादसा हुआ है ? वह भी, तुम्हारी तरह ही, कलाकृति बनाती थी किंतु समाचार- पत्र वालों का तो कहना है, कि' वह प्रतियोगिता के बहाने, अपने किसी लड़के मित्र से मिलने आई थी। '

यह सब बकवास है। 

तुम ऐसा, कैसे कह सकती हो ?मधुलिका ने जिज्ञासावश पूछा।

 क्या तुम जानती नहीं हो ? समाचार- पत्र वाले कितनी झूठी खबरें फैलाते हैं ?शिल्पा ने अपने आपको बहुत समझाया था ,तब आज वह कॉलिज आई थी किन्तु आते ही ,मधुलिका ने उसकी बात कर दी हालाँकि मधुलिका ये सब नहीं जानती थी ,शिल्पा भी अपने को संयत करने का प्रयास कर रही थी किन्तु फिर भी वो आक्रोश से भर उठी।  

वह तो है, सच में तुझे एक बात बताऊँ, तू बुरा मत मानना , मैंने सोचा था -यह हादसा तेरे साथ ही हो गया है इसीलिए मैं वहां तेरा नाम ढूंढ रही थी, उस चित्र में भी, तुझे पहचानने का प्रयास कर रही थी। 

क्या बकवास कर रही है ? मेरे साथ ऐसा क्यों होगा ?

क्योंकि तू उस दिन, कॉलेज आई नहीं थी, और तू भी चित्रकारी करती है।  मैंने सोचा, कहीं तू ही तो वह लड़की नहीं है, अपनों की फ़िक्र तो होती ही है,उसने मुस्कुराते हुए जबाब दिया।   

अच्छा, यह सब छोड़ ! क्या तूने कुमार को देखा है ?

मैं भला कुमार को क्यों देखूंगी? वह तो तेरा दोस्त है, तुझे पता होना चाहिए। 

शिल्पा ने उसे घूरते हुए देखा और पूछा-जब वह मेरा दोस्त है , तो तू क्यों उसकी मोटरसाइकिल पर कॉलिज आती है ? तू क्या समझती है, मैं कुछ जानती नहीं हूं , मुझे सब मालूम है। 

क्या मालूम है ?एक -दो बार उसके साथ क्या आ गयी ?तूने तो न जाने अपने मन में ,मुझे और कुमार को लेकर क्या -क्या भ्राँतियां पाल ली हैं ?क्या तुझे मुझसे जलन हो रही है ? तू कुछ भी समझे !किन्तु वो तो मुझे इंसानियत के नाते कहो या फिर..... 

  तू उस पर डोले डाल रही है, कहते हुए आगे बढ़ गई ,उसकी नज़रें कुमार को ढूंढ रही थीं किंतु कुमार उसे कहीं भी दिखलाई नहीं दिया, तब वो बोली -मुझे क्यों जलन होने लगी ?कुछ भी मत सोच ! 

दो दिनों तक,कुमार कॉलेज आया ही नहीं, तब शिल्पा ने उसके किसी दोस्त से पूछा -कुमार ,कॉलेज क्यों नहीं आ रहा है ?

अरे क्या तुम जानती नहीं हो, उसका तो बहुत बड़ा एक्सीडेंट हो गया। 

क्या कह रहे हो ? उसके साथ दुर्घटना कैसे हुई ? 

मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी उसके साथ यह दुर्घटना हुई , यह तो तीन दिन पहले की बात है।

 अब वह कहाँ हैं ? उसे ज्यादा चोट तो नहीं आई। 

पट्टी बंधी हुई है ,हाँ, भगवान का शुक्र है,कोई हड्डी नहीं टूटी।  

अब तो उस बात को तीन दिन हो गए ,मुझे उससे मिलना है ,कहाँ मिलेगा ?

अपने घर पर ही होगा किन्तु तुम वहां नहीं जा सकतीं। 

क्यों, नहीं जा सकती ?

उसके परिवारवाले थोड़े दकियानूसी विचारों के हैं ,उन्हें इस तरह किसी लड़की का, उनके घर पर आना अच्छा नहीं लगेगा।

ये क्या बात हुई ?उन्हें मालूम तो है कि वो जिस कॉलिज में पढ़ता है ,उस कॉलिज में लड़कियां भी पढ़ती हैं । 

हाँ ,वो बात तो सही है किन्तु उनके परिवार में बाहर से कोई लड़की आकर उनके बेटे से मिलती है ,उन्हें पसंद नहीं आएगा। 

अज़ीब लोग हैं ,सोचते हुए शिल्पा बोली। 

तुम्हें, क्या उससे कुछ काम था ? जाते -जाते उस लड़के ने वापस आकर पूछा।

नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है ,वो कई दिनों से दिखलाई नहीं दिया इसीलिए पूछ रही थी ,वैसे उसका घर कहाँ पर है ?

मुझे भी नहीं मालूम !मैं तो उससे मिलने अस्पताल में ही पहुंच गया था उसके घर जाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी ,वैसे अब वो ठीक है ,कल या परसों में आ जायेगा। 

शिल्पा किसी को बिना बताये ही ,उससे मिलने जाना चाहती थी किन्तु जब उसके कॉलिज के दोस्त ने बताया कल या परसों में आ जायेगा ,तब उसने सोचा -अब यहीं पर मिलना हो जायेगा। मन में अनेक विचार आये ,क्या अब मुझे उससे उस विज्ञापन के विषय में बात करनी चाहिए  या नहीं।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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