Khoobsurat [part 29]

शिल्पा,समय से पहले ही ,उस ''ऑडिटोरियम'' में पहुंच जाती है ,हालाँकि जिस रिक्शे से वो,उस स्थान पर पहुंचना चाहती थी, वही  रिक्शावाला उससे ये बात कहना चाहता है-' कि यहाँ कोई प्रतियोगिता नहीं होती है ', किन्तु शिल्पा के रूखे व्यवहार के कारण, उसने शांत रहना ही उचित समझा।  उस स्थान पर शिल्पा को कोई नजर नहीं आता ,तब वह सोचती है ,शायद मैंने ही आने में थोड़ी शीघ्रता दिखलाई। कुछ समय पश्चात वहां कुछ लड़के आकर,शिल्पा के साथ छेड़छाड़ करते हैं। जब वहां शोर -शराबा मचता है ,तब उस जगह का सुरक्षाकर्मी भी आ जाता है और वो रिक्शा चालक 'रंजन 'भी ,बाहर भागकर लोगों को इकट्ठा करके लाता है। उस भीड़ में से एक लड़का बाहर आकर ,उन लड़कों से लड़ने लगता है। वहां अन्य लोग भी इकट्ठे होकर शोर मचाते हैं।


 तब उन बदमाश लड़कों में से, एक लड़का आगे आकर कहता है - यह कौन सा दूध की धुली है, इससे पूछो ! यह यहां क्यों आई है ?अपने किसी यार से मिलने आई होगी।  यह स्वयं ही यहां आई थी, हमने नहीं बुलाया।

उस अनजान लड़के की तरफ देखते हुए बोला -मुझे तो लगता है ,यह भी इसके साथ है और यह इससे ही मिलने आई होगी, हम तो यहां अक्सर आते रहते हैं। इतनी भीड़ देखकर, और लड़कों का ऐसा व्यवहार देखकर शिल्पा बुरी तरह डर गई थी और वह रोने लगी थी। उनकी ऐसी बातें सुनकर वह और भी घबरा गई थी।

 तब एक अधेड़ उम्र व्यक्ति वहां आया और उसने पूछा - तुम यहां क्यों आई हो, तुम्हारा यहां पर क्या काम है ? शिल्पा लगातार रोये  जा रही थी। तब वह काँपती हुई आवाज में बोली - मैं यहां प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आई थी। 

उसकी बात सुनकर वहां उपस्थित, सभी लोग हंसने लगे, और बोले -यहां पर कौन सी प्रतियोगिता होती है ? यहां पर आज तक कोई प्रतियोगिता नहीं हुई, तुमसे यह बात किसने बताई है ?

 तब उन लड़कों में से एक लड़का बोला -लो ! इसका पहला झूठ तो यही पकड़ा गया। 

तब वह रिक्शा चालक  आगे आकर बोला -ये मैडम !इस इलाके से अनजान हैं , यहां पहली बार आई हैं , किसी ने इन्हें झूठी जानकारी दी है इसीलिए यहां आईं हैं कहते हुए ,उसने, शिल्पा से कहा -वह पर्चा दिखा दीजिये ! ताकि इन लोगों को विश्वास हो जाए। शिल्पा ने वह पर्चा अपने बैग में से निकालकर दिखाया ,उस पर्चे को देखकर, सब लोगों को विश्वास हो गया कि अवश्य ही किसी ने इसको मूर्ख बनाया है या झूठ बोलकर यहां भेजा है।

 तब वो लोग, उन लड़कों को डांटते हुए बोले -कोई अनजान व्यक्ति इस तरह आ जाता है तो तुम्हें, उसे सही मार्ग दिखलाना चाहिए उसकी सहायता करने की बजाय ,उसका लाभ उठाने का प्रयास कर रहे थे और तुम लोग उसके पीछे पड़ गए तुम्हें शर्म आनी चाहिए , बेचारी बच्ची ! के साथ ऐसा व्यवहार करते हुए।

तभी भीड़ में से एक बोला -इन लड़कों को पुलिस में दे देना चाहिए ,यदि हम लोग न आते तो इस बच्ची के साथ ,ये लोग ,न जाने ये क्या करते ?किन्तु उसकी बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। 

तब एक व्यक्ति उससे धीरे से कहता है -पुलिस भी ,इन्हें इतनी आसानी से ले जाने वाली नहीं है। सबसे पहले पुलिस ही कहेगी -'किस अपराध के तहत इन्हे बंदी बनाएं ?कुछ हुआ ही नहीं है ,तभी तो गिरफ़्तार करेगी ,जब कुछ हुआ होता कहते हुए हंसने लगा। 

 सुरक्षा कर्मी को डांटते हुए कहते हैं -तुम्हें यहां क्यों रखा गया है ? ताकि यहां आने वाले व्यक्तियों पर ध्यान रख सके किंतु जब ये लोग अंदर आ रहे थे,तुम कहां थे ?

मैं सारा दिन यही खड़ा रहता हूं, किंतु सुबह का समय अपने नहाने और खाने- पीने में ही चला जाता है मुझे क्या मालूम था ?कि सुबह-सुबह ऐसा कुछ हो जाएगा। 

हादसे इसी तरह से ही होते हैं,तब वह व्यक्ति शिल्पा से बोला -  अब तो तुम तुम जान गई होंगी कि यहां पर कोई प्रतियोगिता नहीं है अब तुम अपने घर जा सकती हो,यहाँ क्यों खड़ी हो ? 

इतना अपमान, इतनी बेइज्जती आज तक शिल्पा ने, कभी नहीं सहन की उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह यही जमीन में धंस जाए किंतु क्या करें ? इस बेइज्जती के, बावजूद उसे आगे बढ़ना पड़ रहा था। तभी रिक्शा वाला उसके समीप आकर बोला - मैंने आपसे पहले ही कहा था, किंतु आपने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया। मैं तो अक्सर यहां आता -जाता रहता हूं, यहाँ लोगों की मीटिंग होती हैं ,छोटे-मोटे कार्यक्रम हो जाते हैं लेकिन प्रतियोगिता जैसा कोई कार्यक्रम आज तक नहीं हुआ।

 इस समय शिल्पा के पास कोई भी शब्द नहीं थे वह चुपचाप, उस स्थान से बाहर निकल जाना चाहती थी। मन ही मन सोच रही थी-यदि ऐसे समय में, यह रिक्शा चालक नहीं आता तो आज न जाने क्या हो जाता ? इस रिक्शे वाले ने लोगों को बुलाकर, मुझे बचा तो लिया है किंतु मेरा अपमान भी कम नहीं हुआ है। 

 जब शिल्पा उस 'ऑडिटोरियम 'से बाहर आती है तो उसे सामने ही मोटरसाइकिल पर कुमार दिख जाता है कुमार को देखकर उसे और रोना आ जाता है और वह जोर-जोर से रोने लगती है। कुमार उसकी करीब आता है और उससे पूछता है - क्या हुआ ? किन्तु शिल्पा कुछ भी नहीं कह पाती है और रोती रहती है,आस -पास के लोग,उसे देख रहे थे ,वो अपने को संभालने का प्रयास कर रही थी किन्तु मन में एक घुटन सी हो रही थी ,किसी से कुछ कह नहीं पा रही थी किन्तु वो घुटन इतनी बढ़ गयी थी ,उसे संभाल पाना सम्भव नहीं हो रहा था ,उसके आंसुओं में ढलकर वो बाहर आ रही थी।  रिक्शावाला उसकी प्रतीक्षा में खड़ा था ताकि वह उसे वापस ले जाए  किंतु जब उसने, शिल्पा को कुमार के समीप खड़ा देखा, तो वह सोच रहा था -शायद कोई जानने वाला है। 

 तब वह शिल्पा से पूछता है -आप घर चल रही हैं।

तुम कौन हो ? कुमार ने पूछा। 

मैं ही इनको यहां लेकर आया था, और मैं इन्हें वापस ले जाने के लिए ही यहां खड़ा था ,इस बीच यह घटना हो गई। 

क्या हुआ था ? कुमार ने शिल्पा की तरफ देखते हुए पूछा किंतु शिल्पा ने कोई जवाब नहीं दिया, इस समय उसकी सोचने -समझने की शक्ति जैसे शून्य हो चुकी थी। किसी से भी बात करने या कुछ भी कहने की उसकी कोई इच्छा नहीं थी। वह शून्य में ताक रही थी, शायद अपने अपमान को बार-बार स्मरण करके उसका दिल रो रहा था। आज वह एक तमाशा बन गई थी। उसने कुछ भी जवाब नहीं दिया, तब कुमार उस रिक्शेवाले से बोला -तुम जा सकते हो, मैंने इन्हें छोड़ दूंगा।

 कुमार ने शिल्पा से पूछा -क्या तुम मेरे साथ चलना पसंद करोगी ? किंतु शिल्पा ने कुछ भी जवाब नहीं दिया और चुपचाप कुमार की मोटरसाइकिल पर बैठ गई। उसे देखकर कुमार धीरे से मुस्कुराया और मोटरसाइकिल चलाकर वहां से चला गया। तुम कहां जाना चाहोगी ? घर पर या कॉलेज ! शिल्पा चुपचाप बैठी रही, उसके दिलो -दिमाग़ पर तो जैसे धुंध सी छा गयी थी,वह जानती है ,इस समय वो कुमार के साथ है किन्तु वह किसी शून्य में भटक रही है। जब वो लोग, शिल्पा के घर के करीब वाले रास्ते पर पहुंचे, तब उसने कहा -मुझे यहीं पर छोड़ दो !


   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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